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	<title>Shaktipeeth Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
	<lastBuildDate>Mon, 07 Nov 2022 15:55:11 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Shaktipeeth Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>Banaras Me Ghumne ki Jagah &#8211; कैसे पहुंचे कहाँ रुके शापिंग की जानकारी</title>
		<link>https://safarjankari.com/banaras-me-ghumne-ki-jagah-ki-jankari/</link>
					<comments>https://safarjankari.com/banaras-me-ghumne-ki-jagah-ki-jankari/#comments</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jun 2022 10:43:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Historical]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
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		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[बनारस में घूमने की जगहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बनारस में घूमने की प्रमुख जगहों में श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर , माँ अन्नपूर्णा  मन्दिर , दशाश्वमेध घाट , मणिकर्णिका घाट , असी घाट , तुलसी घाट  , श्री काल भैरव मन्दिर , पशुपतिनाथ मन्दिर ( नेपाली मन्दिर ) , न्यू काशी विश्वनाथ मन्दिर , बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय , श्री तुलसी मानस मन्दिर , त्रिदेव मन्दिर , दुर्गा कुण्ड , दुर्गा मन्दिर ,  संकट मोचन हनुमान मन्दिर , रामनगर का किला , सारनाथ , रत्नेश्वर महादेव मन्दिर ( टेढ़ा मन्दिर ) , श्री दिगंबर जैन मन्दिर , गिरिजाघर , गौदोलिया , मृत्युन्जय मन्दिर , जंतर मंतर , भारत माता मन्दिर , माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ आदि प्रमुख है &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah </strong>बनारस में घूमने की प्रमुख जगहों में श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर , माँ अन्नपूर्णा  मन्दिर , <a href="https://www.incredibleindia.org/content/incredible-india-v2/en/destinations/varanasi/dashashwamedh-ghats.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">दशाश्वमेध घाट</a> , मणिकर्णिका घाट , असी घाट , तुलसी घाट  , श्री काल भैरव मन्दिर , पशुपतिनाथ मन्दिर ( नेपाली मन्दिर ) , न्यू काशी विश्वनाथ मन्दिर , बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय , श्री तुलसी मानस मन्दिर , त्रिदेव मन्दिर , दुर्गा कुण्ड , दुर्गा मन्दिर ,  संकट मोचन हनुमान मन्दिर , रामनगर का किला , सारनाथ , रत्नेश्वर महादेव मन्दिर ( टेढ़ा मन्दिर ) , श्री दिगंबर जैन मन्दिर ,  गौदोलिया , मृत्युन्जय मन्दिर , जंतर मंतर , भारत माता मन्दिर , माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ आदि प्रमुख है |</p>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी एक ऐसा शहर है जहाँ <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/">द्वादश ज्योतिर्लिंग</a> में से एक बाबा विश्वनाथ है <a href="https://safarjankari.com/list-of-51-shakti-peeth-hindi-me/">51 शक्तिपीठ</a> में से एक माता विशालाक्षी शक्तिपीठ है बनारस खुद एक सप्तपुरी है मतलब सात पुरियो में एक पुरी बनारस है तो देखिये बनारस में ज्योतिर्लिंग है शक्तिपीठ है यह <a href="https://safarjankari.com/sapta-puri-7-holy-city-of-hinduism/">सप्तपुरी</a> है और माँ गंगा अपने पवित्र जल से इस शहर के महत्त्व को और बढ़ा देती है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Banaras Me Ghumne ki Jagah &#8211; बनारस में घूमने की जगहे</h2>



<p class="has-text-align-justify">बनारस कहिये या बोलिए काशी या फिर वाराणसी कह लीजिये अगर न समझ आये कुछ भी तो बाबा की नगरी बोल दीजिये बनारस भारत का एक अति प्राचीन शहर है यह एक धार्मिक शहर है आज मै कोशिश करूँगा की आपको बनारस शहर में घूमने की जगहों के बारे में बताऊ वैसे सच कहू तो यह पूरा का पूरा शहर ही घूमने वाला है वैसे काशी घूमने की जगह नहीं महसूस करने की जगह है |</p>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी उत्तर प्रदेश का एक शहर है जो की माँ गंगा के किनारे पर बसा हुआ है इस शहर के घाट अत्यधिक सुन्दर है धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व को सहेजे हुये है अच्छा सर हिन्दू धर्म ही नहीं जैन धर्म बौद्ध धर्म के लिये भी वाराणसी एक पवित्र नगरी है बहुत से लोग इस शहर को उत्तर भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी भी बोलते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी  में आपको बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ,  सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय , महात्मा गाँधी काशी  विद्यापीठ जैसे जाने माने विश्वविद्यालय है तो वही वाराणसी ने संगीत के क्षेत्र में भी एक विशेष योगदान दिया है अपने देश के कई जाने माने महान व्यक्ति जैसे कबीर दास जी , गुरु रविदास जी , गोस्वामी तुलसी दास जी , स्वामी रामानन्द , वल्लभाचार्य  , जयशंकर प्रसाद , मुंशी प्रेमचन्द्र , रामचंद शुक्ल , पंडित हरी प्रसाद चौरसिया , उस्ताद बिस्मिल्लाह , गौतम बुद्ध आदि का सम्बन्ध इस शहर से रहा है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-Ki-Jagah.jpg" alt="Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11263" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-Ki-Jagah.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-Ki-Jagah-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-Ki-Jagah-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">खैर अब ज्यादा क्या ही बनारस के बारे में लिखू आते है मुख्य मुद्दे पर की <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> कौन कौन सी है लेकिन सुनिए घूमने की जगहों की जानकारी से पहले हम आपको बताएँगे बनारस कैसे जाया जाए बनारस में कहाँ रुकना सही रहेगा बनारस के अन्दर लोकल ट्रांसपोर्ट के साधन क्या है बनारस में खाने पीने की क्या व्यवस्था है क्यूंकि यह सभी जानकारी भी घुमक्कड़ी से ही सम्बन्धित है तो आइये शुरू करते है &#8211;</p>



<h3 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे बनारस </h3>



<p class="has-text-align-justify">देखिये वाराणसी बनारस भारत का एक जाना माना शहर है और यहाँ तक आने के लिये आपके पास तीनो ही साधन ( सड़क मार्ग , रेल मार्ग , वायु मार्ग ) आसानी से  उपलब्ध है </p>



<p class="has-text-align-justify">अब यदि आप वायु मार्ग से यहाँ तक आना चाहते है तो आपको बता दू वाराणसी में शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर बाबतपुर में लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट है और इस एअरपोर्ट से घरेलू और विदेशी दोनों सेवाए उपलब्ध है दिल्ली , लखनऊ , मुम्बई , आगरा जयपुर , बंगलौर , गोवाहाटी , हैदराबाद , भुवनेश्वर , चेन्नई , कोलकत्ता जैसे शहरों से बनारस के लिये फ्लाइट आती है वही विदेशी उड़ानों की बात करू तो शारजाह , काठमांडू , बैंकाक , कोलम्बो के लिए सेवाए है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब यदि आप रेल मार्ग से वाराणसी आना चाहते हो तो आपको बता दू यह शहर भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है वाराणसी एक  रेल जंक्शन है वाराणसी का सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन है जिसका कोड bsb है और दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन बनारस है जिसे पहले मंडुआडीह कहते थे इसका कोड bsbs है इसके अलावा भी कई रेलवे स्टेशन है लेकिन प्रमुख यह दोनों ही है आपके शहर से यहाँ तक के लिये कोई न कोई ट्रेन जरूर मिल जायेगी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="800" height="600" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-रेलवे-जंक्शन.jpg" alt="बनारस रेलवे जंक्शन" class="wp-image-11289" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-रेलवे-जंक्शन.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-रेलवे-जंक्शन-300x225.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-रेलवे-जंक्शन-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>बनारस रेलवे जंक्शन</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">यदि आप सड़क मार्ग से आ रहे हो तो बता दे यह शहर सड़क मार्ग से बहुत ही बढ़िया तरीके से जुड़ा हुआ है यहाँ बस स्टैंड भी है तो आप बस के माध्यम से भी यहाँ आ सकते है यदि आप अपनी कार या बाइक से आना चाहते तो आपका वेलकम है सड़के बढ़िया है किसी प्रकार की कोई भी दिक्कत आपको नहीं होगी |</p>



<h4 class="wp-block-heading">बनारस के अन्दर घूमने के साधन </h4>



<p class="has-text-align-justify">अब आप यह तो जान गए की आपको अपने शहर से भोले बाबा की नगरी काशी तक आना कैसे है अब बात करेंगे काशी के अन्दर घूमने के लिए क्या क्या विकल्प है दोस्तों हर एक प्रकार का साधन यहाँ पर मौजूद है आप के पास बजट बढ़िया है तो कोई चार पहिये की गाडी बुक करकर बनारस घूमो या फिर ऑटो , ई रिक्शा बुक करकर घूमिये |</p>



<p class="has-text-align-justify">बनारस में आपको हाथ वाले रिक्शे भी मिल जायेंगे हा एक बात और बनारस में ह्रदय स्थल गौदोलिया जहाँ काशी विश्वनाथ मंदिर है मार्किट है घाट है वहां भीड़ न होने पाए इसलिए टेम्पो ई रिक्शा कार आदि की अनुमति नहीं होती इधर आपको पैदल ही घूमना होगा |</p>



<h3 class="wp-block-heading">बनारस में कहाँ रुके &#8211; Where to Stay in Banaras in Hindi</h3>



<p class="has-text-align-justify">यह एक बड़ा पर्यटन स्थल है तो इस शहर में रुकने के विकल्प की कोई कमी नहीं है हर तरह के विकल्प मतलब होटल , धर्मशाला आदि उपलब्ध है और हर तरह के बजट में आपको यहाँ ठहरने की व्यवस्था दिखाई देगी वाराणसी रेलवे स्टेशन के पास आपको तमाम सस्ते महंगे होटल मिल जायेंगे आप अपना बजट  देखकर बुक कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ पर रुकने के लिये आप वाराणसी रेलवे स्टेशन कैंट में रुक सकते है असी घाट की तरफ रुक सकते है गौदोलिया की तरफ रुक सकते है गंगा घाट के किनारे रुक सकते है लेकिन यदि आप घूमने बनारस आये है तो रुकने की बेस्ट लोकेशन है गौदोलिया आप गौदोलिया के आसपास रूम ले क्यूंकि यह एक ऐसी जगह है जहाँ से सभी टूरिस्ट पॉइंट मार्किट नजदीक है और आपको कही भी जाने के लिये यहाँ से साधन भी मिल जायेंगे काशी विशानाथ मन्दिर और मार्किट यहाँ से नजदीक है |</p>



<p class="has-text-align-justify">लेकिन यदि आप का मन है की रूम ऐसा हो की रूम से ही  गंगा जी दिखे तो आप घाट के नजदीक वाले होटल लीजिये  हा यहाँ मतलब गंगा घाट के किनारे वाले होटल आने के लिए आपको पैदल चलना होगा हो सकता है सीढियां चढ़नी पड़े और फिर यदि आप इन होटल से कही घूमने जाओगे तो आपको दुबारा सीढियां पैदल सब करना पड़ेगा |<br><br>स्ट्रीट फ़ूड का मजा लेना हो मार्किट का मजा लेना हो काशी विश्वनाथ के दर्शन हो  प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट तक जाना हो या किसी ऐसी  जगह के लिए ऑटो टेम्पो स्टैंड जाना हो तो आपके लिए जो जगह रुकने की बेस्ट है वो है गौदोलिया | </p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="700" height="525" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-रुकने-की-जगह.jpg" alt="बनारस में रुकने की जगह" class="wp-image-11277" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-रुकने-की-जगह.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-रुकने-की-जगह-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>
</div>


<h3 class="wp-block-heading">बनारस का खानपान &#8211; Banaras Food in Hindi</h3>



<p class="has-text-align-justify">कोई भी किसी प्रकार की बनारस में आपको खाने पीने की दिक्कत नहीं होगी इस शहर में जगह जगह पर आपको रेस्टोरेन्ट दिखाई देंगे जहाँ आप जो मन करे खा सकते है वैसे बनारसी स्ट्रीट फ़ूड जैसे कचोडी सब्जी जलेबी , सर्दियों में मलाईयो , लस्सी , ठण्डाई , चाय , टमाटर चाट , पान , बाटी चोखा आदि तो फेमस है जिसकी ज्यादा जानकारी आप मेरी यह <a href="https://safarjankari.com/banaras-famous-food-hindi-me/">Banaras Famous Food – बनारस आये तो खाने पीने के इन ठियो पर जरूर जाये</a> पोस्ट से ले सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके अलावा हम यहाँ बात करेंगे खाने की देखिये यदि आप किसी ठीक ठाक होटल में रुके है तो आपको उस होटल में ही खाने की सभी व्यवस्थाये मिल जाएँगी ज्यादातर लोग यहाँ थाली खाते है और यदि आप बाहर खाना चाहते हो तो इस शहर में तमाम रेस्टोरेंट और भोजनालय है जहाँ आपको  चाइनीज , साउथ इन्डियन के साथ साथ बहुत कुछ मिल जायेगा और रेस्टोरेंट में आप थाली भी लेकर खा सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-खाना-कहाँ-खाए.jpg" alt="बनारस में खाना कहाँ खाए" class="wp-image-11276" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-खाना-कहाँ-खाए.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-में-खाना-कहाँ-खाए-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>
</div>


<h3 class="wp-block-heading">बनारस में घूमने की जगहे  &#8211; Banaras Me Ghumne ki Jagah</h3>



<p class="has-text-align-justify">अब हम लोग इस शहर में आ गए होटल धर्मशाला ले ली खाने को समझ गये अब गुरु आओ घुमाते है आपको बनारस देखो इस पोस्ट में हम आपको जाने माने फेमस जगहों के बारे में बतायेंगे वैसे सच बताऊ तो बनारस एक ऐसा शहर है जहाँ घूमने के लिये अनगिनत पॉइंट है यह इतना सुन्दर शहर है की आप यहाँ आओगे इसे महसूस करोगे तो बस बनारस के कायल हो जाओगे आइये अब शुरू करते है &#8211;</p>



<h4 class="wp-block-heading">काशी विश्वनाथ मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">12 ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग यही पर है जिसके दर्शन करने दूर दूर से लोग आते है  भगवान शिव जी को समर्पित यह मन्दिर हिन्दुओ में एक विशेष महत्त्व रखता है यह पतित पावन माँ गंगा के किनारे पर बना हुआ है यहाँ तक आने के लिए सबसे पहले आपको गौदोलिया तरफ आना होगा फिर वहां से कई गेट है जिनसे आप बाबा विश्वनाथ के दर्शन हेतु जा सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आजकल ज्यादातर लोग मुख्यता तीन तरफ से इस मंदिर में आते है सबसे पहले गेट नंबर एक से जिसके लिये विश्वनाथ गली  से होकर जाना होता है यह गेट आपको गौदोलिया से दशाश्वमेद्य घाट की तरफ चलने पर पड़ेगा इसे सिंह द्वार कहते है दूसरा रास्ता है गोडोलिया से मैदागिन की तरफ जाओ और आपको मिलेगा गेट नंबर 4 तीसरा रास्ता है ललिता घाट के सामने से ललिता घाट मणिकर्णिका घाट और दशाश्मेद्य घाट के मध्य है |</p>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप ललिता घाट से जाते हो तो आप सीधे जो कारीडोर बन रहा है उसमे प्रवेश करोगे घाट पर से ही सीढियां बनी हुई है अच्छा बाबा विश्वनाथ मन्दिर परिसर में कई देवी देवताओ के अन्य मन्दिर भी जहाँ भी आप दर्शन जरूर करे इसके अलावा आपको जानकारी दे दू की बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर में आप मोबाइल इत्यादि नहीं ले जा सकते है तो या तो आप मोबाइल वगैरह होटल रूम में रखकर आइये या मन्दिर से पहले तमाम लाकर है जहाँ आप प्रसाद ले वही अपना मोबाइल और सामान रख दे |</p>



<p class="has-text-align-justify">इस मंदिर में अत्यधिक भीड़ होती है तो बाबा की शिवलिंग के दर्शन हेतु आपको कुछ सेकंड्स ही मिलते है तो बिलकुल भी आप अपना ध्यान इधर उधर न करे और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करे कही कही मैंने पढ़ा है काशी विश्वनाथ मन्दिर को गोल्डन टेम्पल या स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है शायद वो इसलिये क्यूंकि मंदिर के ऊपर बने गुम्बद में सोना लगा हुआ है तो <strong><em>Banaras Me Ghumne ki Jagah</em></strong> में काशी विश्वनाथ सबसे पड़ाव होना चाहिए या फिर पहले गंगा स्नान फिर बाबा के दर्शन करे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="557" height="673" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="काशी विश्वनाथ मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11271" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी.jpg 557w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी-248x300.jpg 248w" sizes="auto, (max-width: 557px) 100vw, 557px" /><figcaption>काशी विश्वनाथ मन्दिर</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="606" height="409" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-कारीडोर-गेट-बनारस.jpg" alt="काशी विश्वनाथ कारीडोर गेट बनारस" class="wp-image-11270" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-कारीडोर-गेट-बनारस.jpg 606w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/काशी-विश्वनाथ-कारीडोर-गेट-बनारस-300x202.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" /><figcaption>काशी विश्वनाथ कारीडोर गेट</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">माँ अन्नपूर्णा मन्दिर बनारस का एक मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">अन्नपूर्णा देवी मंदिर बाबा विश्वनाथ मन्दिर के समीप ही है यदि आप विश्वनाथ गली से जाओगे तो आपको पहले माँ अन्नपूर्णा देवी का मंदिर दिखाई देगा इस मंदिर में आपको दर्शन हेतु अबश्य आना चाहिए जैसा की नाम से ही समझ आ रहा है यह मन्दिर मुख्य रूप से अन्न की देवी माँ अन्नपूर्णा को समर्पित है इस मन्दिर परिसर में भी कई देवी देवताओ की सुन्दर प्रतिमाये है आप सभी के दर्शन करे माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद ले ध्यान दे कि जब आप काशी विश्वनाथ मन्दिर दर्शन हेतु आये तो साथ में ही माँ अन्नपूर्णा देवी के दर्शन कर ले |</p>



<h4 class="wp-block-heading">खिचड़ी बाबा का मन्दिर बनारस का दर्शनीय स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">खिचड़ी बाबा का मन्दिर आपको काशी विश्वनाथ मन्दिर के गेट नंबर 1 सिंह द्वार के ठीक सामने दिखाई देगा यहाँ खिचड़ी का भंडारा सा चला करता है आप यही  से निकल रहे हो तो आप इस मन्दिर में भी दर्शन अवश्य कर ले |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="650" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/खिचड़ी-बाबा-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="खिचड़ी बाबा मन्दिर Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11272" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/खिचड़ी-बाबा-मन्दिर-वाराणसी.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/खिचड़ी-बाबा-मन्दिर-वाराणसी-162x300.jpg 162w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>खिचड़ी बाबा मन्दिर सिंह द्वार गेट नम्बर 1 के सामने </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">श्री गुरु देव ब्रहस्पति मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">सिंह द्वार काशी विश्वनाथ गेट नंबर 1 से जब आप दशाश्वमेध घाट की तरफ आओगे तो रास्ते में आपको श्री गुरु देव ब्रहस्पति का मन्दिर दिखाई देगा यहाँ आपको भीड़ नहीं मिलेगी आप सकून से इस मन्दिर में जाकर दर्शन लाभ ले |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="430" height="540" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Shri-Brihaspati-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg" alt="Shri Brihaspati Mandir Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11267" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Shri-Brihaspati-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg 430w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Shri-Brihaspati-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-239x300.jpg 239w" sizes="auto, (max-width: 430px) 100vw, 430px" /><figcaption>श्री गुरु ब्रहस्पति मन्दिर दशाश्वमेध घाट रोड </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">मान सिंह वेद्यशाला जंतर मंतर बनारस का पर्यटन स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">दशाश्वमेध घाट से समीप ही मान मंदिर घाट बोलो या डाक्टर राजेंद्र प्रसाद घाट के समीप ही बना हुआ है मान सिंह वेधशाला इसी में है जंतर मंतर यह एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है जिसे महाराजा जय सिंह दृतीय ने बनवाया था यहाँ आपको पुराने समय के तमाम यंत्र दिखाई देंगे जिनसे पहले समय सूर्य की गति का हिसाब लगाया जाता था एक बात और इस स्थल से गंगा नदी का बहुत ही प्यारा व्यू मिलता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसमें आपको एक राजमहल देखने को मिलेगा जिसकी बनावट अति उत्कृष्ट है यहाँ रखे कुछ खगोलीय उपकरण ठीक ठाक स्थिति में है तो आप यहाँ भी जाये यहाँ का टिकट है मतलब इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने के लिये आपको टिकट लेना होगा |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="557" height="494" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Jantar-Mantar-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg" alt="Jantar Mantar Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11264" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Jantar-Mantar-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg 557w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Jantar-Mantar-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-300x266.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 557px) 100vw, 557px" /><figcaption>जंतर मंतर दशाश्वमेध घाट के पास </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">माँ विशालाक्षी मन्दिर बनारस का एक शक्तिपीठ </h4>



<p class="has-text-align-justify">51 शक्तिपीठ में से एक शक्तिपीठ बनारस में स्थित है जिसका नाम विशालाक्षी शक्तिपीठ है यह शक्तिपीठ काशी विश्वनाथ मन्दिर के समीप ही है यदि आप यहाँ पर घाट की तरफ से  जायेंगे तो आपको बता दू मीर घाट से जो सीढियां बनी है आप उन्ही सीढियों से होते हुए आगे माँ विशालाक्षी मन्दिर तक जाते हो यहाँ प्रसाद स्वरुप बहुत से लोग साड़ी चढाते है कुछ लोग मंदिर के पुजारी को रूपये देकर चढ़ी हुई साड़ी खरीदते भी है खैर आप यहाँ भी दर्शन कर ले |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="386" height="606" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/माँ-विशालाक्षी-शक्तिपीठ-वाराणसी.jpg" alt="माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ वाराणसी" class="wp-image-11279" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/माँ-विशालाक्षी-शक्तिपीठ-वाराणसी.jpg 386w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/माँ-विशालाक्षी-शक्तिपीठ-वाराणसी-191x300.jpg 191w" sizes="auto, (max-width: 386px) 100vw, 386px" /><figcaption>माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">नेपाली मन्दिर &#8211; Nepali Mandir <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify">मीर घाट के पास ही है ललिता घाट और यही पर बना है नेपाली मन्दिर जो की नेपाल के पशुपतिनाथ मन्दिर ली तरह ही दिखाई देता है और इसका निर्माण भी नेपाल के राजा ने करवाया था इस नेपाली मन्दिर में शिवलिंग है और मंदिर की बनावट बहुत ही सुन्दर तरीके से की गई है तो  |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="503" height="417" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/NEPALI-MANDIR-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg" alt="NEPALI MANDIR Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11266" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/NEPALI-MANDIR-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg 503w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/NEPALI-MANDIR-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-300x249.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 503px) 100vw, 503px" /><figcaption>नेपाली मन्दिर ललिता घाट ले पास </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">रत्नेश्वर महादेव मन्दिर टेढ़ा मन्दिर </h4>



<p class="has-text-align-justify">ललिता घाट से आप जब मणिकर्णिका घाट की और आओगे तो आपको मणिकर्णिका घाट पर ही दिखाई देगा एक मन्दिर जो दिखने में टेढ़ा है इसीलिए इसका नाम टेढ़ा मंदिर है वैसे इस मंदिर को रत्नेश्वर महादेव मंदिर कहते है टेढ़ा मन्दिर देखकर आपको एक बार आश्चर्य जरूर होगा की आखिर यह मन्दिर टेढ़ा कैसे है वहां के लोकल की माने तो यह मंदिर श्रापित है इसीलिये यहाँ पर पूजा नहीं होती है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="423" height="610" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रत्नेश्वर-मन्दिर-टेढ़ा-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="रत्नेश्वर मन्दिर टेढ़ा मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11280" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रत्नेश्वर-मन्दिर-टेढ़ा-मन्दिर-वाराणसी.jpg 423w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रत्नेश्वर-मन्दिर-टेढ़ा-मन्दिर-वाराणसी-208x300.jpg 208w" sizes="auto, (max-width: 423px) 100vw, 423px" /><figcaption>रत्नेश्वर मन्दिर टेढ़ा मन्दिर मणिकर्णिका घाट के पास </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">दशाश्वमेध घाट बनारस का दर्शनीय स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस शहर का सबसे ज्यादा प्रसिद्ध घाट है दशाश्वमेध घाट यहाँ की गंगा आरती बहुत ही भव्य होती है यह घाट काशी विश्वनाथ मन्दिर और गौदोलिया के समीप ही है और बहुत ही सुन्दर और पवित्र घाट है आप बनारस आये तो इस घाट पर गंगा स्नान जरूर करे और यहाँ की गंगा आरती जरूर देखे पौराणिक कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इस घाट का निर्माण शिवजी के स्वागत के लिये किया था  दूसरी कथा के अनुसार इस जगह दस अश्वमेध यज्ञ किये गए थे जो भी हो यह एक पवित्र गंगा घाट है यहाँ आप स्नान जरूर करे  |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="520" height="463" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दशाश्वमेध-घाट-बनारस.jpg" alt="दशाश्वमेध घाट बनारस" class="wp-image-11273" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दशाश्वमेध-घाट-बनारस.jpg 520w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दशाश्वमेध-घाट-बनारस-300x267.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 520px) 100vw, 520px" /><figcaption>दशाश्वमेध घाट </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">मणिकर्णिका घाट बनारस का पर्यटन स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">चौबीसों घंटे मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार हुआ करता है इसे महाशमसान भी  कहते है जीवन के अंतिम सत्य मृत्यु को दिखाता यह घाट देखने योग्य है यहाँ आप देखोगे हर 5-10 मिनट में कोई न कोई शव आ रहा है इस घाट पर आपको हिन्दू धर्म के दाह संस्कार की सभी विधियाँ देखने को मिलेंगी सुना है की यहाँ मुर्दे का आग देने का काम डोम राजा ही करते है यहाँ पर सबसे पहले शव को अर्थी सहित ही गंगा में डुबुकी लगवा दी जाती है खैर आप यहाँ आकर भी थोडा समय दे |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="762" height="487" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/मणिकर्णिका-घाट-बनारस.jpg" alt="मणिकर्णिका घाट बनारस" class="wp-image-11278" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/मणिकर्णिका-घाट-बनारस.jpg 762w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/मणिकर्णिका-घाट-बनारस-300x192.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 762px) 100vw, 762px" /><figcaption>मणिकर्णिका घाट </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">माता संकठा मन्दिर सिंधिया घाट बनारस में घूमने की जगह </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह मंदिर देवी संकटा को समर्पित मंदिर है और बनारस में सिंधिया घाट के पास है इस मंदिर परिसर में शेर की एक विशाल प्रतिमा बनी हुई है कहते है इस मंदिर में दर्शन करने से बड़े ही चमत्कारिक लाभ मिलते है इस मंदिर परिसर में संकठा माँ की एक सुन्दर प्रतिमा बनी हुई है  धार्मिक कथा की माने तो यहाँ पर भगवान शिव ने माँ संकठा की पूजा की थी और पांडवो ने भी यही पर माँ संकठा की पूजा की थी सिंधिया घाट मणिकर्णिका घाट से समीप ही स्थित है  |</p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री काशी कामकोटेश्वर मन्दिर बनारस का एक मन्दिर </h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस में हरीशचंद घाट के समीप ही एक मंदिर है कामकोटेश्वर जो की दक्षिण भारतीय शैली में बना एक सुन्दर मन्दिर है आप इस मंदिर में आकर दर्शन कर सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">आदि केशव मन्दिर बनारस का एक मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">आदि केशव मंदिर बनारस का एक बहुत ही सुन्दर मन्दिर है वरुणा नदी और गंगा नदी के संगम पर यह पावन मंदिर  बना हुआ है शहर का प्रसिद्ध आदि केशव घाट भी यही पर है इस मन्दिर में आपको विष्णु जी और शिवजी दोनों के ही दर्शन का सौभाग्य मिलता है तो <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah </strong>में आप आदि केशव मन्दिर को भी शामिल कर सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री काल भैरव मन्दिर बनारस का दर्शनीय स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस का बाबा विश्वनाथ के बाद सबसे प्रमुख मंदिर है काल भैरव मंदिर यह बनारस के कोतवाल है बनारस में बाबा कालभैरव की अनुमति के बिना कुछ भी नहीं होता श्री काल भैरव मन्दिर विशेश्वरगंज में है जो की गौदोलिया से डेढ़ दो किलोमीटर होगा मै यहाँ हाथ वाले रिक्शे से ५० रूपये में गौदोलिया से आया था इस मंदिर में भी अच्छी खासी भीड़ होती है यहाँ आपको लम्बी लाबी कतारे दिखाई देंगी गलियों में प्रसाद की दुकाने  है आप अपने चप्पल जूते किसी भी  प्रसाद की दुकान पर रखकर काल भैरव के दर्शन करे|</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="448" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-काल-भैरव-मन्दिर-बनारस.jpg" alt="श्री काल भैरव मन्दिर बनारस" class="wp-image-11281" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-काल-भैरव-मन्दिर-बनारस.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-काल-भैरव-मन्दिर-बनारस-300x300.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-काल-भैरव-मन्दिर-बनारस-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption>श्री काल भैरव मन्दिर </figcaption></figure>
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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="727" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-SHREE-KAAL-BHAIRAV.jpg" alt="Banaras Me Ghumne ki Jagah - SHREE KAAL BHAIRAV" class="wp-image-11260" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-SHREE-KAAL-BHAIRAV.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-SHREE-KAAL-BHAIRAV-206x300.jpg 206w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>श्री काल भैरव </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">मृत्युंजय महादेव मन्दिर </h4>



<p class="has-text-align-justify">श्री काल भैरव मंदिर के समीप ही स्थित है बनारस जिले का एक और शिव मंदिर जिसका नाम मृत्युंजय मन्दिर है यह मंदिर मुख्य रूप से शिवजी को समर्पित है वैसे तो इस मंदिर प्रांगण में कई देवी देवताओ के दर्शन का लाभ मिलेगा लेकिन गर्भगृह में शिवलिंग यहाँ का मुख्य स्थल है <strong>बनारस में घूमने की जगह</strong> में आप इस मन्दिर को भी शामिल कर सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="401" height="635" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Mratyunjay-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg" alt="Mratyunjay Mandir Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11265" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Mratyunjay-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg 401w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Mratyunjay-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-189x300.jpg 189w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Mratyunjay-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-285x450.jpg 285w" sizes="auto, (max-width: 401px) 100vw, 401px" /><figcaption>मृत्युंजय महादेव मन्दिर </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">श्री दिगम्बर जैन मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस शहर में मैदागिन क्रासिंग के पास स्थित है श्री दिगंबर जैन मन्दिर यह एक साफ़ सुथरा शांत जैन मन्दिर है आपको एक बात और बता दू बनारस में जैन धर्म के कुछ और भी जाने माने मंदिर है जिनके नाम नीचे दिये दे रहा हु &#8211; <br>पार्श्वनाथ जैन मन्दिर  , भेलूपुर <br>ग्यारहवे तीर्थंकर श्री श्रेयांसनाथ , सारनाथ <br>आंठ्वे तीर्थंकर चन्द्र प्रभु  , चन्द्रावती </p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="385" height="407" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-Digambar-Jain-Mandir.jpg" alt="Banaras Me Ghumne ki Jagah Digambar Jain Mandir" class="wp-image-11261" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-Digambar-Jain-Mandir.jpg 385w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-Digambar-Jain-Mandir-284x300.jpg 284w" sizes="auto, (max-width: 385px) 100vw, 385px" /><figcaption>श्री दिगंबर जैन मंदिर मैदागिन क्रासिंग </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">भारत माता मन्दिर बनारस में घूमने की जगह</h4>



<p class="has-text-align-justify">स्वंत्रतता सेनानी बाबू शिव प्रसाद गुप्ता द्वारा दो मंजिले भारत माता मन्दिर का निर्माण करवाया गया था यह मंदिर मुख्य रूप से भारत माता को समर्पित है इस मन्दिर में आपको कोई भी देवी देवता के दर्शन नहीं होंगे अरे एक बात और इसका उद्घाटन महात्मा गांधीजी ने किया था इस भारत माता मन्दिर में मार्बल से बना हुआ भारत का एक नक्शा हो जो की अत्यंत भव्य है सॉरी भारत का नक्शा नहीं यहाँ पर अखण्ड भारत का नक्शा बना हुआ है यह मन्दिर कैंट रेलवे स्टेशन के समीप ही है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री तिलभांडेश्वर महादेव मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस के भेलूपुर में स्थित श्री तिलभांडेश्वर महादेव मन्दिर काफी लोकप्रिय मन्दिर है यहाँ ऐसी मान्यता की इस मन्दिर का शिवलिंग हर साल मकर सक्रान्ति के दिन तिल के बराबर बढ़ जाता है इस मन्दिर में कालसर्प दोष वाली पूजाए हुआ करती है इसके नाम के पीछे कई किद्वंती है एक तो यह की तिल तिल करके शिवलिंग बढ़ रहा है दूसरी यह की यह मन्दिर जहाँ पर है वहां पहले तिल की खेती होती थी तभी किसानो ने यह शिवलिंग देखा बस तबसे इसका नाम श्री तिलभांडेश्वर महादेव मन्दिर हो गया |</p>



<h4 class="wp-block-heading">मारकंडेय महादेव मन्दिर कैथी </h4>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी के कैथी नाम की जगह पर स्थित है शिव जी का मन्दिर जिसका नाम मारकंडेय महादेव मन्दिर है यह एक पुराना मन्दिर है और शहर में अत्यधिक लोकप्रिय है यहाँ मन्दिर से थोड़ी दूरी पर गंगा जी भी है आप इस मन्दिर में भी आ सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">असी घाट</h4>



<p class="has-text-align-justify">असी घाट बनारस का एक प्रमुख गंगा घाट है जहाँ आपको जरूर जाना चाहिये और यहाँ की गंगा आरती और सुबह -ए बनारस कार्यक्रम को जरूर देखना चाहिये यकीन मानिये इस घाट पर आपको काफी सकून मिलेगा मै यहाँ शाम को गया तो देखा यही आसपास कुछ लड़के लडकिय पेंटिंग बना रहे कही कोई ग्रुप म्यूजिक में व्यस्त है कुल मिलाकर एक अलग किस्म का सकारात्मक वातावरण आपको असी घाट पर मिलेगा आप चाहो तो यहाँ नौका विहार भी कर सकते हो |</p>



<p>यहाँ पर असी नदी आकर गंगा में मिलती है इसीलिये इसे असी घाट कहा जाता है यह एक बहुत बड़ा घाट है यहाँ से सूर्यास्त और सूर्योदय का नजारा बहुत ही सुन्दर होता है इस घाट पर होने वाली गंगा आरती में दशाश्वमेध घाट की अपेक्षा भीड़ कम होती है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="506" height="571" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/असि-घाट-बनारस.jpg" alt="असि घाट" class="wp-image-11269" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/असि-घाट-बनारस.jpg 506w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/असि-घाट-बनारस-266x300.jpg 266w" sizes="auto, (max-width: 506px) 100vw, 506px" /><figcaption>असि घाट</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">रानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली अस्सी घाट और तुलसी घाट के पास</h4>



<p class="has-text-align-justify">जी यह एक ऐतिहासिक स्थल है जो बनारस के शिवाला में है अरे अस्सी घाट या तुलसी घाट से मुश्किल से 250 मीटर की दूरी पर है बनारस में ही रानी लक्ष्मीबाई का जन्म हुआ था इस स्थल पर रानी की एक प्रतिमा बनी हुई है और तमाम रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी हुई तस्वीरे यहाँ पर आप देख सकते है यहाँ एक हरा भरा गार्डन भी है देखिये यदि आप अस्सी घाट की तरफ आ रहे हो और इतिहास प्रेमी हो तो तो आपको रानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली पर जरूर आइयेगा |</p>



<h4 class="wp-block-heading">लोलार्क कुण्ड</h4>



<p class="has-text-align-justify">लोलार्क कुण्ड <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> है इसकी लोकेशन की बात करे तो यह आपको अस्सी घाट तुलसी घाट के आगे मिलेगा भदैनी इलाके में लोलार्क कुण्ड बना हुआ है लोलार्क कुण्ड स्थित लोलार्केश्वर महादेव का बड़ा ही महत्त्व है श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते है ऐसी मान्यता है कि लोलार्क कुण्ड में स्नान करने से निसंतान महिलाओ को भी संतान की उत्पत्ति होती है |</p>



<p class="has-text-align-justify">तुलसी घाट पर ही गोस्वामी तुलसीदास जी का कमरा है जहाँ वो रहा करते थे आपका मन हो तो आप यहाँ भी देख ले और यही पर कही अखाड़ा भी है हालाँकि अखाड़ा मै गया नहीं था |</p>



<h4 class="wp-block-heading">नया काशी विश्वनाथ मन्दिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय</h4>



<p class="has-text-align-justify">बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जो बीएचयू के नाम से जानी जाती है इस यूनिवर्सिटी परिसर में नया काशी विश्वनाथ मन्दिर स्थित है जो की देखने में बड़ा ही भव्य है मन्दिर के सामने ही खाने पीने के कई स्टाल है इस मन्दिर के चारो तरह एक सुन्दर सा गार्डन है इस मन्दिर में आकर आपको अच्छा लगेगा और मै यही कहूँगा की आप नये काशी विश्वनाथ मन्दिर जरूर आये और आकर इस भव्य मन्दिर की भव्यता को देखे मन्दिर परिसर में नंदी जी की भी एक आकर्षण प्रतिमा बनी हुई है  |</p>



<p>बनारस हिन्दू विश्विद्यालय में ही भारत कला भवन है जो की एक संग्रहालय है यदि आप कला प्रेमी है तो इस जगह भी आप आ सकते है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="579" height="639" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/नया-काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="नया काशी विश्वनाथ मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11275" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/नया-काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी.jpg 579w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/नया-काशी-विश्वनाथ-मन्दिर-वाराणसी-272x300.jpg 272w" sizes="auto, (max-width: 579px) 100vw, 579px" /><figcaption>नया काशी विश्वनाथ मन्दिर </figcaption></figure>
</div>

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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="362" height="500" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-New-Kashi-Vishanath-Temple.jpg" alt="Banaras Me Ghumne ki Jagah New Kashi Vishanath Temple" class="wp-image-11262" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-New-Kashi-Vishanath-Temple.jpg 362w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-New-Kashi-Vishanath-Temple-217x300.jpg 217w" sizes="auto, (max-width: 362px) 100vw, 362px" /><figcaption>नन्दी जी नया विश्वनाथ मन्दिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय </figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">संत रविदास पार्क बनारस का पर्यटन स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप हरियाली पसंद करते है और थोडा रिलैक्स करना चाहते है तो आप संत रविदास पार्क आ सकते है यहाँ रविदास जी की एक प्रतिमा बनी हुई है पार्क के समीप ही गंगा घाट है इस पार्क में आपको टिकट भी लेनी होगी जो शायद वयस्कों के लिये 15 रूपये है तो आप रिलैक्स करके के लिहाज से यहाँ आ सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">रामनगर का किला <strong>बनारस में घूमने की जगह</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी के लंका से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है रामनगर का किला यह किला गंगा नदी के किनारे पर बना हुआ एक सुन्दर किला है यदपि यहाँ रख रखाव का अभाव है लेकिन आप यहाँ जरूर जाये काशी नरेश बलवंत सिंह ने इस किले का निर्माण कार्य करवाया था यहाँ की टाइमिंग सुबह १० बजे शाम 5 बजे तक की है  इस किले में एक संग्रहालय है जो की एक इतिहास प्रेमी को अवश्य देखना चाहिए संग्रहालय देखने की टिकट 75 रूपये है |</p>



<p class="has-text-align-justify">किले के अन्दर आपको तोपे रखी हुई दिखाई देंगी किले के अन्दर ही आपको वेद व्यास मंदिर , दक्षिण मुखी हनुमान मन्दिर के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा गंगा किनारे से इस किले का व्यू बहुत ही प्यारा दीखता है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="518" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रामनगर-वाराणसी.jpg" alt="रामनगर वाराणसी" class="wp-image-11230" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रामनगर-वाराणसी.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/रामनगर-वाराणसी-290x300.jpg 290w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>रामनगर का किला </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का पैत्रक आवास </h4>



<p class="has-text-align-justify">रामनगर किले से थोड़ी ही दूरी पर हमारे देश के ईमानदार प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का पैत्रक आवास है जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है यहाँ पर आपको शास्त्री जी के जीवन से जुड़ी हुई बहुत सी वस्तुये देखने को मिलेंगी यहाँ आप जरूर जाए |</p>



<p>अधिक जानकारी के लिये <a href="https://safarjankari.com/ramnagar-varanasi-ghumne-ki-jankari-ramnagar-ka-kila/">रामनगर वाराणसी घूमने की जानकारी – रामनगर का किला, शास्त्री जी का पैतृक आवास</a> पोस्ट को पढ़े |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/पूर्व-प्रधानमंत्री-स्वर्गीय-श्री-लाल-बहादुर-शास्त्री-जी-का-पैतृक-आवास-रामनगर.jpg" alt="पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का पैतृक आवास रामनगर" class="wp-image-11225" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/पूर्व-प्रधानमंत्री-स्वर्गीय-श्री-लाल-बहादुर-शास्त्री-जी-का-पैतृक-आवास-रामनगर.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/पूर्व-प्रधानमंत्री-स्वर्गीय-श्री-लाल-बहादुर-शास्त्री-जी-का-पैतृक-आवास-रामनगर-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/पूर्व-प्रधानमंत्री-स्वर्गीय-श्री-लाल-बहादुर-शास्त्री-जी-का-पैतृक-आवास-रामनगर-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का पैतृक आवास कक्ष संख्या 1</figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">संकट मोचन हनुमान मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">संकट मोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है आपकी बनारस की यात्रा बिना इस मन्दिर दर्शन के अधूरी है इस मन्दिर परिसर में मोबाइल वगैरह मतलब फोटोग्राफी मना है तो आपको मन्दिर के प्रवेश मार्ग पर ही अपना मोबाइल जमा कराना होगा जैसा की नाम से ही समझ आ रहा है कि यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है यदि आपके पास समय हो तो इस मन्दिर में आकर हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करे मन्दिर परिसर के अन्दर ही प्रसाद मिलता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">ध्यान दे की मंगल और शनिवार के दिन संकट मोचन हनुमान मन्दिर में आपको लम्बी लम्बी लाइन दिखाई देंगी यहाँ इन दो दिनो में बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है ऐसी मान्यता है की संकट मोचन हनुमान मन्दिर में हनुमान जी के दर्शन मात्र से आपके जीवन के समस्त संकट मिट जाते है यह मंदिर लंका नाम की जगह से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="353" height="542" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/संकट-मोचन-हनुमान-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="संकट मोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11283" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/संकट-मोचन-हनुमान-मन्दिर-वाराणसी.jpg 353w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/संकट-मोचन-हनुमान-मन्दिर-वाराणसी-195x300.jpg 195w" sizes="auto, (max-width: 353px) 100vw, 353px" /><figcaption>संकट मोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी</figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">त्रिदेव मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">संकट मोचन हनुमान मन्दिर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है त्रिदेव मन्दिर जिसकी बनावट और भव्यता देखते ही बनती है यहाँ सबसे पहले आप अपने जूता चप्पल उतार के मन्दिर के अन्दर प्रवेश करे मंदिर के अन्दर की साफ सफाई बहुत ही बढ़िया है मंदिर परिसर के अन्दर का रख रखाव बनावट प्रतिमाये सभी उत्कृष्ट है शाम के समय लाइटिंग में इस मन्दिर की सुन्दरता और भी ज्यादा बढ़ जाती है यह मंदिर मुख्य रूप से रानी दादी सती देवी  , खाटू श्याम और हनुमान जी को समर्पित है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="530" height="430" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Tridev-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg" alt="Tridev Mandir Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11268" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Tridev-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah.jpg 530w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/Tridev-Mandir-Banaras-Me-Ghumne-ki-Jagah-300x243.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 530px) 100vw, 530px" /><figcaption>त्रिदेव मन्दिर </figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading"> श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर </h4>



<p class="has-text-align-justify">त्रिदेव मंदिर के पास ही स्थित है बनारस का एक और प्रसिद्ध मन्दिर जिसे हम श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर के नाम से जानते है यह मन्दिर मुख्य रूप से भगवान राम को समर्पित है इस मन्दिर के अन्दर आपको एक अध्यात्मिक सी अनुभूति होगी इस मन्दिर की दीवारों पर राम चरित मानस लिखी हुई है यदि आप मन्दिर के ऊपरी मंजिल पर जाते हो तो वहां आपको रामायण के चित्र दिखाई देते है जो की बहुत ही सजीव लगते है इस मंदिर का नाम तुलसी दास के नाम पर श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इस मन्दिर में जैसे ही आप प्रवेश करोगे आपको राम भक्ति का एह्सास होगा बहुत ही शांत देवीय उर्जा से भरा हुआ यह मन्दिर <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> में काफी लोकप्रिय है इस मन्दिर में आप श्री राम के अलावा श्री कृष्ण के जीवन की कई पेंटिंग्स देख सकते है और यहाँ पर अन्य देवी देवताओ की प्रतिमाये भी है मंदिर के बाहर बना गार्डन भी आप देख सकते है मंदिर परिसर में आपको काल भैरव , रामजी लक्ष्मणजी सीताजी, राधा कृष्ण जी , भगवान शंकर जी , गणेश जी के दर्शन का लाभ मिलता है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="430" height="471" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-सत्यनारायण-तुलसी-मानस-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11282" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-सत्यनारायण-तुलसी-मानस-मन्दिर-वाराणसी.jpg 430w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/श्री-सत्यनारायण-तुलसी-मानस-मन्दिर-वाराणसी-274x300.jpg 274w" sizes="auto, (max-width: 430px) 100vw, 430px" /><figcaption>श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर वाराणसी</figcaption></figure>
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<h4 class="wp-block-heading">दुर्गा कुण्ड मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर से थोड़ा सा आगे जाने पर आपको एक लाल रंग का मन्दिर दिखाई देगा यही बनारस का प्रसिद्ध दुर्गा मन्दिर है यहाँ पर भक्त माँ दुर्गा के दर्शन हेतु आते है इस मंदिर परिसर में माँ दुर्गा की एक दिव्य मूर्ति स्थापित है इस मन्दिर का निर्माण अठारवी शताब्दी में बंगाल की एक रानी ने करवाया था ऐसी मान्यता है कि इस मन्दिर में जो माँ दुर्गा की मूर्ति है वह अपने आप ही प्रकट हुई थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">दुर्गा मंदिर में एक कुण्ड भी है जिसे दुर्गा कुण्ड कहते है और इस सम्पूर्ण मन्दिर परिसर में कई और भी मन्दिर है जैसे श्री सिद्ध हनुमान विष्णु  कल्कि मन्दिर , शंकर जी का मन्दिर  , राधा कृष्ण मन्दिर तो आप यहाँ आक्र माँ दुर्गा के दर्शन का लाभ जरूर ले |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="855" height="391" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दुर्गा-कुण्ड-मन्दिर-वाराणसी.jpg" alt="दुर्गा कुण्ड मन्दिर वाराणसी" class="wp-image-11274" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दुर्गा-कुण्ड-मन्दिर-वाराणसी.jpg 855w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दुर्गा-कुण्ड-मन्दिर-वाराणसी-300x137.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/दुर्गा-कुण्ड-मन्दिर-वाराणसी-768x351.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 855px) 100vw, 855px" /><figcaption>दुर्गा कुण्ड मन्दिर </figcaption></figure>
</div>


<p><strong>विशेष नोट &#8211; </strong> संकट मोचन हनुमान मन्दिर , त्रिदेव मन्दिर , श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर , दुर्गा कुण्ड मन्दिर यह सभी मन्दिर एक लाइन से आस पास ही है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">खिड़किया घाट या नमो घाट &#8211; Banaras Me Ghumne ki Jagah</h4>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी में राजघाट के समीप ही एक नए घाट  का निर्माण कार्य गति पर है जिसका नाम खिड़किया घाट या नमो घाट है यह एक बेहद ही अलग तरीके का सुन्दर घाट है यह आदिकेशव घाट के समीप बना हुआ है खिडकिया घाट पर नमस्कार मुद्रा की तीन प्रतिमाये आकर्षण का केंद्र है यह घाट बनारस का उभरता हुआ पर्यटन स्थाल है तो यह गंगा घाट <strong>बनारस में घूमने की जगह</strong> में लोकप्रिय हो रहा है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">सारनाथ बनारस का पर्यटन स्थल </h4>



<p class="has-text-align-justify">वाराणसी से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सारनाथ जो की एक बौद्ध स्थल है भगवान् बुद्ध के जीवन से सम्बंधित यह पावन क्षेत्र भी बनारस में एक बढ़िया पर्यटन स्थल है वैसे सारनाथ हिन्दू , बौद्ध और जैन धर्म का पवित्र स्थल है यहाँ पर सारंगनाथ महादेव का मन्दिर है और जैन धर्म के ग्यारहवे तीर्थंकर श्रेयांसनाथ जी की तपोस्थली है  सारनाथ इसलिए यह जैन धर्म में भी लोकप्रिय है |</p>



<p class="has-text-align-justify">सारनाथ में आप तिब्बती मन्दिर , चौखंडी स्तूप , धमेख स्तूप , अशोक स्तम्भ , मूल्गंध कुटी विहार , धर्मराजिका , स्तूप , डियर पार्क , थाई मन्दिर आदि स्थल जरूर देखे कोशिश करे कि आप यहाँ समय लेकर आये सारनाथ घूमने की अधिक जानकारी के लिये नीचे क्लिक करके पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/places-to-visit-in-sarnath-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">सारनाथ में घूमने की समस्त जानकारी </a></p>



<p class="has-text-align-justify">यह तो हमने आपको <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> के जाने माने पर्यटन स्थलों के बारे में बताया इनके अलावा और भी जगहों पर जा सकते है जिनके नाम हम नीचे दिए दे रहे है &#8211; <br>अलमगीर मस्जिद पंचगंगा घाट के पास <br>काशी धाम संग्राहलय बूंदी परकोटा घाट के पास <br>लाल खान का मकबरा राजघाट <br>गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी गुरुबाग <br>सैंट मेरी केथेड्रल चर्च  कैंट<br>बाबा कीनाराम <br>डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद घाट<br>दरभंगा घाट<br>शीतला घाट<br>अहिल्याबाई घाट<br>भारतेन्दु हरिश्चंद उद्यान <br>गौदोलिया मार्केट<br>विश्वनाथ गली<br>वाराणसी फन सिटी वाटरपार्क<br>आनंद पार्क दुर्गाकुण्ड आनंदबाग भेलूपुर <br>नेहरु पार्क कैन्ट<br>शहीद उद्यान नगर निगम सिगरा </p>



<p class="has-text-align-justify">लिखते ही रहेंगे ऐसे तो <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah </strong>की लिस्ट बहुत बड़ी है हर घाट पर मन्दिर है बनारस की गलियों में मन्दिर है आप बस घूमते रहिये दर्शन करते रहिये |</p>



<h4 class="wp-block-heading">वाराणसी की मार्केट क्या क्या ख़रीदे </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये अब बात करते है बनारस की जानी मानी बाजारों की और आप क्या क्या बनारस से खरीद सकते है </p>



<h5 class="wp-block-heading">गौदोलिया से दशाश्वमेध घाट की तरफ की मार्किट </h5>



<p class="has-text-align-justify">जब आप गौदोलिया से दशाश्वमेध की तरफ आयेंगे तो रास्ते में आपको साड़ी सूट , कंगन चूड़ियाँ , पूजा पाठ की सामग्री , सैडल आदि सामान आप खरीद सकते है और यही आप स्ट्रीट फ़ूड का मजा भी ले सकते है |<br>और इधर ही आपको विश्वनाथ गली भी मिलेगी जहाँ भी आप जाना न भूले |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="477" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-का-ह्रदय-स्थल-गौदोलिया.jpg" alt="Gaudoliya Banaras Me Ghumne ki Jagah" class="wp-image-11288" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-का-ह्रदय-स्थल-गौदोलिया.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/06/बनारस-का-ह्रदय-स्थल-गौदोलिया-300x286.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>बनारस का ह्रदय स्थल गौदोलिया</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">ठठेरी बाज़ार </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप साड़ियाँ खरीदना चाहते हो तो आप ठठेरी बाजार की और रुख कर सकते है यहाँ पर साड़ियो की होलसेल मार्किट है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">दालमंडी मार्किट</h5>



<p class="has-text-align-justify">यह बनारस की एक ऐसी बाजार है जहाँ आपको जरूरत का हर एक सामान सही दाम पर मिल जायेगा यहाँ पर बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इनके आलावा वाराणसी में गोलघर , लहुराबीर, लंका की तरफ भी शापिंग कर सकते हो |</p>



<h4 class="wp-block-heading">Things To Do In Varanasi &#8211; वाराणसी में क्या क्या करे </h4>



<ul class="wp-block-list"><li>दशाश्वमेध घाट या किसी अन्य घाट पर गंगा स्नान </li><li>प्रमुख मन्दिरों जैसे बाबा विश्वनाथ मन्दिर , माँ अन्नपूर्णा मन्दिर , श्री काल भैरव मन्दिर , संकट मोचन हनुमान मन्दिर , दुर्गा मन्दिर , तुलसी मानस मन्दिर , नया काशी विश्वनाथ मन्दिर , रामनगर का किला , सारनाथ , भारत माता मन्दिर के दर्शन करे |</li><li>दशाश्वमेध घाट या डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद घाट की शाम की गंगा आरती और असी घाट की सुबह की गंगा आरती </li><li>असी घाट पर सुबह ए बनारस </li><li>नाव द्वारा घाट की सैर मतलब नौका विहार </li><li>बनारसी फ़ूड का मजा </li><li>बनारस की मार्किट में घूमना </li><li>गंगा के घाट पर बैठना </li></ul>



<p>हमने आपको <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah </strong>के बारे में बताया और बहुत सी घूमने वाली जगहे बता दी लेकिन यदि आप के पास समय कम है यह आप बनारस के प्रमुख प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट ही देखना चाह रहे हो तो अब हम आपको नीचे प्रमुख प्रमुख टूरिस्ट पॉइंट के नाम दिये दे रहा हूँ जिन्हें आप जरूर घूमें &#8211; </p>



<ul class="wp-block-list"><li>श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर और सम्पूर्ण कारीडोर </li><li>माँ अन्नपूर्णा देवी </li><li>माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ </li><li>गौदोलिया मार्केट</li><li>दशाश्वमेध घाट</li><li>मणिकर्णिका घाट</li><li>श्री काल भैरव मन्दिर</li><li>नया काशी विश्वनाथ मन्दिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय</li><li>संकट मोचन हनुमान मन्दिर</li><li>दुर्गा कुण्ड मन्दिर</li><li>असि घाट</li><li>रामनगर </li><li>सारनाथ </li></ul>



<p>बनारस घूमने से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844500513"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस किस राज्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बनारस उत्तर प्रदेश राज्य में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844527252"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; वाराणसी क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">वाराणसी बनारस भारत का एक पुराना शहर है यह अपनी संस्कृति के लिये प्रसिद्ध है गंगा नदी के लिये प्रसिद्ध है श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है देखा जाय तो बनारस अपने गंगा घाटो और मंदिरों के लिये प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844664938"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस को और किन नामो से जानते है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बनारस के एनी नाम वाराणसी और काशी है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844698338"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस कब जाना चाहिये बनारस जाने का बेस्ट टाइम कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बेस्ट तो ठंडी ही है अक्टूबर से लेकर फरवरी मार्च तक |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844818634"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस घूमने के लिये कितने दिन चाहिये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">वैसे तो आप बनारस को दिनों में बांध नहीं सकते है लेकिन फिर भी यदि आप बनारस के सिर्फ प्रमुख स्थलों को देखना चाहते है तो कम से कम दो दिन आप बनारस को जरूर दे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663844957918"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस के प्रमुख मन्दिर कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री काशी विश्वनाथ मंदिर , माँ विशालाक्षी मंदिर , श्री काल भैरव मंदिर , संकट मोचन हनुमान मंदिर , दुर्गा मंदिर , त्रिदेव मंदर , सत्यनारायण तुलसी मानस मंदिर , माँ अन्नपूर्णा मंदिर , नया वाला काशी विश्वनाथ मंदिर |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845064515"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस के प्रमुख घाट कौन कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">दशाश्वमेध घाट , मणिकर्णिका घाट , असि घाट |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845132050"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में कौन सा ज्योतिर्लिंग है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845216146"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में टेढ़ा मन्दिर कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर है जिसकी बनावट टेढ़ी है इसीलिये इसे टेढ़ा मंदिर कहते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845323658"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में माँ अन्नपूर्णा मंदिर कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप ही माँ अन्नपूर्णा मंदिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845384426"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; वाराणसी स्थित माता विशालाक्षी मंदिर के बारे में बताइये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">वाराणसी स्थित माता विशालाक्षी मंदिर एक शक्तिपीठ है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845564144"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में महाशमशान क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मणिकर्णिका घाट को महाशमशान कहा जाता है क्यूंकि यहाँ दाह संस्कार हुआ करते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845699858"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; वाराणसी का मणिकर्णिका घाट क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इसे महाशमशान कहा जाता है यहाँ दाह संकार बहुत ही ज्यादा होते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845766428"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस के श्री काल भैरव मंदिर के बारे में बताइए ?</strong> <p class="schema-faq-answer">काल भैरव को बनारस का कोतवाल कहते है इनकी अनुमति के बिना बनारस में न कोई आता है न जाता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845841758"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में घूमने की जगहे बताइए ? <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> Bataiye ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बनारस में आप यहाँ के मंदिर , गंगा घाट , यहाँ की गलियां घूम सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663845983615"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">संकट मोचन हनुमान मन्दिर |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663912820096"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस का भारत माता मन्दिर क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">क्यूंकि भारत माता मन्दिर का उद्घाटन महात्मा गाँधीजी ने किया था , स्वंत्रतता सेनानी बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने इस मंदिर को बनवाया था इस मंदिर में बना भारत का नक्शा बड़ा ही भव्य है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913140326"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; वाराणसी का असि घाट क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">असि घाट पर सूर्यास्त और सूर्योदय देखना मन को लुभाता है इस घाट पर सुबह सुबह सुबह ए बनारस का कार्यक्रम होता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913243095"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; वाराणसी में लोलार्क कुण्ड कहा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लोकार्क कुण्ड बनारस में असि घाट के आगे तुलसी घाट के समीप है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913362014"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नया काशी विश्वनाथ मन्दिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बनारस के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय कैम्पस में |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913417750"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस में श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मन्दिर किस भगवान को समर्पित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भगवन राम को |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913488749"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न -खिड़किया घाट या नमो घाट क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> खिडकिया घाट पर नमस्कार मुद्रा की तीन प्रतिमाये आकर्षण का केंद्र है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913562411"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; सारनाथ क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बनारस से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सारनाथ एक बौद्ध स्थल है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913619334"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस का ह्रदय स्थल किसे कहते है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">गौदोलिया को |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663913685234"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बनारस की प्रसिद्ध मार्किट कौन कौन सी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">गौदोलिया मार्किट , ठठेरी बाज़ार , दालमंडी मार्किट , गोलघर , लहुराबीर आदि |</p> </div> </div>



<p>हमने आपको बनारस शहर के पर्यटन से सम्बन्धित बहुत सी जानकारियां दी <strong>Banaras Me Ghumne ki Jagah</strong> की पोस्ट आपको कैसी लगी कमेन्ट करके अवश्य बताये |<br></p>
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		<title>टनकपुर में घूमने की जगहें &#8211; Tanakpur Tourist Places की A to Z जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Oct 2021 08:10:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[टनकपुर]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[नानकमत्ता]]></category>
		<category><![CDATA[शारदा घाट टनकपुर]]></category>
		<category><![CDATA[श्री सिद्धबाबा मन्दिर नेपाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>टनकपुर एक टाउन है जो की उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में आता है यहाँ घूमने के लिये आपको माँ पूर्णागिरि मन्दिर , शारदा घाट , श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर, श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर मिलेंगे इसके अलावा टनकपुर  से थोड़ी ही दूरी पर नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम के स्थल पर बाबा सिद्धनाथ का मन्दिर है और घूमने की बात करे तो यहाँ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर सिखों का पवित्र स्थल श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब है  &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>टनकपुर</strong> एक टाउन है जो की <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखण्ड</a> राज्य के चम्पावत जिले में आता है यहाँ घूमने के लिये आपको माँ पूर्णागिरि मन्दिर , शारदा घाट , श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर, श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर मिलेंगे इसके अलावा <strong><em>टनकपुर</em></strong>  से थोड़ी ही दूरी पर <a href="https://www.welcomenepal.com/">नेपाल</a> के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम के स्थल पर बाबा सिद्धनाथ का मन्दिर है और घूमने की बात करे तो यहाँ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर सिखों का पवित्र स्थल श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">अच्छा यहाँ पर शारदा नदी में राफ्टिंग का भी लुत्फ़ उठा सकते हो , यहाँ पर बूम नाम की जगह पर आप राफ्टिंग की सेवा पा सकते है  और Tanakpur में एक झील भी है जिसे श्यामलाताल कहते है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">टनकपुर के बारे में </h2>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो <strong>टनकपुर</strong> माँ पूर्णागिरि मन्दिर के लिये ही जाना जाता है लेकिन इस पवित्र मन्दिर के अलावा भी यहाँ कुछ पर्यटन स्थल है जहाँ आप जा सकते हो सबसे पहले आप जान लो की यह स्थल  चम्पावत जिले  के अन्तर्गत आता है यहाँ एक सरकारी बस अड्डा है और एक रेलवे स्टेशन भी है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यहाँ की मार्केट भी ठीक ठाक है जहाँ आपके काम का सब सामान आसानी से मिल जायेगा , यहाँ पे ढेर सारे होटल धर्मशालाये रेस्टोरेंट भी उपलब्ध है जिससे आपको ठहरने और खाने पीने की यहाँ कोई मुश्किल नहीं होगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको एक जानकारी और दिए दे रहे है स्वामी विवेकानंद जी 20 जनवरी 1901 को <strong><em>टनकपुर</em></strong>  आये थे और एक किराने की दूकान पर रात्रि विश्राम किया था स्वामी जी के साथ स्वामी शिवानंद , स्वामी सदानद , स्वामी विरजानन्द और लाला गोविन्द शाह भी थे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे टनकपुर </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह एक जानी पहचानी जगह है तो यहाँ आपके लिए रेल सड़क वायु तीनो माध्यम खुले हुए हो आपको जिस भी माध्यम से ठीक लगे आप उसी साधन से आये  हमने अपनी पिछली पोस्ट Maa Purnagiri में <strong>टनकपुर </strong>पहुँचने की समस्त डिटेल्स दे दी है आप वहां जाकर आप पढ़ सकते हो अरे छोड़ो  मै आपको अपनी पिछली पोस्ट से लेके यही कॉपी किये दे रहा हूँ &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">हवाई मार्ग से </h5>



<p>यदि आप हवाई मार्ग मतलब हवाई जहाज से <strong><em>टनकपुर</em></strong>  आना चाहते हो तो आप जान लो यहाँ का निकटतम एअरपोर्ट पन्तनगर है जो की यहाँ से लगभग 100 किलोमीटर दूर होगा और पन्तनगर से आपको यहाँ के लिए टैक्सी आदि मिल जाएँगी |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रेल मार्ग  से </h5>



<p>यदि आप ट्रेन द्वारा यहाँ आना  चाहते हो आप को बता दे की<strong> टनकपुर</strong> में एक रेलवे स्टेशन है जिसका कोड TPU है इस रेलवे स्टेशन पे कई ट्रेन है एक ट्रेन दिल्ली से भी टनकपुर आती है बाकी एक है वो लखनऊ बरेली होते हुए<strong><em> टनकपुर</em></strong>  जाती है तो आप देख ले आपके शहर से यहाँ की कोई सीधी ट्रेन है या नहीं है तो कोई दिक्कत ही नहीं यदि नहीं है तो आप के आसपास के किसी शहर जैसे दिल्ली , लखनऊ , पीलीभीत , बरेली , प्रयागराज , गाजियाबाद , मुरादाबाद आदि तक अगर ट्रेन हो आप यहाँ आ जाये फिर यहाँ से आप <strong><em>टनकपुर</em></strong>  की ट्रेन ले सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="495" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg" alt="टनकपुर रेलवे स्टेशन" class="wp-image-10650" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-300x212.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /><figcaption>टनकपुर रेलवे स्टेशन</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">सड़क मार्ग से </h5>



<p>यह शहर  बहुत ही अच्छी तरह से भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है दिल्ली लखनऊ जैसे शहरो से तो आपको सीधी बस मिल जाएगी और आप अपने साधन से भी बड़ी ही आसानी से यहाँ आ सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">मैंने दिल्ली से <strong>टनकपुर</strong> की जो बस चलती है उसके किराये की बात नहीं की थी दिल्ली की बात करे तो वहां के ISBT आनंद विहार वाले बस स्टैंड से टनकपुर के लिए दिन भर बसे जाती है जिनका किराया महज रूपये 415 है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कहाँ रुके | Where to Stay in Tanakpur in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">किसी भी तरह की यहाँ रुकने की कोई परेशानी नहीं है इस स्थल पर बहुत सी धर्मशालाये है जिनकी लोकेशन की बात करे तो ज्यादातर धर्मशाला शारदा घाट के समीप है कुछ एक अच्छे होटल भी यहाँ मौजूद है  यदि आपका बजट बढ़िया है तो आप होटल में भी रुक सकते है लेकिन मेरे हिसाब से यहाँ पर लोग ज्यादा ठहरते नही सभी श्रद्धालु शारदा घाट में स्नान करके माँ पूर्णागिरि निकल जाते है लेकिन कुछ हमारी तरह ऐसे घुमक्कड़ होते है जिनके शहर की मार्किट शहर के लोकल टूरिस्ट स्पॉट में भी रूचि होती है इस प्रकार के लोग यहाँ रुकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कब जाये &#8211; Best Months For Tanakpur Visit</h4>



<p>यह एक ऐसी जगह है जहाँ आप साल भर जा सकते है लेकिन गर्मी यहाँ भी पड़ती है तो बेहतर की मई जून में यहाँ जाने से बचे अगर आपको गर्मी सताती हो तो वरना छुट्टियां तो मई जून में ही होती है बरसात के मौसम में भी अगर ज्यादा जरूरी न हो तो न जाय क्यूंकि माँ पूर्णागिरि पहाड़ पे है और पहाड़ बरसात में थोडा रूठ जाते है |<br></p>



<h4 class="wp-block-heading">टनकपुर के पर्यटन स्थल | Tanakpur Tourist Places in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">अब हम आपको यहाँ के सभी पर्यटन स्थल के बारे में बताने वाले है जिनमे कुछ पर्यटन स्थल <strong>टनकपुर</strong> टाउन में ही है बाकी कुछ थोड़ी दूरी पर है लेकिन मेरा ये मानना है कि जब आप यहाँ आ ही गये है तो क्या पास क्या दूर जो भी टूरिस्ट स्पॉट उधर नजदीक में हो घूम डालिये तो आइये घूमते है अब<strong> Tanakpur Tourist Places<em> </em></strong>&#8211;</p>



<h5 class="wp-block-heading">शारदा घाट</h5>



<p class="has-text-align-justify">शारदा नदी पे बना एक घाट जिसे शारदा घाट कहते है यहाँ स्नान करना बड़ा पुण्य का काम है यह स्थल <strong>टनकपुर</strong> रेलवे स्टेशन से समीप ही है आप यहाँ पैदल ही जा सकते है यहाँ पर एक सुन्दर सा घाट बना हुआ है जहाँ आप स्नान कर सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आपको चेंजिंग रूम भी देखने को मिल जायेंगे जो महिला श्रधालुओ के लिए टनकपुर नगर पालिका ने बनवाये है जो कि एक बढ़िया बात है , घाट के सामने ही हरे भरे पहाड़ है अब आप जरा सोचो  कल कल करती माँ शारदा और सामने हरे हरे पहाड़ कितना सुन्दर द्रश्य होगा |</p>



<p class="has-text-align-justify">शारदा घाट प्रांगण में कुछ छोटे छोटे मन्दिर बने हुए है जिनमे शारदा मैया का मन्दिर , शनि देव का मन्दिर प्रमुख है अच्छा इस घाट पे मुंडन भी होते है और मुंडन संस्कार के लिए एक बरामदा सा यहाँ बना है , शारदा घाट पे आपको लैया वाला प्रसाद भी मिल जायेगा तो आप सबसे पहले इस घाट पे स्नान करे उसके बाद ही अन्य जगहों पर जाए |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="751" height="418" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg" alt="शारदा घाट टनकपुर" class="wp-image-10652" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg 751w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 751px) 100vw, 751px" /><figcaption>शारदा घाट टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर  </h5>



<p class="has-text-align-justify">इस मन्दिर की <strong><em>टनकपुर</em></strong>  में अत्यधिक मान्यता है माँ पूर्णागिरि के भक्तो की यह तपस्थली हुआ करता था इस मंदिर का शिवलिंग प्राकृतिक है इस मन्दिर प्रांगण में आपको श्री राधा कृष्ण मन्दिर , श्री शीतला माता मंदिर , श्री दुर्गा माता मंदिर , श्री संतोषी माता मंदिर और एक बरामदा जिसमे आप निशुल्क विश्राम कर सकते है देखने को मिल जायेगा यहाँ पर बेंच वगैरह भी है यह पवित्र मन्दिर आपको शारदा घाट से पहले ही रास्ते में मिलेगा |</p>



<p class="has-text-align-justify"> आगे यहाँ की पौराणिक कहानी की बात करे तो चमपवत के सौज और धोन गाँव के तीन बब्राम्हणों को एक सपना आया और उस सपने में महादेव ने उन ब्राम्हणों को बताया की महादेव शारदा , बूम और कांकड़ घाट के भंवर में फसे है तो जब वे ब्राम्हण वहा गए तो उन्हें सच में एक शिवलिंग वहा फंसा मिला फिर क्या था ब्राम्हण बंधु उसे निकलकर टनकपुर ले आये और विश्राम करने के लिए उस दिव्य पंचमुखी शिवलिंग को एक स्थान पर रख दिया फिर उसके बाद जब वो लोग चले और शिवलिंग को उठाया तो वो शिवलिंग उठा ही नहीं बस जहाँ पर यह शिवलिंग रखा था वही पे आज  श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर  स्थित है |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="552" height="506" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10653" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर.jpg 552w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर-300x275.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 552px) 100vw, 552px" /><figcaption>श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">शारदा घाट के ही समीप स्थित है बजरंग बली का एक बहुत ही पवित्र मन्दिर जिसकी वहां के स्थानीय लोगो में बहुत ज्यादा मान्यता है यहाँ लोग अपनी मन्नते लेकर आते है इस मन्दिर का नाम है श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर तो यहाँ भी आप दर्शन जरूर करे काफी साफ़ सुथरा मन्दिर है और बहुत ही सुन्दर हनुमान जी की प्रतिमा बनी हुई है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="574" height="404" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10654" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg 574w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर-300x211.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर-130x90.jpg 130w" sizes="auto, (max-width: 574px) 100vw, 574px" /><figcaption>श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">तो अब</mark> <mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">आपने शारदा घाट देख लिया  श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर मन्दिर देख लिया  श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर  देख लिया ये तीनो ही आसपास ही है आप आराम से पैदल इन जगहों को घूम सकते हो अब थोडा आगे चलते है |</mark></p>



<h5 class="wp-block-heading">बूम राफ्टिंग पॉइंट </h5>



<p class="has-text-align-justify">जी हां वही राफ्टिंग जो आपने ऋषिकेश में देखि होगी उसी तरह की राफ्टिंग <strong><em>टनकपुर</em></strong>  में शारदा नदी में होती है यह मुख्य शहर से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर पूर्णागिरि रोड पर ही बूम रेंज में होती है यदि आप राफ्टिंग करना चाहते हो तो यहाँ जरूर जाए यहाँ पर नाईट कैम्प की भी व्यवस्था है नाईट कैम्प मतलब खुले आसमान के नीचे एक कैम्प में आप रात गुजारे , बूम रेंज में ही एक मंदिर है जिसका नाम बूम मन्दिर श्री आद्य शक्ति पीठ है यहाँ भी आप दर्शन कर सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरि मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">माँ पूर्णागिरि धाम<strong>  <strong>Tanakpur Tourist Places</strong> </strong> का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला टूरिस्ट स्पॉट है टनकपुर के नाम से लोग पूर्णागिरि को ही जानते है यह ,यह मन्दिर पहाड़ो पर बना है जहाँ का रास्ता बहुत ही ज्यादा नैसर्गिक सुन्दरता को लपेटे हुए है श्री पूर्णागिरि धाम 108 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ है और इसकी उत्तर भारत में अत्यधिक मान्यता है यहाँ श्रधालुओ का तांता साल भर लगा रहता है यहाँ जाने के लिए आपको 3 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तो इस पावन धाम की अधिक जानकारी के लिए आप नीचे क्लिक करे और सारी जानकारी पढ़ ले |<br><a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/">Maa Purnagiri Yatra ki A to Z Jankari – माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहा ठहरे</a></p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ke do Raste" class="wp-image-10610" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री सिद्धबाबा मन्दिर कंचनपुर नेपाल </h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की मान्यता है की जब तक सिद्धबाबा के दर्शन न कर लो तब तक माँ पूर्णागिरि के दर्शन अधूरे माने जाते है तो आपको बता दे की श्री सिद्धबाबा का यह मन्दिर <strong>टनकपुर &#8211; नेपाल</strong> के बॉर्डर को पार करके नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम की जगह पर स्थित है , यहाँ पर आने के लिए सबसे पहले आपको टनकपुर / शारदा बैराज आना होगा फिर शारदा नदी पर बने पुल को पार करके आप नेपाल की सीमा में प्रवेश करोगे | </p>



<p>वहां आपकी आईडी देखि जाएगी उसके बाद आप या तो पैदल या फिर वहां मोटर साईकिल वाले १० रूपये प्रति व्यक्ति लेकर आपको ब्रम्हदेव की बाजार के पास छोड़ देंगे | ब्रम्हदेव की इस बाजार से सिद्ध बाबा का मन्दिर नजदीक ही है यहाँ आप का मन हो तो शौपिंग भी कर सकते है खैर आइये अब करिए श्री सिद्ध बाबा के दर्शन , सिद्ध बाबा मंदिर परिसर में  एक विष्णु जी का भी मन्दिर है साथ में ही कुछ प्राचीन मंदिर भी है आप सभी के दर्शन कर ले  | </p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10616" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-267x300.jpg 267w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्यामलाताल </h5>



<p class="has-text-align-justify">मुख्य शहर<strong><em> टनकपुर </em></strong> से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर एक बहुत ही शांत और मनोरम जगह है जहाँ आपको एक प्राकृतिक झील दिखाई देती है इस जगह का रख रखाव उत्तम नहीं है यहाँ साफ़ सफाई का भी अभाव देखने को मिल जाता है इस  झील  के  काले नीले पानी में आप नौका विहार भी कर सकते है , इस झील के अलावा यही पर <a href="https://www.culturalindia.net/reformers/vivekananda.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">स्वामी विवेकानन्द</a> जी का आश्रम स्थित है जिसकी स्थापना सन 1913 में की गई थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">श्यामलाताल में आपको बहुत ही तरह के गुलाब के पौधे मिल जायेंगे , श्यामलाताल से आपको हिमालय भी देखने को मिलता है कुल मिलाकर यदि आपको किसी शांत जगह की तलाश है तब तो आप श्यामलाताल चलो ,  <strong>Tanakpur Tourist Places</strong>  में अब यह स्थल भी फेमस हो रहा है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्री गुरुद्वारा नानकमता साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह एक बहुत ही पवित्र और मान्यता वाला गुरुद्वारा है  जो की<strong><em> टनकपुर</em></strong>  से 40 किलोमीटर की दूरी पर है टनकपुर से खटीमा फिर खटीमा से नानकमत्ता आप जा सकते है वैसे Tanakpur से नानकमत्ता के लिए सीधी बस भी मिल जाएगी ये जो नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारा है इसके कैम्पस में एक पवित्र सरोवर है एक पवित्र पीपल का पेड़ है और यहाँ की हर एक जगह बहुत ही सुन्दर बनाइ गई है  मुख्य गुरुद्वारा पूरा सफ़ेद  संगमरमर से बना है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">नानकमत्ता में एक झील भी है जिसे नानक सागर के नाम से जानते है यहाँ आप बोटिंग का मजा ले सकते और सच बता रहा हु नानक सागर में आपको बहुत ही बढ़िया व्यू मिलेंगे खासकरके सनसेट यदि आप नेचर फोटोग्राफी के शौक़ीन है तो आप नानक सागर जरूर आये |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="667" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg" alt="नानकमत्ता टनकपुर के समीप" class="wp-image-10651" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>नानकमत्ता टनकपुर के समीप</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg" alt="Nanak Sagar Near tanakpur tourist places" class="wp-image-10649" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">नानकमत्ता में रहने के लिए श्री हरगोबिन्द सराय है जहाँ आप मात्र 100 रूपये में एक रूम पा जाओगे इसके अलावा यदि खाने की बात करे तो यहाँ लंगर चला करता है जिसमे आप निशुल्क पेट भर भोजन कर सकते हो |</p>



<p class="has-medium-font-size">नानकमत्ता की सम्पूर्ण जानकारी के लिए नीचे क्लिक करे &#8211;<br><a href="https://safarjankari.com/gurudwara-shree-nanakmatta-sahib-darshan-ki-jankari/">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कैसे पहुँचे कहाँ रुके क्या-क्या देखे भोजन आदि की जानकारी</a></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">दोस्तों ज्यादातर लोग माँ पूर्णागिरि दर्शन करने <strong>टनकपुर </strong>आते है और मातारानी के दर्शन करके वापस अपने घर लौट जाते है लेकिन मेरी मानिये तो आप सिर्फ एक दिन एक्स्ट्रा लेके आइये और सबसे पहले टनकपुर शहर में ही शारदा घात पर स्नान करिए फिर श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर और श्री पंचमुखी महादेव मंदिर के दर्शन करे फिर निकल पड़िये माँ पूर्णागिरि धाम की और वहां रास्ते में प्राकृतिक मनोरम द्रश्यो को निहारते हुए मातारानी के दर्शन करिए  अब निकल पड़िये टनकपुर बैराज और जाइये नेपाल स्थित श्री सिद्धबाबा के दर्शन करने |</mark></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">इसके बाद यदि आपको राफ्टिंग का शौक है तो आप बूम रेंज जाइये यदि आपको झील देखने का मन हो तो श्यामलाताल जाइये ये आपकी रूचि पर है कही का न मन हो तो इन दोनों जगहों में से कही न जाइये आपकी मर्जी लेकिन आपको <strong>टनकपुर</strong> से 40 किलोमीटर दूर नानकमत्ता जरूर जाना चाहिए अगर आप वहां गये तो वहां के गुरूद्वारे , नानक सागर आपको बहुत ही पसंद आयेंगे |</mark></p>



<p>टनकपुर में घूमने से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456035655"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर कहा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर  उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456096107"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर माता पूर्णागिरि मन्दिर के लिये प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456140946"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर कौन से राज्य में पड़ता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखण्ड</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456194519"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बरेली से टनकपुर की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 113 किलोमीटर </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456242634"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बरेली से टनकपुर के लिये कौन सी ट्रेन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> बरेली से टनकपुर के लिये त्रिबेनी एक्सप्रेस  ट्रेन है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456292847"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; लखनऊ से टनकपुर के लिये कौन सी ट्रेन है</strong> <p class="schema-faq-answer">त्रिबेनी एक्सप्रेस </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456353850"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; पीलीभीत से टनकपुर की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 62 किलोमीटर </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456388674"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर में कौन सी नदी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">शारदा नदी </p> </div> </div>



<p>हमने इस पोस्ट में आपको <strong>Tanakpur Tourist Places</strong> की सारी जानकारी दो तो यही आपको <strong>टनकपुर</strong> की यह पोस्ट पसंद आई हो तो कमेन्ट करके बताये |</p>
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		<title>Maa Purnagiri Yatra ki Jankari &#8211; माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहाँ रुके</title>
		<link>https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Oct 2021 12:09:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Natural]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Maa Purnagiri 108 शक्ति पीठो में से एक है और हिन्दू धर्म में अत्यधिक पूज्यनीय है यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के  टनकपुर शहर  में है , यहाँ हम आपको माँ पूर्णागिरी के दर्शन से जुड़ी हुई हर एक बात बतायेंग जैसे यहाँ तक कैसे पहुंचे , यहाँ कहाँ ठहरे , क्या क्या दर्शन करे , प्रसाद कहाँ ले , चढ़ाई का रास्ता कैसा है , भोजन की क्या व्यवस्था है  , दर्शन की टाइमिंग क्या है , टनकपुर से यहाँ जाने का रास्ता , माता रानी के अलावा अन्य देखने वाली जगहे आदि &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Maa Purnagiri </strong>108 शक्ति पीठो में से एक है और हिन्दू धर्म में अत्यधिक पूज्यनीय है यह स्थल<a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/"> उत्तराखण्ड </a>राज्य के चम्पावत जिले के  <a href="https://www.euttaranchal.com/tourism/tanakpur.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">टनकपुर</a> शहर  में है , यहाँ हम आपको माँ पूर्णागिरी के दर्शन से जुड़ी हुई हर एक बात बतायेंग जैसे यहाँ तक कैसे पहुंचे , यहाँ कहाँ ठहरे , क्या क्या दर्शन करे , प्रसाद कहाँ ले , चढ़ाई का रास्ता कैसा है , भोजन की क्या व्यवस्था है  , दर्शन की टाइमिंग क्या है , टनकपुर से यहाँ जाने का रास्ता , माता रानी के अलावा अन्य देखने वाली जगहे आदि |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो दोस्तों कुल मिलकर मैंने बहुत की मेहनत करके यह पोस्ट तैयार की है जिससे की यदि आपको भविष्य में कभी भी  <strong>Maa Purnagiri</strong>  माँ पूर्णागिरि मंदिर आना हो तो आप को इस पोस्ट से  काफी सहूलियत होगी |</p>



<h2 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरि मन्दिर ( Maa Purnagiri ) के बारे में </h2>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के टनकपुर नाम के शहर में अन्नपूर्णा शिखर पे  माता रानी का यह पवित्र धाम स्थित है यह नेपाल की सीमा से समीप है  इस मन्दिर की आराध्य देवी महाकाली माँ है कहने का तात्पर्य यह है की पूर्णागिरि मन्दिर में देवी महाकाली की  पूजा अर्चना की जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> इसके अलावा आपको बता दे यही से काली नदी भी निकलती है जो की आगे जाकर शारदा नदी के नाम से जानी जाती है तो देखा जाय तो यह क्षेत्र धार्मिक के साथ साथ मनमोहक प्राकृतिक द्रश्यो से आच्छादित है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आप थोडा सा समय निकालकर यहाँ अवश्य आये और आकर माँ पूर्णागिरी के दर्शन करे और प्रकृति की ख़ूबसूरती को बेहद ही नजदीक से जाने Maa Purnagiri Darshan से सम्बन्धित समस्त जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी तो आइये शुरू करते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे पूर्णागिरि मन्दिर &#8211; How to reach Maa Purnagiri Mandir in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">आप कही भी जाते हो सबसे पहले आपके मन में यही आता है आखिर जाए कैसे बस का क्या रूट है ट्रेन का क्या है हवाई जहाज का क्या है इसके बाद उस स्थल का लोकल ट्रांसपोर्ट कैसा है तो आप निश्चिन्त रहे आपकी सभी समस्याओ का समाधान नीचे है |</p>



<p class="has-text-align-justify">माता पूर्णागिरि के दिव्य दर्शन हेतु आपको उत्तराखण्ड में स्थित टनकपुर नाम की जगह पर आना होगा और फिर टनकपुर से मुख्य मन्दिर दूरी लगभग 22 किलोमीटर की है जिसमे से आपको  लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी तो आइये सबसे पहले  जान लेते है टनकपुर पहुचने के तरीके &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">हवाई मार्ग से </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप हवाई मार्ग मतलब हवाई जहाज से माँ पूर्णागिरि  के दर्शन करना चाहते हो तो आप जान लो यहाँ का निकटतम एअरपोर्ट पन्तनगर है जो की टनकपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर होगा और पन्तनगर से आपको टनकपुर के लिए टैक्सी आदि मिल जाएँगी |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रेल मार्ग  से </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप ट्रेन द्वारा <strong><em>Maa Purnagiri</em></strong>  के दर्शन करना चाहते हो आप को बता दे की टनकपुर में एक रेलवे स्टेशन है जिसका कोड TPU है इस रेलवे स्टेशन पे कई ट्रेन है एक ट्रेन दिल्ली से भी टनकपुर आती है बाकी एक है वो लखनऊ बरेली होते हुए टनकपुर जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> आप देख ले आपके शहर से यहाँ की कोई सीधी ट्रेन है या नहीं है तो कोई दिक्कत ही नहीं यदि नहीं है तो आप के आसपास के किसी शहर जैसे दिल्ली , लखनऊ , पीलीभीत , बरेली , प्रयागराज , गाजियाबाद , मुरादाबाद आदि तक अगर ट्रेन हो आप यहाँ आ जाये फिर यहाँ से आप टनकपुर की ट्रेन ले सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">सड़क मार्ग से </h5>



<p class="has-text-align-justify">टनकपुर बहुत ही अच्छी तरह से भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है दिल्ली लखनऊ जैसे शहरो से तो आपको सीधी बस मिल जाएगी और आप अपने साधन से भी बड़ी ही आसानी से यहाँ आ सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब ये तो बात हो गई टनकपुर तक आने की अब ये जानिए कि टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे जाया जाय &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे पहुंचे &#8211; How to reach Maa Purnagiri Temple from Tanakpur</h5>



<p class="has-text-align-justify">अब आप टनकपुर आ गए तो आपको टनकपुर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बड़ी ही आसानी से शेयर्ड जीप मिल जायेगी जो आपको ठूलीगाड नाम की जगह तक ले जाएगी उसके बाद आपको दूसरी जीप मिलेगी जो आपको टुन्यास तक लेकर आएगी अब टुन्यास वही जगह है जहाँ से माँ पूर्णागिरि की लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई शुरू होती है कभी कभी आपको टनकपुर से टुन्यास की सीधी जीप भी मिल सकती है इन जीप से जाने का किराया लगभग 60-70 रूपये प्रति व्यक्ति हो सकता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके अलावा आप अपने साधन से भी टुन्यास तक आ सकते हो रोड  सही है कही कही पे थोड़ी सी गड़बड़ है यदि आप एक कुशल ड्राईवर है तो आप आ सकते है | ठूलीगाड से टुन्यास (यही से आपको पैदल चढ़ाई करनी है ) की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है | </p>



<p class="has-text-align-justify">अब जो ये 3 किलोमीटर की चढ़ाई है इसमें भी थोड़ी दूर जाकर आपको दो रास्ते दिखाई देंगे दोनों ही बढ़िया है बस एक रास्ते में सीढियां ज्यादा है दूसरे में कम और दोनों ही रास्ते आगे जाकर एकमे मिल जाते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ke do Raste" class="wp-image-10610" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir ke do Raste Dusra Dahini Taraf hai </figcaption></figure>
</div>


<p><strong>माँ पूर्णागिरी मन्दिर तक आने का बेस्ट तरीका </strong></p>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले ट्रेन या बस या अपने साधन से टनकपुर आ जाओ अब टनकपुर से बेहतर रहेगा की आप शेयर्ड जीप के माध्यम से ठूलीगाड फिर टुन्यास आओ फिर यहाँ से पैदल चढ़ाई करो और आगे जाकर कम सीढियों वाले रास्ते को चुने जो की आपके दाहिनी तरफ होगा |</p>



<h4 class="wp-block-heading">माता पूर्णागिरि मन्दिर यात्रा में रुके कहाँ &#8211; Where to stay in Mata Purnagiri Tanakpur in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये रुकने की यहाँ बहुत सारी जगहे है आप टनकपुर में ही रुक सकते हो टनकपुर में ढेर सारी धर्मशालाये होटल उपलब्ध है इसके अलावा आप ऊपर जाकर माता रानी के समीप भी रुक सकते है जब आप चढ़ाई शुरू करेंगे तो रस्ते में आपको ढेर सारी प्रसाद की दुकाने दिखाई देंगी और हर एक प्रसाद की दुकान में आपको रुकने की ,  स्नान करने की सेवा निशुल्क मिल जाएगी इसके बदले आप उसी दुकान से प्रसाद खरीदना होगा जिसकी कीमत 50 रूपये से शुरू हो जाएगी वैसे यहाँ आपको 151 , 250 , 500 , 2100 ऐसे रेट बतायेंग लेकिन आप मोलभाव करके अपने हिसाब से प्रसाद ले लीजिये |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ki Dharmshala" class="wp-image-10611" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir ki Dharmshala</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">पूर्णागिरी मन्दिर यात्रा में भोजन की व्यवस्था </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये टनकपुर तो टाउन है वहा आपको हर प्रकार का भोजन मिल जायेगा लेकिन हम यहाँ पे बात कर रहे ऊपर भोजन की व्यवस्था के बारे में तो आप निश्चिन्त रहे आपको पैदल चढाई के दौरान ढेर सरे होटल मिल जायेंगे जहाँ आप भोजन कर सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की एक औसत थाली की कीमत लगभग 70-80 रूपये होती है जिसमे आपको चार रोटी दाल सब्जी चावल मिल जायेगा इसके अलावा आपको जगह जगह पे और भी खाने पीने जैसे चाय मैगी कोल्डड्रिंक  जैसे अन्य विकल्प भी  मिल जायेंगे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">Maa Purnagiri Mandir ke Raste Ke Anya Mandir &#8211; पूर्णागिरि मन्दिर के रस्ते में पड़ने वाले अन्य प्रसिद्ध मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">अब आपको दर्शन करते है माँ पूर्णागिरि रास्ते में पड़ने वाले ऐसे मन्दिरों के बारे में जिनके बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जायेगी &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">टुन्यास का भैरव मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">टुन्यास जी ये वही जगह जहाँ से आपको यात्रा प्रारंभ करनी है यही पे भैरव बाबा का एक मन्दिर है जिसके आपको दर्शन करने है और हा जब <strong><em>Maa Purnagiri</em></strong> के दर्शन कर ले उसके बाद जब आप वापसी करे तब भैरव बाबा के दर्शन अवश्य करे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="370" height="493" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg" alt="भैरव मन्दिर टुन्यास" class="wp-image-10615" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg 370w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 370px) 100vw, 370px" /><figcaption>भैरव मन्दिर टुन्यास</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">झूठे का मन्दिर </h5>



<p class="has-text-align-justify">जो भी भक्त माँ पूर्णागिरी के दर्शन हेतु आता है उसे झूठे का मन्दिर में दर्शन करने हेतु अवश्य जाना चाहिए यह आपको चढ़ाई करते समय रास्ते में ही दिखेगा यहाँ पे रुककर दर्शन कर ले , झूठे  का मन्दिर के पास से ही चढ़ाई के दोनों रास्ते एक में मिल जाते है और यही से सिर्फ एक ही रास्ता ऊपर की और जाता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg" alt="झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर" class="wp-image-10614" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">काली मन्दिर रामबाड़ा</h4>



<p class="has-text-align-justify">रामबाड़ा नाम की जगह पे स्थित है माँ काली का मन्दिर यहाँ से मुख्य मंदिर लगभग एक किलोमीटर ही रह जाता है आप यहाँ रुके और माता महाकाली के दर्शन करे फिर आप ऊपर की और जाए , यहाँ मैंने देखा प्रसाद स्वरुप काले वस्त्र में लिपटी हुई खिचड़ीऔर नारियल गोला लोग माँ काली को अर्पण कर रहे थे  |</p>



<p class="has-text-align-justify">देखिये पूर्णागिरि माँ के रस्ते में आपको ये तीन मन्दिर पड़ेंगे भैरव मन्दिर , झूठे का मन्दिर , काली मन्दिर आपको इन तीनो मन्दिर के दर्शन करने है इसके अलावा की जगह-जगह पर रास्ते में भगवान की प्रतिमाये बनी है दान पेटी रखी है आप का मन हो तो आप दर्शन कर सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="413" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg" alt="Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri" class="wp-image-10613" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">माता रानी के धाम की यात्रा से सम्बन्धित अन्य उपयोगी जानकारियां </h5>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले यह जान ले की जो <strong>Maa Purnagiri</strong> की चढ़ाई का रास्ता है बेहद ही मनमोहक है आप जैसे जैसे ऊपर चढ़ेंगे तो आपको बहुत ही हरे भरे पेड़ दिखाई देंगे जो निश्चित तौर से आपको तरोताजा कर देंगे आप चढ़ाई कम सीढ़ी वाले रास्ते से करे तो आपको बहुत ही अच्छे प्राकृतिक व्यू देखने को मिलेंगे यहाँ आपके फोटो वगैरह भी बहुत ही बेहतरीन आयेंगे और आपको यात्रा का मजा भी आएगा , रास्ता में धूप से बचाव हेतु टिन शेड है और किसी प्रकार के हादसे से बचाव हेतु जालियां लगी हुई है  |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="300" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir Ka rasta" class="wp-image-10609" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir Ka rasta</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">आपको चढ़ाई के दौरान रास्ते में जगह जगह में धर्मशालाए , प्रसाद की दुकाने , होटल , खिलौनों की दूकान , सिन्दूर कड़े चूड़ी कंगन लैया भगवान की फोटो प्रतिमाये ब्रेसलेट माला जैसी सैकड़ो दुकाने मिलेंगी जहाँ आपको यदि शॉपिंग करनी हो तो आप कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको दर्शन नंगे पैर करने होते अब इसका ये मतलब नहीं कि आपको पूरी 3 किलोमीटर की चढ़ाई नंगे पैर करनी है देखिये मुख्य मन्दिर से थोड़ी ही दूरी पे हमको अपने चप्पल जूते उतार देने होते है यही से एकदम खड़ी चढ़ाई शुरू हो जाती है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar.jpg" alt="Maa Purnagiri Pravesh Dwar" class="wp-image-10612" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>Maa Purnagiri Pravesh Dwar</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">यदि आपके पास बैग है तो बैग लेके यात्रा करने में आप परेशान हो सकते हो इसका विकल्प यही है आप चढ़ाई शुरू कर दो जब आपको बैग से दिक्कत महसूस हो तो वही पे जो भी प्रसाद की दूकान हो वही पे विश्राम करे नहा धो ले बैग जमा करके प्रसाद लेके अपने जूते चप्पल वही पे उतार के अपनी आगे की यात्रा माँ के जयकारो के साथ  आरंभ करे |</p>



<p class="has-text-align-justify">दोस्तों सबसे पहले आप <strong>Maa Purnagiri</strong> के दर्शन करे फिर वापसी करते समय माता महाकाली के दर्शन करे फिर झूठे का मंदिर के दर्शन टुन्यास स्थित भैरव बाबा के दर्शन जोकि यात्रा का अन्तिम पड़ाव है | यदि आप भीड़ भाड़ से डरते हो तो आप रात में ही दर्शन कर ले रात में भीड़ कम रहती है |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/mata-vaishno-devi-ki-kahani-history-of-vaishno-devi-temple/">Mata Vaishno Devi Ki Kahani – History of Vaishno Devi Temple</a><br><br><a href="https://safarjankari.com/shri-naina-devi-temple-himachal-pradesh-ki-jankari/">Shri Naina Devi Temple Himachal Pradesh Ki Jankari</a><br><br><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%be/">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना</a></p>



<p class="has-text-align-justify">आपको रास्ते में काली नदी भी दिखाई देगी जैसे ठूलीगाड में आपको काली नदी और हरे भरे पहाड़ एक साथ दिखाई देते है जो की बहुत ही मनोरम लगता है निसन्देह प्रकृति से सुन्दर कुछ भी नहीं होता है | शारदीय नवरात्रि में यहाँ पर एला लगता है जिसमे अत्यधिक भीड़ होती है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव कंचनपुर नेपाल</h4>



<p class="has-text-align-justify">ऐसी मान्यता की <strong>Maa Purnagiri</strong> दर्शन के लाभ तभी मिलते है जब आप माँ के दर्शन के बाद नेपाल के कंचनपुर जिले में स्थित श्री सिद्धबाबा के दर्शन न कर ले तो अब आप का अगला पड़ाव श्री सिद्धबाबा मन्दिर होना चाहिए यहाँ आने के लिए आपको टनकपुर से शारदा  बैराज आना होगा जो की आप ई रिक्शा से आ सकते है फिर आपको बैराज को पैदल ही पार करना होगा इसके बाद पड़ेगी नेपाल की चेक पोस्ट जहाँ आप आधार कार्ड या अन्य कोई आईडी दिखाके आगे जाओगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आग आप चाहो तो श्री सिद्धबाबा मन्दिर तक पैदल जाओ या तो फिर वही आपको मोटसाइकिल वाले मिल जाते है जो प्रति व्यक्ति 10 रूपये लेकर आपको मुख्य बाजार तक छोड़ देते है वहां से मन्दिर पास में ही है रास्ते में नेपाल के लोगो के होटल है दुकाने है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यहाँ अपनी भारतीय करेन्सी भी चलती है आप इस बाजार को देखते हुये आ जाइये श्री सिद्धबाबा मन्दिर परिसर में  जहाँ आप विष्णु मन्दिर , प्राचीन अखण्ड सिद्ध धुना , प्राचीन कुवां , श्री सिद्ध बाबा मन्दिर के दर्शन करिए और परिसर में हरा भरा पार्क है आप वहा बैठ सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10616" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-267x300.jpg 267w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">कब जाए माँ पूर्णागिरी धाम </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये यहाँ आप दर्शन हेतु कभी भी आ सकते है लेकिन गर्मियों में यहाँ भी गर्मी ही पड़ती बस ऊपर जहाँ माता का मुख्य मन्दिर है वहा हलकी सी ठण्ड लगती है बाकी टनकपुर में गर्मी ही रहती है बरसात में यहाँ जाने से आप बचाव करे क्यूंकि पहाड़ बरसात में थोडा खतरनाक हो जाते है यदि आपको ज्यादा भीड़ भाद पसन्द नहीं है तो यहाँ आप नवरात्र के समय ना जाए क्यूंकि उस समय यहाँ भीड़ होती है मेरे हिसाब से तो बरसात में यहाँ जरूरी न हो तो जाने से बचे बाकि कभी भी जाए |</p>



<p>माता पूर्णागिरि मंदिर टनकपुर से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438304953"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माता पूर्णागिरि मंदिर कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के टनकपुर नाम के शहर में अन्नपूर्णा शिखर पे  माता पूर्णागिरि का यह पवित्र धाम स्थित है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438377699"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ पूर्णागिरि मन्दिर की आराध्य देवी कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माँ पूर्णागिरि मन्दिर की आराध्य देवी महाकाली माँ है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438461447"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ पूर्णागिरि धाम में कौन सी नदी बहती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">काली नदी जो आगे जाकर शारदा नदी कहलाती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438525167"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर से माँ पूर्णागिरि का मुख्य मन्दिर  की दूरी कितने किलोमीटर की है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर से माँ पूर्णागिरि का मुख्य मन्दिर  की दूरी लगभग 22 किलोमीटर की है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438609175"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माता पूर्णागिरि में कितने  किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आपको  लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438652328"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211;  <strong>Maa Purnagiri</strong> kis rajya me hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> <strong>Maa Purnagiri</strong> Uttarakhand rajy me hai </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438689055"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे पहुंचे ? </strong> <p class="schema-faq-answer">आपको टनकपुर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बड़ी ही आसानी से शेयर्ड जीप मिल जायेगी जो आपको ठूलीगाड नाम की जगह तक ले जाएगी उसके बाद आपको दूसरी जीप मिलेगी जो आपको टुन्यास तक लेकर आएगी अब टुन्यास वही जगह है जहाँ से माँ पूर्णागिरि की लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई शुरू होती है कभी कभी आपको टनकपुर से टुन्यास की सीधी जीप भी मिल सकती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438890776"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Maa Purnagiri Mandir ke Raste Ke Anya Mandir kaun kaun se hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">Tunyas ka Bhairav Mandir<br/>Jhuthe ka Mandir<br/>Kali Mandir Rambada</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438967337"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टुन्यास का भैरव मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर में जहाँ से माता पूर्णागिरि की पैदल यात्रा शुरुहोती है उसी जगह का नाम टुन्यास है और वही पर भैरव मंदिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662439044758"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; झूठे का मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">झूठे का मंदिर माँ पूर्णागिरि के पैदल मार्ग में पड़ता है यहाँ आप दर्शन जरूर करे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662439143024"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; पूर्णागिरि धाम जाने का बेस्ट मौसम कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यहाँ अप बरसात में ना जाये तो बेहतर है बाकी किसी मौसम में जा सकते है बेस्ट की बात करे तो हलकी सर्दी वाले महीने बेस्ट होते है |</p> </div> </div>



<p>तो दोस्तों मैंने ऊपर आपको टनकपुर स्थित माँ पूर्णागिरि मन्दिर यात्रा की ढेर सारी जानकारी दी इसके अलावा भी आपके  मन में कोई भी सवाल हो तो आप मुझसे पूछ सकते  है ,  <strong>Maa Purnagiri</strong>  अप सभी को स्वस्थ रखे |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/">Maa Purnagiri Yatra ki Jankari &#8211; माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहाँ रुके</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश दर्शन की समस्त जानकारी कैसे पहुंचे कहाँ रुके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2020 17:37:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Ke Paryatan Sthal]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Shri Naina Devi Temple 51 शक्तिपीठो में से एक है और यह पवित्र मन्दिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है यहाँ के बारे में यह कहा जाता है कि यह वही स्थल है जहाँ पर माता सती के नेत्र गिरे थे , नवरात्र में इस स्थान पर अत्यधिक भीड़ हो जाती है &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश</strong> <a href="https://safarjankari.com/list-of-51-shakti-peeth-hindi-me/">51 शक्तिपीठो</a> में से एक है और यह पवित्र मन्दिर हिमाचल प्रदेश के <a href="https://www.britannica.com/place/Bilaspur-Himachal-Pradesh-India" target="_blank" rel="noreferrer noopener">बिलासपुर</a> जिले में है यहाँ के बारे में यह कहा जाता है कि यह वही स्थल है जहाँ पर माता सती के नेत्र गिरे थे , नवरात्र में इस स्थान पर अत्यधिक भीड़ हो जाती है |</p>



<h2 class="wp-block-heading"> नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश बिलासपुर जिला &#8211; Naina Devi Ka Mandir</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">नयना देवी मन्दिर के बारे में मुझे सबसे अच्छी बात ये लगी कि यह हिन्दू धर्म और सिख धर्म दोनों के लिए ही पवित्र स्थल है यहाँ आप जब जाओगे तो देखोगे यहाँ हिन्दू और सिक्ख दोनों ही बहुतायत संख्या में आते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अच्छा <strong>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश<em> </em></strong>की  शिवालिक श्रंखला की एक पहाड़ी पर स्थित है इसलिये यहाँ के प्राकृतिक नज़ारे भी बड़े लुभावने है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">पौराणिक कथा के अनुसार जब माता सती ने अपना अंत कर लिया था तब भोलेनाथ अत्यधिक क्रोधित हो गये थे माता सती के शव को उठाकर ताण्डव करने लगे थे  जिससे काफी नुक्सान हो रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> इसीलिये विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित कर दिया था जिससे माता के शरीर के अंग प्रथ्वी पर कई जगह पर गिरे इस स्थान पर  माँ के नेत्र गिरे थे इसीलिये <strong>Naina Devi Ka Mandir</strong> एक शक्तिपीठ भी है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश कैसे पहुंचे</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">जैसा की पहले ही बताया है कि यह मन्दिर बिलासपुर जिले में स्थित है जो की चंडीगढ़ से 110 किलोमीटर है , अम्बाला शहर से लगभग 140 किलोमीटर है |</p>



<ul class="has-medium-font-size wp-block-list"><li>यदि आप वायुमार्ग से यहाँ आना चाहते है तो सबसे बढ़िया विकल्प चंडीगढ़ है आप पहले चंडीगढ़ पहुंचे फिर वहां से आप बस या टैक्सी करके नयना देवी तक पहुँच सकते है |</li><li>यदि आप रेल मार्ग से आना चाहते है तो आपको बता दे यहाँ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन आनन्दपुर साहिब है लेकिन हो सकता है की आपके शहर से आनंदपुर साहिब के लिए कोई सीधी ट्रेन न हो तो आप देख लीजिये कि क्या आपके शहर से चंडीगढ़ या  अम्बाला के लिए कोई सीधी ट्रेन है जरूर होगी आप ट्रेन से चंडीगढ़ या अम्बाला पहुच जाए फिर वहां से अप बस या टैक्सी से <strong>नैना देवी मंदिर बिलासपुर</strong> आ सकते है |</li><li>यदि आप सड़क मार्ग से आना चाहते है तो आपको बता दे की पंजाब और हिमांचल प्रदेश के लगभग सभी जगहों से यहाँ से लिए अच्छी सड़के उपलब्ध है |</li></ul>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">बेस्ट और सस्ता तरीका &#8211; सबसे पहले आप चंडीगढ़ या अम्बाला पहुचो ट्रेन से फिर वहां से पैसेंजर ट्रेन आती है आनंदपुर साहिब तक आप आनंदपुर साहिब आ जाओ फिर आनंदपुर साहिब से आप बस या टैक्सी करके नयना देवी आ सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कहाँ रुके &#8211; Dharamshala in Naina Devi</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आप <strong>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश</strong> में रुकने की जरा सी भी चिंता न करे पहले आपको बता दूँ की यहाँ आप जब भी दर्शन करने आये तो एक रात रुकिए जरूर क्यूंकि थकान काफी हो जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> सबसे पहले आपको मुफ्त धर्मशाला <strong>Dharamshala in Naina Devi</strong> के बारे में बता दे धरमशाला को यहाँ सराय बोलते है , नयना देवी मन्दिर के समीप ही एक पटियाला धर्मशाला है जो की निशुल्ल्क है आप यहाँ रुक सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब बात करते है नयना देवी मन्दिर ट्रस्ट की ऐसी सराय के बारे में जो की बहुत ही कम शुल्क पर आपको अच्छी सुविधाए देती है जिनके नाम है मात्री आंचल , मात्री छाया और मात्री शरण |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मात्री आंचल सराय में AC रूम 600 का NON AC रूम 400 का और साधारण रूम 250 का है वही मात्री शरण सराय में AC रूम में 600 का और Non AC 400 का है एक रूम में तीन लोग रुक सकते है और एक व्यक्ति एक्स्ट्रा भी रुक सकता है जिसका अलग से 50 रूपये और देना होगा |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="250" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Dharamshala_in_Naina_Devi.jpg" alt="Dharamshala in Naina Devi Bilaspur" class="wp-image-2773" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Dharamshala_in_Naina_Devi.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Dharamshala_in_Naina_Devi-300x136.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Dharamshala in Naina Devi Bilaspur</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री नयना देवी मन्दिर का लंगर</h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मन्दिर ट्रस्ट की तरफ से यहाँ लंगर की भी व्यवस्था है एक अलग से भवन बना हुआ है जिसमे एक साथ अधिकतम 500 व्यक्ति लंगर ग्रहण कर सकते है आप जब भी यहाँ आये एक बार लंगर अवश्य ग्रहण करे क्यूंकि इस प्रसाद में देवी माँ का आशीर्वाद होता है |</p>



<p class="has-medium-font-size">यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/indian-historical-places-in-hindi/">भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों की सूची </a><br><a href="https://safarjankari.com/hanumat-dham-shahjahanpur-travel-guide-hindi/">दुःखहरता विशालकाय हनुमत धाम शाहजहांपुर की सम्पूर्ण जानकारी </a></p>



<h4 class="wp-block-heading">About Shri Naina Devi Temple in Hindi &#8211; नयना देवी मन्दिर के बारे में</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब चलते है माँ के दर्शन करने देखिये मुख्य मन्दिर तक पहुँचने के लिए आपके दो विकल्प है एक सीढियों से चढ़कर दूसरा रोपवे से यदि आप पैदल जाना चाहते है तो निश्चिन्त रहिये ये रास्ता ज्यादा लम्बा नहीं है आप आराम से जा सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आप ध्यान रखे की कार पार्किंग जहा होती है उसके सामने से जाए तो आपको लगभग 200 सीढियां चढ़नी पड़ेंगी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आप यहाँ रजिस्ट्रेशन काउंटर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा ले हालाँकि बहुत से लोग रजिस्ट्रेशन कराते ही नहीं |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश में रोपवे की टाइमिंग </h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये रोपवे का कुछ समय है चलिए देख लीजये अच्छा यहाँ रोपवे को रस्से का मार्ग या रज्जू मार्ग  भी कहा जाता है  &#8211; <br>मार्च से सितम्बर &#8211; सुबह 8 बजे शाम 7 बजे तक <br>अक्टूबर &#8211; सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक <br>दिसम्बर से फरवरी &#8211; सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक </p>



<h5 class="wp-block-heading">श्री नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश में रोपवे का शुल्क </h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एक वयस्क का एक तरफ का जाने का टिकट 110 रूपये है और दोनों तरफ का 170 रूपये  है , बच्चो का कुछ सस्ता टिकट है और विकलांग के लिए यह टिकट बिलकुल मुफ्त है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नयना देवी मन्दिर परिसर की जानकारी</h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">सच में <strong><em>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश</em></strong>  पहुंचकर आपको एक देवीय उर्जा का एहसास होगा जैसे ही आप मन्दिर देखोगे बस देखते ही रह जाओगे अब आप चप्पल जूता स्टैंड पर अपने जूते चप्पल उतार दे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> प्रसाद आदि के लिये यहाँ पर कई दुकाने मिल जाएँगी और मंदिर के समीप ही एक मन्दिर न्यास द्वारा संचालित दुकान भी है जहाँ आपको काफी किफ़ायती पैसो में प्रसाद शुद्ध घी से बनी मिठाइयाँ , बेसन के लड्डू , नारियल , मेवा आदि मिल जायेगा | </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> संगमरमर से बने इस  भव्य मन्दिर का मुख्य मार्ग चांदी से बना हुआ है जिसमे देवताओं की अत्यधिक सुन्दर नक्खाशी की गई है जो की देखते ही बनती है , मुख्य द्वार के दाहिनी तरफ आप देखोगे तो आपको भगवान हनुमान और गणेश जी की प्रतिमाये बनी दिखाई देंगी और शेर की दो प्रतिमाये भी बनी है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मन्दिर के गर्भ मतलब मुख्य मन्दिर में तीन पिंडिया है जिनके आप दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाइये दाहिनी और नयना देवी की मुख्य मूर्ती है जिसमे आप माँ के नेत्र के दर्शन कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">बीच में नयना देवी दो नेत्र के रूप में है जो की सोने के बने है अब बाई और गणेश जी की प्रतिमा है , अब बाहर आकर मन्दिर की परिक्रमा जरूर करे | </p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ नयना देवी मन्दिर परिसर के अन्य धार्मिक स्थल </h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">दोस्तों आप माँ के दर्शन करने के बाद कुछ अन्य स्थलों के भी दर्शन करे &#8211; </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मन्दिर परिसर में बना पीपल का पेड़ यह अत्यधिक पवित्र माना जाता है इसके दर्शन भी जरूर करे कहाँ जाता है की इस वृक्ष की पूजा करने से आपकी मनोकामनाए पूरी होती है , पीपल के वृक्ष के समीप स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के भी दर्शन करे |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="320" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Peepal_Ka_Ped_Naina_Devi_Ka_Mandir.jpg" alt="Peepal Ka Ped Naina Devi Ka Mandir" class="wp-image-2774" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Peepal_Ka_Ped_Naina_Devi_Ka_Mandir.jpg 650w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Peepal_Ka_Ped_Naina_Devi_Ka_Mandir-300x148.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>Peepal Ka Ped Naina Devi Ka Mandir</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यहाँ का प्राचीन हवन कुण्ड जिसके बारे में कहा जाता है की इस हवन कुण्ड की राख को कभी बाहर नहीं निकाला जाता अब यह राख कहा जाती है माँ नयना देवी ही जाने  , गुरु गोविन्द सिंह जी ने इस हवन कुण्ड में हवन किया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हवन कुण्ड के समीप ही एक छोटा सा मन्दिर है जिसमे श्री गणेश और हनुमान जी की प्रतिमाये है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब आप श्री नैना देवी की गुफा के भी दर्शन कर ले यह गुफा 70 फिट की है यह एक प्राचीन गुआ है और बहुत ही संकरी है यहाँ अन्दर माँ नयना देवी की प्रतिमा है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">कोला वाला टोबा वैसे तो यह  कमल के फूल के लिए जाना जाता है इसके अलावा यहाँ एक पवित्र तालाब है जिसमे लोग स्नान करके माँ नयना देवी के दर्शन करते है वैसे बहुत से लोग खप्पर महिषासुर नाम के स्थल  ( जो की मुख्य मन्दिर के समीप ही है ) पर भी स्नान करते है   |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">ये सब तो मैंने आपको मन्दिर परिसर या समीप के कुछ धार्मिक स्थल बताये अब आपको बता दे की मुख्य मंदिर अत्यधिक ऊंचाई पर है तो वहां से बेहतरीन प्राकृतिक द्रश्य भी आप देख सकते है और गोविंदसागर झील भी ऊपर से काफी सुन्दर दिखाई देता है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="300" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Shri_Naina_Devi_Temple_Himachal_Pradesh.jpg" alt="नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश" class="wp-image-2776" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Shri_Naina_Devi_Temple_Himachal_Pradesh.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/04/Shri_Naina_Devi_Temple_Himachal_Pradesh-300x150.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>
</div>


<p>माता नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660386415582"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश में कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660386481597"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नैना देवी मन्दिर में कितनी सीढियां है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नैना देवी मन्दिर में कार पार्किंग के पास से जाने पर आपको लगभग 200 सीढियां चढ़नी होंगी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660386599817"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नैना देवी मन्दिर कौन से जिले में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660387041812"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; चंडीगढ़ से नैना देवी मन्दिर की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">चंडीगढ़ से नैना देवी मन्दिर की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660387111043"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नैना देवी मन्दिर बिलासपुर कैसे पहुंचे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">सबसे पहले आप चंडीगढ़ आ जाओ फिर यहाँ से टैक्सी लेकर श्री नैना देवी मंदिर बिलासपुर आ जाओ या तप आप देख लो कि आनंदपुरसाहिब के लिये कोई ट्रेन हो तो आप सीधे आनंदपुर साहिब आ जाओ यहाँ से नैना देवी मंदिर महज 20 किलोमीटर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660387676013"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; श्री नयना देवी मन्दिर बिलासपुर में कहाँ रुके ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री नयना देवी मन्दिर बिलासपुर में रुकने की फिकर मत करिए आपको मन्दिर के समीप ही बजट में सराय मिल जाएगी यदि आप निशुल्क रुकना चाहते है तो पटियाला धर्मशाला में रुक सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660387871955"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; श्री नयना देवी मन्दिर बिलासपुर कब जाये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री नयना देवी मन्दिर बिलासपुर जाने का बेस्ट टाइम अप्रैल से अक्टूबर का है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660389836288"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; आनंदपुर साहिब और Naina Devi Ka Mandir के बीच की दूरी कितनी हिया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आनंदपुर साहिब और Naina Devi Ka Mandir के बीच की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p>श्री नयना देवी मन्दिर एक अद्भुत मन्दिर है यहाँ का वातावरण सच में अलौकिक है यहाँ से <a href="https://www.researchgate.net/figure/Map-of-Shivalik-region-in-Himachal-Pradesh-and-Haryana_fig2_281741717" target="_blank" rel="noreferrer noopener">शिवालिक</a> श्रंखला की पहाड़ियां देखो तो यही लगता है हम <a href="https://safarjankari.com/best-16-hill-station-india/">हिल स्टेशन</a> पर है</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हमने <strong>नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश </strong>के बारे में लगभग सारी जानकारी जैसे यहाँ कैसे पहुचे , <strong>Dharamshala in Naina Devi</strong> आदि आप को दे दी है इसके अलावा यदि आपके पास कोई जानकारी हो तो कमेंट जरूर करे |</p>
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		<title>विंध्यवासिनी मन्दिर की मेरी यात्रा का वृतान्त पढिये</title>
		<link>https://safarjankari.com/vindhyavasini-mandir-ka-yatra-vratant/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Nov 2019 11:02:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>dhyachal Dham जाने का विचार अचानक ही बना था चलिये शुरू करते है विन्ध्याचल धाम का यात्रा वृतांत , मै अपने गृह जनपद हरदोई में अपने मित्र लैपटॉप के साथ बैठा हुआ था वही कोई शाम के 7 बज रहे थे मई का महिना था मेरे एक जानने वाले है पेशे से वो टीचर है और लखनऊ के रहने वाले है तो उनका फ़ोन आया की कल बनारस चलोगे मै तो घूमने के लिये हमेशा तैयार ही रहता हु तो मैंने हां बोल दी तो उन्होंने बताया की कल शाम 6 बजे वरुणा एक्सप्रेस से चलना है मैंने कहा ठीक मै पहुच जाऊंगा अगले दिन मैंने बैग पैक किया और त्रिवेणी एक्सप्रेस से लखनऊ पहुच गया मई शाम को ४:20 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन लखनऊ में था &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>विंध्यवासिनी मन्दिर </strong>जाने का विचार अचानक ही बना था चलिये शुरू करते है <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0/">विन्ध्याचल धाम </a>का यात्रा वृतांत , मै अपने गृह जनपद हरदोई में अपने मित्र लैपटॉप के साथ बैठा हुआ था वही कोई शाम के 7 बज रहे थे मई का महिना था मेरे एक जानने वाले है पेशे से वो टीचर है और लखनऊ के रहने वाले है तो उनका फ़ोन आया की कल बनारस चलोगे |</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong></h2>



<p class="has-text-align-justify"> मै तो घूमने के लिये हमेशा तैयार ही रहता हु तो मैंने हां बोल दी तो उन्होंने बताया की कल शाम 6 बजे <a aria-label="वरुणा एक्सप्रेस (opens in a new tab)" href="https://www.cleartrip.com/trains/14228/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">वरुणा एक्सप्रेस</a> से चलना है मैंने कहा ठीक मै पहुच जाऊंगा अगले दिन मैंने बैग पैक किया और त्रिवेणी एक्सप्रेस से लखनऊ पहुच गया मै शाम को 4:20 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन लखनऊ में था |</p>



<p class="has-text-align-justify">मै सोच रहा था यार हां तो कर दी पर कोई रिजर्वेशन तो है नहीं जनरल डिब्बे में इत्ती दूर का सफ़र कैसे करेंगे फिर विकास सर जो मेरे साथ जाने वाले थे उनको फ़ोन किया और उन्हें यह समस्या बताई वो बोले हर हम वरुणा एक्सप्रेस से चलेंगे इसमें बहुत सारे जनरल वाले डिब्बे होते है और चार टिकट ले लो एक बच्चे का ले लेना मैंने कहा अरे चार कौन तो बोले की उनकी धर्मपत्नी और धर्मपत्नी जी की एक दोस्त और उनके दो बच्चे भी है|</p>



<p class="has-text-align-justify"> मैंने कहा ओके मैंने टिकट ले लिया और इन लोगो का इंतज़ार करता रहा खैर ट्रेन और विकास सर लोग एक साथ ही आये मैंने देखा सच में ट्रेन में जगह थी हम लोगो को आराम से सीट मिल गई बातचीत होने लगी अच्छा विकास सर को तो मै जानता था परन्तु उनकी धर्मपत्नी और उनकी दोस्त और बच्चो से पहली बार मिला था लेकिन सब लोगो में बड़ा अपनापन था |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;  <a href="https://safarjankari.com/meri-pehli-hawai-yatra/">मेरी पहली हवाई यात्रा</a> </p>



<p class="has-text-align-justify">ट्रेन चल दी थी हम लोग कभी सो जाते कभी बाते करते खैर रात के 1 बजे हम सब महादेव की नगरी बनारस में थे और एकदम से प्लान चेंज हो गया और <strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong> जाने की बात होने लगी विकास सर मुझसे बोले की चलो यार <strong>माँ विंध्यवासिनी </strong>के दर्शन करके आते है फिर लौटकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर लेंगे मैंने कहा ठीक , मोबाइल में विन्ध्याचल की ट्रेन देखी तो रात 3 बजे एक ट्रेन आने वाली थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">हम लोग स्टेशन पर ही बैठ गए और खाना पीना किया लेकिन ये ट्रेन सुबह 6 बजे आई और इसने विन्ध्याचल पहुचाने में रुला दिया सुबह 10 बजे हम लोग विन्ध्याचल रेलवे स्टेशन पर थे बाहर आये एक ऑटो वाला मिल गया उससे कहा माँ विंध्यवासिनी चलोगे तो बोला बिलकुल चलेंगे हम सब बैठ गये और पहुच गये माता के दरबार तब तक महिला मंडल ने बताया पहले गंगा स्नान कर लो फिर देवी माँ के दर्शन करना |</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="742" height="683" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/गंगा_स्नान.jpeg" alt="विंध्यवासिनी मन्दिर" class="wp-image-2169" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/गंगा_स्नान.jpeg 742w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/गंगा_स्नान-300x276.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 742px) 100vw, 742px" /><figcaption>गंगा स्नान </figcaption></figure>



<p class="has-text-align-justify">फिर हम लोग <strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong> में कल कल बहती माँ गंगा के समीप पहुचे यहाँ का घाट बहुत ज्यादा सुविधाओ वाला तो नहीं परन्तु ठीक था सब लोगो ने स्नान किया बच्चो ने तो काफी अच्छे से डुबकी लगाई अच्छा बच्चे साथ हो तो समय का पता नहीं चलता मेरा यह पहला गंगा स्नान था और सच में गंगा जी में स्नान के बाद ऐसा लगा जैसे सारी थकान चली गई हो शरीर हल्का सा हो गया |</p>



<p class="has-text-align-justify"> अब नहा धो के हम लोग चल दिये मंदिर की तरफ एक प्रसाद वाली दूकान पर प्रसाद लिये वही चप्पल जूता उतारे और आगे चल दिये तक तक दुकान से ही एक पुजारी सा दिखने वाला व्यक्ति बोला चलो हम आपको पंहुचा देते है वो आगे आगे चल रहा था हम पीछे पीछे रास्ते में प्रसाद की दुकाने और भी बहुत सी दिकाने थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब हम <em><strong><strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong></strong>  </em>पहुच चुके थे यहाँ काफी भीड़ थी लेकिन जगह जगह पंखे लगे हुये थे तो कोई परेशानी नहीं बाकी जो पुजारी से व्यक्ति साथ में उन्होंने कोई जुगाड़ लगाकर हम सबको लाइन में काफी आगे पंहुचा दिया अब वो अलौकिक क्षण आ चूका था |</p>



<p class="has-text-align-justify"> मै माँ विंध्यवासिनी के सामने था माँ को नमन किया और मंदिर देखा जो की अत्यंत सुन्दर था अब बाहर आ गए अच्छा अब वो पुजारी जी दक्षिणा माग रहे वो इस बात की जल्दी दर्शन करवा दिये एक बात बता दे आपको यहाँ पंडो से सावधान रहे कोन पुजारी है कौन नहीं पता ही नहीं चलता |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब एक मजेदार किस्सा हो गया हम लोग वो दूकान भूल गए जहाँ हमने अपना सामान जूता चप्पल बैग रखा था बड़ी देर बाद वो दूकान मिली वो भी बच्चो की बदौलत लेकिन इस गलती से बहुत दिक्कत हुई हम सब नंगे पैर थे और मई का महिना था सबके पैर जल गये खैर |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify"> हम लोग और जोरो की भूख लगी थी तो एक रेस्टोरेंट में बैठ के सबने भोजन किया भोजन के उपरान्त समय देखा तो तो दो बजने वाला था अब सोचा गया बनारस चले की यही के और मंदिर देखे जाए क्यूंकि समय हमारे पास एक ही दिन का था तो यही तय की भोले बाबा के दर्शन को अब दुबारा आयेंगे आज यही के बाकी के मंदिर देख लिये जाए एक ऑटो वाले से बात की उसने काली खोह मंदिर और पहाड़ी पर स्थित अष्ट भुजी मंदिर दिखने को कहा |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/सिद्धि_दात्री_माँ_दुर्गा.jpeg" alt="विंध्यवासिनी मन्दिर फोटो" class="wp-image-2172" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/सिद्धि_दात्री_माँ_दुर्गा.jpeg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/सिद्धि_दात्री_माँ_दुर्गा-300x225.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>सिद्धि दात्री माँ दुर्गा मंदिर विन्ध्याचल </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब हम सब यहाँ के दूसरे पवित्र मंदिर <em>काली खोह</em>  पहुच चुके थे इस मंदिर प्रांगण में भी कई मंदिर थे हमने सबके दर्शन किये अच्छा यहाँ एक व्यक्ति हनुमान जी बना बैठा था गदा लिये गाल को रेंज हुये और एक नकली पूँछ लगाये था और किसी भंडारे के लिये चंदा ले रहा था काली खोह मंदिर मुख्य रूप से माँ काली को समर्पित है और एक शांत जगह पर बना हुआ है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> अच्छा विन्ध्याचल के बारे में एक बात और बता दे यहाँ आप को गंगा घाट मिल जायेंगे और मंदिर इसके अलावा आपको यहाँ हरे भरे पठार भी दिखाई देते है आप बिलकुल यह कह सकते है कि विन्ध्याचल एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब हमारा ऑटो चल दिया था माँ अष्ट भुजी मन्दिर की और यह मन्दिर पहाड़ी पर बना है तो हमको थोड़ी चढ़ाई करनी पड़ी लगभग 70 सीढ़िया हमको चढ़नी पड़ी और इस रास्ते में थकने की बजाय सबने मजा किया क्यूंकि दोनों तरफ दुकाने थी हर कोई अपने मतलब का सामान देखता चल रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify">बच्चो से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी तो बच्चे मेरे साथ ही चल रहे थे और बच्चो के साथ हम भी बच्चे बनकर चलते गये पता ही नहीं चला कब मुख्य मंदिर हमारे सामने आ गया |</p>



<p class="has-text-align-justify">माँ अष्ट भुजी एक गुफा एक अन्दर विराजमान है तो आपको झुके झुके के माता के दर्शन करने थे लेकिन यहाँ की मुख्य पुजारी लोग बहुत ही खीचतान करते है  मेरा सर पकड़ लिया बोले 1001 रूपये माता को दो हमने कहा पंडित जी माफ़ करिये सब कुछ तो माता का ही है उनको मै क्या दे सकता हु और आप के मागने का तरीका गलत है तो वो और गुस्सा हो गये हम तो भैया डर गये साथ में बच्चे भी थे हमने 100 रूपये दिए और माँ के दर्शन कर आगे निकल आये फिर सोचा की कितना गलत तरीका है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> इस तरह ज़बरदस्ती करना फिर दिमाग में ख्याल आया अरे सब ठीक है ,  ऊपर से विन्ध्याचल शहर अत्यंत आकर्षित प्रतीत हो रहा था यहाँ  भैरव बाबा का भी मंदिर है चलिये अब हम सब माता का आशीर्वाद पाकर खुश थे और नीचे उतर रहे थे अच्छा सामान हम लोग अपना उसी ऑटो में छोड़ के गए थे तो कही न कही एक शंका बनी रहती थी कि कही ऑटो वाला सामान लेकर फुर्र ना हो जाए |</p>



<p class="has-text-align-justify">रास्ते में अब सबने खरीददारी करी और नीचे आकर हम लोगो ने वो ऑटो देखा खड़ा था ऑटो था ऑटो वाला था ऑटो में सामान था अब सकूं मिला और सोचा यार ऐसा भी नहीं अभी भी बहुत ईमानदार लोग है अपने देश में अब हम लोगो ने चाय नाश्ता किया ऑटो वाले भैया को भी नाश्ता कराया गया और फिर विचार बना की कोई ट्रेन तो है नहीं अभी तो बनारस बस से चला जाय |</p>



<p class="has-text-align-justify"> बनारस से लखनऊ के लिए कोई ट्रेन देखेंगे तो ऑटो वाला हम लोगो को लेकर चल दिया और बस स्टैंड पहुंचा दिया एक बस लगी थी हम सब उसमे बैठ लिये बस भी चल दी अब विन्ध्याचल पीछे छूट रहा था थोडा खराब भी लग रहा था और माँ के इतने अच्छे दर्शन पाकर हम सब प्रसन्न भी थे , <strong><strong>विंध्यवासिनी</strong></strong> की धीमी धीमी खुशबू अब पीछे छूट रही थी और काशी हमारा स्वागत कर रही थी |</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/Maa-Vindhyavasini-Devi-Vindhyachal.jpeg" alt="Maa Vindhyavasini Devi mandir" class="wp-image-1401" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/Maa-Vindhyavasini-Devi-Vindhyachal.jpeg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/Maa-Vindhyavasini-Devi-Vindhyachal-300x167.jpeg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/Maa-Vindhyavasini-Devi-Vindhyachal-768x427.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>Maa Vindhyavasini Devi</figcaption></figure>



<p class="has-text-align-justify">लेकिन विडंबना देखिये काशी आकर भी बाबा विश्वनाथ के दर्शन हम ना कर पाए विकास सर का स्कूल था तो उन सबको तो वापसी करनी ही थी मैंने भी सोचा चलो जिनके साथ आये है  वापसी भी साथ ही करेंगे भोले बाबा से क्षमा मागकर हम ट्रेन की जानकारी में लग गये खैर एक कम भीड़ भाड़ वाली ट्रेन बनारस &#8211; बरेली एक्सप्रेस हमें मिल गई |</p>



<p class="has-text-align-justify"> हम सब उसमे बैठकर लखनऊ आ गये, इस यात्रा वृतांत का सबसे बढ़िया क्षण लगा जब भाभी जी की दोस्त की बड़ी वाली बिटिया ने हमारी बिटिया के लिए कंगन ख़रीदे मेरी बिटिया 2.5 साल की थी उस समय, बात खरीदने की नहीं उस बच्ची ने इतना सोचा यह काबिलेतारीफ था |</p>



<p class="has-text-align-justify">दोस्तों यात्राये हमें बहुत कुछ सिखाती है मै जब चला तो विकास सर के अलावा सब मेरे लिए अनजान थे लेकिन जब यात्रा ख़तम हुई तो सबसे बहुत ही अच्छी जान पहचान हो चुकी थी सफ़र में लगा ही नहीं की मै किसी दुसरे परिवार के साथ हु इतना अपनापन था एक दिन के टूर में , मै तहेदिल से विकास सर का और भाभी जी और भाभी जी की  दोस्त और उनके बच्चे सबका धन्यवाद इस पोस्ट के माध्यम से देना चाहूँगा |</p>



<p class="has-text-align-justify"> और हां यह भी निवेदन करना चाहूँगा की यही <strong>विंध्यवासिनी मन्दिर</strong> वाली  घुमक्कड़ टीम अब कोई दूसरा टूर बनाये एक बात और बच्चे बड़े प्यारे थे और बहुत ही समझदार जब हम लोगो के पैर जल रहे थे तो मैंने बच्चो से कहा आप लोग बैठ जाओ लेकिन वो बैठे नहीं और पूरी हमारी मदद करते रहे इतने हिम्मती बच्चे थे |</p>



<p>दोस्तों यात्रा वृतांत लिखना सीख रहा हु यदि कोई त्रुटी हुई तो तो कमेंट के माध्यम से अवश्य बताये धन्यवाद |</p>
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		<title>हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी कैसे पहुंचे कहाँ रुके कहाँ घूमे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Oct 2019 19:05:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हरिद्वार दर्शन करना सच में एक दिव्य अनुभव है इस शहर के लिए कई बाते है जैसे हरिद्वार सप्तपुरियो में से एक है , हरिद्वार चार धाम यात्रा का प्रवेश मार्ग है , हरिद्वार में शक्तिपीठ भी है , हरिद्वार का प्राचीन नाम मायापुरी था , हरिद्वार में कुम्भ के मेले का आयोजन होता है , यह पवित्र शहर भगवान विष्णु और भगवान शिव की नगरी है जब यहाँ पहुचे तो हमने जो समझा उस हिसाब से हरिद्वार आधुनिक मन्दिर प्राचीन मन्दिर एक से बढ़कर एक गंगा घाट और भव्य आश्रमों का मिश्रण है &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>हरिद्वार दर्शन</strong> करना सच में एक दिव्य अनुभव है इस शहर के लिए कई बाते है जैसे हरिद्वार सप्तपुरियो में से एक है , <a href="https://www.lonelyplanet.com/india/uttarakhand-uttaranchal/haridwar" target="_blank" rel="noopener noreferrer">हरिद्वार</a> चार धाम यात्रा का प्रवेश मार्ग है , हरिद्वार में शक्तिपीठ भी है , हरिद्वार का प्राचीन नाम मायापुरी था , हरिद्वार में कुम्भ के मेले का आयोजन होता है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">हरिद्वार दर्शन &#8211; हरिद्वार में घूमने की जगह &#8211; हरिद्वार पर्यटन स्थल</h2>



<p> यह पवित्र शहर भगवान विष्णु और भगवान शिव की नगरी है जब यहाँ पहुचे तो हमने जो समझा उस हिसाब से हरिद्वार आधुनिक मन्दिर प्राचीन मन्दिर एक से बढ़कर एक गंगा घाट और भव्य आश्रमों का मिश्रण है |</p>



<p>देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध यह शहर अपने आप में एक धर्म ग्रन्थ है , माँ गंगा जी यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है और हो भी क्यों न हरी की पौडी जैसे पवित्र घाट इसी धरा पर है वही दूसरी तरफ माँ मनसा देवी माँ चंडी देवी जैसी देविया भी इसी धरा पर है जो अपने भक्तो की मन्नते पूरा करती है |</p>



<p> वही शांतिकुंज जैसे आश्रम भी हरिद्वार में अपना ज्ञान बिखेर रहे है और कनखल में दक्ष महादेव मन्दिर जैसे पवित्र मन्दिर <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> में मुख्य भूमिका निभाते है , <strong>हरिद्वार पर्यटन स्थल</strong> में बहुत सी धार्मिक जगहे है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">हरिद्वार कैसे पहुचे  &#8211; How To Reach Haridwar in Hindi</h5>



<p>हरिद्वार उत्तराखण्ड राज्य का एक जनपद है जिसकी भारत की राजधानी नई दिल्ली से दूरी लगभग 214 किलोमीटर है , इस शहर में पहुचना अत्यन्त आसान है भारत के हर एक प्रमुख शहर से तीर्थ नगरी हरिद्वार के लिए साधन उपलब्ध है |</p>



<p><br>~ यदि आप हरिद्वार वायुमार्ग से जाना चाहते है तो हम आपको बता दे यहाँ का सबसे नजदीकी एअरपोर्ट जॉली ग्रान्ट एअरपोर्ट है जो की देहरादून में स्थित है एअरपोर्ट की हरिद्वार से दूरी लगभग 40 किलोमीटर है और एअरपोर्ट से आपको तमाम साधन जैसे टैक्सी या बस आपको मिल जायेंगे , जॉली ग्रांट एअरपोर्ट का IATA कोड DED है |</p>



<p><br>~ यदि आप हरिद्वार रेलमार्ग से आना चाहते है तो हरिद्वार शहर में रेलवे स्टेशन है जहाँ देश भर के लगभग सभी प्रमुख जिलो से ट्रेन चलती है आप बड़े आराम से ट्रेन से यहाँ पहुच सकते है |</p>



<p><br>~ यदि आप <strong><em>हरिद्वार दर्शन</em></strong>  सड़क&nbsp; मार्ग से करना चाहते है तो आपको बता दे की यह शहर बहुत ही अच्छी तरह से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है कई शहरी जैसे लखनऊ , दिल्ली , मथुरा , शिमला , देहरादून से यहाँ के लिए नियमित बसे उपलब्ध है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">हरिद्वार दर्शन करने का उचित समय &#8211; Best Time to Haridwar Visit in Hindi</h5>



<p>वैसे तो <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> आप साल भर में किसी भी समय कर सकते है लेकिन फिर भी यहाँ बारिश और गर्मी की छुट्टियों मतलब मई जून में जाने से बचे कुल मिलाके आप यहाँ मई जून जुलाई अगस्त इन महीनो में जाने से बचे |</p>



<p>अच्छा गर्मी की छुट्टी में हम आपको इसलिये मना कर रहे है क्यूंकि उस समय यहाँ पर अत्यधिक भीड़ होती है तो जब भीड़ है तब असुविधा जरूर होगी तो आप कोशिश करे सितम्बर अक्टूबर नवम्बर फरवरी मार्च अप्रेल में जाये हमने दिसम्बर और जनवरी इसलिये छोड़े है क्यूंकि इन महीनो में यहाँ सर्दी बहुत पड़ती है&nbsp;</p>



<h5 class="wp-block-heading">हरिद्वार दर्शन में ठहरे कहा &#8211; Where To Stay In Haridwar in Hindi &#8211;  Haridwar me Kaha Ruke</h5>



<p><strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को लेकर लोग बहुत ही ज्यादा परेशान रहते है ठहरने के लिए&nbsp; होटल कहाँ&nbsp; ले कैसा ले आदि तो सबसे पहले तो हम कहेंगे आप धर्मशाला खोजिये वैसे रेलवे स्टेशन के समीप अनगिनत धर्मशालायें है जहाँ आपको 500 रुपये में&nbsp; एक बढ़िया कमरा मिल जायेगा |</p>



<p> शांतिकुंज ठहरने के लिए एक अच्छा विकल्प है&nbsp; रेलवे स्टेशन के समीप गुजराती समाज धर्मशाला , मुल्तान भवन , के के रेणुका धर्मशाला है बाकी भूपतवाला में भी कई धर्मशालाए है निष्काम सेवा ट्रस्ट, तायल धर्मशाला , अग्रवाल भवन आदि| </p>



<h4 class="wp-block-heading">हरिद्वार दर्शन के प्रमुख पर्यटन स्थल &#8211; Best Places to Visit in Haridwar in Hindi</h4>



<p>हमने ऊपर यह जानकारी कर ली की यहाँ कैसे और कब आये और कहाँ रुके अब यह जानेंगे की यहाँ आकर कहा-कहा घूमने जाये कहाँ कहाँ <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> करने जाये हम यहाँ आपको क्रम से सभी <strong>हरिद्वार पर्यटन स्थल</strong> बताने की कोशिश करेंगे &#8211;&nbsp;</p>



<h5 class="wp-block-heading">हरी की पौड़ी &#8211; Hari Ki Paudi Haridwar in Hindi</h5>



<p><strong>हरी की पौड़ी हरिद्वार</strong> का सबसे मुख्य गंगा घाट है हमारी माने तो आप जब भी देवभूमि हरिद्वार दर्शन को आये तो सबसे पहले हरी की पौडी घाट पर जाकर गंगा स्नान कर अपने को शुद्ध करे , इस स्थल को ब्रम्हकुण्ड भी कहते है मान्यता है की यहाँ भगवान विष्णु स्वयं स्नान करने आते थे हालाँकि हरी की पौडी के पास एक विष्णु घाट भी है |</p>



<p><strong>हरी की पौड़ी हरिद्वार</strong> पर शाम को होने वाली <em>गंगा आरती</em>&nbsp; में अवश्य शामिल हो क्यूंकि गंगा आरती हरिद्वार के हरी की पौडी घाट क एकअलग अनुभव है जिसे देख आप भक्ति भाव में खो जायेंगे शाम को श्रद्धालु गंगा नदी में दिए जलाकर छोड़ते है ये दिए गंगा जी में बहते हुए बड़े मनोरम दिखलाई देते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/हरी-की-पौड़ी-हरिद्वार-दर्शन.jpg" alt="हरिद्वार दर्शन हरी की पौड़ी गंगा घाट"/><figcaption>हरी की पौड़ी</figcaption></figure>
</div>


<p>अच्छा <strong>हरी की पौड़ी हरिद्वार</strong> आकर आप गंगा मन्दिर भी अवश्य जाए यह मन्दिर घाट के समीप ही बना हुआ है आप हरी की पौड़ी घाट पर घंटो बैठकर माँ गंगा के स्वच्छ जल को निहार सकते है हमारे अनुसार आप सुबह यहाँ सुबह गंगा स्नान करे और दुबारा शाम को आकर गंगा आरती के दर्शन करे |</p>



<p><strong>हरी की पौड़ी हरिद्वार</strong>  के नजदीक ही आप <strong>भीमगोड़ा</strong> नामक स्थल पर भी जा सकते है कहा जाता है की जब पाण्डव भीम की पत्नी द्रौपदी को प्यास लगी थी और आसपास किसी प्रकार का कोई पीने लायक पानी नहीं था तब भीम जी ने अपने घुटनों को टेका जिसे उस जगह एक गड्ढा हो गया और उसमे से पानी निकलने लगा तो आप यहाँ भी जा सकते है |</p>



<p><strong>विष्णु घाट</strong> भी <strong>हरिद्वार पर्यटन</strong> स्थल का एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है मान्यता है कि इस घाट पर स्वयं भगवान विष्णु जी ने स्नान किया था यह भी हरी की पौडी घाट से थोड़ी ही दूरी पर है इस घाट से आप पैदल पैदल गंगा के किनारे ठहलते हुए <em>हरी की पौड़ी</em> पहुच सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ मनसा देवी मन्दिर &#8211; Maa Mansa Devi Mandir Haridwar</h5>



<p><strong>हरिद्वार दर्शन</strong> का सबसे ज्यादा मुख्य धार्मिक स्थल और माँ मनसा देवी की अनुकम्पा का जीता जागता उदहारण है यह मन्दिर जो की बिलवा पर्वत पर है , यहाँ जाने के लिए हमारे पास दो साधन है एक तो पैदल मार्ग और दूसरा उड़न खटोला आपकी जैसी श्रद्धा वैसे जाये |</p>



<p>अच्छा पैदल मार्ग भी दो तरह का है एक में सीढियां बहुत ही ज्यादा है लेकिन दूरी कम और दुसरे रास्ते में सीढियां कम है परन्तु दूरी ज्यादा है , इन रास्तो में आपको प्रसाद की दुकाने खाने पीने की दुकाने और बैठने के लिए भी व्यवस्था है यहाँ आपको बन्दरों से थोडा सा सतर्क रहना चाहिए |</p>



<p>मनसा देवी पार्वती का ही रूप है जिसका शाब्दिक अर्थ इच्छा होता है अपने नाम के अनुरूप माँ मनसा अपने भक्तो की मनसा मतलब इच्छा को पूरा करती है , माँ मनसा देवी को कश्यप ऋषि की पुत्री और नाग वासुकी की बहन बताया गया है |</p>



<p>अच्छा माँ मनसा देवी मन्दिर प्रांगण में माँ वैष्णवी देवी मन्दिर , चामुंडा देवी मन्दिर , श्री पशुपतिनाथ आदि मन्दिर है , यहाँ आप लहंगा पहन के फोटो भी खिचवा सकते हो लहंगा आपको फोटो स्टूडियो वाले ही उपलब्ध कराते है और यह लहंगा कुछ अलग सा होता है |<br><br>माँ मनसा देवी मन्दिर में श्रद्धालु अपनी इच्छा का एक धागा यहा स्थित एक पवित्र पेड़ में बांध देते है और इच्छा पूरी होने पर इसे खोलने भी आते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/मनसा-देवी-हरिद्वार.jpg" alt="माँ मनसा देवी मन्दिर से हरिद्वार दर्शन"/><figcaption>माँ मनसा देवी मन्दिर से हरिद्वार दर्शन</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">चंडी देवी मन्दिर &#8211; हरिद्वार में घूमने की जगह </h5>



<p>यह मन्दिर नील पर्वत पर है और यहाँ तह पहुचने के लिए आपको मनसा देवी की ही भान्ति दो साधन है एक पैदल मार्ग और दूसरा उड़न&nbsp; खटोला जिसे रोपवे भी कहा जाता है चंडी देवी मन्दिर परिसर में अन्नपूर्णा देवी मन्दिर , जय माँ भद्र काली मन्दिर , काल भैरव&nbsp; मन्दिर , संकट मोचन हनुमान मन्दिर एवं अन्य छोटे छोटे&nbsp; मन्दिर भी है |</p>



<p>माँ चंडी देवी से थोड़ी ही चढ़ाई पर माँ अंजना देवी मन्दिर है यहाँ भी आप अपना मत्था टेक ले इस मन्दिर परिसर में नागेश्वर शिव मन्दिर , संतोषी माता मन्दिर , हनुमान जी मन्दिर है अच्छा यहाँ से आपको नील पर्वत का एक बेहतरीन सुन्दर नज़ारा दिखाई पड़ता है जो की हरिद्वार दर्शन करने आये पर्यटकों को बड़ा लुभाता है , माँ अंजना हनुमान जी की माता थी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/माँ-चंडी-देवी-हरिद्वार-मन्दिर.jpg" alt="माँ चंडी देवी हरिद्वार में घूमने की जगह"/><figcaption>माँ चंडी देवी</figcaption></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">माँ मनसा देवी माँ चंडी देवी के लिए उड़न खटोला रोपवे का शुल्क</h6>



<p>आप हरिद्वार दर्शन में माँ मनसा देवी और माँ चंडी देवी तो जरूर जायेंगे अच्छा इन दोनों पवित्र मंदिरों में रोपवे की व्यवस्था भी है बस आपके साथ यदि छोटे बच्चे है तो उड़न खटोले पर बच्चो को पकड़ कर बैठे |</p>



<p> उड़न खटोले से हरिद्वार शहर और माँ गंगा देखना एक रोमांचकारी अनुभव है , चलिए अब शुल्क देख लिया जाय माँ मनसा देवी और चंडी देवी का एक संयुक्त टिकट 314 रुपये का है जिसमे आप दोनों देवियों के दर्शन रोपवे से कर पाओगे |</p>



<p>यदि आप सिर्फ चंडी देवी की रोपवे का टिकट चाहते है तो यह 193 रुपये का है वैसे माँ मनसा देवी की अपेक्षा माँ चंडी देवी की चढ़ाई ज्यादा है तो हो सके तो आपप चंडी देवी में रोपवे का टिकट अवश्य ले |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माया देवी मन्दिर &#8211; हरिद्वार पर्यटन स्थल</h5>



<p><strong>माया देवी मन्दिर हरिद्वार</strong> का अत्यंत प्राचीन मन्दिर है और यह एक शक्तिपीठ भी है आप <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को कभी&nbsp; भी आये देवी माया के दर्शन अवश्य करे यह स्थल हरिद्वार रेलवे स्टेशन से 2-3 किलोमीटर ही होगा |</p>



<p> यहाँ की कहावत है की माँ सती के इस मन्दिर में भक्तो की सारी मन्नते पूरी&nbsp; होती है , मन्दिर प्रांगण में बहुत से शिवलिंग बने हुये है और एक कान्हा जी का सुन्दर झुला है इसके अलावा एक अत्यंत बड़ा सा त्रिशूल भी है , अच्छा एक स्थानीय व्यक्ति के अनुसार चंडी देवी , मनसा देवी और माया देवी को मिलाकर एक त्रिभुज का निर्माण होता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/माया-देवी-मन्दिर-शक्तिपीठ-हरिद्वार.jpg" alt="हरिद्वार दर्शन माया देवी मन्दिर"/><figcaption>माया देवी मन्दिर हरिद्वार का शक्तिपीठ</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">सप्तऋषि आश्रम &#8211; हरिद्वार में घूमने की जगह </h5>



<p>यह पवित्र स्थल भारत के सात ऋषियों के लिए जाना जाता है यह एक शान्त और धार्मिक स्थल है , कहा जाता है कि प्राचीन काल में सात ऋषिवर ( भारद्वाज , विश्वामित्र , अत्री , वशिष्ठ , कश्यप , गौतम , जमदग्नि ) इसी जगह पर पूजा पाठ करते थे |</p>



<p> सप्त ऋषि आश्रम के बारे में एक और पौराणिक कथा है कि यहाँ पर सातों ऋषियों को पूजा करने में कोई दिक्कत न हो इसीलिए माँ गंगा ने अपने आप को सात धाराओ में विभाजित कर लिया था |</p>



<p>आश्रम परिसर में कई मन्दिर है जिनके आप दर्शन कर सकते है लेदेके देखा जाय तो यहा आप अवश्य जाये , <strong>हरिद्वार पर्यटन स्थल</strong> का यह स्थल भी पर्यटकों को अपनी और खींच लेता है |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;&nbsp;<br><a href="https://safarjankari.com/allahabad-me-ghumne-ki-jagah/">Triveni Sangam Allahabad ke Parytan Sthal – प्रयागराज पर्यटन</a></p>



<p><a href="https://safarjankari.com/ram-janmbhumi-ayodhya-me-ghumne-ki-jagahe/">अयोध्या दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी Ayodhya Darshan</a>&nbsp;</p>



<h5 class="wp-block-heading">भारत माता मन्दिर &#8211; हरिद्वार पर्यटन स्थल </h5>



<p>मैंने अपने जीवन काल में अभी तक जितने मन्दिर देखे न सबमे <em>भारत माता मन्दिर </em> एक अनूठा मन्दिर है कभी भी आप <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को जाये तो इस मन्दिर के दर्शन अवश्य करे , <em>भारत माता मन्दिर</em>  हमें अपने देश भारत से बहुत ही अच्छी तरफ से रूबरू कराता है |</p>



<p> यह 6 खंडो में बना हुआ है जिसमे आप अलग &#8211; अलग खण्ड पर अलग अलग महापुरुषों , भगवान के दर्शन कर पाओगे कुल मिलाके भारत माता मन्दिर धर्म , देश , संस्कृति आदि का मिश्रण है |</p>



<p>यहाँ आपको लिफ्ट का टिकट लेना है जो की मात्र 2 रुपये का और आप लिफ्ट से सबसे उपरी खण्ड पर पहुँच जाओगे फिर आप एक एक खण्ड को अच्छी तरह देखते हुए नीचे आते जाओगे यहाँ सफाई भी उत्तम है |</p>



<p><strong>हरिद्वार पर्यटन स्थल </strong> &#8211;<a href="https://safarjankari.com/bharat-mata-mandir-haridwar-ek-anokha-mandir/">Bharat Mata Mandir Haridwar A Complete Guide</a></p>



<h5 class="wp-block-heading">माता वैष्णो देवी गुफ़ा मन्दिर ( माता लाल देवी मन्दिर ) &#8211; हरिद्वार का दर्शनीय स्थल </h5>



<p>भारत माता मन्दिर से कुछ ही दूरी पर स्थित यह मन्दिर जम्मू के कटरा में स्थित माँ वैष्णो देवी की तर्ज पर बनाया गया है परन्तु यहाँ की गुफाये आर्टिफीसियल है फिर भी इस मन्दिर के दर्शन आप अवश्य करे यहाँ आपको 12 ज्योतिर्लिंग और हाथी मत्था की चढ़ाई देखने को मिलेगी |</p>



<p>इसके अलावा यहाँ आप माता को चढाने के लिए हलवा प्रसाद ले सकते है जो की आपको 10 रुपये में एक दोंना मिल जायेगा , इस गुफ़ा मन्दिर में आपको अमरनाथ गुफ़ा के भी दर्शन मिल जायेंगे , <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> की लिस्ट में इस मन्दिर का नाम भी लिख ले |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/वैष्णोदेवी-गुफ़ा-मन्दिर-हरिद्वार.jpg" alt="हरिद्वार में घूमने की जगह माँ वैष्णो देवी गुफा मन्दिर"/><figcaption>माँ वैष्णो देवी गुफ़ा मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">भूमा निकेतन &#8211; हरिद्वार में घूमने की जगह </h5>



<p>माता वैष्णो देवी गुफा मन्दिर से थोड़ी ही दूरी पर उसी रोड पर एक और साफ़ सुथरा भव्य स्थल है जिसे लोग भूमा निकेतन कहते है <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> में यह स्थल भी खास है&nbsp; यहाँ यदि आप मोबाइल ले जाना चाहते है तो आपको गोसेवा के लिए 31 रुपये का दान देना होगा |</p>



<p> इस पवित्र स्थल पर हमें 108 शालिग्राम दिखे जिन्हें हमने जीवन में पहली बार देखा था भूमा निकेतन में भी गुफा है वैसे इस स्थल की झांकिया देखते ही बनती है खासकर भगवान कृष्ण के जीवन काल की झांकियां आपका मन मोह लेंगी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/भूमा-निकेतन-हरिद्वार-दर्शन.jpg" alt="भूमा निकेतन हरिद्वार में घूमने की जगह"/><figcaption>भूमा निकेतन हरिद्वार दर्शन</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">तुलसी मानस मन्दिर ( श्रीराम मन्दिर ) </h5>



<p>भूमा निकेतन से जैसे ही आप थोड़ा आगे जाओगे आपको एक बेहद भव्य मन्दिर दिखाई देगा जो की भगवान श्री राम का है यह मन्दिर देखते ही बनता है गज़ब की नक्खाशी की गई है यहा इस मन्दिर के झूमर सच में भव्यता को प्रदर्शित करते है |</p>



<p> अच्छा राम मन्दिर की सबसे अच्छी बात कि इस मन्दिर की दीवारों पर रामायण की चौपाईयां लिखी हुई है <strong>हरिद्वार में घूमने की जगह</strong>  में राम मन्दिर का एक विशेष महत्त्व है |</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/श्रीराम-मन्दिर-हरिद्वार.jpg" alt="हरिद्वार दर्शन श्री राम मन्दिर"/><figcaption>श्रीराम मन्दिर</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">शिवानन्द धाम</h5>



<p>अब आप श्री राम मन्दिर से थोड़ा और आगे जायेंगे तो आपको <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> का अगला पड़ाव&nbsp; शिवानन्द धाम दिखाई देगा यह प्रसिद्ध धाम झाँकियो के लिए जाना जाता है यह भी गुफाये और अन्य गुफ़ा वाले मंदिरों की अपेक्षा शिवानन्द धाम की गुफ़ा में अंधेरा ज्यादा रहता है&nbsp;|</p>



<p> यहाँ टिकट भी&nbsp; है जो की मात्र 5 रुपये का है , शिवानन्द धाम की गुफाओ में आपको बाण गंगा , बाबा बर्फानी अमरनाथ , माता अर्धकुमारी योनी गुफ़ा में भोलेनाथ आदि पावन स्थल दर्शन करने को मिल जायेंगे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/शिवानन्द-धाम-हरिद्वार-दर्शन.jpg" alt="शिवानन्द धाम हरिद्वार का दर्शनीय स्थल "/><figcaption>शिवानन्द धाम हरिद्वार</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">इण्डिया टेम्पल -हरिद्वार पर्यटन स्थल का एक धार्मिक जगह </h5>



<p>भगवान श्री साकेत बिहारी ट्रस्ट द्वारा संचालित इण्डिया टेम्पल भी झाकियों के लिए जाना जाता है  यहाँ की चलती फिरती झाकियां आपका मन मोह लेंगी अच्छा इस मन्दिर में कोई भी गुफ़ा नहीं है |</p>



<p> इण्डिया टेम्पल में भंडारा , गो सेवा , बिजली एवं सफाई , अन्न क्षेत्र के नाम पर एक ३ रुपये का टिकट भी है यह मन्दिर बिलकुल शिवानन्द धाम के समीप है हरिद्वार दर्शन के लिए आप इण्डिया टेम्पल को भी महत्त्व दे |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/इंडिया-टेम्पल-हरिद्वार-दर्शन.jpg" alt="इंडिया टेम्पल हरिद्वार दर्शन"/><figcaption>इंडिया टेम्पल</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">पावन धाम / कांच का मन्दिर / शीश महल</h5>



<p><strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को आये है और पावन धाम ना जाये यह तो बेईमानी सी होगी सच में एक अद्भुत , अविस्मरणीय स्थल है पावन धान इसे आप कांच मन्दिर और शीश महल नाम से भी जानते हो पूरा मन्दिर कांच का बना एक साफ़ सुथरा स्थल है |</p>



<p>यहाँ बना हुआ&nbsp; योध्या अर्जुन का रथ ( जिसके सारथी श्री कृष्ण भगवान थे ) बहुत ही सुन्दर है यहाँ आप आये देखिये इसकी भव्यता पावन धाम में चारो तरफ कांच ही कांच है तो आपको अपने प्रतिबिम्ब बहुतायत दिखाई देंगे सेल्फी के शौक़ीन लोगो के लिये भी यह स्थल बढ़िया है |</p>



<p><br>पावन धाम से निकलकर थोडा सा आगे जायेंगे तो एक और दिव्य एवं भव्य स्थल है वहां आपको राम सेतु के पत्थर के दर्शन हो जायेंगे जो की पानी में तैरता हुआ दिखाई देगा जबकि इसका वजन 21 किलो 800 ग्राम है |</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/पावन-धाम-कांच-का-मन्दिर-हरिद्वार.jpg" alt="पावन धाम कांच का मन्दिर हरिद्वार पर्यटन स्थल"/><figcaption>पावन धाम कांच का मन्दिर हरिद्वार</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">दक्ष महादेव मन्दिर &#8211; हरिद्वार पर्यटन स्थल का एक धार्मिक स्थल </h5>



<p>हरिद्वार के कनखल में स्थित यह एक प्राचीन मन्दिर है जो की पूर्ण रूप से शिव जी को समर्पित है यहाँ भक्तो का ताँता लगा रहता है मन्दिर परिसर में ही&nbsp; &nbsp;रेस्टोरेन्ट , प्रसाद की दुकाने , खिलोनो की दुकाने , बच्चो के झूले आदि है |</p>



<p>यह मन्दिर दक्ष प्रजापति मन्दिर और दक्षेश्वर महादेव मन्दिर नाम से भी जाना जाता है , कनखल भोलेनाथ की ससुराल है यही पास में एक गंगा घाट भी है जहाँ आप स्नान के लिए जा सकते है <strong>हरिद्वार में घूमने की जगह</strong> में दक्ष महादेव के इस प्राचीन मन्दिर का उल्लेख होना अति आवश्यक था |</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/दक्ष-महादेव-मन्दिर-हरिद्वार-दर्शन.jpg" alt="दक्ष महादेव मन्दिर हरिद्वार दर्शन"/><figcaption>दक्ष महादेव मन्दिर</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">हरिहर आश्रम ( पारद शिवलिंग और रुद्राक्ष का पेड़ )</h5>



<p>हरिहर आश्रम एक पवित्र और शांत जगह है यहाँ आप श्री पारदेश्वर महादेव मतलब पारद शिवलिंग के दर्शन कर सकते हो इसके अलग इस आश्रम परिसर में एक दिव्य रुद्राक्ष का पेड़ भी है जिसके चारो और 12 ज्योतिर्लिंग बने हुए है |</p>



<p> इनके आलावा इस परिसर में श्री महा मृत्युन्जय मन्दिर जो की बड़ा ही शानदार बना हुआ है इस मन्दिर में एक नंदी जी की बड़ी सी प्रतिमा भी है , अच्छा यहाँ के मुख्य आकर्षण प्रद शिवलिंग का वजन लगभग 150 किलो है पारद शिवलिंग और रुद्राक्ष का पेड़ <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> का अहम् हिस्सा है | </p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/पारद-शिवलिंग-हरिहर-आश्रम.jpg" alt="पारद शिवलिंग हरिहर आश्रम हरिद्वार पर्यटन स्थल"/><figcaption>पारद शिवलिंग हरिहर आश्रम</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">पायलट बाबा आश्रम &#8211; हरिद्वार पर्यटन स्थल</h5>



<p>पायलट बाबा का आश्रम हरिहर आश्रम से थोड़ी ही दूरी पर है ब्याक्तिगत रूप से कहू तो मुझे यह अत्यंत भव्य आश्रम लगा एकदम शांत वातावरण में स्थित यह आश्रम शहर के शोर शराबे से दूर है और यहाँ की प्रतिमाये , झाकियां सच में अद्भुत है |</p>



<p>  यदि आपके पास समय हो तो एक दो घंटे के लिए इस आश्रम में भी आये , महायोगी पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार में लगी भारत माता और महादेव की प्रतिमा सच में देखने लायक है वैसे तो पूरा आश्रम ही शानदार प्रतिमाओ से सुसज्जित है |</p>



<p>यहाँ आप जब भी आये कृपया एक कोई भी आई डी प्रूफ साथ में लाये और गर्मियों में यहाँ सुबह 7 से 12 बजे तक और दोपहर&nbsp; 2 बजे से शाम 6 बजे तक ही आये वही सर्दियों में सुबह 8 बजे से 12 बजे तक और फिर दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक ही आये |</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/पायलट-बाबा-आश्रम-हरिद्वार.jpg" alt="पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार दर्शन"/><figcaption>पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार</figcaption></figure>
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<h5 class="wp-block-heading">शान्तिकुंज</h5>



<p>पण्डित श्री राम शर्मा जी की देन है गायत्री परिवार का मुख्यालय शांतिकुंज यह एक बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है और यह स्थल ऋषिकेश मार्ग पर है जो लोग धार्मिक है वो इस स्थल पर अवश्य जाये शांतिकुंज में लोगो को रहने का मुफ्त में व्यवस्था और यहाँ के मुख्य आकर्षण अखण्ड ज्योती , गायत्री माता का मन्दिर है |</p>



<p> यहाँ रोजाना अध्यात्म से सम्बंधित तरह तरह के शिविर आयोजित होते रहते है कुल मिलकर हमारे अनुसार यहाँ जीवन जीने की कला सिखाई जाती है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">हरिद्वार की खरीददारी और खानपान &#8211;  Best Food Shopping in Haridwar in Hindi</h4>



<p>आये है <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को लो जी बात करने लगे खरीददारी की ये तो गलत बात अरे भाई हम है घुमक्कड़ तो जिस शहर जाते ज्यादा से ज्यादा उसके बारे में जानने की कोशिश करते है आइये खरीददारी की बात हो जाए देखिये |</p>



<p>हरिद्वार की लगभग बाजारे हरी की पौडी के इर्द गिर्द ही है यहाँ की मुख्य बाजारों में बड़ा बाज़ार , अपर रोड बाज़ार , मोती बाज़ार है अच्छा एक और मार्किट है जहाँ आप जा सकते है वो है कनखल की बाज़ार&nbsp; इन सारी बाजारों में आपको शाल , लकड़ी से बने खिलोने या सजावटी सामान , कपडे , स्वेटर , पूजा का सामान आदि उचित दामो पर मिल जायेगा कृपया मोलभाव जरूर करे |</p>



<p>अब खानपान तो आप कोशिश करे <strong>हरिद्वार </strong> में पूरी सब्जी जरूर खाए आप हरी की पौड़ी पर मोहन जी पूरी वाले या चोटीवाला रेस्टोरेंट में यह स्वाद ले सकते है , यहाँ लस्सी जरूर पिए और पौडी पर ही मथुरा जी की प्राचीन लाल पेडे की दूकान है वहा से पेडे अवश्य ले |</p>



<p> अपर रोड पर कोतवाली के सामने भगवती छोले भण्डार के यहाँ छोला भटूरा अवश्य चखे , जैन चाट भण्डार की आयुर्वेदिक चाट जरूर खाये|</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/10/हरी-की-पौड़ी-स्ट्रीट-फ़ूड.jpg" alt="हरी की पौड़ी स्ट्रीट फ़ूड"/><figcaption>हरी की पौड़ी स्ट्रीट फ़ूड</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">Itinerary &#8211; यात्रा कार्यक्रम &#8211; हरिद्वार कैसे घूमे</h5>



<p>आपको हमने <strong><strong>हरिद्वार में घूमने की जगह</strong></strong> के लगभग समस्त दार्शनिक स्थलों के बारे में ऊपर बता ही दिया है अब&nbsp; हम आपके लिए एक यात्रा कार्यक्रम भी बना रहे जिसमे हम सुबह से यात्रा की शुरुआत करेंगे आप जब भी पहुचे उस हिसाब से अपना प्लान बनाइएगा यहाँ से आपको कुछ सहयोग जरूर मिल जायेगा &#8211;&nbsp;</p>



<p><em><strong>पहला दिन</strong></em> &#8211; सबसे पहले आप हरी की पौड़ी आ जाये यहाँ गंगा स्नान करे और पास में ही स्थित भीमगोड़ा , विष्णु घाट , माया देवी मन्दिर के दर्शन करे इतना कर लेने के बाद आप मनसा देवी रोपवे काउंटर पर आकर माँ मनसा देवी और माँ चंडी देवी का संयुक्त टिकट लेकर दोनों देवियों के दर्शन करे |</p>



<p>इतने में आपको दोपहर के 2-3 बज जायेंगे अब आप अपने होटल / धर्मशाला में आकर कुछ खा पीकर आराम करे , इसके बाद आप शाम को 5 बजे दुबारा हरी की पौडी आये और गंगा आरती में शामिल हो गंगा आरती देखने के बाद आप वही बड़ा बाज़ार और अपर रोड की शौपिंग करे और वही के स्ट्रीट फ़ूड का लुत्फ़ ले फिर जब थक जाए तब अपने रूम पर जाकर आराम करे और सो जाये |</p>



<p><em><strong>दूसरा दिन</strong></em> &#8211; चलिए नहा धो के नाश्ता करके <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> को तैयार हो जाइये और चाहे तो ऑटो बुक कर ले या शेयर्ड ऑटो से जाये हम आपको जो लिस्ट दे रहे है वो सब मन्दिर लाइन से ही है एक के दर्शन करे तुरंत दुसरे मन्दिर में जाये&nbsp; </p>



<p><br>शांति कुंज &#8211; सप्त ऋषि आश्रम &#8211; भारत माता मन्दिर &#8211; माँ वैष्णो देवी गुफ़ा मन्दिर &#8211; भूमा निकेतन &#8211; श्री राम मन्दिर &#8211; शिवानन्द धाम &#8211; इण्डिया टेम्पल &#8211; पावन धाम<br>इतना सब देखने के बाद&nbsp; आप खा पीकर अपने रूम पर जाकर आराम करे , अब शाम को आप कनखल जाए वहां दक्ष महादेव मन्दिर , पायलट बाबा आश्रम , हरिहर आश्रम ( पारद शिवलिंग और रुद्राक्ष पेड़ ) देखिये |</p>



<p>इसके अलावा भी हरिद्वार में कई मन्दिर और आश्रम है यदि आपके पास समय हो तो आप और भी जगहों पर जाये वैसे मेरे हिसाब से असली घुमक्कड़ी वही जो पूरा शहर घूमे|</p>



<p><strong>हरिद्वार में घूमने की जगह से सम्बन्धित प्रश्न </strong>&#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659243778158"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार किस राज्य में है </strong> <p class="schema-faq-answer">हरिद्वार उतराखण्ड राज्य में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659243809902"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार में कौन सी नदी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हरिद्वार में गंगा नदी है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659243841661"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार का सबसे प्रमुख घाट कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> हरिद्वार का सबसे प्रमुख घाट हरि की पौड़ी है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659243902334"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार कब जाना चाहिये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आप साल भर में कभी भी हरिद्वार दर्शन को आ सकते है लेकिन मेरा व्यक्तिगत सुझाव यही रहेगा कि आप यहाँ भीसण गर्मी में आने से बचे तो सितम्बर अक्टूबर नवम्बर फ़रवरी मार्च बेस्ट है | बाकी सितम्बर से लेकर मई तक आप यहाँ आ सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244151811"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हरिद्वार हिन्दू धर्म का एक पवित्र स्थल है यहाँ हरि की पौड़ी जैसे पवित्र घाट है पुराने मन्दिर है माँ गंगा है कुम्भ भी यहाँ होता है इन्ही कारणों से हरिद्वार प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244273895"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार की यात्रा कैसे करे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यहाँ हर प्रकार के साधन मौजूद है आप अपने बजट के हिसाब से ऑटो , ई रिक्शा , कार से घूम सकते है कहाँ कहाँ घूमना है यह मैंने पोस्ट में बताया हुआ है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244414949"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार में कहाँ ठहरे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">अरे क्यों परेशां है आप आइये तो सही यहाँ आपको ढेरो होटल ढेरो धर्मशालाए मिलजाएँगी आप अपने बजट के हिसाब से देख कर कोई भी साफ सुथरी जगह को बुक कर लेंगे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244534102"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; चंडी देवी की चढ़ाई कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 3 किलोमीटर और हम किसी बीमार व्यक्ति को  यह यह चढ़ाई करने की सलाह नहीं देंगे यहाँ पर उड़न खटोला की व्यवस्था है आप उससे भी जा सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244635941"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मनसा देवी की चढ़ाई कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 800 सीढियां है यहाँ भी रोपवे की व्यवस्था है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244730819"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; दिल्ली से हरिद्वार जाने में कितना समय लगता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 4-5 घंटे </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244852710"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; लखनऊ से हरिद्वार जाने में कितना समय लगता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 10-11 घन्टे </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659244944815"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या दिल्ली से हरिद्वार के लिये कोई ट्रेन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कोई क्या बहुत सी ट्रेन्स है आपको फिकर करने की जरूरत नहीं बहुत सी ट्रेन्स है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659245072057"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार से मनसा देवी कैसे जाये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से ऑटो बुक करे उसे बोल दे की मनसा देवी जाना है वप आपको उस स्थल पर उतार देगा जहाँ से मनसा देवी की पैदल यात्रा या रोपवे यात्रा शुरू होती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659245262872"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार में देखने के लिये क्या क्या है ? हरिद्वार पर्यटन स्थल कौन कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हरी की पौडी , माँ मनसा देवी मन्दिर , माँ चंडी देवी मन्दिर , भारत माता मन्दिर , पावन धाम , वैष्णो देवी मंदिर , शांतिकुंज  , शिवानन्द धाम , दक्ष महादेव मन्दिर , पायलट बाबा आश्रम , इण्डिया टेम्पल , हरिहर आश्रम , सप्तऋषि आश्रम आदि |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659245497680"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार से शांतिकुंज किनती दूर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 6 किलोमीटर है ऋषिकेश की तरफ जाओ तब शांतिकुंज पड़ता है |</p> </div> </div>



<h5 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h5>



<p> यह देवभूमि मायापुरी हरिद्वार मन्दिरों , गंगा के घाटो , आश्रमों की नगरी है और पूज्यनीय स्थल है यहाँ आपका ज्यादा खर्चा भी नही होता क्यूंकि यहाँ रुकना सस्ता है करण यहाँ बहुत सारी धर्मशालाओ का होना है |</p>



<p>हमने आपको <strong>हरिद्वार दर्शन</strong> से सम्बंधित लगभग समस्त जानकारी मुहैया करने का प्रयास किया है बहुत से पर्यटन के केंद्र हमारे द्वारा कवर नही हो पाए कृपया इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं |</p>



<p> स्वच्छ गंगा स्नान के लिए हरिद्वार एक बढ़िया विकल्प है तो क्या सोच रहे बना लीजिये मन और आइये <strong>हरिद्वार में घूमने की जगह</strong> की यह पोस्ट यदि आपको पसंद आई हो तो कृपया इसे अपने दोस्तों में शेयर जरूर करे |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी कैसे पहुंचे कहाँ रुके कहाँ घूमे</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Sep 2019 11:53:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य एक ऐसा मन्दिर है जहाँ पर हर एक भक्त की मनोकामना पूरी होती है , यह पावन  स्थल उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर जिले से लगभग  35 किलोमीटर की दूरी पर है , माँ को माता सती के 108 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ भी माना गया है &#124; इस स्थल के बारे में प्रसिद्ध है कि यहाँ जो भी श्रद्धालु  एक बार मत्था टेकने जाता है उसकी मनोकामना को माता रानी पूरा करती है </p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%be/">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य </strong>एक ऐसा मन्दिर है जहाँ पर हर एक भक्त की मनोकामना पूरी होती है , यह पावन  स्थल उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर जिले से लगभग  35 किलोमीटर की दूरी पर है , माँ को माता सती के <a aria-label="108 शक्तिपीठो (opens in a new tab)" href="https://en.wikipedia.org/wiki/Shakti_Peetha" target="_blank" rel="noreferrer noopener">108 शक्तिपीठो</a> में से एक <a href="https://safarjankari.com/tag/shaktipeeth/">शक्तिपीठ</a> भी माना गया है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> इस स्थल के बारे में प्रसिद्ध है कि यहाँ जो भी श्रद्धालु  एक बार मत्था टेकने जाता है उसकी मनोकामना को माता रानी पूरा करती है इसी कारण <strong><em>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य</em></strong> में सालो  भक्तो की  भीड़ बनी रहती है खासकर नवरात्र के दिनों में तो यहाँ पैर रखने की जगह ही नही होती कहने का मतलब नवरात्र में इस स्थल पर अत्यधिक भीड़ होती है | </p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुचे माँ ललिता देवी मन्दिर नीमसार </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यहाँ पहुचना बहुत ही आसान है यह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 85 किलोमीटर , सीतापुर से लगभग 35 किलोमीटर पर स्थित है | </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यदि आपको वायुमार्ग से आना है तो आप लखनऊ  के एअरपोर्ट से आ सकते हो उत्तर प्रदेश की राजधानी  से आपको बस भी मिल जाएगी और चाहे तो आप अपनी कोई गाड़ी भी बुक कर सकते है | </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">रेलवे से आने के लिए आप या तो लखनऊ पहुचे या सीतापुर या हरदोई और उसके बाद इन तीनो शहरों से नीमसार के लिए आपको बस मिल जाएगी |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कहा रुके </h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यदि आप माँ <strong>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य </strong>दर्शन  करने आये है तो आपको यहाँ रुकने की वैसे तो कोई आवश्यकता नहीं है आप बड़े आराम से एक दिन में दर्शन करके जा सकते है फिर भी यदि किन्ही कारणोंवश आपको रुकना पड़े तो आप घबराये नहीं नैमिषारण्य एक बड़ा तीर्थ स्थान है यहाँ आपको बहुत सी अच्छी धर्मशालाये और होटल मिल जायेंगे आप अपने बजट के अनुसार कोई भी होटल / धर्मशाला में  रुक सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ ललिता देवी से जुड़ी कुछ पौराणिक कहानियाँ</h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हर एक मन्दिर की अपनी एक कहानी होती है इसी प्रकार समस्त मनोकामनाओ को पूरा करने वाली जगत की जननी माँ <strong>ललिता देवी </strong>की भी कुछ पौराणिक कथाये  है आइये जान लेते है &#8211;</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/naimisharanya-neemsaar-tirth/">पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य की सम्पूर्ण जानकारी  </a></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एक कथा के अनुसार जब माता सती ने <a aria-label="राजा दक्ष (opens in a new tab)" href="https://hindi.webdunia.com/article/sanatan-dharma-history/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%80-84-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-1-113100500004_1.htm" target="_blank" rel="noreferrer noopener">राजा दक्ष</a> के यज्ञ में अपने शरीर का त्याग किया था तब शिवजी अत्यन्त क्रोधित और दुखी हुये थे माता सती के शरीर को लेकर वो दुःख से विचरण करने लगे थे जिससे की स्रष्टि के कई तरह के कार्य बाधित होने लगे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तब भगवान विष्णु ने जग के कल्याण के लिए माता सती के शरीर के 108 टुकड़े किये जो सम्पूर्ण पृथ्वी में इधर-उधर गिरे ये टुकड़े जहा जहाँ गिरे उस स्थल को शक्तिपीठ का नाम दिया गया , मान्यताओं अनुसार इस पवित्र स्थल पर माता का ह्रदय गिरा था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब एक दूसरी पौराणिक कथानुसार भगवान ब्रम्हा जी ने देवी सती को यहाँ प्रकट होने का आदेश दिया था अतः देवी यहाँ माँ <strong>ललिता देवी</strong> के रूप में प्रकट हुई और अपने भक्तो की सेवा में तत्पर हो गई |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">कही कही मैंने सुना है की इसी मन्दिर के पास में ही चक्रतीर्थ है जहाँ भगवान् ब्रम्हा जी ने चक्र छोड़ा था उस चक्र की शक्ति को सन्तुलित बनाये रखने हेतु माता सती यहाँ आई |</p>



<h5 class="wp-block-heading">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य से जुड़ी कुछ रोचक बाते </h5>



<ul style="font-size:20px"><li> नीमसार में जब भी आप आये सबसे पहले चक्रतीर्थ में स्नान करके आप माँ <strong>ललिता देवी</strong> मन्दिर आये यहाँ माँ के पावन रूप के दर्शन करे आप जैसे ही मन्दिर की तरफ आओगे आपको रास्ते में बहुत सारी प्रसाद की दुकाने मिल जाएँगी वहां आप अपने चप्पल जुते उतार दे प्रसाद ले और प्रसाद माँ  को अर्पित करे | </li><li>ध्यान दे यहाँ आपको थोड़ा होशियार रहने की जरूरत है क्यूंकि यहाँ थोड़ी से लूट खसोट ज्यादा है हो सके तो यहाँ के पण्डित लोगो के चक्कर में कम ही पड़े |</li><li>माँ <em>ललिता देवी</em> मन्दिर के पड़ोस में ही पंचप्रयाग नाम का एक सरोवर है कहा जाता है की यह अत्यधिक पवित्र है तो आप यहाँ भी हाथ पैर धुल सकते है |</li><li>यहाँ पर माता को त्रिपुर सुन्दरी के नाम से भी जाना जाता है |</li><li>आप इस पवित्र मन्दिर में अपनी मनोकामना पूरी करने हेतु एक धागा बाँध सकते हो और जब आपकी मनोकामना पूरी हो जय तब यहाँ वापस आकर धागा आपको खोलना होगा |</li></ul>



<p><strong>ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य से सम्बन्धित प्रश्न </strong></p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659190711159"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह मन्दिर नैमिषारण्य में है जो की उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659190860760"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या नैमिषारण्य में स्थित माँ ललिता देवी मन्दिर एक शक्तिपीठ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">51 शक्तिपीठ में जो ललिता देवी शक्तिपीठ है वह तो प्रयागराज में है अब नाम एक ही है मान्यता नैमिषारण्य की माँ ललिता देवी की बहुत ज्यादा है तो आप इसे शक्तिपीठ मान सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659191077048"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; सीतापुर का प्रमुख मन्दिर कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माँ ललिता देवी मन्दिर </p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आज 29 सितम्बर 2019 को नवरात्र आरम्भ हुए हमेशा की तरह मै आज जब पूजा करने बैठा तो दुर्गा शप्तसती की पवित्र किताब को देखने लगा उसमे मैंने एक श्लोक देखा जो की देवी कवच के अंतर्गत है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">श्लोक की एक पंक्ति &#8221; <em>ह्रदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी</em> &#8221; से ख्याल आया की क्यों ना <strong>माँ ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य</strong> की महिमा अपने पाठको तह पहुचाई जाय तभी इस पोस्ट को लिख डाला खैर माँ ललिता देवी के दरबार में जो भी भक्त सच्चे ह्रदय से कुछ मांगता है माँ उसको निराश नहीं करती है |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%be/">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>20+ इलाहाबाद प्रयागराज में घूमने की जगह की जानकारी &#8211; कैसे पहुंचे कहाँ रुके क्या घूमे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Sep 2019 13:53:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Historical]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज शहर अपने आप में एक गौरवमय इतिहास को बयां करता है जैसे नेहरु जी का पुराना मकान  यही है और श्री चन्द्रशेखर आज़ाद जी ने इसी शहर में अपने प्राणों की आहूति दी थी , यह वही शहर है जहां ब्रम्हा जी ने सृष्टि के निर्माण के बाद प्रथम यज्ञ किया था तब से ये तीर्थराज कहलाया , ऋषि भारद्वाज ऋषि दुर्वासा ऋषि पन्ना का भी सम्बन्ध प्रयागराज से रहा है , चन्द्रवंशी राजा पुरुरव का भी प्रयाग से सम्बन्ध है देखा जाय तो प्रयागराज अति पावन शहर है , Triveni Sangam Allahabad को समस्त तीर्थो का राजा कहा गया है &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong> में सबसे प्रमुख तीर्थराज प्रयाग है&nbsp; &nbsp;, यह अति प्राचीन शहर अलाहाबाद , प्रयागराज , इलाहाबाद आदि नामो से जाना जाता है वैसे आधिकारिक रूप से इसका नाम अब प्रयागराज है यह शहर <a href="https://safarjankari.com/tag/uttar-pradesh/">उत्तर प्रदेश</a> जिले में है और अपनी शिक्षा के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है |</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong></h2>



<p> भारत की तीन नदियों गंगा , यमुना और सरस्वती के इस संगम पर अनेको तीर्थ स्थान मौजूद है <strong>प्रयागराज के पर्यटन स्थल</strong> जैसे आनंद भवन , अक्षय वट, अकबर का किला , खुसरो बाग , सैंट कैथेड्रल चर्च , अलोपी देवी मंदिर , त्रिवेणी संगम , लेटे हनुमान मन्दिर आदि प्रमुख है |</p>



<p>प्रयागराज शहर अपने आप में एक गौरवमय इतिहास को बयां करता है जैसे नेहरु जी का पुराना मकान&nbsp; यही है और श्री चन्द्रशेखर आज़ाद जी ने इसी शहर में अपने प्राणों की आहूति दी थी , यह वही शहर है जहां ब्रम्हा जी ने सृष्टि के निर्माण के बाद प्रथम यज्ञ किया था तब से ये तीर्थराज कहलाया |</p>



<p>ऋषि भारद्वाज ऋषि दुर्वासा ऋषि पन्ना का भी सम्बन्ध प्रयागराज से रहा है , चन्द्रवंशी राजा पुरुरव का भी प्रयाग से सम्बन्ध है देखा जाय तो प्रयागराज अति पावन शहर है , त्रिवेणी संगम प्रयागराज&nbsp; को समस्त तीर्थो का राजा कहा गया है |<br><strong>Tourist Places in Prayagraj in Hindi</strong></p>



<p>कुम्भ मेला और माघ मेला यहाँ के दो बड़े सांस्कृतिक मेले है कुम्भ मेला तो हर बारहवे साल लगता है जो की विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला है वही माघ मेला हर वर्ष जनवरी के महीने में आयोजित होता है यह भी एक बड़ा धार्मिक सांस्कृतिक मेला है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">प्रयागराज कैसे पहुचे &#8211; How to Reach Prayagraj in Hindi</h5>



<p>अच्छा <strong><strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong></strong> जानने से पहले यहाँ कैसे पहुंचे यह जान ले,&nbsp; आपको यहाँ पहुचने में किसी भी तरह की समस्या नहीं होगी क्यूंकि यह शहर भारत के सभी शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हहा है , <em><strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong></em>&nbsp; &nbsp;उतर प्रदेश राज्य में है इसकी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दूरी लगभग 195 किलोमीटर है |</p>



<p>~ यदि आप सड़क मार्ग से प्रयागराज पहुचना चाहते है तो आपको बता दे की यह शहर राष्टीय राज्यमार्ग से जुड़ा हुआ है , एन एच 2 और एन एच 27 और एन एच 76 और एन एच 96 आदि राजमार्ग से प्रयागराज जुड़ा हुआ है तो आप बड़ी आसानी से सड़क मार्ग से यहाँ पहुच सकते है |</p>



<p><br>~ यदि आपको रेलवे मार्ग से यहाँ पहुचना है तो हम बता दे कि प्रयागराज मध्य उत्तर जोन का मुख्यालय है यहाँ पर कई रेलवे स्टेशन है जैसे प्रयाग , प्रयागघाट , इलाहाबाद सिटी , नैनी , इलाहाबाद जंक्शन आदि भारत के लगभग समस्त शहरो से यहाँ के लिए आपको ट्रेन मिल जाएगी |</p>



<p><br>~ यदि आप वायुमार्ग से <strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong> <strong>&nbsp;</strong>आना चाहते है तब भी आपको किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी क्यूंकि इलाहाबाद शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर बमरौली एअरपोर्ट है जहा से लखनऊ , देलही , मुम्बई , कोलकात्ता आदि शहरो से सीधी फ्लाइट है यहाँ का IATA कोड IXD है , आप देख ले की क्या आप के शहर से प्रयागराज के लिए कोई फ्लाइट है अथवा नहीं |</p>



<p>अच्छा मै दो और विकल्प बताये दे रहा हु एक तो प्रयागराज से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा है और दूसरा विकल्प अलाहाबाद से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर लखनऊ में चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डा है आप यहाँ से भी जा सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">प्रयागराज इलाहाबाद में कहा ठहरे &#8211; Where to Stay in Prayagraj in Hindi</h5>



<p>वैसे तो देखा जाय तो <strong>प्रयागराज </strong>&nbsp;आप एक दिन में भी घूम सकते है लेकिन फिर रुकने के बारे में जानकारी तो होनी ही चाहिए क्यूंकि किसी की ट्रेन दोपहर 2 बजे प्रयागराज पहुची तब तो वो एक दिन में नहीं घूम पायेगा उसे रूम लेना ही पड़ेगा |</p>



<p> तीर्थराज प्रयाग एक बड़ा शहर है जो की होटलों से भरा पड़ा है लेकिन एक बात का ध्यान दे प्रयागराज के अधिकतम होटल आपको इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन सिविल लाइन में ही मिलेंगे यहाँ आपको सस्ते महंगे हर प्रकार के होटल मिल जायेंगे |</p>



<p><br>यदि आप धर्मशाला में रुकना चाहते है तो <em><strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong> &nbsp;</em>में कई धर्मशालाये भी है जैसे बांगड़ धर्मशाला जो की संगम के पास ही है और भी है आप गूगल कर सकते है आप अपने बजट के अनुसार कोई होटल या लॉज या धर्मशाला देखकर बुक कर सकते है |</p>



<p>&nbsp; यह भी पढ़े &#8211;</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/goa-me-ghumne-ki-jagah/">&nbsp;गोवा सिटी के पर्यटन स्थल की जानकारी </a><br><a href="https://safarjankari.com/konark-surya-mandir-hindi-me/">&nbsp;कोणार्क सूर्य मन्दिर की सम्पूर्ण जानकारी&nbsp;</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">इलाहबाद प्रयागराज के पर्यटन स्थल &#8211; Tourist Places in Prayagraj in Hindi</h4>



<p>प्रयागराज ( इलाहाबाद ) में घुमने के लिए आपके पास बहुत कुछ है आप चाहे है पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान कर सकते है चाहे तो मन्दिरों के दर्शन कर सकते है एतिहासिक पर्यटन की भी यहाँ झलक दिखाई देती है  &#8211;&nbsp;</p>



<h5 class="wp-block-heading">त्रिवेणी संगम &#8211; Triveni Sangam Tourist Place in Prayagraj in Hindi</h5>



<p>गंगा यमुना सरस्वती नदियों के मिलने से बना है तीर्थराज प्रयाग यहाँ आपको गंगा जी का जल और यमुना जी का जल दो अलग अलग रंगों में दिखाई देगा आप स्पष्ट रूप से बीच संगम में दो रंग का पानी देख सकते है जबकि कहा जाता है की सरस्वती जी यहाँ गुप्त है |</p>



<p>श्रद्धालु <a href="https://www.atlasobscura.com/places/the-triveni-sangam-allahabad-india" target="_blank" rel="noreferrer noopener">त्रिवेणी संगम</a> &nbsp;​ में स्नान करके अपने जीवन को धन्य बनाते है , बहुत ही अच्छा लगता है जब हम नाव पर बैठे बैठे त्रिवेणी संगम के दर्शन करते है | <strong>त्रिवेणी संगम प्रयागराज&nbsp; </strong>में ही भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा धार्मिक मेला कुम्भ हर १२वे साल आयोजित होता है और प्रयागराज का कुम्भ सच में अद्वितीय है |</p>



<p>अच्छा यदि आप संगम में स्नान करना चाहते है तो आपको वहां&nbsp; तक पहुचने के लिए एक नाव चाहिए होगी जो आपसे कम से कम 30 रूपये प्रति सवारी लेगा आपको संगम वाले स्थान पर ले जायेगा वहा दो नावो के बीच में एक तखत डालकर प्लेटफ़ॉर्म सा बनाये है जहां आप स्नान कर सकते हो |</p>



<p>आप इतमिनान से तीर्थराज प्रयाग के त्रिवेणी संगम का स्नान करे चाहे तो नारियल फूल भी चढ़ा सकते&nbsp; है आपको वही नाव पे ही मिल जायेंगे फिर आप अपनी नौका में बैठ के संगम को निहारते हुए वापस लौट आइये |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="Triveni Sangam Allahabad"/><figcaption class="wp-element-caption">त्रिवेदी संगम</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">किला &#8211; Ilahabad Fort Tourist Place in Prayagraj in Hindi</h5>



<p>जैसे ही आप संगम में स्नान करके किनारे पर आओगे सामने आपको किला दिखाई देगा जो की <em><strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong></em> <strong>&nbsp;</strong> की एक एतिहासिक धरोहर है यहाँ की उत्कृष्ट बनावट आपको इसे देखने पर मजबूर कर देगी , अकबर ने इस किले का निर्माण संगम तट पर करवाया था |</p>



<p> वैसे इस किले के कुछ ही भाग हम देख सकते है बाकी पूरा किला देखना प्रतिबंधित है |<br>अलाहाबाद किले के अन्दर आप अशोक स्तम्भ भी देख सकते है |</p>



<p>आपको किले के अन्दर ही अक्षय वट दिखेगा आप इस अलौकिक वृक्ष के दर्शन अवश्य करे कहा जाता है की यह अक्षय वट अमर है , यहाँ मान्यता है की जब प्रलय आएगी सब कुछ नष्ट हो जायेगा तब भी यह अक्षय वट बच जायेगा तो आप इस वृक्ष को देखे इसकी परिक्रमा करे |</p>



<p><br><strong>अक्षय वट</strong> के आसपास जमीन के अन्दर एक बेहद प्राचीन मन्दिर स्थित है जिसमे हिन्दू देवी देवताओ की मूर्तिया स्थापित है इसे <strong>पातालपुरी मंदिर</strong> कहा जाता है और इस पातालपुरी मंदिर में आपको <em>अक्षय वट</em> की जड़े भी दिखाई देती है इस मंदिर के दर्शन अवश्य करे&nbsp; </p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/किला-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="त्रिवेणी संगम इलाहाबाद"/><figcaption class="wp-element-caption">इलाहाबाद किला</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">लेटे हनुमान मन्दिर &#8211; Prayagraj Ilahabad ka Famous Mandir</h5>



<p>देखिये वैसे तो आजकल आपको लेटे हुए हनुमान जी के कई मंदिर मिल जायेंगे लेकिन पुराणों में लेटे हनुमान मंदिर के लिये <strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong> <strong>&nbsp;</strong>शहर का ही जिक्र किया गया है यह मन्दिर प्रयागराज का सबसे प्रसिद्ध मन्दिर है यहाँ भक्तो का ताँता लगा रहता है |</p>



<p>यह भी संगम तट के समीप ही है लेटे हनुमान मन्दिर में हनुमान जी की एक विशाल प्रतिमा लेटे हुई मुद्रा में है संगम में स्नान पश्चात इस मन्दिर के दर्शन करे , <strong>लेटे हनुमान मन्दिर</strong> के प्रांगड़ में ही श्री राम जानकी मन्दिर भी है आप यहाँ भी मत्था टेक सकते है |</p>



<p>अब <em>लेटे हनुमान मन्दिर</em> और संगम तट के आसपास कई और भी मंदिर बने हुए है जैसे नवलक्खा मन्दिर यदि आपके पास समय है&nbsp; तो आप अन्य मन्दिरों के दर्शन हेतु भी जा सकते है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">आनन्द भवन , स्वराज भवन , तारामंडल &#8211; Anand Bhavan Tourist Place in Prayagraj in Hindi</h5>



<p><em><strong>प्रयागराज में घूमने की जगह </strong></em> में अब चलते है आनंद भवन यह विख्यात पर्यटन स्थल नेहरु-गांधी परिवार  का पुस्तैनी घर है आप यहाँ आइये और मोतीलाल नेहरु जी द्वारा बनवाया गया मकान  देखिये यहाँ आने से आपको काफी जानकारी मिलेगी |</p>



<p>अच्छा आनंद भवन का एक और बड़ा आकर्षण है यहाँ चंद्रशेखर आजाद की वो गन रखी है जिससे उन्होंने अपने आपको गोली मारी थी |</p>



<p> यहाँ के टिकट बात करे तो प्रथम तक का टिकल रूपये 20 है और दोनों तलो का 70 रूपये है वही विदेशी नागरिको के लिए टिकल का मूल्य रूपये 200 है वैसे यदि आप आज़ाद जी की गन देखना चाहते हो तो आपको दोनों तलो का टिकट लेना होगा |</p>



<p>जवाहर तारामंडल भी इसी आनंद भवन में स्थित है यहाँ आप चाँद&nbsp; , तारो को महसूस कर सकते है यहाँ एक शो चलता है जिसमे आपको ये सब चीजे दिखाई जाती है आप कभी भी पेयाग्राज इलाहाबाद<em>&nbsp;</em>जाए तो आनंद भवन के जवाहर तारामंडल का शो जरूर देखे |</p>



<p><br>स्वराज भवन नाम से जो ईमारत बनी हुई है उसमे इंदिरा गांधी जी से जुडी हुई जानकारियां मिलती है यह भी बहुत बढ़िया जगह यहाँ आपको नेहरु -गाँधी परिवार की दुर्लभ तस्वीरे इसके आलावा इस परिवार के जीवन के तमाम तथ्य यहाँ मौजूद है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/आनंद-भवन-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="आनन्द भवन  प्रयागराज में घूमने की जगह की जगह "/><figcaption class="wp-element-caption">आनंद भवन</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">भारद्वाज पार्क , भारद्वाज आश्रम , वेणी माधव का मन्दिर</h5>



<p>देखिये ये दोनों पर्यटन स्थल अलग अलग है और दोनों ही आनंद भवन से महज 5-10 मिनट की दूरी पर&nbsp; है <em>भारद्वाज पार्क</em> में ऋषि भारद्वाज की एक विशाल मूर्ति बनी है जो की देखते ही बनती और हरा भरा पार्क भी आकर्षण का केंद्र है |</p>



<p> इस पार्क से जब आप आनंद भवन की तरफ जाओगे तो मूषिक से 200 मीटर की दूरी पर एक रास्ता <em>भारद्वाज आश्रम</em> की तरफ जाता है आप वहा भी जा सकते है |</p>



<p>आप वेणी माधव के प्राचीन&nbsp; मंदिर के भी दर्शन कर लीजिये यह आनंद भवन के समीप ही है <strong>प्रयागराज के पर्यटन स्थल &nbsp;</strong>में श्री वेणी माधव मंदिर की अपनी एक अलग पहचान है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/भारद्वाज-पार्क.jpg" alt="भारद्वाज पार्क प्रयागराज में घूमने की जगह "/><figcaption class="wp-element-caption">भारद्वाज पार्क</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">आज़ाद पार्क , कम्पनी बाग , अल्फ्रेड पार्क</h5>



<p>आज़ाद पार्क , कम्पनी बाग , अल्फ्रेड पार्क&nbsp; ये तीनो एक ही जगह के नाम है यह पार्क यह वही स्थान है जहां चंद्रशेखर आज़ाद जी ने अंग्रेजो द्वारा घेरे जाने पर अपने आप को गोली मारी थी और शहीद हुए थे |</p>



<p> इस स्थल&nbsp; को तो हर भारतीय को जरूर देखने आना चाहिए अच्छा आज़ाद पार्क में आपको अलाहाबाद संग्रहालय और अलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी भी मिल जाएगी इन दोनों जगहों पर भी आप जा सकते है |</p>



<p>अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में एक सिंथेटिक जॉगिंग पार्क भी बना हुआ है जो की जॉगिंग का एक अलग ही एहसास कराता है यह पार्क काफी हरा भरा है अच्छा इसमें भी 5 रूपये का टिकट है , कम्पनी बाग में एक खेल ग्राउंड भी है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/आज़ाद-पार्क-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="आज़ाद पार्क कम्पनी बाग एल्फ्रेड पार्क  प्रयागराज में घूमने की जगह "/><figcaption class="wp-element-caption">श्री चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">मिन्टो पार्क , मनकामेश्वर मन्दिर , सरस्वती घाट &#8211; Allahabad me Ghumne ki Jagah</h5>



<p>लार्ड मिन्टो के नाम पर इस पार्क का नाम मिन्टो पार्क पड़ा था परन्तु अब इसका नाम बदलकर मदन मोहम मालवीय पार्क कर दिया गया है यहाँ एक पत्थर से बना हुआ स्मारक है जिसके सबसे ऊँचे हिस्से पर चार सिंह बने हुए है इस पार्क में बच्चो के लिए झूलो और बोटिंग की भी व्यवस्था है |</p>



<p>मिन्टो पार्क एक हरा भरा पार्क है जहां आप अपना समय बिता सकते है&nbsp;|<br><br>यही पास में ही मनकामेश्वर मंदिर भी है स्थानीय लोगो का मानना है कि सोमवार को जल का अभिषेक करने से भगवान शिव अपने भक्तो की मनोकामना को पूरा करते है&nbsp;|<br><br><em>सरस्वती घाट</em>&nbsp; भी मिन्टो पार्क के नजदीक ही है यह भी एक अच पर्यटन स्थल है जहां आप कुछ वक़्त गुज़ार सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">अलोपी देवी मन्दिर &#8211; Alopi Devi Mandir <strong>Allahabad me Ghumne ki Jagah</strong></h5>



<p>मैंने अपने जीवन काल में ऐसा कोई भी मंदिर नहीं देखा जहां कोई देवी देवता न हो जी हां सही बता रहा हू <em>अलोपी देवी का मंदिर</em>&nbsp; यहाँ किसी भी देवी देवता की प्रतिमा नहीं&nbsp; है अपितु इस मंदिर में एक झूले की पूजा की जाती है |</p>



<p> मान्यता है यह वही स्थान है जहां पर माता सती के शरीर का आखिरी अंग गिरा था और यही से माता का शरीर लुप्त हो गया था यह एक शक्तिपीठ भी है यह अद्भुत मंदिर प्रयागघाट जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास ही है इसे भी आप जरूर देखे |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/अलोपी-देवी-मन्दिर-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="अलोपी देवी मन्दिर  प्रयागराज में घूमने की जगह "/><figcaption class="wp-element-caption">अलोपी देवी मन्दिर</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">खुसरो बाग</h5>



<p>हरे भरे पेड़ो से अच्छादित इतिहास को समेटे हुए उत्कृष्ट शिल्पकला से सुसज्जित खुसरो बाग&nbsp; में जहाँगीर के पुत्र खुसरो का मकबरा है , शाह बेगम का मकबरा है , खुसरो की बहन का मकबरा है | </p>



<p>यह पर्यटन स्थल आपको भारत की बेजोड़ वास्तुकला से परिचित कराता है यह मशहूर खुसरो बाग &nbsp;इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन के समीप ही बना हुआ है यदि आप इतिहास के शौखीन है तो यहाँ अवश्य जाए |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/खुसरो-बाग-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt="खुसरो बाग त्रिवेणी संगम प्रयागराज"/><figcaption class="wp-element-caption">खुसरो बाग</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">सैंट कैथेड्रल चर्च</h5>



<p>यह यहाँ का सबसे बड़ा गिरिजाघर है इसका निर्माण 19वी शताब्दी में किया गया था सच मानिये यह चर्च इतना सुन्दर है कि पर्यटकों को यहाँ ठहरने के लिए यह विवश कर देता है एकदम शांत वातावरण , बेजोड़ शिल्पकला का नमूना चाहे आप इस गिरिजाघर को बाहर से देखे चाहे अन्दर से दोनों तरफ से ही <em>सैंट कैथेड्रल चर्च</em>  शानदार दिखाई देता है |</p>



<p> जब भी&nbsp; प्रयागराज आना हो आप इस स्थल को इगनोर नहीं कर सकते है , यह चर्च भी आपको इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन के समीप ही है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/09/सैंट-कैथेड्रल-चर्च-Triveni-Sangam-Allahabad.jpg" alt=" प्रयागराज में घूमने की जगह सैंट कैथेड्रल चर्च"/><figcaption class="wp-element-caption">सैंट कैथेड्रल चर्च</figcaption></figure>



<h5 class="wp-block-heading">&nbsp;<strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong> के अन्य दर्शनीय स्थल</h5>



<p><strong><strong>इलाहाबाद</strong> <strong><strong>प्रयागराज के पर्यटन स्थल</strong></strong></strong>&nbsp;में बहुत कुछ है मैंने ऊपर कुछ महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की जानकारी दे दी है इनके आलावा भी यहाँ&nbsp; कई स्थल है जिनको भी हम अनदेखा नहीं कर सकते है चलिए संक्षिप्त में इनको भी जान लेते है &#8211;&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>&nbsp;नागवासुकी मंदिर जो की प्रयागराज घाट&nbsp; जंक्शन के समीप स्थित है&nbsp;<strong>प्रयागराज इलाहाबाद&nbsp;</strong>&nbsp;में मान्यता है की तीर्थराज प्रयाग में जब तक आप नागवासुकी मन्दिर के दर्शन नहीं कर लेते तब तक आपकी तीर्थ यात्रा अधूरी है यहाँ नागो के राजा वासुकी नाग स्थापित है |</li>



<li>शंकर विमान मंडपम&nbsp;<b>त्रिवेणी संगम प्रयागराज&nbsp;</b>&nbsp;के समीप ही है और एक धार्मिक पर्यटन स्थल है यहाँ कई हिन्दू देवी देवताओ की मूर्तिया राखी हुई है |</li>



<li>&nbsp;इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी देखने जा सकते है यह भी एक बेहतरीन शिल्पकला का उदहारण है |</li>



<li>ललिता देवी मन्दिर जो की 51&nbsp;<a href="https://safarjankari.com/tag/shaktipeeth/">शक्तिपीठ</a>&nbsp;में से एक है इसका भी एक अलग महत्त्व है इस मंदिर में आपको सही राम , लक्ष्मण , सीता जी और हनुमान जी की मूर्तिया है वाही दूसरी तरह नव गृह शुशोभित है , राधा -कृष्णा की मुर्तिया भी इस मंदिर में स्थापित है |</li>



<li>नया यमुना ब्रिज एक बेहद ही खूबसूरत ब्रिज है जो प्रयागराज की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है इसे नैनी ब्रिज भी कहा जाता है मौका मिले तो इस ब्रिज पर भी जाए |</li>
</ul>



<h5 class="wp-block-heading"><strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong> का यात्रा कार्यक्रम &#8211; Itinerary</h5>



<ul class="wp-block-list">
<li><em><strong>Allahabad me Ghumne ki Jagah</strong></em>&nbsp;की शुरुवात आप गंगा यमुना&nbsp; सरस्वती संगम से करे पहले संगम में स्नान करे फिर संगम के समीप ही किला जाये वहा अक्षय वट और पातालपुरी मन्दिर और अशोक स्तम्भ देखे फिर बाहर&nbsp; आकर लेटे हनुमान मन्दिर के दर्शन करे इसके बाद यदि समय है तो संगम के आसपास कई मन्दिर है आप देखे |<br>अब आप आनंद भवन , स्वराज भवन , जवाहर तारामंडल जो की एक ही ईमारत में है देखे इसके बाद समीप में ही बेनी माधव मन्दिर , भारद्वाज आश्रम और पार्क भी देख ले |</li>



<li>इसके बाद आप आज़ाद पार्क जाये वहा आपको इलाहाबाद म्यूजियम और पब्लिक लाइब्रेरी देखे पार्क में ही है |</li>



<li>आप मिन्टो पार्क , सरस्वती घाट और मनकामेश्वर मंदिर देखे टीनो स्थाल पास में ही है |<br>खुसरो बाग , सैंट कैथेड्रल चर्च , हनुमान निकेतन मन्दिर ये तीनो दर्शनीय&nbsp; स्थल इलाहाबाद जुन्व्तिओं रेलवे स्टेशन के इर्द गिर्द ही है |</li>



<li><strong><em>प्रयागराज इलाहाबाद</em> &nbsp;</strong>के प्रयागघाट जंक्शन के पास आपको अलोपी देवी मंदिर , नाग वासुकी मंदिर , शंकर विमान मंडपम मिल जायेंगे |</li>
</ul>



<p>यदि आपके पास समय बहुत ही कम है तो <strong>Allahabad me Ghumne ki Jagah</strong> में सबसे ज्यादा त्रिवेणी संगम को महत्त्व दे क्यूंकि संगम के पास आपको और भी कई पर्यटन स्थल मिल जायेंगे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">प्रयागराज इलाहाबाद जाने का बेस्ट सीजन </h4>



<p>यहाँ जाने का उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है क्यूंकि यहाँ गर्मी बहुत पड़ती है तो हो सके तो गर्मी के महीनो में यहाँ जाने से बचे&nbsp;</p>



<p><strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong> <strong>से सम्बन्धित प्रश्न </strong></p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659103446828"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रयागराज में सबसे फेमस क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">प्रयागराज इलाहाबाद में सबसे ज्यादा फेमस त्रिवेणी संगम है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659103643870"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रयागराज इलाहबाद में कौन कौन सी नदियों का संगम हुआ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">प्रयागराज इलाहाबाद में गंगा यमुना और सरस्वती नदियों का संगम हुआ है जिसमे से हम गंगा और यमुना के जल के अलग अलग रंग को साफ़ देख सकते है सरस्वती नदी को अद्रश्य बताया जाता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659103844318"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रयागराज क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">प्रयागराज में गंगा यमुना सरस्वती का संगम होता है यह सभी तीर्थो का राजा है और यहाँ कुम्भ मेले का आयोजन होता है इसलिये यह प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659103909127"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रयागराज क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इलाहाबाद शहर का नाम अब प्रयागराज है प्रयागराज मतलब सभी तीर्थो में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659104055782"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; इलाहाबाद प्रयागराज में कहाँ रुके ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बहुत से विकल्प है कई धर्मशालाये है और होटल तो अनगिनत है हर बजट में आपको यहाँ होटल मिल जायेंगे ऊपर मैंने रुकने के बारे मे बताया है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659104175671"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; इलाहाबाद प्रयागराज कैसे घूमे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आप अपने बजट के अनुसार ऑटो या कार बुक कर ले और आराम से घूमिए |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659104231862"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; इलाहाबाद प्रयागराज घूमने के लिये कितने दिन चाहिये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इलाहाबाद प्रयागराज आप एक दिन में भी घूम सकते है जैसे आप सुबह प्रयागराज आ गए तो शुरुआत कीजिये त्रिवेणी संगम से फिर वही लेटे हनुमान के दर्शन कर कुछ अन्य जगहों को घूम ले और यदि आपके पास समय है तो आप दो तीन दिन रुककर इलाहबाद को महसोस कीजिये |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659104563631"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रयागराज में क्या क्या घूमने वाला है ? <strong>प्रयागराज के पर्यटन स्थल</strong> कौन कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">त्रिवेणी संगम , लेटे हनुमान , अलोपी देवी मन्दिर , आनन्द भवन , आजाद पार्क , खुसरो बाग़ आदि है पोस्ट पढिये ऊपर एक एक पॉइंट के बारे में बताया है |</p> </div> </div>



<h5 class="wp-block-heading">Conclusion &#8211; निष्कर्ष</h5>



<p>हम <strong>प्रयागराज इलाहाबाद</strong> में प्रयाग जंक्शन रेलवे स्टेशन पर उतरे काफी सफाई थी और दीवारों पर भारतीय संकृति को दर्शाते चित्र देखते ही बनते है&nbsp; शहर की रोड के किनारे भारतीय संस्कृति के चित्र ,जगह जगह बने सुन्दर शिवलिंग आपका मन मोह लेते है |</p>



<p> यह शहर हमारे भारत के गौरवमय इतिहास का गवाह है और धार्मिक पहलु से देखे तो इसे तीर्थराज कहा जाता&nbsp; है मतलब समस्त तीर्थो का राजा , कई मंदिर , चर्च <strong>इलाहाबाद</strong> <strong>प्रयागराज में घूमने की जगह</strong> (<strong>Tourist Places in Prayagraj in Hindi</strong>) के धार्मिक महत्त्व को बढ़ाते है  |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/allahabad-me-ghumne-ki-jagah/">20+ इलाहाबाद प्रयागराज में घूमने की जगह की जानकारी &#8211; कैसे पहुंचे कहाँ रुके क्या घूमे</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>विंध्याचल मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2019 19:59:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विंध्याचल मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित मिर्ज़ापुर जिले के एक कस्बे में है जिसकी मिर्ज़ापुर शहर से दूरी लगभग 7 किलोमीटर है विन्ध्याचल एक धार्मिक पर्यटन स्थल है जहां आपको माता दुर्गा के कई मंदिर देखने को मिल जायेंगे Maa Vindhyavasini Devi Mandir यहाँ का प्रमुख मंदिर है जो की एक शक्तिपीठ भी है इसके आलावा विन्ध्याचल में आप अष्टभुजी देवी मंदिर , काली खोह  मन्दिर , सीता कुण्ड , विन्ध्याचल के गंगाघाट के भी दर्शन कर सकते है &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0/">विंध्याचल मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h2 class="wp-block-heading">विंध्याचल मंदिर</h2>



<p><strong>विंध्याचल मंदिर</strong> उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित मिर्ज़ापुर जिले के एक कस्बे में है जिसकी <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Mirzapur" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मिर्ज़ापुर</a> शहर से दूरी लगभग 7 किलोमीटर है विन्ध्याचल एक धार्मिक पर्यटन स्थल है जहां आपको माता दुर्गा के कई मंदिर देखने को मिल जायेंगे <em>Maa Vindhyavasini Devi Mandir</em> यहाँ का प्रमुख मंदिर है जो की एक <a href="https://safarjankari.com/list-of-51-shakti-peeth-hindi-me/">शक्तिपीठ</a> भी है इसके आलावा विन्ध्याचल में आप अष्टभुजी देवी मंदिर , काली खोह&nbsp; मन्दिर , सीता कुण्ड , विन्ध्याचल के गंगाघाट के भी दर्शन कर सकते है |</p>



<p>यह क़स्बा गंगा किनारे बसा हुआ है और बहुत ही शान्त है यहाँ आपको बस धार्मिक विचारधारा वाले लोग ही दिखाई पड़ते है हालाँकि यहाँ के मंदिरों में अत्यंत भीड़ देखने को मिलती है परन्तु विन्ध्याचल टाउन शांतिप्रिय जगह है विन्ध्याचल में आपको पहाड़ भी देखने को मिल जायेंगे परन्तु ये पहाड़ पठार होते आप इन्हें बर्फीले पहाड़ समझने की गलती न कर दीजियेगा |</p>



<p>विन्ध्याचल क़स्बा वैसे तो&nbsp; 51 शक्तिपीठो में से एक<strong> Maa Vindhyavasini Devi</strong>&nbsp; का निवास स्थान है और यहाँ का माहोल भी कुछ ऐसा प्रतीत होता है जैसे सच में माता सती यहाँ पर विराजमान हो पावन गंगा नदी इस स्थान की धार्मिक महत्वता को और भी बढाती है यहाँ के प्राकृतिक हरे भरे नज़ारे जिनमे पेड़ पौधों की हरियाली और पठार और इन पठारों के ऊपर बने मन्दिर भी आकर्षण का केंद्र रहते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">How to reach Vindhyachal &#8211; विन्ध्याचल कैसे पहुचे</h5>



<p>आपको <em><strong>विंध्याचल मंदिर</strong></em>&nbsp; के दर्शन हेतु मिर्ज़ापुर स्थित विन्ध्याचल पहुचना होगा यहाँ आना आसान है क्यूंकि यह स्थान भारत के प्रतिष्ठित धार्मिक शहर वाराणसी से महज 65 किलोमीटर और प्रयागराज&nbsp; से महज 85&nbsp; किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<p>~ यदि आप रेलमार्ग से विन्ध्याचल आना चाहते है तो आपको बता दे की यहाँ का निकटतम एअरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एअरपोर्ट बाबतपुर वाराणसी में स्थित है जिसका IATA कोड VNS है आपको भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरो से यहाँ के लिए फ्लाइट मिल जाएगी और यहाँ से आप विन्ध्याचल बस द्वारा , ट्रेन द्वारा या फिर आप कोई बी कार या ऑटो बुक करके जा सकते है |</p>



<p>~ यदि आप रेलवे मार्ग से विन्ध्याचल आना चाहते है तो आपको बता दे की यहाँ पर एक रेलवे स्टेशन है जिसका कोड BDL है इस रेलवे स्टेशन पर मुम्बई और देलही &#8211; हावड़ा रूट की तमाम ट्रेन रूकती है फिर भी आप इन्टरनेट के माध्यम से पता कर ले की आपके शहर से कोई ट्रेन सीधे विन्ध्याचल जाती है या नहीं यदि आपके शहर से कोई भी ट्रेन <strong>Maa Vindhyavasini Devi</strong> धाम विन्ध्याचल के लिए नहीं है तब भी कोई परेशानी की बात नहीं है आप मिर्ज़ापुर , वाराणसी , प्रयागराज इनमे से कही भी पहुच जाये उसके बाद आराम से आप <strong>विंध्याचल मंदिर</strong> आ सकते है |</p>



<p>~ यदि आप सड़क मार्ग से यहाँ आना चाहते है तो यह स्थान भारत के सभी शहरो से अच्छी तरह से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है बड़ी आसानी से आप यहाँ आ सकते है यहाँ के निकटतम शहर मिर्ज़ापुर , वाराणसी , प्रयागराज है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कहा रुके &#8211; Where to stay</h5>



<p><strong>विंध्याचल मंदिर</strong> का यह पवित्र स्थान कोई बड़ी जगह नहीं है परन्तु माँ जगदम्बा का एक पावन शक्तिपीठ होने के कारण यहाँ पर माता के भक्तो का ताँता लगा रहता है इसीलिए यहाँ पर आपको तमाम धर्मशालाए और होटल मिल जायेंगे जहां आप आसानी से रुक सकते है बाकी आप चाहे तो मिर्ज़ापुर , वाराणसी में भी रुक सकते है |</p>



<p>कहने का मतलब इतना ही है कि यहाँ पर ठहरने की कोई भी समस्या नहीं है वैसे अगर आप थोडा सा ध्यान दे और यहाँ सुबह ही पहुच जाये तो आप शाम 4-5 बजे तक यहाँ के सभी प्रमुख तीर्थ स्थान जैसे <strong>महा काली खोह मन्दिर</strong> ,<strong> अष्टभुजी मन्दिर</strong> , <strong>सीता कुण्ड</strong> , <strong>गंगा घाट</strong> और <strong>Maa Vindhyavasini Devi mandir</strong> के दर्शन कर सकते है तो यहाँ रात बिताने की आपको आवश्यकता नहीं पड़ेगी फिर भी यदि आप की ट्रेन या जिस भी साधन से आते है वो शाम को या रात को यहाँ पहुचता है तब आप यहाँ रुक सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">विन्ध्याचल ले पर्यटन स्थल</h5>



<p>यह स्थान मुख्य रूप से एक धार्मिक स्थल है इसीलिए यहाँ पर आपको बस मन्दिर ही दिखाई देंगे मन्दिरों में भी खासकर माँ जगदम्बा के तीन मन्दिर यहाँ की पहचान है खासकर <em>विंध्याचल मंदिर  </em>जो की 51 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ है और ये सारे मन्दिर आसपास ही है आप आराम से एक ही दिन में इनके दर्शन कर सकते है |</p>



<p>यदि आपको जाकारी है तो आप इन मंदिरों में अपनेआप जा सकते है वर्ना आप ऑटो बुक कर लीजिये ऑटो आपको सारे मन्दिरों के दर्शन करवाकर आपको रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड या फिर आपके होटल पर लाकर छोड़ देगा चलिए एक एक करके इन तीर्थ स्थलों के बारे में जानकारी कर ली जाये &#8211; </p>



<h6 class="wp-block-heading">गंगा घाट</h6>



<p>विन्ध्याचल क़स्बा पावन <a href="https://www.mapsofindia.com/maps/rivers/ganges.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">गंगा नदी</a> के किनारे बसा हुआ है इसी कारण इस स्थान की आस्था और भी बढ़ जाती है मुख्यता यहाँ आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले गंगा नदी के घाट पर डुबकी लगाकर अपने आप को धन्य करते है यहाँ गंगा घाट <strong>विंध्याचल मंदिर</strong> के समीप ही है अच्छा यहाँ आपको गंगा नदी के दोनों किनारों पर स्नान करने की सुविधा है |</p>



<p>यहाँ तमाम नाविक आपको गंगा नदी के दूसरे किनारे पर ले जाकर स्नान करवा सकते है और दोनों किनारों के  बीच  एक शिवलिंग भी है आप जैसे ही घाट के पास पहुचोगे आपको ये नावीक यही बोलेंगे की चलिए आपको शिवलिंग के दर्शन करा देंगे और इधर वाले घाट पर पत्थर बहुत ज्यादा है तो आप दुसरे किनारे पर स्नान करे |</p>



<p>ध्यान दे ये सब बेकार की बाते है आप जहां चाहे वहा स्नान करे घाट के समीप आपको छोटे छोटे तखत दिखाई देंगे वहां आप अपने कपडे सामान इत्यादि रख सकते है महिलाओ के लिए कपडे बदलने के लिए छोटे छोटे स्थान बनाये गये है जो की उच्च किस्म के नहीं है फिर भी वहां पर व्यवस्था है आसपास आपको गंगा जल ले जाने के लिए छोटी बड़ी बोतल-पिपिया मिल जाएँगी&nbsp; , यहाँ पर साफ़ सफाई अच्छी नहीं है गंगा किनारे सब तरफ गंदगी दिखाई देती है जो की सोचनीय है |</p>



<p>अच्छा यहाँ पर एक छोटा सा शनि मन्दिर भी है आप वहां भी दर्शन कर सकते है आपको गंगा घाट जाते समय तमाम भिखारी दिखाई देंगे आपकी श्रधा हो तो आप इन गरीब लोगो की भी मदद कर सकते है मेरा यही मानना है की जरूरतमन्द की मदद करना ही सबसे बड़ा पुण्य का काम है मै ये नहीं कहता की आप मन्दिरों में कुछ दान न दे परन्तु सम्भव हो तो आपको गरीबो की भी मदद कर&nbsp; देनी चाहिए जिससे&nbsp; <strong>विंध्याचल मंदिर</strong> की <strong>Maa Vindhyavasini Devi</strong> बिलकुल आपसे नाराज नहीं होंगी अपितु और ज्यादा प्रसन्न होंगी&nbsp; |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/Ganga-Ghat-Maa-Vindhyavasini-Devi-Temple.jpeg" alt="Maa Vindhyavasini Devi"/><figcaption>गंगा घाट विन्ध्याचल</figcaption></figure>



<h6 class="wp-block-heading">Maa Vindhyavasini Devi Mandir &#8211; विंध्याचल मंदिर</h6>



<p>51 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ <em><strong>विंध्याचल मंदिर</strong></em> की&nbsp; <strong>Maa Vindhyavasini Devi</strong> की महिमा अपरम्पार है साल भर यहाँ श्रद्धालु माँ के दर्शन हेतु आते रहते है अत्यंत पवित्र स्थान है जब आप मंदिर जाओगे रास्ते में आपको मेला जैसा दिखाई देगा&nbsp; आपको रेस्टोरेन्ट , प्रसाद की दुकाने , बच्चो के खिलोंनो की दुकाने दैनिक इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओ की दुकाने दिखाई पड़ती है आप यहाँ से प्रसाद ले जिस दुकान से प्रसाद ले वही अपने चप्पल जूते रख सकते है इसके बाद आप चलते चले जाये कुछ दूरी चलने के बाद&nbsp; आपको यह शक्तिपीठ दिखाई देता है आप सच्चे मन से <strong>Maa Vindhyavasini Devi</strong> का नाम लेकर लाइन में लग जाए यहाँ भीड़ होती है तो थोडा धैर्य रखे |</p>



<p>लाइन में गर्मियों के समय में कूलर पंखे इत्यादि चला करते है आपकी दर्शन लाइन धीरे धीरे आगे बढ़ेगी और आखिर आप पहुच जाओगे&nbsp; माँ के दरबार में हाथ जोड़कर माता का आशीर्वाद ले यहाँ आपको बहुत ही कम समय मिलेगा मन्दिर प्रांगण में कुछ और मन्दिर भी है आप उनके भी दर्शन कर सकते है ध्यान दे यहाँ के पंडा लोगो से सावधान रहे यहाँ लूट खसोट चरम पर है जहां तक संभव हो आप पंडितो के बहकावे में ना आवे |</p>



<p>हमने जहां से प्रसाद लिया था उसी दुकान का एक पंडित हमारे साथ ही चल पड़ा उसने हम लोगो की दर्शन भी जल्दी करवा दिए परन्तु बाद में एक मोटी दक्षिणा की मांग करने लगा तो ये चीजे आप ध्यान दे |</p>



<p>&nbsp; &nbsp; यह भी पढ़े &#8211;</p>



<ul class="wp-block-list"><li><a href="https://safarjankari.com/ram-janmbhumi-ayodhya-me-ghumne-ki-jagahe/">अयोध्या दर्शन Ayodhya Darshan की सम्पूर्ण जानकारी</a></li><li><a href="https://safarjankari.com/chandrika-devi-mandir-51-shaktipeeth-mandir-lucknow-hindi-me/">Chandrika Devi Mandir,51 Shaktipeeth Mandir लखनऊ के दो पावन स्थल</a></li><li><a href="https://safarjankari.com/naimisharanya-neemsaar-tirth/">नैमिषारण्य तीर्थ सीतापुर उत्तर प्रदेश की सम्पूर्ण जानकारी | A Complete Guide of Naimisharanya Neemsaar Tirth</a></li></ul>



<h6 class="wp-block-heading">काली खोह मंदिर</h6>



<p><em><strong>विंध्याचल मंदिर</strong></em>&nbsp; के दर्शन के बाद आप जाइये महा काली खोह मन्दिर यह मन्दिर देवी काली को समर्पित है यहाँ भी जब आप जाओगे तो रास्ते में आपको प्रसाद , खिलोने इत्यादि की दुकाने दिखाई देंगी और फिर आगे मंदिर का प्रवेश द्वार और उसमे लगी लाइन दिखाई देती है आप लाइन में लग जाइए यहाँ आपको सबसे पहले श्री भद्र काली&nbsp; मंदिर पड़ेगा फिर <a href="http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-article/hanuman-114022200005_1.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">हनुमान</a> मन्दिर , शिवलिंग फिर प्रमुख मूर्ति दिखाई देगी जिसके आप दर्शन करे और बाहर निकल आये यह मंदिर प्रांगण सुर्ख लाल रंग का बना हुआ है&nbsp; यहाँ पर एक गज़ब का उत्साह भक्तो में दिखाई&nbsp; देता है&nbsp; इस मन्दिर के पड़ोस में ही सिद्धि दात्री माँ दुर्गा का भी मन्दिर है आप वहा भी दर्शन कर लीजिये |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/काली-खोह-मंदिर-विन्ध्याचल.jpeg" alt=""/><figcaption>काली खोह मन्दिर विन्ध्याचल प्रवेश द्वार</figcaption></figure>



<h6 class="wp-block-heading">अष्टभुजा मन्दिर</h6>



<p>यह पावन अष्टभुजा मन्दिर <strong>विंध्याचल मंदिर</strong>&nbsp;से लगभग 3 -4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह मन्दिर एक पहाड़ी पर है और वहां तक जाने के लिए हमको तकरीबन 60-70 सीढियां चढ़नी पड़ती है हालाँकि रास्ता बढ़िया है कोई परेशानी वाली बात नहीं है रास्ते में इस मंदिर में तो बहुत सारी मूर्तियों की दुकाने पड़ती है मान के चलिए यहाँ पर भी एक मेला जैसा ही लगता है जहां तमाम तरह की दुकाने होती है कहा जाता है की <strong>अष्टभुजा माता</strong> अपने आठ भुजाओ से समस्त दिशाओ में भक्तो की रक्षा करती है |</p>



<p>जब आप 60-70 सीढिया चढ़कर अष्टभुजा मंदिर की तरफ आगे बढ़ेंगे तो आपको मन्दिर के प्रवेश द्वार पर भीड़ दिखाई देती है यहाँ से आपको गुफा में प्रवेश करना है और झुके झुके ही माता अष्टभुजा के दर्शन करने है इसके बाद आप गुफा से बहार निकल आयेंगे यही समीप में भैरव मन्दिर भी है आप वहां के भी दर्शन कर सकते है और अष्टभुजा मंदिर से सम्पूर्ण विन्ध्याचल का नजारा दिखाई देता है जो की अद्भुत है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/06/अष्टभुजा-मन्दिर-विन्ध्याचल.jpg" alt="अष्टभुजा मंदिर"/><figcaption>अष्टभुजा मंदिर के रास्ते में सजी दुकाने</figcaption></figure>



<h6 class="wp-block-heading">सीता कुण्ड</h6>



<p>सीता कुण्ड नामक स्थान एक छोटी से पहाड़ी पर है जहां <a href="https://safarjankari.com/ayodhya-darshan-ki-jankari/">भगवान् राम</a> , लक्ष्मण और सीता की मुर्तिया लगी हुई है मान्यता है की इसी स्थान पर माता सीता ने स्नान किया था वैसे तो यह एक साधारण सा जल स्त्रोत है जो की कभी सूखता नहीं है यही समीप में कई और मन्दिर है जैसे हनुमान मंदिर , माँ दुर्गा मंदिर , सीता मंदिर इत्यादि |</p>



<p>मात्र नवमी के दिन सीता कुण्ड पर भारी संख्या में महिलाये स्नान हेतु आती है और सौभाग्य सामग्री का दान देती है है और अपने पितरो को जल अर्पण करती है&nbsp;</p>



<p><strong>विशेष टिप्पणी &#8211; </strong>विन्ध्याचल में लूट खसोट चरम पर है तो कृपया सावधान रहे दान दक्षिणा के नाम पर यहाँ लोगो को ठगा जाता है हम दान की निंदा नहीं करते है परन्तु किसी को भी दान के लिए बाध्य करना उचित नहीं होता है |</p>



<p>यहाँ पर मान्यता है कि<em><strong> विंध्याचल मंदिर</strong></em>&nbsp; की&nbsp; <strong>Maa Vindhyavasini Devi</strong> की मौजूदगी अत्यंत प्राचीन यहाँ तक की सृष्टि से पहले की है और इस का वजूद प्रलय के बाद भी रहेगा |</p>



<p>नवरात्र में यहाँ पर अत्यंत भीड़ हो जाती है देश के कोने कोने से लोग <strong>विंध्याचल मंदिर&nbsp;</strong>के दर्शन हेतु यहाँ दौड़े चले आते है यहाँ की मान्यता है की नवरात्र में माँ मन्दिर की छत पर लगे ध्वज की पताका पर निवास करती है |</p>



<p>इस क्षेत्र में आपको माता भगवती के त्रिगुण स्वरुप के दर्शन हो जाते है जिसे त्रिकोण यन्त्र भी कहा जाता है इसमें विंध्याचल मंदिर&nbsp;, अष्टभुजी मंदिर और महा काली खोह मंदिर है |</p>



<p>यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B0" target="_blank" rel="noopener noreferrer">नवम्बर</a> से लेकर अप्रैल तक का ही है क्यूंकि बाकि दिनों में यहाँ बहुत गर्मी रहती है वैसे जाने को आप कभी भी जा सकते हो |</p>



<p>दोस्तों ये थी हमारी <strong><em>&nbsp;विंध्याचल मंदिर</em>&nbsp; </strong> से सम्बंधित पोस्ट जिसमे हमने आपको विन्ध्याचल के प्रत्येक प्रसिद्ध मन्दिर के बारे में बताया है यदि आप को यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे अपने दोस्तों&nbsp; में शेयर करे यदि आपको कोई सुझाव हो तो आप हमें <a href="https://safarjankari.com/contact-us/">मैसेज</a>&nbsp;कर सकते है |</p>
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		<title>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ और 51 शक्तिपीठ मन्दिर लखनऊ घूमने की जानकारी</title>
		<link>https://safarjankari.com/chandrika-devi-mandir-51-shaktipeeth-mandir-lucknow-hindi-me/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 May 2019 16:49:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Tourist Spot in Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow Parytan]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज की पोस्ट में हम आपको रूबरू कराएँगे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो अत्यंत जाने माने मंदिरों से जिसमे से  एक है Maa Chandrika Devi Mandir और दूसरा है 51 Shaktipeeth Mandir, दोनों मन्दिरों की अपनी अलग अलग महिमा है , एक और जहां माँ चन्द्रिका देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है वही 51 शक्तिपीठ मन्दिर अभी नया ही बना हुआ है हालाँकि 51 शक्तिपीठ के प्रांगण में आदिशक्ति माता भुइयां देवी मंदिर काफी पुराना है &#124;</p>
<p>पर्यटन के लिहाज से लखनऊ जिला भी किसी से कम नहीं है इस शहर में अनेको पर्यटन स्थल है जो की देखने लायक है परन्तु आज हम लोग लखनऊ शहर से बाहर स्थित सीतापुर रोड के दो मन्दिरों के बारे में बात करने वाले है , लखनऊ वासियों के लिए माँ चन्द्रिका देवी धाम अनेको सालो से आस्था का पर्याय बना हुआ है &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<h2 class="wp-block-heading">चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ और 51 शक्तिपीठ मन्दिर लखनऊ दो पावन स्थल</h2>



<p>नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट में हम आपको रूबरू कराएँगे उत्तर प्रदेश की राजधानी <a href="https://lucknow.nic.in/tourist-places/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">लखनऊ</a> के दो अत्यंत जाने माने मंदिरों से जिसमे से  एक है <strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong> और दूसरा है <strong>51 </strong>शक्तिपीठ मन्दिर |</p>



<p> दोनों मन्दिरों की अपनी अलग अलग महिमा है , एक और जहां <em>माँ चन्द्रिका देवी मंदिर</em> अत्यंत प्राचीन है वही <strong><em>51 शक्तिपीठ मन्दिर</em> </strong>अभी नया ही बना हुआ है हालाँकि <a href="https://safarjankari.com/list-of-51-shakti-peeth-hindi-me/"><em>51 शक्तिपीठ</em></a> के प्रांगण में <strong>आदिशक्ति माता भुइयां देवी मंदिर</strong> काफी पुराना है |</p>



<p>पर्यटन के लिहाज से लखनऊ जिला भी किसी से कम नहीं है इस शहर में अनेको पर्यटन स्थल है जो की देखने लायक है परन्तु आज हम लोग लखनऊ शहर से बाहर स्थित सीतापुर रोड के दो मन्दिरों के बारे में बात करने वाले है , लखनऊ वासियों के लिए<em> <strong>माँ चन्द्रिका देवी धाम</strong></em> अनेको सालो से आस्था का पर्याय बना हुआ है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">चन्द्रिका देवी मन्दिर लखनऊ और 51 शक्तिपीठ मन्दिर लखनऊ कैसे पहुचे</h4>



<p>दोनों धार्मिक स्थल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित है और यहाँ पहुचना अत्यन्त आसान है  लखनऊ कैसे पहुचना है आदि की जानकारी हमारी पिछली पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/places-to-visit-in-lucknow/">https://safarjankari.com/places-to-visit-in-lucknow/</a>  में आप पढ़ सकते है |</p>



<p>अच्छा ये दोनों मंदिर सीतापुर रोड पर ही है जब आप लखनऊ से सीतापुर की ओर जाओगे तो बिठौली क्रासिंग के समीप आपको <em><strong>51 शक्तिपीठ मन्दिर</strong>  </em>मिलेगा और इसके और आगे जाने पर बक्शी का तालाब क्षेत्र में आपको <strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ</strong> दिखाई पड़ता है  , <strong><em>51 शक्तिपीठ</em> मंदिर </strong>बिलकुल सड़क के किनारे ही नंदना ग्राम में स्थित है और <em><strong>माँ चन्द्रिका देवी मन्दिर</strong></em> सीतापुर रोड से लगभग 6 किलोमीटर अन्दर कठवारा गाँव में स्थित है ||</p>



<p><strong>51 शक्तिपीठ मन्दिर</strong>  लिए आपको तमाम साधन मिल जायेंगे परन्तु <em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> के लिए यदि आप अपने साधन से जाय तो ज्यादा अच्छा है क्यूंकि जो सीतापुर रोड से आपको 6 किलोमीटर अन्दर जाना होता है वहां आपको साधन की असुविधा हो सकती है वैसे अमूमन साधन चलते है पर कभी कभी यहाँ साधन आपको समय से नहीं मिलते है तो आप इस बात का ध्यान जरूर दे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">51 शक्तिपीठ मन्दिर लखनऊ &#8211; 51 Shaktipeeth Mandir</h4>



<p>इस मन्दिर में जाने से पहले इसी मंदिर प्रांगण में बने <strong>आदिशक्ति माता भुइयां देवी मंदिर</strong> में जरूर जाये स्थानीय लोगो से पूछने पर पता चला की ये बहुत पुराना मंदिर है और नवरात्र के दिनों यहाँ भक्त भरी संख्या में <em>माता भुइयां देवी</em> के दर्शन हेतु यहाँ आता है और आदिशक्ति माँ के दर्शन करके अपने जीवन को धन्य बनाता है |</p>



<p> यह पूजनीय स्थल अत्यंत शांत है यहाँ आसपास बैठने के लिए कुर्सियां बनी हुई है इस स्थल पर आकर मन को सकून मिलता है  , यहाँ संकट मोचन हनुमान जी , विघ्नहर्ता गणेश जी , माता दुर्गा जी , भैरव जी की पूजा अर्चना की जाती है |</p>



<p><strong>आदिशक्ति भुइयां माता के प्राचीन मन्दिर</strong> में श्रद्धालु अपनी मनोकामना को पूर्ण करने हेतु चुनरी बांधते है और माता अपने भक्तो की मुरादे पूरी करती है यहाँ पर आदिशक्ति भुइयां माता पिण्डी के रूप में विद्दमान है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/05/आदिशक्ति-भुइयां-माता-का-प्राचीन-मंदिर-लखनऊ.jpeg" alt="आदिशक्ति माता भुइयां का प्राचीन मन्दिर"/><figcaption>आदिशक्ति भुइयां माता का प्राचीन मंदिर लखनऊ</figcaption></figure>
</div>


<p>चलिए अब बात कर लेते है जो <strong>51 शक्तिपीठ मन्दिर</strong> बना हुआ है इस मंदिर का निर्माण अभी जल्द ही हुआ है , दोस्तों हमको 51 शक्तिपीठो के दर्शन हेतु भारत , पाकिस्तान , नेपाल , बांग्लादेश , श्रीलंका , तिब्बत आदि स्थानों पर जाना पड़ता था परन्तु अब भारत में उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लखनऊ में एक ऐसे भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है जहां इन समस्त <strong>51 <em>शक्तिपीठ</em></strong>  के दर्शन करे जा सकते हो |</p>



<p>इस मंदिर में 51 शक्तिपीठो की रज लाइ गई और उस रज से यहाँ पर मन्दिर का निर्माण हुआ है अन्य मंदिरों की तुलना में यह मन्दिर बहुत ही साफ़ सुथरा है , इस बहुमंजिला मंदिर में जो व्यक्ति सीढियां चढ़ने में असक्षम है उनके लिए लिफ्ट की भी व्यवस्था की गई है  |</p>



<p>इस अद्भुत मन्दिर का श्रेय <strong>आशीष सेवा यज्ञ न्यास</strong> को जाता है जिसके इतने परिश्रम स्वरुप हमको एक ऐसा मन्दिर मिला जहां पर माता दुर्गा के समस्त शक्तिपीठो के दर्शन एक साथ सम्भव हो पाए , आखिरी मंजिल पर भगवान भोलेनाथ की स्फटिक की शिवलिंग स्थापित है जो की सफ़ेद रंग की अत्यंत सुन्दर दिखाई देती है |</p>



<p> जब हम समस्त <em>51 शक्तिपीठो</em> के दर्शन करने के पश्चात सबसे आखिरी मंजिल पर पहुचे तो वहां का नजारा सच में अद्भुत था आप को अपने आप वहां भोले बाबा के होने का एहसास होगा बड़े से नंदी जी और उनके सामने बना भव्य मंदिर जिसमे सफ़ेद रंग की शिवलिंग हर भक्त का मन मोह लेती है |</p>



<p><br>यह भी पढ़े  <br><a href="https://safarjankari.com/lucknow-ka-mandir-lord-ayyappa-temple/">भगवान अयप्पा मन्दिर गोमती नगर लखनऊ की जानकारी </a></p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/05/51-Shaktipeeth-teerth-Lucknow.jpeg" alt="51 शक्तिपीठ मन्दिर लखनऊ "/><figcaption>51 शक्तिपीठ मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading"><em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em></h4>



<p>गोमती नदी के किनारे स्थित बक्शी का तालाब नमक क्षेत्र में बना यह माता का मन्दिर अत्यंत पुराना है और यहाँ श्रद्धालु भारी संख्या में आते है खासकर नवरात्र में तो यहाँ पर भक्तो का एक बहुत बड़ा हुजूम देखने को मिलता है यहाँ पर हर महीने अमावस्या के उपलक्ष्य में एक मेले का आयोजन किया जाता है तो देखा जाय तो नवरात्र , अमावस्या के दिन और छुट्टी वाले दिन मतलब रविवार को <em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> कुछ ज्यादा ही भीड़ रहती है |</p>



<p><em><strong>माँ चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> वाले रास्ते पर दोनों तरफ प्रसाद की दुकाने , खाने पीने की दुकाने , खिलोनो की दुखाने , घरेलु सामान की दुकाने सजी हुई रहती है<em> </em>यह भव्य मन्दिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है , यहाँ मान्यता है की सुधन्वा कुण्ड के पास स्थित एक प्राचीन नीम के वृक्ष के कोटर में नौ दुर्गाओ के साथ उनकी वेदियाँ आज भी मौजूद है |</p>



<p>इस मन्दिर का प्रांगण बहुत विशाल बना हुआ है इसमें<strong> </strong><em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> का दरबार , एक विशाल हवन कुण्ड , एक बड़ी सी यज्ञशाला , बर्बरीक का द्वार , मही सागर संगम तीर्थ आदि पावन स्थल है इस स्थल पर भी मन्नत मागने हेतु चुनरी की गांठ बांधने की प्रथा है तो आप भी न चुके माँ चन्द्रिका देवी से अपने मन की मुराद अवश्य मागे |</p>



<p>अच्छा <strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong>की जो बात मुझसे सबसे ज्यादा पसंद आई है वो ये की इस माता के दरबार में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता है माता के मंदिर की पूजा अर्चना पिछड़ा वर्ग के मालियों द्वारा की जाती है यही नहीं भैरवनाथ मतलब पछुआ देव के स्थल की पूजा अनुसूचित जाति के पासियो द्वारा करवाई जाती है</p>



<p>माता का यह पावन स्थल तीन और से तो गोमती नदी से घिरा हुआ है और अगर ध्यान दे तो इसके एक और वही समीप में बना महीसागर संगम से घिरा हुआ है लो अब आप लोग सोच रहे होंगे की ये एक नया नाम आ गया <strong>मही सागर संगम तीर्थ</strong> तो इसके बारे में भी बता देता हु ये मुख्य के समीप ही बना हुआ है इसे <strong>सुधन्वा कुण्ड</strong> नाम से भी जाना जाता है |</p>



<p>स्कन्द पुराण के अनुसार यदि आप शनिवार के दिन की अमावस्या को <strong>मही सागर संगम तीर्थ सुधन्वा कुण्ड</strong> में स्नान कर दान करने से जो फल मिलता  है वह पुष्कर में सात बार यात्रा , प्रयागराज की 8 बार यात्रा और प्रभाष की दस बार यात्रा के बराबर होता है ,<em> मही सागर संगम तीर्थ सुधन्वा कुण्ड</em>  का जल रोग विनाशक भी माना गया है इस कुण्ड में महादेव की एक बहुत बड़ी मूर्ति बनी हुई है , पर्यटन के लिहाज से भी सुधन्वा कुण्ड एक विशेष महत्त्व रखता है |</p>



<p>दोस्तों <em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> का पावन स्थान धार्मिक होने के साथ साथ अत्यंत रमणीय भी है यहाँ का हरा भरा रास्ता और मही सागर संगम तीर्थ के पावन जल के अन्दर भगवान भोलेनाथ की बड़ी सी मूर्ति बड़ी मनोहर है , रास्ते में बने एक दूकान पर रुककर हमने चाय पी जो की हमको कुल्हड़ में दी गई कुल्हड़ की चाय का स्वाद की अलग होता है क्या कहे बस मजा आ गया था वो अदरक वाली चाय को कुल्हड़ में पीकर |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/05/mahadev-murti-chandrika-devi-mandir.jpeg" alt="चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ"/><figcaption>मही सागर संगम तीर्थ सुधन्वा कुण्ड में हर हर महादेव</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/05/Chandrika-Devi-Mandir-Lucknow-Tea-Enjoy.jpeg" alt="चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ"/><figcaption>माँ चन्द्रिका देवी मंदिर के रास्ते में कुल्हड़ वाली चाय का स्वाद</figcaption></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष &#8211; Conclusion</h6>



<p>आज हमने आपको अपनी इस पोस्ट के माध्यम से लखनऊ जनपद के दो महत्वपूर्ण मन्दिर <strong><em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर लखनऊ </strong></em> </strong>और <strong>51  शक्तिपीठ मन्दिर द</strong>र्शन कराये , मुख्यतः ये दोनों पावन मन्दिर माता रानी को समर्पित है और लखनऊ पर्यटन को एक नये आयाम पर पहुचाने का कार्य कर रहे है जहां <em><strong>चन्द्रिका देवी मंदिर </strong></em> ना जाने कितने समय से अपने भक्तो की सारी मन्नते पूरी कर रहा है वही <em><strong>51 शक्तिपीठ मंदिर</strong></em> एक आधुनिक ज़माने का आस्था , भक्ति से ओतप्रोत मन्दिर है तो आप कभी भी लखनऊ जाए तो इन दोनों धार्मिक स्थल अवश्य जाये |</p>
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