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	<title>Uttarakhand Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
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	<title>Uttarakhand Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>टनकपुर में घूमने की जगहें &#8211; Tanakpur Tourist Places की A to Z जानकारी</title>
		<link>https://safarjankari.com/tanakpur-tourist-places-ki-a-to-z-jankari-hindi-me/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Oct 2021 08:10:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
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		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
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		<category><![CDATA[शारदा घाट टनकपुर]]></category>
		<category><![CDATA[श्री सिद्धबाबा मन्दिर नेपाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>टनकपुर एक टाउन है जो की उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में आता है यहाँ घूमने के लिये आपको माँ पूर्णागिरि मन्दिर , शारदा घाट , श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर, श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर मिलेंगे इसके अलावा टनकपुर  से थोड़ी ही दूरी पर नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम के स्थल पर बाबा सिद्धनाथ का मन्दिर है और घूमने की बात करे तो यहाँ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर सिखों का पवित्र स्थल श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब है  &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>टनकपुर</strong> एक टाउन है जो की <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखण्ड</a> राज्य के चम्पावत जिले में आता है यहाँ घूमने के लिये आपको माँ पूर्णागिरि मन्दिर , शारदा घाट , श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर, श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर मिलेंगे इसके अलावा <strong><em>टनकपुर</em></strong>  से थोड़ी ही दूरी पर <a href="https://www.welcomenepal.com/">नेपाल</a> के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम के स्थल पर बाबा सिद्धनाथ का मन्दिर है और घूमने की बात करे तो यहाँ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर सिखों का पवित्र स्थल श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">अच्छा यहाँ पर शारदा नदी में राफ्टिंग का भी लुत्फ़ उठा सकते हो , यहाँ पर बूम नाम की जगह पर आप राफ्टिंग की सेवा पा सकते है  और Tanakpur में एक झील भी है जिसे श्यामलाताल कहते है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">टनकपुर के बारे में </h2>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो <strong>टनकपुर</strong> माँ पूर्णागिरि मन्दिर के लिये ही जाना जाता है लेकिन इस पवित्र मन्दिर के अलावा भी यहाँ कुछ पर्यटन स्थल है जहाँ आप जा सकते हो सबसे पहले आप जान लो की यह स्थल  चम्पावत जिले  के अन्तर्गत आता है यहाँ एक सरकारी बस अड्डा है और एक रेलवे स्टेशन भी है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यहाँ की मार्केट भी ठीक ठाक है जहाँ आपके काम का सब सामान आसानी से मिल जायेगा , यहाँ पे ढेर सारे होटल धर्मशालाये रेस्टोरेंट भी उपलब्ध है जिससे आपको ठहरने और खाने पीने की यहाँ कोई मुश्किल नहीं होगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको एक जानकारी और दिए दे रहे है स्वामी विवेकानंद जी 20 जनवरी 1901 को <strong><em>टनकपुर</em></strong>  आये थे और एक किराने की दूकान पर रात्रि विश्राम किया था स्वामी जी के साथ स्वामी शिवानंद , स्वामी सदानद , स्वामी विरजानन्द और लाला गोविन्द शाह भी थे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे टनकपुर </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह एक जानी पहचानी जगह है तो यहाँ आपके लिए रेल सड़क वायु तीनो माध्यम खुले हुए हो आपको जिस भी माध्यम से ठीक लगे आप उसी साधन से आये  हमने अपनी पिछली पोस्ट Maa Purnagiri में <strong>टनकपुर </strong>पहुँचने की समस्त डिटेल्स दे दी है आप वहां जाकर आप पढ़ सकते हो अरे छोड़ो  मै आपको अपनी पिछली पोस्ट से लेके यही कॉपी किये दे रहा हूँ &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">हवाई मार्ग से </h5>



<p>यदि आप हवाई मार्ग मतलब हवाई जहाज से <strong><em>टनकपुर</em></strong>  आना चाहते हो तो आप जान लो यहाँ का निकटतम एअरपोर्ट पन्तनगर है जो की यहाँ से लगभग 100 किलोमीटर दूर होगा और पन्तनगर से आपको यहाँ के लिए टैक्सी आदि मिल जाएँगी |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रेल मार्ग  से </h5>



<p>यदि आप ट्रेन द्वारा यहाँ आना  चाहते हो आप को बता दे की<strong> टनकपुर</strong> में एक रेलवे स्टेशन है जिसका कोड TPU है इस रेलवे स्टेशन पे कई ट्रेन है एक ट्रेन दिल्ली से भी टनकपुर आती है बाकी एक है वो लखनऊ बरेली होते हुए<strong><em> टनकपुर</em></strong>  जाती है तो आप देख ले आपके शहर से यहाँ की कोई सीधी ट्रेन है या नहीं है तो कोई दिक्कत ही नहीं यदि नहीं है तो आप के आसपास के किसी शहर जैसे दिल्ली , लखनऊ , पीलीभीत , बरेली , प्रयागराज , गाजियाबाद , मुरादाबाद आदि तक अगर ट्रेन हो आप यहाँ आ जाये फिर यहाँ से आप <strong><em>टनकपुर</em></strong>  की ट्रेन ले सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="700" height="495" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg" alt="टनकपुर रेलवे स्टेशन" class="wp-image-10650" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-300x212.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /><figcaption>टनकपुर रेलवे स्टेशन</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">सड़क मार्ग से </h5>



<p>यह शहर  बहुत ही अच्छी तरह से भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है दिल्ली लखनऊ जैसे शहरो से तो आपको सीधी बस मिल जाएगी और आप अपने साधन से भी बड़ी ही आसानी से यहाँ आ सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">मैंने दिल्ली से <strong>टनकपुर</strong> की जो बस चलती है उसके किराये की बात नहीं की थी दिल्ली की बात करे तो वहां के ISBT आनंद विहार वाले बस स्टैंड से टनकपुर के लिए दिन भर बसे जाती है जिनका किराया महज रूपये 415 है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कहाँ रुके | Where to Stay in Tanakpur in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">किसी भी तरह की यहाँ रुकने की कोई परेशानी नहीं है इस स्थल पर बहुत सी धर्मशालाये है जिनकी लोकेशन की बात करे तो ज्यादातर धर्मशाला शारदा घाट के समीप है कुछ एक अच्छे होटल भी यहाँ मौजूद है  यदि आपका बजट बढ़िया है तो आप होटल में भी रुक सकते है लेकिन मेरे हिसाब से यहाँ पर लोग ज्यादा ठहरते नही सभी श्रद्धालु शारदा घाट में स्नान करके माँ पूर्णागिरि निकल जाते है लेकिन कुछ हमारी तरह ऐसे घुमक्कड़ होते है जिनके शहर की मार्किट शहर के लोकल टूरिस्ट स्पॉट में भी रूचि होती है इस प्रकार के लोग यहाँ रुकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कब जाये &#8211; Best Months For Tanakpur Visit</h4>



<p>यह एक ऐसी जगह है जहाँ आप साल भर जा सकते है लेकिन गर्मी यहाँ भी पड़ती है तो बेहतर की मई जून में यहाँ जाने से बचे अगर आपको गर्मी सताती हो तो वरना छुट्टियां तो मई जून में ही होती है बरसात के मौसम में भी अगर ज्यादा जरूरी न हो तो न जाय क्यूंकि माँ पूर्णागिरि पहाड़ पे है और पहाड़ बरसात में थोडा रूठ जाते है |<br></p>



<h4 class="wp-block-heading">टनकपुर के पर्यटन स्थल | Tanakpur Tourist Places in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">अब हम आपको यहाँ के सभी पर्यटन स्थल के बारे में बताने वाले है जिनमे कुछ पर्यटन स्थल <strong>टनकपुर</strong> टाउन में ही है बाकी कुछ थोड़ी दूरी पर है लेकिन मेरा ये मानना है कि जब आप यहाँ आ ही गये है तो क्या पास क्या दूर जो भी टूरिस्ट स्पॉट उधर नजदीक में हो घूम डालिये तो आइये घूमते है अब<strong> Tanakpur Tourist Places<em> </em></strong>&#8211;</p>



<h5 class="wp-block-heading">शारदा घाट</h5>



<p class="has-text-align-justify">शारदा नदी पे बना एक घाट जिसे शारदा घाट कहते है यहाँ स्नान करना बड़ा पुण्य का काम है यह स्थल <strong>टनकपुर</strong> रेलवे स्टेशन से समीप ही है आप यहाँ पैदल ही जा सकते है यहाँ पर एक सुन्दर सा घाट बना हुआ है जहाँ आप स्नान कर सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आपको चेंजिंग रूम भी देखने को मिल जायेंगे जो महिला श्रधालुओ के लिए टनकपुर नगर पालिका ने बनवाये है जो कि एक बढ़िया बात है , घाट के सामने ही हरे भरे पहाड़ है अब आप जरा सोचो  कल कल करती माँ शारदा और सामने हरे हरे पहाड़ कितना सुन्दर द्रश्य होगा |</p>



<p class="has-text-align-justify">शारदा घाट प्रांगण में कुछ छोटे छोटे मन्दिर बने हुए है जिनमे शारदा मैया का मन्दिर , शनि देव का मन्दिर प्रमुख है अच्छा इस घाट पे मुंडन भी होते है और मुंडन संस्कार के लिए एक बरामदा सा यहाँ बना है , शारदा घाट पे आपको लैया वाला प्रसाद भी मिल जायेगा तो आप सबसे पहले इस घाट पे स्नान करे उसके बाद ही अन्य जगहों पर जाए |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="751" height="418" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg" alt="शारदा घाट टनकपुर" class="wp-image-10652" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg 751w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर-300x167.jpg 300w" sizes="(max-width: 751px) 100vw, 751px" /><figcaption>शारदा घाट टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर  </h5>



<p class="has-text-align-justify">इस मन्दिर की <strong><em>टनकपुर</em></strong>  में अत्यधिक मान्यता है माँ पूर्णागिरि के भक्तो की यह तपस्थली हुआ करता था इस मंदिर का शिवलिंग प्राकृतिक है इस मन्दिर प्रांगण में आपको श्री राधा कृष्ण मन्दिर , श्री शीतला माता मंदिर , श्री दुर्गा माता मंदिर , श्री संतोषी माता मंदिर और एक बरामदा जिसमे आप निशुल्क विश्राम कर सकते है देखने को मिल जायेगा यहाँ पर बेंच वगैरह भी है यह पवित्र मन्दिर आपको शारदा घाट से पहले ही रास्ते में मिलेगा |</p>



<p class="has-text-align-justify"> आगे यहाँ की पौराणिक कहानी की बात करे तो चमपवत के सौज और धोन गाँव के तीन बब्राम्हणों को एक सपना आया और उस सपने में महादेव ने उन ब्राम्हणों को बताया की महादेव शारदा , बूम और कांकड़ घाट के भंवर में फसे है तो जब वे ब्राम्हण वहा गए तो उन्हें सच में एक शिवलिंग वहा फंसा मिला फिर क्या था ब्राम्हण बंधु उसे निकलकर टनकपुर ले आये और विश्राम करने के लिए उस दिव्य पंचमुखी शिवलिंग को एक स्थान पर रख दिया फिर उसके बाद जब वो लोग चले और शिवलिंग को उठाया तो वो शिवलिंग उठा ही नहीं बस जहाँ पर यह शिवलिंग रखा था वही पे आज  श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर  स्थित है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="552" height="506" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10653" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर.jpg 552w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-पंचमुखी-महादेव-मन्दिर-टनकपुर-300x275.jpg 300w" sizes="(max-width: 552px) 100vw, 552px" /><figcaption>श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">शारदा घाट के ही समीप स्थित है बजरंग बली का एक बहुत ही पवित्र मन्दिर जिसकी वहां के स्थानीय लोगो में बहुत ज्यादा मान्यता है यहाँ लोग अपनी मन्नते लेकर आते है इस मन्दिर का नाम है श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर तो यहाँ भी आप दर्शन जरूर करे काफी साफ़ सुथरा मन्दिर है और बहुत ही सुन्दर हनुमान जी की प्रतिमा बनी हुई है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="574" height="404" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10654" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg 574w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर-300x211.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-बालाजी-धाम-हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर-130x90.jpg 130w" sizes="auto, (max-width: 574px) 100vw, 574px" /><figcaption>श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">तो अब</mark> <mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">आपने शारदा घाट देख लिया  श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर मन्दिर देख लिया  श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर  देख लिया ये तीनो ही आसपास ही है आप आराम से पैदल इन जगहों को घूम सकते हो अब थोडा आगे चलते है |</mark></p>



<h5 class="wp-block-heading">बूम राफ्टिंग पॉइंट </h5>



<p class="has-text-align-justify">जी हां वही राफ्टिंग जो आपने ऋषिकेश में देखि होगी उसी तरह की राफ्टिंग <strong><em>टनकपुर</em></strong>  में शारदा नदी में होती है यह मुख्य शहर से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर पूर्णागिरि रोड पर ही बूम रेंज में होती है यदि आप राफ्टिंग करना चाहते हो तो यहाँ जरूर जाए यहाँ पर नाईट कैम्प की भी व्यवस्था है नाईट कैम्प मतलब खुले आसमान के नीचे एक कैम्प में आप रात गुजारे , बूम रेंज में ही एक मंदिर है जिसका नाम बूम मन्दिर श्री आद्य शक्ति पीठ है यहाँ भी आप दर्शन कर सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरि मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">माँ पूर्णागिरि धाम<strong>  <strong>Tanakpur Tourist Places</strong> </strong> का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला टूरिस्ट स्पॉट है टनकपुर के नाम से लोग पूर्णागिरि को ही जानते है यह ,यह मन्दिर पहाड़ो पर बना है जहाँ का रास्ता बहुत ही ज्यादा नैसर्गिक सुन्दरता को लपेटे हुए है श्री पूर्णागिरि धाम 108 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ है और इसकी उत्तर भारत में अत्यधिक मान्यता है यहाँ श्रधालुओ का तांता साल भर लगा रहता है यहाँ जाने के लिए आपको 3 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तो इस पावन धाम की अधिक जानकारी के लिए आप नीचे क्लिक करे और सारी जानकारी पढ़ ले |<br><a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/">Maa Purnagiri Yatra ki A to Z Jankari – माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहा ठहरे</a></p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ke do Raste" class="wp-image-10610" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्री सिद्धबाबा मन्दिर कंचनपुर नेपाल </h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की मान्यता है की जब तक सिद्धबाबा के दर्शन न कर लो तब तक माँ पूर्णागिरि के दर्शन अधूरे माने जाते है तो आपको बता दे की श्री सिद्धबाबा का यह मन्दिर <strong>टनकपुर &#8211; नेपाल</strong> के बॉर्डर को पार करके नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रम्हदेव नाम की जगह पर स्थित है , यहाँ पर आने के लिए सबसे पहले आपको टनकपुर / शारदा बैराज आना होगा फिर शारदा नदी पर बने पुल को पार करके आप नेपाल की सीमा में प्रवेश करोगे | </p>



<p>वहां आपकी आईडी देखि जाएगी उसके बाद आप या तो पैदल या फिर वहां मोटर साईकिल वाले १० रूपये प्रति व्यक्ति लेकर आपको ब्रम्हदेव की बाजार के पास छोड़ देंगे | ब्रम्हदेव की इस बाजार से सिद्ध बाबा का मन्दिर नजदीक ही है यहाँ आप का मन हो तो शौपिंग भी कर सकते है खैर आइये अब करिए श्री सिद्ध बाबा के दर्शन , सिद्ध बाबा मंदिर परिसर में  एक विष्णु जी का भी मन्दिर है साथ में ही कुछ प्राचीन मंदिर भी है आप सभी के दर्शन कर ले  | </p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10616" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-267x300.jpg 267w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">श्यामलाताल </h5>



<p class="has-text-align-justify">मुख्य शहर<strong><em> टनकपुर </em></strong> से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर एक बहुत ही शांत और मनोरम जगह है जहाँ आपको एक प्राकृतिक झील दिखाई देती है इस जगह का रख रखाव उत्तम नहीं है यहाँ साफ़ सफाई का भी अभाव देखने को मिल जाता है इस  झील  के  काले नीले पानी में आप नौका विहार भी कर सकते है , इस झील के अलावा यही पर <a href="https://www.culturalindia.net/reformers/vivekananda.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">स्वामी विवेकानन्द</a> जी का आश्रम स्थित है जिसकी स्थापना सन 1913 में की गई थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">श्यामलाताल में आपको बहुत ही तरह के गुलाब के पौधे मिल जायेंगे , श्यामलाताल से आपको हिमालय भी देखने को मिलता है कुल मिलाकर यदि आपको किसी शांत जगह की तलाश है तब तो आप श्यामलाताल चलो ,  <strong>Tanakpur Tourist Places</strong>  में अब यह स्थल भी फेमस हो रहा है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्री गुरुद्वारा नानकमता साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह एक बहुत ही पवित्र और मान्यता वाला गुरुद्वारा है  जो की<strong><em> टनकपुर</em></strong>  से 40 किलोमीटर की दूरी पर है टनकपुर से खटीमा फिर खटीमा से नानकमत्ता आप जा सकते है वैसे Tanakpur से नानकमत्ता के लिए सीधी बस भी मिल जाएगी ये जो नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारा है इसके कैम्पस में एक पवित्र सरोवर है एक पवित्र पीपल का पेड़ है और यहाँ की हर एक जगह बहुत ही सुन्दर बनाइ गई है  मुख्य गुरुद्वारा पूरा सफ़ेद  संगमरमर से बना है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">नानकमत्ता में एक झील भी है जिसे नानक सागर के नाम से जानते है यहाँ आप बोटिंग का मजा ले सकते और सच बता रहा हु नानक सागर में आपको बहुत ही बढ़िया व्यू मिलेंगे खासकरके सनसेट यदि आप नेचर फोटोग्राफी के शौक़ीन है तो आप नानक सागर जरूर आये |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="667" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg" alt="नानकमत्ता टनकपुर के समीप" class="wp-image-10651" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>नानकमत्ता टनकपुर के समीप</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg" alt="Nanak Sagar Near tanakpur tourist places" class="wp-image-10649" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">नानकमत्ता में रहने के लिए श्री हरगोबिन्द सराय है जहाँ आप मात्र 100 रूपये में एक रूम पा जाओगे इसके अलावा यदि खाने की बात करे तो यहाँ लंगर चला करता है जिसमे आप निशुल्क पेट भर भोजन कर सकते हो |</p>



<p class="has-medium-font-size">नानकमत्ता की सम्पूर्ण जानकारी के लिए नीचे क्लिक करे &#8211;<br><a href="https://safarjankari.com/gurudwara-shree-nanakmatta-sahib-darshan-ki-jankari/">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कैसे पहुँचे कहाँ रुके क्या-क्या देखे भोजन आदि की जानकारी</a></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">दोस्तों ज्यादातर लोग माँ पूर्णागिरि दर्शन करने <strong>टनकपुर </strong>आते है और मातारानी के दर्शन करके वापस अपने घर लौट जाते है लेकिन मेरी मानिये तो आप सिर्फ एक दिन एक्स्ट्रा लेके आइये और सबसे पहले टनकपुर शहर में ही शारदा घात पर स्नान करिए फिर श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर और श्री पंचमुखी महादेव मंदिर के दर्शन करे फिर निकल पड़िये माँ पूर्णागिरि धाम की और वहां रास्ते में प्राकृतिक मनोरम द्रश्यो को निहारते हुए मातारानी के दर्शन करिए  अब निकल पड़िये टनकपुर बैराज और जाइये नेपाल स्थित श्री सिद्धबाबा के दर्शन करने |</mark></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><mark style="background-color:rgba(0, 0, 0, 0)" class="has-inline-color has-vivid-red-color">इसके बाद यदि आपको राफ्टिंग का शौक है तो आप बूम रेंज जाइये यदि आपको झील देखने का मन हो तो श्यामलाताल जाइये ये आपकी रूचि पर है कही का न मन हो तो इन दोनों जगहों में से कही न जाइये आपकी मर्जी लेकिन आपको <strong>टनकपुर</strong> से 40 किलोमीटर दूर नानकमत्ता जरूर जाना चाहिए अगर आप वहां गये तो वहां के गुरूद्वारे , नानक सागर आपको बहुत ही पसंद आयेंगे |</mark></p>



<p>टनकपुर में घूमने से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456035655"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर कहा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर  उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456096107"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर माता पूर्णागिरि मन्दिर के लिये प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456140946"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर कौन से राज्य में पड़ता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखण्ड</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456194519"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बरेली से टनकपुर की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 113 किलोमीटर </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456242634"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बरेली से टनकपुर के लिये कौन सी ट्रेन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> बरेली से टनकपुर के लिये त्रिबेनी एक्सप्रेस  ट्रेन है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456292847"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; लखनऊ से टनकपुर के लिये कौन सी ट्रेन है</strong> <p class="schema-faq-answer">त्रिबेनी एक्सप्रेस </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456353850"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; पीलीभीत से टनकपुर की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 62 किलोमीटर </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662456388674"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर में कौन सी नदी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">शारदा नदी </p> </div> </div>



<p>हमने इस पोस्ट में आपको <strong>Tanakpur Tourist Places</strong> की सारी जानकारी दो तो यही आपको <strong>टनकपुर</strong> की यह पोस्ट पसंद आई हो तो कमेन्ट करके बताये |</p>
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		<title>गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कैसे पहुँचे कहाँ रुके क्या-क्या देखे की जानकारी</title>
		<link>https://safarjankari.com/gurudwara-shree-nanakmatta-sahib-darshan-ki-jankari/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Oct 2021 07:20:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Historical]]></category>
		<category><![CDATA[Natural]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Nature]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नानकमत्ता ये नाम सुना था लेकिन यहाँ की ज्यादा जानकारी नहीं थी तो पहले हमने जानकारी एकत्र की फिर यह पोस्ट लिखी  आज आपको इस पोस्ट में बताएँगे कि गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कहाँ है यहाँ कैसे जाया जय यहाँ कहाँ रुके क्या खाये और यहाँ दर्शन करने के लिये क्या क्या विकल्प है &#124; सबसे पहले आप यह जान लो कि Nanakmatta Sahib उत्तराखण्ड के उधमसिंहनगर के खटीमा के समीप एक बहुत ही प्रसिद्ध सिखों का धार्मिक स्थान है जहाँ आपको दर्शन करने के लिये पवित्र गुरुद्वारा मिलेगा इसके अलावा यहाँ एक झील है जो की बस देखते ही बनती है &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>नानकमत्ता</strong> ये नाम सुना था लेकिन यहाँ की ज्यादा जानकारी नहीं थी तो पहले हमने जानकारी एकत्र की फिर यह पोस्ट लिखी  आज आपको इस पोस्ट में बताएँगे कि गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कहाँ है यहाँ कैसे जाया जय यहाँ कहाँ रुके क्या खाये और यहाँ दर्शन करने के लिये क्या क्या विकल्प है | </p>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले आप यह जान लो कि<strong> Nanakmatta Sahib</strong> <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखण्ड</a> के <a href="https://usnagar.nic.in/">उधमसिंहनगर</a> के खटीमा के समीप एक बहुत ही प्रसिद्ध सिखों का धार्मिक स्थान है जहाँ आपको दर्शन करने के लिये पवित्र गुरुद्वारा मिलेगा इसके अलावा यहाँ एक झील है जो की बस देखते ही बनती है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">नानकमत्ता साहिब </h2>



<p class="has-text-align-justify"><strong>नानकमत्ता गुरुद्वारा</strong> सिखों का एक बहुत ही पवित्र स्थल है यहाँ हर साल हजारो की संख्या में श्रद्धालु आकर गुरूद्वारे में मत्था टेकते है , सिखों के पहले गुरु श्री नानकदेव जी यहाँ पर रुके थे और सिखोंके छठवे गुरु श्री हरगोविंद जी भी इसी स्थल पर आये थे  तो जब दो दो  गुरु <strong><em>नानकमत्ता </em></strong> आये हो तो इस जगह का महत्त्व क्या होगा ये बताने की हमे जरुरत नही है निसन्देह  <strong>Nanakmatta Sahib</strong> एक बहुत ही ऐतिहासिक और पावन जगह है |</p>



<p>इस गुरूद्वारे के पास में ही एक झील है जिसे <strong>नानक सागर</strong> नाम से जानते है जहाँ आप बोटिंग भी कर सकते हो बाकी <strong><em>नानक सागर</em></strong>   एक बहुत ही मनोरम जगह है यहाँ आप घंटो बैठ के प्रकृति के शांत वातावरण में खुद को तरोताजा महसूस करोगे , यहाँ की ठंडी-ठंडी शुद्ध हवा आपको एक अलग ही अनुभव देगी तो आइये <strong><em>गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब   </em></strong>दर्शन करने की सम्पूर्ण जानकारी को जान लेते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading"> Nanakmatta Sahib  Kaha hai | कहाँ है नानकमत्ता साहिब </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के उधमसिंह नगर में है और अगर ज्यादा जानकारी दे तो यह खटीमा और सितारगंज के बीच स्थित है , खटीमा से <strong><em>नानकमत्ता</em></strong>  की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है वही सितारगंज से इसकी दूरी लगभग 13 किलोमीटर है , यदि आप कभी <strong><a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/">Maa purnagiri</a></strong> के दर्शन करने जाए जो की टनकपुर में है तब भी यहाँ आ सकते है क्यूंकि टनकपुर से <strong>नानकमत्ता </strong>की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अगर हम लोग देश की राजधानी नई दिल्ली से <strong>नानकमत्ता </strong>की दूरी की बात करे तो यह लगभग 300 किलोमीटर है और उत्तर प्रदेश के बरेली से से यहाँ की दूरी लगभग 95 किलोमीटर है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">How to Reach  Nanakmatta Sahib  | यहाँ कैसे पहुंचे </h4>



<h5 class="wp-block-heading">वायुमार्ग से </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप इस गुरुद्वारा के दर्शन हेतु हवाई जहाज से आना चाहते है तो आपको बता दे यहाँ का सबसे नजदीकी एअरपोर्ट पंतनगर है जो की यहाँ से मात्र 55 किलोमीटर की दूरी पर है और एअरपोर्ट से आप गुरूद्वारे तक टैक्सी से आ सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रेल मार्ग द्वारा </h5>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थान पर आप ट्रेन के द्वारा भी आ सकते है यहाँ के नजदीकी स्टेशन खटीमा है और खटीमा से <strong>नानकमत्ता</strong> आप बस से टेम्पो से अपनी गाड़ी से आ सकते हो खटीमा का कोड KHMA है , इसके अलावा यहाँ के नजदीकी रेलवे स्टेशन रुद्रपुर सिटी ( RUPC ) और लाल कुंवा ( LKU ) है वैसे बेस्ट खटीमा ही है क्यूंकि खटीमा से यहाँ की दूरी महज 15 किलोमीटर है और जो भी ट्रेन टनकपुर माँ पूर्णागिरि की तरफ जाती है वो सभी खटीमा में रूकती है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अगर ट्रेन की बात करे तो त्रिवेणी एक्सप्रेस जो शक्तिनगर सोनभद्र प्रयागराज लखनऊ बरेली पीलीभीत होते हुये खटीमा तक आती है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इस रूट की एक और पॉपुलर ट्रेन है पूर्णागिरि जन शताब्दी है जो दिल्ली गाज़ियाबाद हापुर मुरादाबाद बरेली होते हुए खटीमा तक आती है इन दोनों के अलावा  खटीमा से पीलीभीत के बीच भी ट्रेन्स है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रोड द्वारा </h5>



<p class="has-text-align-justify">सड़क मार्ग से भी आप यहाँ पर बड़े ही आराम से पहुँच सकते है यह भारत के सभी मुख्य शहरो से जुड़ा हुआ है आपको दिल्ली के ISBT आनंद विहार से खटीमा के लिए दिनभर बस मिल जाएँगी जिनका किराया लगभग 385 रूपये होगा बाकी आप अपनी भी गाड़ी से यहाँ आ सकते हो आपको कोई भी दिक्कत नहीं होगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">अगर आप माँ पूर्णागिरि के दर्शन करने गये हो तो आप टनकपुर से बस से भी यहाँ आ सकते हो आप टनकपुर बस स्टैंड से रुद्रपुर काशीपुर वाली बस पकड़ो जो आपको <strong>नानकमत्ता</strong> उतार देगी |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कहाँ रुके </h4>



<p class="has-text-align-justify">आप कही भी घूमने दर्शन करने जाते हो तो सबसे पहले वहा कैसे पहुंचा जाय सवाल आता है जिसका उत्तर आपको ऊपर मिल गया है अब बात करते है यहाँ आकर कहाँ रुका जाये तो देखिये आप खटीमा में रुक सकते हो वहां आपको होटल मिल जायेंगे लेकिन सबसे बेहतर विकल्प है की आप<strong> नानकमत्ता</strong> की सराय में रुके सराय का नाम श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास है जो की आपको <strong>नानकमत्ता गुरुद्वारा</strong> कैम्पस में मिल जाएगी |<br><br> <strong>श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास </strong> में आपको साधारण कमरे जिनमे अटेच वाशरूम होंगे महज 100 रूपये में मिल जायेंगे वही यदि आपको AC रूम चाहिये तो वो आपको 500 रूपये में मिल जायेंगे और यह सराय अत्यंत बड़ी और हरी-भरी शांत जगह है यहाँ आपको बड़ा ही सुकून मिलेगा |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता.jpg" alt="श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास नानकमत्ता" class="wp-image-10632" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास नानकमत्ता</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="578" height="252" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय.jpg" alt="नानकमत्ता गुरुद्वारा सराय" class="wp-image-10628" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय.jpg 578w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय-300x131.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 578px) 100vw, 578px" /><figcaption>नानकमत्ता गुरुद्वारा सराय</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">इसके अलावा गुरुद्वारा के समीप ही कुमाऊ विकास मंडल लिमिटेड का एक रेस्ट हाउस है जहाँ भी आपको रुकने की व्यवस्था हो जाएगी हालाँकि यहाँ रूम थोड़े महंगे मिल सकते है यहाँ के रेट 500 रूपये से ऊपर ही रहते है अगर आप यहाँ रुकना  चाहते हो तो<a href="http://kmvn.in/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"> http://kmvn.in/</a> इस वेबसाइट से बुकिंग कर सकते हो |</p>



<h4 class="wp-block-heading">भोजन की व्यवस्था </h4>



<p class="has-text-align-justify">अब हम लोग बात करेंगे <strong><em>नानकमत्ता</em></strong>  में भोजन की यहाँ आपको कई होटल मिल जायेंगे जहाँ आप अपने मन का खाना खा सकते हो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यदि हम <strong><em>नानकमत्ता</em></strong>  गुरुद्वारा कैम्पस की बात करे तो दोस्तों यहाँ लंगर चलता रहता है जिसे श्री गुरु का लंगर बोलते है यहाँ आपको निशुल्क भोजन जिसको हम तो प्रसाद ही बोलेंगे मिलता है और यह भोजन भरपेट आप करिए यदि आप चाय पीना चाहते हो तो आप यहाँ निशुल्क चाय पी सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify">आप जब भी लंगर में जाओ तो अपने आप थाली गिलास चम्मच उठा लो फिर लंगर करने के बाद अपने झूठे बर्तन धुलके के रख दो और हा आपको अपना सर भी रुमाल से ढकना होगा इसके अलावा आप जो चाहो वो सेवा यहाँ कर सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="537" height="405" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib.jpg" alt="shree guru ka langar Nanakmatta Sahib" class="wp-image-10627" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib.jpg 537w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib-300x226.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 537px) 100vw, 537px" /><figcaption>shree guru ka langar Nanakmatta Sahib</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">तो मेरे हिसाब से आप रुकिए  <strong>श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास  सराय</strong> में और भोजन करिए <strong>श्रीगुरु का लंगर</strong> में आपको एक अलग ही एह्सास होगा ये दोनों जगह <strong>नानकमता गुरुद्वारा</strong> के समीप ही है |<br><br><a href="https://safarjankari.com/amritsar-me-ghumne-ki-jagah/">Amritsar Tourism – अमृतसर के पर्यटन स्थल</a><br><a href="https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/">Uttarakhand me Ghumne Ki jagah – उत्तराखण्ड में घूमने वाली जगहे (2021)</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">पर्यटकों के लिये यहाँ के आकर्षण के केंद्र </h4>



<p class="has-text-align-justify"> वैसे तो यह जगह <strong><em>श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब</em></strong>  के लिए विश्व भर में जानी जाती है परन्तु यहाँ पे  अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थल भी मौजूद है जिनकी भी जानकारी आपको होनी चाहिए &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह मुख्य गुरुद्वारा है और निसंदेह इसकी भव्यता देखते ही बनती है जैसे ही आप गुरुद्वारा के गेट पर जाते हो सबसे पहले आपको अपने जूते-चप्पल को रखना होगा उसके लिए गुरुद्वारा कमिटी ने निशुल्क व्यवस्था कर रखी अब आप आगे बढे और आगे प्रवेश मार्ग में आप पानी में से होकर निकालेंगे जिससे आपके पैर साफ़ हो जायेंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आप प्रसाद की पर्ची कटवाकर प्रसाद लेके आगे जाओगे अब आप देखेंग ये गुरुद्वारा बहुत ही बड़ा बहुत ही साफ़ सुथरा और यहाँ की नक्खाशी कमाल की है एक बार आप इस गुरूद्वारे को निहार  ले फिर अन्दर जाकर प्रसाद चढा दे और अपना मत्था टेके |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब.jpg" alt="श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब" class="wp-image-10633" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">मुख्य गुरूद्वारे के अन्दर की भी नक्खाशी  बेजोड़ है यह गुरुद्वारा संगमरमर के पत्थरो से बना सफ़ेद रंग का इतना अलौकिक लगता है की बस इसे देखते ही रहे वाकई में इसकी बनावट इसकी साज सज्जा इसकी साफ़ सफाई  बहुत ही उच्च कोटि की है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> <strong>नानकमत्ता</strong> गुरुद्वारा साहिब में आपको कुछ अन्य जगहों के भी दर्शन कर लेने चाहिए आइये अब उन जगहों के बारे में भी जान लेते है &#8211; </p>



<h6 class="wp-block-heading">सरोवर </h6>



<p class="has-text-align-justify">मुख्य गुरूद्वारे में ही एक अति सुन्दर बड़ा सा सरोवर है जिसमे बहुत ही स्वच्छ जल है यहाँ आप बैठ के इस सरोवर को देख सकते है एक बात और इस सरोवर में रंग बिरंगी बहुत ही सुन्दर मछलियाँ भी है लेकिन आप  मछलियोंको कुछ खिला नहीं सकते है सुना तो ये भी है की यहाँ पे स्नान भी किया जाता है परन्तु जब मै गया था तो इस सरोवर में घुसना मना था खैर आप इसे देखे जरूर |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="721" height="365" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पवित्र-सरोवर-नानकमत्ता-गुरुद्वारा.jpg" alt="पवित्र सरोवर नानकमत्ता गुरुद्वारा" class="wp-image-10629" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पवित्र-सरोवर-नानकमत्ता-गुरुद्वारा.jpg 721w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पवित्र-सरोवर-नानकमत्ता-गुरुद्वारा-300x152.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 721px) 100vw, 721px" /><figcaption>पवित्र सरोवर नानकमत्ता गुरुद्वारा</figcaption></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">पीपल का वृक्ष नानकमत्ता  </h6>



<p class="has-text-align-justify">गुरुद्वारा प्रांगण में एक हरा भरा विशाल पीपल का वृक्ष है जिसकी बड़ी मान्यता है जो भी यहाँ आता है वो इस पीपल के वृक्ष के दर्शन अवश्य करता है , कहा जाता है कि पहले यह पीपल का वृक्ष सूखा था लेकिन जब गुरु नानकदेव जी यहाँ आये तो उन्होंने इसी वृक्ष के नीचे ही अपना आसन जमा लिया और उनके यहाँ बैठने भर से ही यह वृक्ष हरा भरा हो गया था , इसे पंजा साहिब भी कहा जाता है तो आप इस दिव्य पीपल के वृक्ष के दर्शन अवश्य करे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="467" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता.jpg" alt="पीपल का वृक्ष नानकमत्ता" class="wp-image-10630" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>पीपल का वृक्ष नानकमत्ता</figcaption></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">दूध वाला कुवां</h6>



<p class="has-text-align-justify">गुरुद्वारा प्रांगण में ही स्थित है दूध वाला   कुवां  जिसके बारे में कहा जाता है कि भाई मरदाना ने गुरु नानक से दूध पीने की इच्छा जाहिर की तो गुरु ने कहा की योगियों से दूध मांग लो लेकिन योगियों ने भाई मरदाना को दूध भी नहीं दिया और ताना भी मारा तो गुरु साहिब में अपनी अध्यात्मिक शक्तियों से योगियों की सारी गायो का दूध निकालकर एक कुंवे में भर दिया ऐसा बताया जाता है की इस कुवे के पानी का स्वाद बिलकुल दूध जैसा है बाद में यही पे एक गुरुद्वारा का निर्माण हुआ तो यह स्थान गुरुद्वारा दूध वाला कुंवा के नाम से जाना जाता है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">गुरुद्वारा श्री भंडारा साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">मुख्य <strong><em>नानकमत्ता</em></strong>  गुरूद्वारे से महज 400-500 मीटर की दूरी पर स्थित है श्री भंडारा साहिब गुरुद्वारा , यहाँ पर भी आप मत्था टेकने जा सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">गुरुद्वारा श्री अलमस्त साहिब </h4>



<p class="has-text-align-justify">बाबा श्री अलमस्त जी की याद में बनाया गया यह गुरुद्वारा भी नानक मत्ता में स्थित है कहा जाता है बाबा अलमस्त साहिब को जोगिय ने उनके मन्दिर से निकाल दिया था फिर बाबा अलमस्त जी ने गुरु हरगोबिन्द जी को यहाँ बुलाया और फिर मिलकर एक सिख सेवा संगठन बनाया तो आप यहाँ भी अपना मत्था टेकने जरूर आये |</p>



<h5 class="wp-block-heading">गुरुद्वारा छठा पटशाही साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह गुरुद्वारा मुख्य गुरूद्वारे से थोड़ी दूरी पर है इस गुरूद्वारे का जुड़ाव श्री हरगोबिन्द जी से है कहा जाता है इसी स्थान पर सीखो के छठवे गुरु श्री हरगोबिन्द जी ने पीलीभीत जाते समय अपने घोड़ो को बांध दिया था |</p>



<h5 class="wp-block-heading">बाउली  साहिब </h5>



<p class="has-text-align-justify">जो मुख्य गुरुद्वारा है वही से पीछे की और एक रास्ता गया है लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है <strong>बाउली साहिब</strong> इस स्थान पर गुरु नानक जी द्वारा लाइ हुई एक पानी की बाउली स्थित है तो यहाँ लोग दर्शन हेतु आते है इसके अलावा यह स्थान एक बेहद ही रमणीक जगह है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यहाँ दूर दूर तक आपको शांत पानी दिखाई देता है तो यह  स्थल एक पिकनिक स्पॉट के रूप में भी उभर के आ रहा है , <strong>बाउली साहिब</strong> के बहार आपको तमाम आइसक्रीम की दुकाने खिलोनो की दुकाने , चिप्स की दुकाने आदि है |</p>



<p class="has-text-align-justify">यह जो <strong>बाउली साहिब</strong> है वह<strong> नानक सागर</strong> पर बनी हुई है मतलब एक रास्ता गया हुआ जिसके दोनों और <strong>नानक सागर </strong>का शांत जल दिखाई देता है फिर आगे जाकर <strong><em>बाउली साहिब</em></strong>  है जिसमे एक जीना लगा हुआ उस जीने से आप नीचे तक जा सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यह एक ऐतिहासिक जगह है यहाँ आपको जरूर जाना चाहिए यहाँ का सूर्यास्त तो बहुत ही सुन्दर होता है संभव हो तो यहाँ आप शाम को आये , यहाँ पर आपको नाव की सवारी का भी लुत्फ़ मिल सकता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="733" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib.jpg" alt="Bowli Sahib Nankmatta Sahib" class="wp-image-10626" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Bowli Sahib Nankmatta Sahib</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="456" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/बाउली-साहिब-नानक-सागर.jpg" alt="बाउली साहिब नानक सागर" class="wp-image-10631" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/बाउली-साहिब-नानक-सागर.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/बाउली-साहिब-नानक-सागर-300x171.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/बाउली-साहिब-नानक-सागर-768x438.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>बाउली साहिब नानक सागर</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">नानक सागर </h5>



<p class="has-text-align-justify"><strong>नानक सागर</strong> डैम भी एक बहुत ही खूबसूरत जगह है यह मुख्य गुरुद्वारा से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ आप बोटिंग का मजा ले सकते हो और डैम की ख़ूबसूरती को भी निहार सकते हो तो यदि समय मिले तो यहाँ भी अवश्य जाए |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कब जाए &#8211; दर्शन की टाइमिंग </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये <strong>Nanakmatta Sahib</strong> आप साल भर के कभी भी जा सकते हो परन्तु यहाँ दीपावली के समय मेला लगता है तो उस समय यह स्थान और भी खास हो जाता है तो यदि आप दीपावली में जाओ तो भीड़ तो मिलेगी लेकिन मजा भी आने वाला है रही बात टाइमिंग की तो यहाँ के सभी गुरूद्वारे में आप रात 8-9 बजे तक देख लो तो ज्यादा बढ़िया रहता है |</p>



<p>गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443292864"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब किस राज्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब उत्तराखण्ड राज्य में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443337594"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के उधमसिंह नगर में है और अगर ज्यादा जानकारी दे तो यह खटीमा और सितारगंज के बीच स्थित है , खटीमा से <strong><em>नानकमत्ता</em></strong>  की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है वही सितारगंज से इसकी दूरी लगभग 13 किलोमीटर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443413218"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नानकमत्ता क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखंड में एक जगह है यहाँ पर सिखों का धार्मिक स्थान है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443509993"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर से <strong>नानकमत्ता </strong>की दूरी कितने  किलोमीटर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर से <strong>नानकमत्ता </strong>की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443615945"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बरेली से नानकमत्ता की दूरी कितनी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग 95 किलोमीटर </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662443687466"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नानक सागर बांध कहाँ पर है  ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखंड में खटीमा के पास यह क्षेत्र नानकमत्ता कहलाता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662446891407"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Nanakmatta Sahib</strong> kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">Uttarakhand ke Udhamsingh Nagar me Nankmatta naam ki Jagah par ek Gurudwara hai jise Nanakmatta Sahib kaha jata hai </p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify">दोस्तों <strong>नानकमत्ता</strong> के गुरूद्वारे एक बहुत ही शांतिप्रिय जगह है अगर यहाँ कुछ सुनाई देता है तो सिर्फ गुरुबानी की धुन जो बहुत ही मधुर होती है यहाँ पर हर एक गुरूद्वारे का अपना एक अलग इतिहास है तो कुल मिलाकर यह स्थान सिखों का एक पावन स्थान है जहाँ आप गुरुद्वारा में मत्था टेककर दर्शन का लाभ ले सकते हो और<strong> नानक सागर </strong>के प्राकृतिक नज़ारे भी देख सकते हो यदि आपके पास एक दिन का समय है तो आप यहाँ आ सकते है |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/gurudwara-shree-nanakmatta-sahib-darshan-ki-jankari/">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कैसे पहुँचे कहाँ रुके क्या-क्या देखे की जानकारी</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>Maa Purnagiri Yatra ki Jankari &#8211; माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहाँ रुके</title>
		<link>https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Oct 2021 12:09:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Natural]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Shaktipeeth]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Maa Purnagiri 108 शक्ति पीठो में से एक है और हिन्दू धर्म में अत्यधिक पूज्यनीय है यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के  टनकपुर शहर  में है , यहाँ हम आपको माँ पूर्णागिरी के दर्शन से जुड़ी हुई हर एक बात बतायेंग जैसे यहाँ तक कैसे पहुंचे , यहाँ कहाँ ठहरे , क्या क्या दर्शन करे , प्रसाद कहाँ ले , चढ़ाई का रास्ता कैसा है , भोजन की क्या व्यवस्था है  , दर्शन की टाइमिंग क्या है , टनकपुर से यहाँ जाने का रास्ता , माता रानी के अलावा अन्य देखने वाली जगहे आदि &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Maa Purnagiri </strong>108 शक्ति पीठो में से एक है और हिन्दू धर्म में अत्यधिक पूज्यनीय है यह स्थल<a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/"> उत्तराखण्ड </a>राज्य के चम्पावत जिले के  <a href="https://www.euttaranchal.com/tourism/tanakpur.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">टनकपुर</a> शहर  में है , यहाँ हम आपको माँ पूर्णागिरी के दर्शन से जुड़ी हुई हर एक बात बतायेंग जैसे यहाँ तक कैसे पहुंचे , यहाँ कहाँ ठहरे , क्या क्या दर्शन करे , प्रसाद कहाँ ले , चढ़ाई का रास्ता कैसा है , भोजन की क्या व्यवस्था है  , दर्शन की टाइमिंग क्या है , टनकपुर से यहाँ जाने का रास्ता , माता रानी के अलावा अन्य देखने वाली जगहे आदि |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो दोस्तों कुल मिलकर मैंने बहुत की मेहनत करके यह पोस्ट तैयार की है जिससे की यदि आपको भविष्य में कभी भी  <strong>Maa Purnagiri</strong>  माँ पूर्णागिरि मंदिर आना हो तो आप को इस पोस्ट से  काफी सहूलियत होगी |</p>



<h2 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरि मन्दिर ( Maa Purnagiri ) के बारे में </h2>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के टनकपुर नाम के शहर में अन्नपूर्णा शिखर पे  माता रानी का यह पवित्र धाम स्थित है यह नेपाल की सीमा से समीप है  इस मन्दिर की आराध्य देवी महाकाली माँ है कहने का तात्पर्य यह है की पूर्णागिरि मन्दिर में देवी महाकाली की  पूजा अर्चना की जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> इसके अलावा आपको बता दे यही से काली नदी भी निकलती है जो की आगे जाकर शारदा नदी के नाम से जानी जाती है तो देखा जाय तो यह क्षेत्र धार्मिक के साथ साथ मनमोहक प्राकृतिक द्रश्यो से आच्छादित है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आप थोडा सा समय निकालकर यहाँ अवश्य आये और आकर माँ पूर्णागिरी के दर्शन करे और प्रकृति की ख़ूबसूरती को बेहद ही नजदीक से जाने Maa Purnagiri Darshan से सम्बन्धित समस्त जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी तो आइये शुरू करते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे पूर्णागिरि मन्दिर &#8211; How to reach Maa Purnagiri Mandir in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">आप कही भी जाते हो सबसे पहले आपके मन में यही आता है आखिर जाए कैसे बस का क्या रूट है ट्रेन का क्या है हवाई जहाज का क्या है इसके बाद उस स्थल का लोकल ट्रांसपोर्ट कैसा है तो आप निश्चिन्त रहे आपकी सभी समस्याओ का समाधान नीचे है |</p>



<p class="has-text-align-justify">माता पूर्णागिरि के दिव्य दर्शन हेतु आपको उत्तराखण्ड में स्थित टनकपुर नाम की जगह पर आना होगा और फिर टनकपुर से मुख्य मन्दिर दूरी लगभग 22 किलोमीटर की है जिसमे से आपको  लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी तो आइये सबसे पहले  जान लेते है टनकपुर पहुचने के तरीके &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">हवाई मार्ग से </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप हवाई मार्ग मतलब हवाई जहाज से माँ पूर्णागिरि  के दर्शन करना चाहते हो तो आप जान लो यहाँ का निकटतम एअरपोर्ट पन्तनगर है जो की टनकपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर होगा और पन्तनगर से आपको टनकपुर के लिए टैक्सी आदि मिल जाएँगी |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रेल मार्ग  से </h5>



<p class="has-text-align-justify">यदि आप ट्रेन द्वारा <strong><em>Maa Purnagiri</em></strong>  के दर्शन करना चाहते हो आप को बता दे की टनकपुर में एक रेलवे स्टेशन है जिसका कोड TPU है इस रेलवे स्टेशन पे कई ट्रेन है एक ट्रेन दिल्ली से भी टनकपुर आती है बाकी एक है वो लखनऊ बरेली होते हुए टनकपुर जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> आप देख ले आपके शहर से यहाँ की कोई सीधी ट्रेन है या नहीं है तो कोई दिक्कत ही नहीं यदि नहीं है तो आप के आसपास के किसी शहर जैसे दिल्ली , लखनऊ , पीलीभीत , बरेली , प्रयागराज , गाजियाबाद , मुरादाबाद आदि तक अगर ट्रेन हो आप यहाँ आ जाये फिर यहाँ से आप टनकपुर की ट्रेन ले सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">सड़क मार्ग से </h5>



<p class="has-text-align-justify">टनकपुर बहुत ही अच्छी तरह से भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है दिल्ली लखनऊ जैसे शहरो से तो आपको सीधी बस मिल जाएगी और आप अपने साधन से भी बड़ी ही आसानी से यहाँ आ सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब ये तो बात हो गई टनकपुर तक आने की अब ये जानिए कि टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे जाया जाय &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे पहुंचे &#8211; How to reach Maa Purnagiri Temple from Tanakpur</h5>



<p class="has-text-align-justify">अब आप टनकपुर आ गए तो आपको टनकपुर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बड़ी ही आसानी से शेयर्ड जीप मिल जायेगी जो आपको ठूलीगाड नाम की जगह तक ले जाएगी उसके बाद आपको दूसरी जीप मिलेगी जो आपको टुन्यास तक लेकर आएगी अब टुन्यास वही जगह है जहाँ से माँ पूर्णागिरि की लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई शुरू होती है कभी कभी आपको टनकपुर से टुन्यास की सीधी जीप भी मिल सकती है इन जीप से जाने का किराया लगभग 60-70 रूपये प्रति व्यक्ति हो सकता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके अलावा आप अपने साधन से भी टुन्यास तक आ सकते हो रोड  सही है कही कही पे थोड़ी सी गड़बड़ है यदि आप एक कुशल ड्राईवर है तो आप आ सकते है | ठूलीगाड से टुन्यास (यही से आपको पैदल चढ़ाई करनी है ) की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है | </p>



<p class="has-text-align-justify">अब जो ये 3 किलोमीटर की चढ़ाई है इसमें भी थोड़ी दूर जाकर आपको दो रास्ते दिखाई देंगे दोनों ही बढ़िया है बस एक रास्ते में सीढियां ज्यादा है दूसरे में कम और दोनों ही रास्ते आगे जाकर एकमे मिल जाते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ke do Raste" class="wp-image-10610" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir ke do Raste Dusra Dahini Taraf hai </figcaption></figure>
</div>


<p><strong>माँ पूर्णागिरी मन्दिर तक आने का बेस्ट तरीका </strong></p>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले ट्रेन या बस या अपने साधन से टनकपुर आ जाओ अब टनकपुर से बेहतर रहेगा की आप शेयर्ड जीप के माध्यम से ठूलीगाड फिर टुन्यास आओ फिर यहाँ से पैदल चढ़ाई करो और आगे जाकर कम सीढियों वाले रास्ते को चुने जो की आपके दाहिनी तरफ होगा |</p>



<h4 class="wp-block-heading">माता पूर्णागिरि मन्दिर यात्रा में रुके कहाँ &#8211; Where to stay in Mata Purnagiri Tanakpur in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये रुकने की यहाँ बहुत सारी जगहे है आप टनकपुर में ही रुक सकते हो टनकपुर में ढेर सारी धर्मशालाये होटल उपलब्ध है इसके अलावा आप ऊपर जाकर माता रानी के समीप भी रुक सकते है जब आप चढ़ाई शुरू करेंगे तो रस्ते में आपको ढेर सारी प्रसाद की दुकाने दिखाई देंगी और हर एक प्रसाद की दुकान में आपको रुकने की ,  स्नान करने की सेवा निशुल्क मिल जाएगी इसके बदले आप उसी दुकान से प्रसाद खरीदना होगा जिसकी कीमत 50 रूपये से शुरू हो जाएगी वैसे यहाँ आपको 151 , 250 , 500 , 2100 ऐसे रेट बतायेंग लेकिन आप मोलभाव करके अपने हिसाब से प्रसाद ले लीजिये |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ki Dharmshala" class="wp-image-10611" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ki-Dharmshala-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir ki Dharmshala</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">पूर्णागिरी मन्दिर यात्रा में भोजन की व्यवस्था </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये टनकपुर तो टाउन है वहा आपको हर प्रकार का भोजन मिल जायेगा लेकिन हम यहाँ पे बात कर रहे ऊपर भोजन की व्यवस्था के बारे में तो आप निश्चिन्त रहे आपको पैदल चढाई के दौरान ढेर सरे होटल मिल जायेंगे जहाँ आप भोजन कर सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की एक औसत थाली की कीमत लगभग 70-80 रूपये होती है जिसमे आपको चार रोटी दाल सब्जी चावल मिल जायेगा इसके अलावा आपको जगह जगह पे और भी खाने पीने जैसे चाय मैगी कोल्डड्रिंक  जैसे अन्य विकल्प भी  मिल जायेंगे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">Maa Purnagiri Mandir ke Raste Ke Anya Mandir &#8211; पूर्णागिरि मन्दिर के रस्ते में पड़ने वाले अन्य प्रसिद्ध मन्दिर</h4>



<p class="has-text-align-justify">अब आपको दर्शन करते है माँ पूर्णागिरि रास्ते में पड़ने वाले ऐसे मन्दिरों के बारे में जिनके बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जायेगी &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">टुन्यास का भैरव मन्दिर</h5>



<p class="has-text-align-justify">टुन्यास जी ये वही जगह जहाँ से आपको यात्रा प्रारंभ करनी है यही पे भैरव बाबा का एक मन्दिर है जिसके आपको दर्शन करने है और हा जब <strong><em>Maa Purnagiri</em></strong> के दर्शन कर ले उसके बाद जब आप वापसी करे तब भैरव बाबा के दर्शन अवश्य करे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="370" height="493" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg" alt="भैरव मन्दिर टुन्यास" class="wp-image-10615" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg 370w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/भैरव-मन्दिर-टुन्यास-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 370px) 100vw, 370px" /><figcaption>भैरव मन्दिर टुन्यास</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">झूठे का मन्दिर </h5>



<p class="has-text-align-justify">जो भी भक्त माँ पूर्णागिरी के दर्शन हेतु आता है उसे झूठे का मन्दिर में दर्शन करने हेतु अवश्य जाना चाहिए यह आपको चढ़ाई करते समय रास्ते में ही दिखेगा यहाँ पे रुककर दर्शन कर ले , झूठे  का मन्दिर के पास से ही चढ़ाई के दोनों रास्ते एक में मिल जाते है और यही से सिर्फ एक ही रास्ता ऊपर की और जाता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg" alt="झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर" class="wp-image-10614" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">काली मन्दिर रामबाड़ा</h4>



<p class="has-text-align-justify">रामबाड़ा नाम की जगह पे स्थित है माँ काली का मन्दिर यहाँ से मुख्य मंदिर लगभग एक किलोमीटर ही रह जाता है आप यहाँ रुके और माता महाकाली के दर्शन करे फिर आप ऊपर की और जाए , यहाँ मैंने देखा प्रसाद स्वरुप काले वस्त्र में लिपटी हुई खिचड़ीऔर नारियल गोला लोग माँ काली को अर्पण कर रहे थे  |</p>



<p class="has-text-align-justify">देखिये पूर्णागिरि माँ के रस्ते में आपको ये तीन मन्दिर पड़ेंगे भैरव मन्दिर , झूठे का मन्दिर , काली मन्दिर आपको इन तीनो मन्दिर के दर्शन करने है इसके अलावा की जगह-जगह पर रास्ते में भगवान की प्रतिमाये बनी है दान पेटी रखी है आप का मन हो तो आप दर्शन कर सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="413" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg" alt="Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri" class="wp-image-10613" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">माता रानी के धाम की यात्रा से सम्बन्धित अन्य उपयोगी जानकारियां </h5>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले यह जान ले की जो <strong>Maa Purnagiri</strong> की चढ़ाई का रास्ता है बेहद ही मनमोहक है आप जैसे जैसे ऊपर चढ़ेंगे तो आपको बहुत ही हरे भरे पेड़ दिखाई देंगे जो निश्चित तौर से आपको तरोताजा कर देंगे आप चढ़ाई कम सीढ़ी वाले रास्ते से करे तो आपको बहुत ही अच्छे प्राकृतिक व्यू देखने को मिलेंगे यहाँ आपके फोटो वगैरह भी बहुत ही बेहतरीन आयेंगे और आपको यात्रा का मजा भी आएगा , रास्ता में धूप से बचाव हेतु टिन शेड है और किसी प्रकार के हादसे से बचाव हेतु जालियां लगी हुई है  |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="300" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir Ka rasta" class="wp-image-10609" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir Ka rasta</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">आपको चढ़ाई के दौरान रास्ते में जगह जगह में धर्मशालाए , प्रसाद की दुकाने , होटल , खिलौनों की दूकान , सिन्दूर कड़े चूड़ी कंगन लैया भगवान की फोटो प्रतिमाये ब्रेसलेट माला जैसी सैकड़ो दुकाने मिलेंगी जहाँ आपको यदि शॉपिंग करनी हो तो आप कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको दर्शन नंगे पैर करने होते अब इसका ये मतलब नहीं कि आपको पूरी 3 किलोमीटर की चढ़ाई नंगे पैर करनी है देखिये मुख्य मन्दिर से थोड़ी ही दूरी पे हमको अपने चप्पल जूते उतार देने होते है यही से एकदम खड़ी चढ़ाई शुरू हो जाती है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar.jpg" alt="Maa Purnagiri Pravesh Dwar" class="wp-image-10612" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Pravesh-Dwar-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>Maa Purnagiri Pravesh Dwar</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">यदि आपके पास बैग है तो बैग लेके यात्रा करने में आप परेशान हो सकते हो इसका विकल्प यही है आप चढ़ाई शुरू कर दो जब आपको बैग से दिक्कत महसूस हो तो वही पे जो भी प्रसाद की दूकान हो वही पे विश्राम करे नहा धो ले बैग जमा करके प्रसाद लेके अपने जूते चप्पल वही पे उतार के अपनी आगे की यात्रा माँ के जयकारो के साथ  आरंभ करे |</p>



<p class="has-text-align-justify">दोस्तों सबसे पहले आप <strong>Maa Purnagiri</strong> के दर्शन करे फिर वापसी करते समय माता महाकाली के दर्शन करे फिर झूठे का मंदिर के दर्शन टुन्यास स्थित भैरव बाबा के दर्शन जोकि यात्रा का अन्तिम पड़ाव है | यदि आप भीड़ भाड़ से डरते हो तो आप रात में ही दर्शन कर ले रात में भीड़ कम रहती है |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/mata-vaishno-devi-ki-kahani-history-of-vaishno-devi-temple/">Mata Vaishno Devi Ki Kahani – History of Vaishno Devi Temple</a><br><br><a href="https://safarjankari.com/shri-naina-devi-temple-himachal-pradesh-ki-jankari/">Shri Naina Devi Temple Himachal Pradesh Ki Jankari</a><br><br><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%be/">ललिता देवी मन्दिर नैमिषारण्य जहाँ पूरी होती है हर मनोकामना</a></p>



<p class="has-text-align-justify">आपको रास्ते में काली नदी भी दिखाई देगी जैसे ठूलीगाड में आपको काली नदी और हरे भरे पहाड़ एक साथ दिखाई देते है जो की बहुत ही मनोरम लगता है निसन्देह प्रकृति से सुन्दर कुछ भी नहीं होता है | शारदीय नवरात्रि में यहाँ पर एला लगता है जिसमे अत्यधिक भीड़ होती है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव कंचनपुर नेपाल</h4>



<p class="has-text-align-justify">ऐसी मान्यता की <strong>Maa Purnagiri</strong> दर्शन के लाभ तभी मिलते है जब आप माँ के दर्शन के बाद नेपाल के कंचनपुर जिले में स्थित श्री सिद्धबाबा के दर्शन न कर ले तो अब आप का अगला पड़ाव श्री सिद्धबाबा मन्दिर होना चाहिए यहाँ आने के लिए आपको टनकपुर से शारदा  बैराज आना होगा जो की आप ई रिक्शा से आ सकते है फिर आपको बैराज को पैदल ही पार करना होगा इसके बाद पड़ेगी नेपाल की चेक पोस्ट जहाँ आप आधार कार्ड या अन्य कोई आईडी दिखाके आगे जाओगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आग आप चाहो तो श्री सिद्धबाबा मन्दिर तक पैदल जाओ या तो फिर वही आपको मोटसाइकिल वाले मिल जाते है जो प्रति व्यक्ति 10 रूपये लेकर आपको मुख्य बाजार तक छोड़ देते है वहां से मन्दिर पास में ही है रास्ते में नेपाल के लोगो के होटल है दुकाने है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> यहाँ अपनी भारतीय करेन्सी भी चलती है आप इस बाजार को देखते हुये आ जाइये श्री सिद्धबाबा मन्दिर परिसर में  जहाँ आप विष्णु मन्दिर , प्राचीन अखण्ड सिद्ध धुना , प्राचीन कुवां , श्री सिद्ध बाबा मन्दिर के दर्शन करिए और परिसर में हरा भरा पार्क है आप वहा बैठ सकते है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10616" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-267x300.jpg 267w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">कब जाए माँ पूर्णागिरी धाम </h4>



<p class="has-text-align-justify">देखिये यहाँ आप दर्शन हेतु कभी भी आ सकते है लेकिन गर्मियों में यहाँ भी गर्मी ही पड़ती बस ऊपर जहाँ माता का मुख्य मन्दिर है वहा हलकी सी ठण्ड लगती है बाकी टनकपुर में गर्मी ही रहती है बरसात में यहाँ जाने से आप बचाव करे क्यूंकि पहाड़ बरसात में थोडा खतरनाक हो जाते है यदि आपको ज्यादा भीड़ भाद पसन्द नहीं है तो यहाँ आप नवरात्र के समय ना जाए क्यूंकि उस समय यहाँ भीड़ होती है मेरे हिसाब से तो बरसात में यहाँ जरूरी न हो तो जाने से बचे बाकि कभी भी जाए |</p>



<p>माता पूर्णागिरि मंदिर टनकपुर से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438304953"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माता पूर्णागिरि मंदिर कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले के टनकपुर नाम के शहर में अन्नपूर्णा शिखर पे  माता पूर्णागिरि का यह पवित्र धाम स्थित है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438377699"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ पूर्णागिरि मन्दिर की आराध्य देवी कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माँ पूर्णागिरि मन्दिर की आराध्य देवी महाकाली माँ है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438461447"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ पूर्णागिरि धाम में कौन सी नदी बहती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">काली नदी जो आगे जाकर शारदा नदी कहलाती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438525167"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर से माँ पूर्णागिरि का मुख्य मन्दिर  की दूरी कितने किलोमीटर की है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर से माँ पूर्णागिरि का मुख्य मन्दिर  की दूरी लगभग 22 किलोमीटर की है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438609175"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माता पूर्णागिरि में कितने  किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आपको  लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करनी होगी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438652328"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211;  <strong>Maa Purnagiri</strong> kis rajya me hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> <strong>Maa Purnagiri</strong> Uttarakhand rajy me hai </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438689055"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टनकपुर से माँ पूर्णागिरि मन्दिर तक कैसे पहुंचे ? </strong> <p class="schema-faq-answer">आपको टनकपुर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बड़ी ही आसानी से शेयर्ड जीप मिल जायेगी जो आपको ठूलीगाड नाम की जगह तक ले जाएगी उसके बाद आपको दूसरी जीप मिलेगी जो आपको टुन्यास तक लेकर आएगी अब टुन्यास वही जगह है जहाँ से माँ पूर्णागिरि की लगभग 3 किलोमीटर की चढ़ाई शुरू होती है कभी कभी आपको टनकपुर से टुन्यास की सीधी जीप भी मिल सकती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438890776"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Maa Purnagiri Mandir ke Raste Ke Anya Mandir kaun kaun se hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">Tunyas ka Bhairav Mandir<br/>Jhuthe ka Mandir<br/>Kali Mandir Rambada</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662438967337"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; टुन्यास का भैरव मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">टनकपुर में जहाँ से माता पूर्णागिरि की पैदल यात्रा शुरुहोती है उसी जगह का नाम टुन्यास है और वही पर भैरव मंदिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662439044758"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; झूठे का मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">झूठे का मंदिर माँ पूर्णागिरि के पैदल मार्ग में पड़ता है यहाँ आप दर्शन जरूर करे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662439143024"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; पूर्णागिरि धाम जाने का बेस्ट मौसम कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यहाँ अप बरसात में ना जाये तो बेहतर है बाकी किसी मौसम में जा सकते है बेस्ट की बात करे तो हलकी सर्दी वाले महीने बेस्ट होते है |</p> </div> </div>



<p>तो दोस्तों मैंने ऊपर आपको टनकपुर स्थित माँ पूर्णागिरि मन्दिर यात्रा की ढेर सारी जानकारी दी इसके अलावा भी आपके  मन में कोई भी सवाल हो तो आप मुझसे पूछ सकते  है ,  <strong>Maa Purnagiri</strong>  अप सभी को स्वस्थ रखे |</p>
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		<title>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah  &#8211; उत्तराखण्ड में घूमने की जगह</title>
		<link>https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 May 2021 14:28:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Natural]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृतिक जगहें]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Nature]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Prayag]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah की बात करे तो देव भूमि उत्तराखण्ड में घूमने के लिए आपके पास ढेर सारे विकल्प मौजूद है इस प्रदेश में आप प्रकृति की अद्भुत सुन्दरता देखने को पाओगे इसके अलावा यहाँ पर तमाम जाने माने मन्दिर , गुरुद्वारा , चर्च , मस्जिद , पार्क , ट्रेक , रोमांच भी पाओगे &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> की बात करे तो देव भूमि <a href="https://knowindia.gov.in/states-uts/uttarakhand.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">उत्तराखण्ड</a> में घूमने के लिए आपके पास ढेर सारे विकल्प मौजूद है इस प्रदेश में आप प्रकृति की अद्भुत सुन्दरता देखने को पाओगे इसके अलावा यहाँ पर तमाम जाने माने मन्दिर , गुरुद्वारा , चर्च , मस्जिद , पार्क , ट्रेक , रोमांच भी पाओगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">कहने का तात्पर्य बस इतना है की आपको देवभूमि <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखंड</a> में केदारनाथ बाबा , बद्रीनाथ धाम , हेमकुण्ड साहिब जैसी धार्मिक जगहे भी मिलेंगी वही नैनीताल भीमताल कौसानी रानीखेत अल्मोड़ा औली चोपता मसूरी धनोल्टी जैसी जगहे भी है जहा आप झीले , झरने , पहाड़ , हरियाली का अनन्द ले सकते है वही गंगोत्री यमुनोत्री देवप्रयाग हरिद्वार जैसे स्थल भी है जहाँ आप पावन नदियों में स्नान कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके आलावा यदि आपको रोमांच पसंद हो तो आप ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग का मजा ले सकते हो वही नैनीताल तरफ आपको और भी साहसिक गेम्स देखने को मिलेंगे , आपको बर्फ देखनी हो तो ठण्डी के मौसम में औली चोपता धनोल्टी में आप यह सुख भी ले सकते हो |</p>



<h3 class="wp-block-heading">अब जानते है Uttarakhand me Ghumne Ki jagah का वर्गीकरण</h3>



<p>देवताओं की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखण्ड को दो मण्डलो में बात दिया गया है जीने नाम कुमायूं और गढ़वाल है और इन्ही दोनों मण्डलो में उत्तराखण्ड के समस्त जिले और <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> आती है आइये अब आपको यह भी बता दे की कौन सा जिला किस मण्डल में आता है <br><br><strong>कुमाऊ मण्डल </strong>&#8211;  बागेश्वर , चम्पावत , अल्मोड़ा, नैनीताल , पिथोरागढ़ और उधमसिंह नगर |<br><br><strong>गढ़वाल मण्डल</strong> &#8211; रुद्रप्रयाग , तिहरी गढ़वाल, पौढ़ी गढ़वाल , देहरादून , हरिद्वार , उत्तरकाशी , चमोली |<br><br>अब आप समझ गये होंगे की उत्तराखण्ड का कौन सा जिला किस मण्डल में आता है आइये अब बात करते है <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> के बारे में जिसके अन्तर्गत हम सम्पूर्ण उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों को कवर करेंगे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">उत्तराखण्ड में घूमने की जगहे </h4>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो आप पूरे के पूरे उत्तराखण्ड को घूमिए तो आपको मजा ही आएगा परन्तु आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ खास खास जगाहोके बारे में बताएँगे &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">देहरादून </h5>



<p class="has-text-align-justify">इस शहर का नाम आपने जरूर सुना होगा क्यूंकि यह उतराखंड की राजधानी है निसंदेह इस शहर में आपको पर्यटन के लिए बहुत कुछ मिल जाएगा |</p>



<p>देहरादून के लिये आपको भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरो से ट्रेन मिल जाएगी इसके अलावा यहाँ एक एअरपोर्ट भी है जिसका नाम जॉलीग्रांट एअरपोर्ट है |<br><br>इस शाहर में घूमने के इए आपको टपकेश्वर महादेव मन्दिर , सहस्त्रधारा , मालसी मृग विहार , राबर्स केव , लच्छीवाला , मिंद्रोलिंग मठ , फेन वेल्ली , तपोवन मन्दिर , जोनल म्यूजियम आदि है यह सभी पर्यटन स्थल अत्यधिक सुन्दर है आपको यहाँ जरूर जाना चाहिये , यहाँ आपको प्राकृतिक सुन्दरता के साथ साथ मन्दिर भी देखने  को मिलेंगे और आप जब भी देहरादून आये तो साथ में मसूरी और धनोल्टी भी जा सकते है आगे इन दोनों जगहों के बारे में भी बताऊंगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पहाड़ो की रानी मसूरी </h5>



<p>यदि आप एक प्रकृति प्रेमी है आपको पहाड़ पसंद है तो आ जाइए आप मसूरी जो की हिमालय की गोद में स्थित है यह भारत का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है , मसूरी देहरादून से महज 35 किलोमीटर ही है और देहरादून से तमाम सरकारी और प्राइवेट बसे मिल जाएँगी , रहा सवाल रुकने का तो यह एक बड़ा पर्यटन स्थल है तो यहाँ आपको बहुत से होटल मिल जायेंगे आप अपने बजट के अनुसार होटल ले सकते है |<br><br>मसूरी में घूमने के लिये आप गन हिल जा सकते है जो की एक ऊँची छोटी है यहाँ से आप हिमालय का नजारा ले सकते हो इसके आलावा आप केम्पटी फाल जा सकते है जो की एक सुन्दर झरना है , आप लेकमिस्ट जाकर वहां की कृत्रिम झील में नौका विहार कर सकते हो , आप मसूरी झील भी जा सकते हो , लाल टिब्बा आप जरूर जाइये यहाँ से आपको गगनचुम्बी पहाड़ दिखाई देंगे , बौद्ध धर्म का तिब्बती मन्दिर भी यहाँ का प्रमुख पर्यटन स्थल है इसके साथ साथ आप भत्ता फाल , मुनिसिपल गार्डेन या कम्पनी गार्डेन , क्लाउड एंड भी जा सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">धनोल्टी </h5>



<p>यह बेहतरीन पर्यटन स्थल मसूरी से लगभग 60 किलोमीटर और देहरादून से 36 किलोमीटर ही है इस जगह पर आपको सुन्दरता के साथ साथ गज़ब की शांति का अभाष होगा यहाँ आपको प्रकृति से रूबरू होने का मौका मिलता है , यह भी एक जाना मन पर्यटन स्थल है तो हटेल आदि आसानी से मिल जायेंगे और यहाँ आना भी आसान है आपको देहरादून या मसूरी या ऋषिकेश हरिद्वार से बसे भी मिल जाएँगी , <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में धनोल्तो बेहद खास है |<br><br>धनोल्टी आये तो आप ईको पार्क जरूर घुमे यहाँ के देवदार के पेड़ और हरियाली आपका मन मोह लेगी इसके अलावा एप्पल ओर्चार्ड रिसोर्ट में आप ताज़े फलो का स्वाद लेना न भूले , धनोल्टी का प्रमुख धार्मिक स्थल सुरकंडा देवी मन्दिर है यहाँ आप अवश्य जाये , अगर आप एडवेंचर के शुखीं है तो शिशिर गंगधार जाकर देखे आपको मजा आ जायेगा इन सबके आलावा धनोल्टी में आप कही भी घुमो आपको मजा ही आएगा |</p>



<p>ऋषिकेश </p>



<p>अगर <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong> की बात हो तो योगनगरी ऋषिकेश का ज़िक्र होगा ही यह ऐसा पर्यटन स्थल है जो योग के लिए जाना जाता है धर्म के लिए जाना जाता है , प्राकृतिक सुन्दरता के लिए जाना जाता है , राफ्टिंग जैसे साहसिक खेलो के लिए जाना जाता है , यहाँ पहुंचना अत्यन्त आसान है तमाम शहरो से यहाँ के लिए सीधी ट्रेन है और यदि आपके शहर से ऋषिकेश की कोई सीधी ट्रेन नहीं है तो आप हरिद्वार आके ऋषिकेश आ जाइये |<br><br>यहाँ रुकने की तो कोई दिक्कत ही नहीं है होटल तो बहुत से है उसके अलावा आपको ऋषिकेश में ढेर सारी सुव्यवस्थित सस्ती धर्मशालाए भी मिल जायेंगी जहाँ आप आराम से रुक सकते हो |<br><br>इस शहर में घूमने के लिए आप गंगा नदी पर बने राम झुला , लक्ष्मण झुला , जानकी झुला की और जा सकते है राम झूले के पास आपको परमार्थ निकेतन , गीता भवन , चौरासी कुटिया जा सकते हो , त्रिवेणी घाट पर जाकर गंगा स्नान करे , ऋषि कुण्ड , भारत मन्दिर भी देखे , भूतनाथ मंदिर , त्रयम्बकेश्वर मंदिर देखे फिर नीलकंठ महादेव के दर्शन करे |<br><br><a href="https://safarjankari.com/ram-jhula-ke-aas-paas-ke-parytan-sthal/">राम झूला के आसपास के पर्यटन स्थल</a>   <br><br>ऋषिकेश से थोड़ी ही दूरी पर स्थित माँ कुंजापुरी देवी का मन्दिर है यहाँ भी आप अवश्य जाइये , नीरगढ़ और पटना  और गरुण चट्टी वाटरफाल भी आप जा सकते हो आप दो तीन दिन यहाँ जरूर रुके गंगा आरती परमार्थ निकेतन की देखे त्रिवेणी घाट की देखे बहुत ही मजा आएगा आपको ऋषिकेश में |<br></p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="400" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश.jpg" alt="राम झूला के समीप परमार्थ निकेतन" class="wp-image-2073" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">हरिद्वार </h5>



<p>यह एक ऐसा धार्मिक स्थान है जहाँ हर साल लाखो की संख्या में पर्यटक आते है और पावन माँ गंगा में डूबुकी लगाते है , हरिद्वार में कुम्भ का मेला भी लगता है , हरिद्वार उत्तराखंड का एक जाना मन शहर है और यहाँ आने के लिए आपको भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरो से ट्रेन मिल जाएँगी तो यहाँ आना अत्यंत आसान है |<br><br>हरिद्वार में ठहरने की भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है यहाँ आपको तमाम होटल और धर्मशालाए मिल जाएँगी , धर्मशालाओ में आप रुकोगे तो आपको काफी सस्ता पड़ेगा |<br>यहाँ घूमने के लिए बहुत स्थल है जैसे गंगा के घाट जिनमे हरी की पौड़ी , चंडी घाट,  कनखल का घाट प्रमुख है इसके आलावा आप मनसा देवी मंदिर , चंडी दक्ष महादेव मंदिर , भारत माता मन्दिर, माया देवी मन्दिर, पायलट बाबा आश्रम , सप्तऋषि आश्रम , भूमा निकेतन , माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर , तुलसी मानस मंदिर , शिवानन्द धाम , इण्डिया टेम्पल , पावन धाम , पारद शिवलिंग , शांतिकुंज आदि जगहों पर जा सकते हो |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे </a></p>



<p></p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h5>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखंड के पञ्च प्रयाग में से एक देवप्रयाग टीहरी गढ़वाल जिले में आता है इस स्थल पर आप नदियों और पहाड़ो के सुन्दर द्रश्य देख पाओगे , देवप्रयाग आप ऋषिकेश से आ सकते हो लगभग ७० किलोमीटर पड़ेगा , यहाँ घूमने के ज्यादा स्थल तो नहीं है फिर भी आप यहाँ पर दशरथशिला , भागीरथी और अलकनंदा का  संगम , रघुनाथ मंदिर , चन्द्रबदनी मंदिर आदि स्थल देख सकते है |<br></p>



<h5 class="wp-block-heading">उत्तराखंड के चार धाम </h5>



<p>गंगोत्री , यमुनोत्री , केदारनाथ , बद्रीनाथ ये उत्तराखण्ड के चार धाम है जहाँ की अत्यन्त श्रद्धालु दर्शन हेतु आते है इन चारो धाम की सुन्न्द्रता देखते ही बनती है गज़ब का अलौकिक सा माहोल रहता है , <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में इन धामों को जरूर शामिल करे |<br><br>गंगोत्री माँ गंगा का उद्गम स्थल है यही से माँ गंगा हिमालय से निकलती है यहाँ का सबसे प्रमुख मंदिर गंगोत्री मंदिर है यह स्थान सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है यहाँ आने के लिए आपको हरिद्वार ऋषिकेश से बस मिल जाएगी आप जब भी गंगोत्री आये तो हरसिल , डोडी ताल , केदार ताल , दयार बुग्याल , नादाँ वन तपोवन , गोमुख आदि जरूर जाए ये सभी जगहे अनेको प्राकृतिक द्रश्यो से भरी है |</p>



<p>अब हम बात करते है यमुनोत्री की यहाँआने के लिये आपको  सबसे पहले हनुमान चट्टी आना होगा फिर वहां से ट्रेक करके आप यमुनोत्री आएँग , यह स्थान यमुना नदी का उद्गम स्थल है , यहाँ आप गर्म कुण्ड के जल से स्नान करे जो की यमुनोत्री मंदिर के पास ही है यहाँ से 7 किलोमीटर दूर जानकी चट्टी आप जा सकते हो |<br><br>बद्रीनाथ धाम तो लगभग सबने ही सुना होगा यह हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है यहाँ  जाने के लिए आपको शुरुआत हरिद्वार या ऋषिकेश से करनी होगी हरिद्वार से बद्रीनाथ धाम लगभग 325 किलोमीटर की दूरी पर होगा , बद्रीनाथ में रुकने के लिए आपको तमाम होटल मिल जायेंगे , यहाँ आप जब भी जाये तो यहाँ की पान्ह्क शिलाओ के दर्शन जरूर करे , यहाँ बने तप्त कुण्ड में स्नान भी करे अब आप नारद कुण्ड , चरण पादुका , माना गाँव , भीम पुल , शेष नेत्र जैसे स्थल भी देख सकते है |</p>



<p>केदारनाथ महादेव का दिव्य स्थान जहाँ का धार्मिक महत्त्व और नैसर्गिक सुन्दरता हर किसी को बुलाती रहती है वैसे तो यह स्थल रुद्रप्रयाग जिले में आता है और यह 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है आप यहाँ भी हरिद्वार या ऋषिकेश से बस के द्वारा जा सकते है हरिद्वार से सोनप्रयाग और सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड तो आप वहां से जा सकते हो उसके बाद की यात्रा आपको पैदल / खच्चर / पिट्ठू से  ही करी होगी  यहाँ सबसे पहले तो आप भोले बाबा के अलौकिक दर्शन करे फिर आप गौरीकुंड , वासुकी ताल भी जा सकते है |<br><br>केदारनाथ मंदिर से 4 किलोमीटर की दूरी पर चोखादो ताल इसे गाँधी ताल भी कहते है यहाँ भी आप जा सकते हो |<br><br>त्रियुगीनारायण मंदिर गौरीकुंड से १० किलोमीटर की दूरी पर है आप यहाँ भी दर्शन हेतु जा सकते है |<br><br>केदारनाथ से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उखीमठ भी आप जा सकते है जब  केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते है तो उनकी पूजा उखीमठ में की जाती है |<br><br>देवरिया ताल भी यहाँ से  महज 60 किलोमीटर की दूरी पर है और वासुकी ताल भी आप जा सकते हो |<br><br>नोट &#8211; ध्यान से ये चारो छोटे धाम के कपाट खुलने की जानकारी करके ही यहाँ जाए |</p>



<h5 class="wp-block-heading">उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग </h5>



<p class="has-text-align-justify">प्रयाग शब्द का मतलब नदियों के संगम से होता है तो उत्तराखंड में पांच ऐसे पवित्र स्थल है जहाँ ये संगम हुये है इनको है आइये इनके बारे में भी जान लिया जाय &#8211; </p>



<h6 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h6>



<p>देवप्रयाग के बारे में हम ऊपर बता ही चुके है <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में ये समस्त प्रयाग बड़े ही खास है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल पर मंककिनी और अलकनंदा नदियों का संगम होता है यह स्थल हरिद्वार से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर है , रुद्रप्रयाग संगम से महज ३ किलोमीटर की दूरी पर कोटेश्वर मन्दिर है जहाँ आपको जरूर दर्शन हेतु जाना चाहिए इसके अलावा आप रुद्रनाथ मन्दिर और अगस्त्मुनिजैसे स्थलों पर भी जा सकते है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ पर अलकनंदा और पिंडर नदियों का संगम होता है , ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी लगभग 173 किलोमीटर है , रुद्रप्रयाग से कर्णप्रयाग की दूरी मात्र ३३ किलोमीटर है यहाँ देखने के लिए आप उमा मंदिर , कर्ण मंदिर , आदि बद्री मन्दिर जा सकते है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल पर अलकनंदा और नंदाकिनी नदी का संगम होता है , नंदप्रयाग कर्णप्रयाग से महज २० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहाँ के मुख्या मंदिरों में आप गोपाल मंदिर और चंडिका मंदिर है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस  स्थल पर विष्णुगंगा और अलकनंदा नदी का संगम होता है , नंद्प्रयाग से विष्णुप्रयाग की दूरी 70 किलोमीटर है , यहाँ से 40 किलोमीटर की दूरी पर बद्रीनाथ धाम स्थित है |<br><br><a href="https://safarjankari.com/panch-prayag-ki-samast-jankari/">Panch Prayag Ki Samast Jankari yahan se padhiye </a></p>



<h5 class="wp-block-heading">पञ्च केदार </h5>



<p class="has-text-align-justify">पञ्च केदार मतलब भगवान शिव के पांच पवित्र मन्दिर जो उत्तराखण्ड में स्थित  है ये उत्तराखण्ड के काफी उंचाई पर स्थित शिव मंदिर है इनमे केदारनाथ , तुंगनाथ , रुद्रनाथ , मदमहेश्वर और कल्पेश्वर है |<br><br>केदारनाथ के बारे में हम आपको पहले ही बता चुके  है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">तुंगनाथ </h6>



<p>यह पवित्र शिव मन्दिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है इस मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है , यह स्थल चोपता क्षेत्र में आता है , ऋषिकेश से यहाँ की दूरी लगभग 210 किलोमीटर है यहाँ आप तुंगनाथ मंदिर देखे फिर मंदिर से आगे लगभग 3 किलोमीटर पर चंद्रशिला शिखर है वहां भी आप ट्रेक कर सकते है |<br><br>यहाँ पहुचने के लिए आपको चोपता आना होगा वहां से आप तुंगनाथ मंदिर की और जा सकते है , तुंगनाथ मंदिर का ट्रेक बड़ा ही शनदार है और दिसंबर जनवरी में यहाँ आपको बर्फ भी देखने को मिलती है | चोपता भी एक जाना माना हिल स्टेशन है यहं भी आप घूम सकते हो |</p>



<h6 class="wp-block-heading">रुद्रनाथ महादेव </h6>



<p class="has-text-align-justify">भगवान शिव का यह मन्दिर चमोली जनपद में स्थित है यह मंदिर गोपेश्वर केदारनाथ रोड पर स्थित है , यहाँ जाने के लिए आपको सबसे पहले गोपेश्वर आन अहोगा फिर गोपेश्वर से रुद्रनाथ की यात्रा शुरू होती है , यहाँ की यात्रा में आपको बुग्याल कई प्रसिद्ध मंदिर मिलते है यह यात्रा बेहद ही रोचक होती है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">मदमहेश्वर </h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आने के लिए आपको उखीमठ आना होगा फिर उखीमठ से ऊनिआना गाँव और यहाँ से से लगभग 21 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है जिसमे आपको प्रकृति के सुन्दर नज़ारे देखने को मिलते है , यह रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">कलपेश्वर</h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आपको भोलेनाथ की जटा के दर्शन होते है जो की एक चट्टान सी है यह चमोली जिले में है यहाँ आने के लिए आपको हेलंग आना होगा फिर वहां से ट्रेक करके आप इस मन्दिर तक अ सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पञ्च बद्री</h5>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखण्ड में भगवान विश्वु के पांच धाम है जिसमे बद्रीनाथ मन्दिर , ध्यान बद्री ,वृद्ध बद्री , योग बद्री , भविष्य बद्री है बद्रीनाथ धाम के बारे में हम आपको बहा ही चुके है <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong>  में इन बद्री को शामिल करना आवश्यक था |<br><br>योग  ध्यान बद्री जिला चमोली में आता है और यह अलाक्नान्दनादी के किनारे गोविन्द घाट पर बना है यह पांडूकेश्वर नाम की जगह पर है यहाँ भगवान् विष्णु ध्यान की मुद्रा में है |<br><br>भविष्य बद्री भी चमोली जिले में है और यह बद्री जोशीमठ के पास सुभई गाँव में है यहाँ विष्णु जी के नरसिंह रूप की पूजा की जाती है यहाँ आने के लिए आप सबसे पहले जोशीमठ आये फिर सलधर फिर सलधर से 6 किलोमीटर का ट्रेक करके जाए भविष्य बद्री और दर्शन करे |<br><br>वृद्ध बद्री जोशीमठ से लगभग 7 किलोमीटर  दूरी पर स्थित है  नाम के अनुसार इस जगह विष्णु जी की पूजा वृद्ध रूप में की जाती है मतलब बूढ़े रूप में , यह साल के बारह महीने खुला रहता है |<br><br>आदिबद्री यह स्थान कर्णप्रयाग से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्री हेमकुण्ड साहिब चमोली जिला </h5>



<p>श्री हेमकुण्ड साहिब सिख समुदाय का एक बहुत ही पवित्र स्थल है यह चमोली जिले में है यह एक गुरुद्वारा है यह एक बहुत ही सुन्दर गुरुद्वारा है जिसके किनारे पर एक झील भी है , यह स्थल श्रधालुओ के लिए समूचे साल न खुलकर सिर्फ मई से ओक्टूबर के मध्य ही खुलता   है क्यूंकि बाकी के दिनों में अत्यधिक बर्फ पड़ने के कारण यहाँ की यात्रा कठीन हो जाती है |<br>यहाँ अप लक्ष्मण मन्दिर , कागभुसंडी ताल , भीम पुल , पांडूकेश्वर आदि देख सकते हो यहाँ तक आने के लिए आपको सबसे पहले जोशीमठ तक आना होगा फिर वहां से आपको गोविन्द घाट आना होगा अब गोविन्द घाट से आपको २० किलोमीटर ट्रेक करके हेमकुण्ड साहिब तक आना ओगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">औली </h5>



<p class="has-text-align-justify">औली एक ऐसा नाम जिसे आजकल के घुमक्कड़ बहुत ही पसंद करते है क्यूंकि यहाँ आप प्रकृति को बहुत ही पास से देखते है यहाँ आप बर्फ का भरपूर मजा ले सकते है और आइस स्कीइंग यहाँ से बेहतर शायद  ही आप कही और पाए औली में आप क़वारी बुग्याल , गुरसो बुग्याल , चिनाल झील , छन्ना कुंड , सेल्धार , आदि देख सकते हो |<br>यहाँ तक आने के लिए आपको सबसे पहले जोशीमठ आना होगा जोशीमठ से आप औली रोपवे के द्वारा जाइएगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">जोशीमठ </h5>



<p class="has-text-align-justify">आप देख रहे उत्तराखंड के कई पर्यटन स्थलों को केंद्र जोशीमठ ही है तो आपको जोशीमठ के आसपास के और भी टूरिस्ट सोत बता देते है यहाँ आपको बहुत सारे मठ और मंदिर मिलेंगे और ये स्थल ही बाद्रिनाथ का प्रवेश दार है जोशीमठ चमोली जिले में है नरसिंह मंदिर , ज्योतिरमठ , नंदा देवी राष्टीय उद्यान आप देख सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">फूलो की घाटी</h5>



<p>यह बेहद की खूबसूरत स्थान चमोली जनपद में है और यहाँ आप जोशीमठ से आ सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कोटद्वार </h5>



<p class="has-text-align-justify">कोटद्वार उत्तराखण्ड राज्य के पौढ़ी गढ़वाल जिले में स्थित है यहाँ का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिद्धबली हनुमान मन्दिर है जो की खोह नदी के किनारे पर है यह एक बहुत सुन्दर स्थल है इसके अलावा यहाँ से 15 किलोमीटर की दूरी पर कण्वाआश्रम है यहाँ भी आप जा सकते है यहाँ आप बड़ी ही आसानी से आ सकते है यह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है यह स्थान हरिद्वार से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">लैंसडाउन </h5>



<p class="has-text-align-justify">कोटद्वार से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर लैंसडाउन नाम का एक हिल स्टेशन है जो की टिप एन टॉप के लिए फेमस है यहाँ आपको भीड़ बहुत कम दिखेगी तो आप जीवन में कभी यहाँ का भी प्लान बनाये यह हिल स्टेशन <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में लोकप्रिय हो रही है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नैनीताल </h5>



<p class="has-text-align-justify">भारत का एक जाना माना हिल स्टेशन नैनीताल जो की उत्तराखंड राज्य में है यह वाकई में झीलों का शहर है यहाँ घुमने के लिए ढेर सारे विकल्प है यहाँ का सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है और काठगोदाम से नैनीताल लगभग 35 किलोमीटर है , यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल में नैना झील , नैना देवी मंदिर , सातताल, जू , रामनगर , रामगढ , भीमताल , माल रोड , हनुमान गढ़ी , मुक्तेश्वर , नौकुचियाताल , थोड़ी दूरी पर कैंची धाम आदि है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रानीखेत</h5>



<p class="has-text-align-justify">काठगोदाम रेलवे स्टेशन रानीखेत की दूरी महज लगभग 80 किलोमीटर है यहाँ आपको देवदार और चीड़ के ऊँचे ऊँचे पेड़ दिखाई देंगे जो वाकई में बेहद ही खूबसूरत है एक प्रकृति प्रेमी क लिए रानीखेत एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट है यहाँ के मुख्य पर्यटक स्थल चौबटिया , दूनागिरी , गोल्फ का मैदान , शीतला खेत , चिलियानौला , मजखाली , द्वाराहाट , धोलिखेत आदि है यहाँ आने के लिए सबसे पहले आपको काठगोदाम आना होगा फिर काठगोदाम से आप रानीखेत बस , टैक्सी आदि साधनों से पहुँच सकते हो , रानीखेत अल्मोड़ा जिले में है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">अल्मोड़ा </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह खुद एक जिला है और काठगोदाम से लगभग 83 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ आप कथोदम से बस या टैक्सी लेके जा सकते हो यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थलों में चितई मंदिर , डिअर पार्क , मम्यूजियम , कसार देवी प्रमुख है |<br><br>इसके अलावा अल्मोड़ा के आसपास भी ढेरो पर्यटन स्थल है जिन्हें हम नीचे बता रहे है &#8211; <br>अल्मोड़ा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर जागेश्वर है |<br>अल्मोड़ा से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है बिनसर है |<br>प्राकृतिक सौन्दर्यता से ओत प्रोत कोसी अल्मोड़ा से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर है |<br>बैजनाथ जो की एक उत्रुष्ट मंदिरों की श्रंखला है यह अल्मोड़ा से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है |<br>बागेश्वर भी एक जाना माना पर्यटन स्थल है जो की अल्मोड़ा से मात्र 90 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>


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<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah.jpg" alt="" class="wp-image-10471" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">कौसानी </h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की नैसर्गिक सुन्दरता देखते ही बनती है महात्मा गाँधीजी ने कौसानी को धरती का स्वर्ग कहा है यहाँ पर्यटन के बहुत से विकल्प नहीं है लेकिन आप यहाँ आये यहाँ रहे मजा आ जायेगा , कौसानी अल्मोड़ा से 50 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ के मुख्य पर्यटन केंद्र पन्त संग्रहालय , अनासक्ति आश्रम है इसके अलावा कौसानी से 20 किलोमीटर की दूरी पर पिनाकेश्वर है जो की ट्रेकिंग के लिए बेस्ट है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरी मन्दिर टनकपुर </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह धार्मिक स्थल चम्पावत जिले में है , माँ पूर्णागिरी देवी का मंदिर अन्नपूर्ण शिखर पे है और यह 108 सिद्धपीठो में से एक है यहाँ नवरात्र में अताधिक भीड़ होती है यहाँ आने के लिए आपको सबसे पहले टनकपुर आना होगा टनकपुर एक रेलवे स्टेशन है नै दिल्ली से टनकपुर की दूरी लगभग 330 किलोमीटर है और टनकपुर से यह मंदिर 22 किलोमीटर की दूरी पर है जिसे आप जीप द्वारा जा सकते है बस आपको लगभग 3 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके माँ तक पहुचना होगा |<br>यहाँ से अप नेपाल के महेन्द्रनगर में स्थित सिद्ध बाबा जा सकते है और टनकपुर में आप शारदा घाट जा सकते है यदि आपको राफ्टिंग का शौख है तो आप बूम राफ्टिंग सन्टर भी जा सकते हो, <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में माँ के इस धाम का जिक्र बेहद जरूर है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पिथोरागढ़ </h5>



<p class="has-text-align-justify">पिथोरागढ़ उत्तराखण्ड राज्य का एक जिला है और यहाँ भी पर्यटन के ढेर सारे विकल्प मौजूद है यहाँ आप सीढीनुमा खेत देखने को पाओगे यहाँ का नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है जो की यहाँ स लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ के मुख्य पर्यटन केंद्र थल केदार ध्वज , चन्दाक आदि है इसके आलावा इसके आसपास भी कुह जाने माने टूरिस्ट पॉइंट है  जिन्हें भी आप जान ले तो बेहतर है |<br><br>पिथोरागढ़ से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बेरीनाग यहाँ  आप हरे भरे चाय के बागन और हिमालय के ऊँचे पहाड़ देख सकते हो |<br><br>गंगोली हाट नाम की जगह पिथोरागढ़ से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है |<br><br>नेपाल की सीमा से लगा हुआ धारचूला पिथोरागढ़ से 100 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">मुन्सियारी </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह हिल स्टेशन पिथोराढ़ में स्थित है बहुत से लोग इसे उत्तराखण्ड का छोटा कश्मीर कहते है यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल पंचाचूली चोटी , महेश्वरी कुण्ड , बिरथी फाल , नंदा देवी मंदिर , कालामुनी मंदिर , बैतूली धार, दरकोट है काठगोदाम से मुन्सियारी लगभग 275 किलोमीटर की दूरी पर है और टनकपुर से 285 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पातळ भुवनेश्वर </h5>



<p class="has-text-align-justify">पिथोरागढ़ से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पाताल भुवनेश्वर है जहा बनी गुफाये देखते ही बनती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">चम्पावत</h5>



<p class="has-text-align-justify">यह जिला उत्तराखण्ड राज्य में है यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल ग्वाल देवता , लोहाघाट , लोहाघाट से 40 किलोमीटर पर पंचेश्वर जगह है जो की चमू मंदिर के लिए प्रसिद्ध है , मायावती आश्रम भी आप जा सकते हो | इसके आलावा गुरुद्वारा रीटा साहिब , आदित्य मंदिर , एबट माउंट भी आप जा सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">केदारकंठा</h5>



<p class="has-text-align-justify">केदारकंठा ट्रेकिंग के शौखीन लोगो के लिये एक उत्तम विकल्प है यह उत्तरकाशी जिले में है यहाँ आने के लिए आपको सांकरी गाँव आना होगा सांकरी गाँव आप देहरादून से आ सकते है फिर यहाँ से आप केदारकंठा का ट्रेक शुरू करेंगे यह सर्दियों में भी खुला रहता है यहाँ के लिए आप गाइड कर ले तो ज्यादा सही रहेगा गाइड आपको सांकरी से मिल जायेंगे |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्रीनगर </h5>



<p class="has-text-align-justify">अरे ये श्रीनगर जम्मू कश्मीर वाला नहीं है भैया ये उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल जनपद का एक टाउन है जो की एक पर्यटन केंद्र है यह जगह अलकनंदा नदी के किनारे पर है यह पर्यटन स्थल ऋषिकेश से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p>मैंने इस लेख में <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong> के कई पर्यटन स्थल का जिक्र किया है लेकिन फिर भी अभी भी ढेरो पर्यटन केंद्र जो की उत्तराखंड में होंगे यहाँ आप नहीं पाएंगे क्यूंकि मेरे हिसाब से तो पूरा उत्तराखण्ड ही घूमने वाला है मेरी जानकारी में जो  जो था मैंने यहाँ लिख दिया और भी बहुत से टूरिस्ट स्पॉट जैसे न्यू टिहरी , पौढ़ी , चंबा , जिम कार्बेट , चकराता , कानाताल , पंगोत  आदि भी देखने लायक है |<br><br>खैर कोई नहीं आप सब कमेन्ट करके इस लिस्ट में और भी टूरिस्ट स्पॉट जोड़ दे जिससे जो भी यह लेख पढ़े फिर आपका कमेन्ट पढ़े तो उसे और भी ज्यादा <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> की जानकारी हो जाय धन्यवाद |</p>



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		<title>History of Kedarnath Temple in Hindi &#124; केदारनाथ मंदिर का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jul 2020 10:51:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केदारनाथ  एक ऐसा नाम जिससे भारत का रहने वाला लगभग हर व्यक्ति परिचित है यह पवित्र स्थल उत्तराखंड में है और 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है और यहाँ जाकर शिवजी के दर्शन करना किसी सौभाग्य से कम नहीं है यह मंदिर काफी उंचाई पर बना है , वैसे इस पोस्ट में हम केदारनाथ धाम की पौराणिक कथा History of Kedarnath Temple in Hindi की बात करेंगे &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>History of Kedarnath Temple in Hindi</strong> केदारनाथ  एक ऐसा नाम जिससे भारत का रहने वाला लगभग हर व्यक्ति परिचित है यह पवित्र स्थल उत्तराखंड में है और <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/">12 ज्योतिर्लिंग</a> में से एक है और यहाँ जाकर शिवजी के दर्शन करना किसी सौभाग्य से कम नहीं है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह मंदिर काफी उंचाई पर बना है , वैसे इस पोस्ट में हम <a aria-label="undefined (opens in a new tab)" href="https://www.incredibleindia.org/content/incredibleindia/en/destinations/kedarnath.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">केदारनाथ</a> मंदिर की पौराणिक कथा <strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong> जानेंगे  |</p>



<h2 class="wp-block-heading">History of Kedarnath Temple in Hindi &#8211; <strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong></h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आज की यह हमारी छोटी सी पोस्ट बस आपको यह जानकारी देने के लिए है कि आखिर<strong> केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong> क्या है क्यों यह स्थल इतना प्रसिद्ध है अपने देश में हर एक छोटे बड़े मन्दिर के पीछे कोई न कोई कथा-कहानी जरूर होती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इसी क्रम में बाबा केदारनाथ मन्दिर  की  भी कुछ पौराणिक कथाये है जो आज आपको हम बताने वाले है , यह बेहद ही अद्भुत मंदिर तीन औरो से पहाड़ो से घिरा हुआ है और यह धार्मिक महत्त्व के साथ साथ अपनी नैसर्गिक प्राकृतिक ख़ूबसूरती के लिए भी जाना जाता है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">केदारनाथ धाम की पौराणिक कथा &#8211; <strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">विशाल हिमालय के आंचल में बना यह अति पावन मंदिर अपने में एक बड़ा सा इतिहास लिए हुए है कहने का मतलब यह धाम कई किद्वंती  लिए हुए है तो आइये जानते है  <strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong> <strong> </strong> &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">नर और नारायण से जुडी किद्वंती &#8211; <strong>History of Kedarnath Temple in Hindi</strong></h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">नर और नारायण जो की भगवान विष्णु के अवतार थे इन दोनों ने केदार पर्वत पर भोलेनाथ की तपस्या की थी जिससे भोलेबाबा प्रसन्न हुए और इन दोनों को दर्शन दिए और कोई भी वरदान मागने को कहा |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तब तब नर और नारायण ने भगवान शिव से ज्योतिर्लिंग के रूप में केदारनाथ में ही रहने का वरदान मागा था जिसे भोलेबाबा ने माना था और वो ज्योतिर्लिंग के रूप में यही बस गए थे |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पांडव से जुडी कहानी &#8211; <strong>History of Kedarnath Temple in Hindi</strong></h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">जब कौरव और पांडवो का युद्ध समाप्त हो गया था तो एक दिन श्री कृष्ण जी के साथ पांचो पांडव इस युद्ध के बारे में सोच रहे थे तब श्री कृष्ण जी ने बोला था की तुम लोग यह युद्ध को  जरूर जीत गए हो लेकिन अपने भाई बंधुओ का विनाश करने का पाप तो तुम सब पर लगा ही है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इस पाप से मुक्ति सिर्फ और सिर्फ भोलेबाबा ही करा सकते है अब क्या था पांडवो ने ठान लिया की अब सबसे पहले भगवान शिव को मनाया जायेगा और निकल पड़े भगवान शिव से मिलने इधर भोलेबाबा भी पांडवो से नाराज थे क्यूंकि इन लोगो ने अपने ही भाई बंधुओ का विनाश किया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">लेकिन पांडव अब दृढ निश्चर कर चुके थे की भगवान शिव से मिलना ही है महादेव की तलाश में पांडव केदारनाथ आ गये अब महादेव ने सोचा अरे ये लोग तो यहाँ भी आ गए अब क्या करे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तब तक महादेव को जानवरों का एक  झुण्ड दिखाई दिया फिर क्या था महादेव ने एक बैल का रूप लिया और उस जानवरों के झुण्ड में शामिल हो गए अब पांडव फिर दुविधा में थे की इतने सारे जानवरों में महादेव रुपी बैल को कैसे पहचाना जाये |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">फिर भीम ने दो पहाडियों पर पैर रखे और खड़े हो गए और बाकी जो पांडव थे उन्होंने जानवरों को भीम के पैरो के नीचे से भगाना शुरू किया सभी जानवर भागने भी लगे लेकिन शिव रुपी जो बैल था उसे भीम के पैर के नीचे आना उचित नहीं लगा |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब पांडव भोलेबाबा को पहचान चुके थे  तो वह महादेव रुपी बैल  वही खड़े खड़े जमीन में धसने लगा यह देख भीम अपनी पूरी शक्ति से भागे और उस बैल का कुल्हा पकड़ लिया अब भोलेबाबा को मजबूरी वश प्रकट होना पड़ा और अपने दर्शन भी देने पड़े |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">भोलेनाथ पांडवो के इस दृढ निश्चय से प्रभावित थे इसीलिए पांडवो को पापो से मुक्त किया यह <strong><em>History of Kedarnath Temple in Hindi</em></strong>  की दूसरी प्रचलित किद्वंती थी |<br><br>यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-badrinath-temple-in-hindi/">History of Badrinath Temple in Hindi</a><br><a href="https://safarjankari.com/rajasthan-me-ghumne-ki-jagah-ki-jankari/">Rajasthan me Ghumne ki Jagah – राजस्थान में घूमने की जगह</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">केदारनाथ मंदिर किसने बनवाया </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये दोस्तों इस धाम को बनवाने की जानकारी का अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन कुछ कथाये जरूर प्रचलित है  जो हम आपके नीचे बता रहे है &#8211;</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> एक किद्वंती के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने करवाया है जो की सन  1076 -1099 काल के थे यह जानकारी ग्वालियर की राजा भोज स्तुति के अनुसार है |<br><br>कुछ लोगो का कहना है की यह मंदिर पांडवो ने बनवाया है कहने का तात्पर्य की मूल मंदिर पांडवो ने बनवाया था परन्तु आज जो आप देख रहे है उसका निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था , या फिर उस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया हो |<br><br>जाने माने इतिहासकार डॉ शिव प्रसाद का कहना है की  शैव लोग आदि गुरु शंकराचार्ये से पहले से केदारनाथ जाते रहे थे  |</p>



<p><strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong> से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980002035"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मन्दिर किस राज्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">केदारनाथ मन्दिर उत्तराखण्ड राज्य में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980038608"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मन्दिर किस जिले में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">केदारनाथ मन्दिर रुद्रप्रयाग जनपद में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980174697"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ की सबसे प्रमुख नदी कौन सी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मन्दाकिनी </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980228536"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">प्राप्त पौराणिक कथाओ के अनुसार केदारनाथ मंदिर का इतिहास दो कथाओ पर आधारित है एक तो नर और नारायण की कथा दूसरी पांडवो की कथा |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980362937"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मंदिर किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">केदारनाथ मंदिर किसने बनवाया इसका कोई मूल प्रमाण तो नहीं है परन्तु पौराणिक कथाओ के अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर को बनवाया था वही एक एनी कथा की माने तो इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने करवाया था तीसरी कथा के अनुसार राजा भोज द्वारा केदारनाथ मंदिर बनवाया गया है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980580330"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मन्दिर कब बनवाया गया है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आठवी शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने बनवाया था वाही कुछ लोगो का मानना है कि 1076 से 1099 के मध्य इसे राजा भोज ने बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980739419"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>History of Kedarnath Temple in Hindi</strong> क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इसमें आपको नर और नारायण की कथा और पांडवो की कथा पढनी होगी जो की विस्तृत में इसी पोस्ट में मैंने बताई हुई है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660980828701"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; केदारनाथ मंदिर 6 महीने के लिये बंद क्यों रहता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बर्फ़बारी के कारन |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये दोस्तों ये सब जो<strong> History of Kedarnath Temple in Hindi</strong> हमने आपको बताई वो सब पौराणिक कथा के आधार पर खैर केदारनाथ धाम हिन्दुओ के लिए आस्था का केंद्र है और हर हिन्दू जीवन में एक बार बाबा केदार के दर्शन करना अवश्य चाहता है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इसीलिए हमने सोचा की अपने पाठको को <strong>केदारनाथ मंदिर का इतिहास</strong>     बता दिया जाय तो यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो कमेंट करके बताये |</p>
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		<title>History of Badrinath Temple in Hindi &#8211; बद्रीनाथ की कथा , इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2020 15:01:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इस पोस्ट में  में हम जानेंगे कि बद्रीनाथ धाम का नाम बद्रीनाथ क्यों पड़ा और बद्रीनाथ धाम  की समस्त  पौराणिक कथाये पढिये</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>History of Badrinath Temple in Hindi </strong>की इस पोस्ट में हम आपको उत्तराखण्ड के एक जनपद चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम की पौराणिक कथाओ के बारे में बताएँगे इस पावन मन्दिर को हर कोई जानता है  इसे हम बद्रीनारायण मन्दिर भी कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह <a href="https://safarjankari.com/bharat-ke-char-dham-kaun-kaun-se-hain/">चार धाम</a> में से एक है  , यह पूर्ण रूप से <a href="https://www.britannica.com/topic/Vishnu" target="_blank" rel="noreferrer noopener">भगवान विष्णु</a> को समर्पित है , आज की पोस्ट <strong>History of Badrinath Dham </strong>में हम इस स्थल के इतिहास और कथाओ से रूबरू होंगे |</p>



<h2 class="wp-block-heading">History of Badrinath Temple in Hindi &#8211; बद्रीनाथ की कथा </h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">निसन्देह भारत के धार्मिक स्थलों में बद्रीनाथ मंदिर एक विशेष महत्त्व रखता है यहाँ आप आध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ प्रकृति की नैसर्गिक सुन्दरता से भी रूबरू होते है , यहाँ का जो मुख्य मन्दिर है उसमे एक लगभग 3.3 फिट की शालिग्राम की प्रतिमा है जो की बद्रीनाथ जी को समर्पित है और अत्यन्त सुन्दर है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हम सभी जानते है हर एक मन्दिर की अपनी एक कहानी होती है अपना एक इतिहास होता है इसी क्रम में बद्रीनाथ धाम का भी अपना एक इतिहास है जिसे हम <strong><em>History of Badrinath Temple in Hindi</em></strong> की पोस्ट में जानने का प्रयास करेंगे |</p>



<h3 class="wp-block-heading"> बद्रीनाथ धाम की पौराणिक कहानी और इतिहास </h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अच्छा अगर हम <strong>बद्रीनाथ धाम मन्दिर के इतिहास</strong> की बात करे तो वैदिक शास्त्र में इस पवित्र मन्दिर का उल्लेख मिलता है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">बद्रीनाथ धाम की पौराणिक कथाये &#8211; <strong>History of Badrinath Temple in Hindi</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये बद्रीनाथ धाम से सम्बन्धित कई पौराणिक कथाये प्रचलित है जो हम आज आपको <strong>बद्रीनाथ की कथा </strong> में बताने वाले है हालाँकि इन पौराणिक कथाओ का कोई ठोस साक्ष्य नहीं होता लेकिन भगवान किसी साक्ष्य के मोहताज भी नहीं होते है तो आइये शुरू करते है  &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">भगवान विष्णु के बालरूप से सम्बन्धित बद्रीनाथ की कथा</h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यहाँ मान्यता है की एक बार भगवान विष्णु तप करने के लिए पृथ्वी पर एक उचित स्थान देख रहे थे  तो उनको अलकनंदा नदी के किनारे एक स्थल अच्छा लगा लेकिन यह स्थल भोलेनाथ का था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> यही विष्णु जी बाल रूप में अवतरित हुए और जोर जोर से रोने लगे , भगवान विष्णु के बालरूप का इस तरह से रोना देख देवी पार्वती विचलित हो गई और फिर महादेव के संग देवी पार्वती भगवान विष्णु के बालरूप के  सम्मुख प्रकट हो गये |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">सम्मुख आकर उन्होंने उस बालक से रोने का कारण पूछा तो उसने ध्यान करने के लिए वह स्थान माँगा तो महादेव और माँ पार्वती ने वह स्थान उस बालक को दे दिया अब भगवान विष्णु तप में लीन हो गये |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> तप के दौरान एक बार वहां अत्यधिक हिमपात हुआ भगवान श्रीविष्णु पूरी तरह से सफ़ेद बर्फ से ढक गए तब देवी लक्ष्मी बहुत परेशान हुई |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">और देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु जी के पास आकर एक बेर ( बद्री ) के पेड़ में बदल गई और सारी बर्फ़बारी को अपने ऊपर सह लिया जिससे की विष्णु जी को तकलीफ न हो इस प्रकार कई वर्षो तक देवी लक्ष्मी ने धूप , वर्षा , हिम से तप करते हुए भगवान विष्णु की रक्षा की |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> अच्छा जब भगवान विष्णु का तप समाप्त हुआ तो उन्होंने देखा की देवी लक्ष्मी बर्फ से ढकी हुई है तब विष्णु जी ने लक्ष्मी जी से कहा की जितना तप मैंने किया है उतना ही आपने भी किया है तो आज से इस स्थान पर मेरे साथ आपकी भी पूजा होगी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">और आपने बद्री का रूप लेकर मेरा बचाव किया है इसीलिये आज से यहाँ मेरा नाम बद्रीनाथ होगा मतलब आप बद्री हम आपके नाथ हुआ बद्रीनाथ इसीलिए इस मन्दिर का नाम बद्रीनाथ पड़ा |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मान्यता यह भी है की जिस स्थल पर विष्णु जी ने तप किया था वह वही तृप्त कुण्ड है जहाँ आज भी गरम जल रहता है और श्रद्धालु यहाँ स्नान कर लाभ उठाते है , तो  इस <strong>बद्रीनाथ की कथा</strong> से हमको ये भी जानकारी मिली कि इस मन्दिर को बद्रीनाथ नाम क्यों दिया गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह भी पढ़े <br><a href="https://safarjankari.com/daksha-mahadev-mandir-ki-pauranik-katha-hindi-me/">दक्ष महादेव मन्दिर की पौराणिक कथा पढ़े </a><br><a href="https://safarjankari.com/sapta-puri-7-holy-city-of-hinduism/">जानिये भारत के सात मोक्षदायिनी शहरो के बारे में </a></p>



<h4 class="wp-block-heading">नर और नारायण से सम्बन्धित पौराणिक  बद्रीनाथ की कथा</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एकबार एक दानव ने सूर्य देव की तपस्या की और वरदान लिया कि जब कोई हजारो वर्ष तप करेगा तभी वो मेरा एक कवच तोड़ पायेगा और ऐसे 1000 कवच उसने वरदान में मांगे  और उस दिन से उस दानव का नाम सहस्त्रकवच पड़ गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">लोक कथा के अनुसार भगवान ब्रम्हा जी के ह्रदय से उतपन्न हुए थे महाराजा धरम और इन्ही महाराजा धरम के पुत्र थे नर और नारायण जो की विष्णु जी के अवतार थे  |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> कहा जाता है सतयुग में बद्रीनाथ धाम के समीप महात्मा नर और नारायण ने कई हजार वर्ष तपस्या की थी  , वतर्मान में इस स्थल को नर और नारायण पर्वत कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">कहते है की नर और नारायण को कठोर तप से देवताओ के राजा इन्द्र का सिंघासन हिलने लगा था , अब इन्द्र देव को लगा कि यह दोनों देव लोक पाने के लिए यह तप कर रहे है तो उन्होंने अपने लोक की अप्सराओ को नर और नारायण का तप भंग करने के लिए भेजा लेकिन वो सब असफल रही |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> अच्छा हमने जितना भी रिसर्च किया सहस्त्रकवच का नाम लगभग सभी पौराणिक कथाओ में मिला तभी हमने अपनी <strong>History of Badrinath Temple in Hindi</strong> की पोस्ट में इसे सम्मिलित किया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">उधर जब सहस्त्रकवच को नर नारायण के बारे में पता चला तो वह इन दोनों तपस्वियों का तप भंग करने तप स्थल आ पंहुचा अच्छा आपको बता दे की जहाँ नर नारायण तप कर रहे थे वह पृथ्वी का एक मात्र ऐसा स्थल है जहाँ एक दिन तप करके 1000 साल तप करने का पुण्य मिलता है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> इसलिये एक दिन नारायण सहस्त्रकवच से युद्ध करते और नर तप करते और उसका एक कवच तोड़ देते फिर अगले दिन नर सहस्त्रकवच से युद्ध करते तो नारायण तप करते थे इस तरह सहस्त्रकवच के 999 कवच टूट गए |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब सहस्त्रकवच सूर्य देव के पास चला गया और उसने अपना बचाव कर लिया , <strong> </strong>बद्रीनाथ मन्दिर की ये विभिन्न पौराणिक कथाये एक दूसरे से जुड़ी हुई है  |</p>



<h4 class="wp-block-heading">भगवान राम से जुड़ी बद्रीनाथ की कहानी </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब जब  त्रेतायुग में श्री राम अवतरित हुये तो उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान जी को बद्रीआश्रम आने को कहा था और हनुमान जी हनुमान चट्टी नाम की जगह पर तप किये थे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">भगवान श्री कृष्ण से जुडी बद्रीनाथ की कहानी </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब द्वापरयुग में सतयुग के नर और नारायण का फिर से अवतार हुआ श्री कृष्ण और अर्जुन के रूप में , और दानव सहस्त्रकवच जिसे सूर्य देव ने उस समय बचाया था इस बार वो कर्ण के रूप में जन्म लिया था और उसका वध अर्जुन ने किया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">दोस्तों अगर आप ने ध्यान दिया होगा तो ऊपर की समस्त पौराणिक कथाये (<strong>History of Badrinath Dham</strong>) एक दूसरे से जुड़ी हुई है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">बद्रीनाथ धाम से जुड़े कुछ प्राचीन मत बद्रीनाथ धाम का निर्माण किसने करवाया </h5>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">बद्रीनाथ मन्दिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था लेकिन यह ऐसी जगह पर है  कि कही हिमपात कही भूकम्प तो यह मन्दिर कई बार क्षतिग्रस्त हुआ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">गढ़वाल के राजाओ ने बद्रीनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण 17वी सदी में किया लेकिन यहाँ फिर से भूकंप आया और मन्दिर का काफी हिस्सा टूट गया तब सन 1803 में जयपुर के महाराजा ने करवाया था  |</p>



<p>बद्रीनाथ मन्दिर की पौराणिक कथाओ से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660627807826"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बद्रीनाथ मन्दिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री बद्रीनाथ मन्दिर उत्तराखण्ड राज्य के चमोली  जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660627867083"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या बद्रीनाथ एक धाम भी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जी हाँ बद्रीनाथ चार धाम में से एक धाम है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660627994044"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बद्रीनाथ मन्दिर किस भगवान् को समर्पित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री बद्रीनाथ मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित मन्दिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660628060026"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; चार धाम में से भारत का पहला धाम कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्रे बद्रीनाथ धाम </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660628162613"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; श्री बद्रीनाथ की कहानी क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इस मन्दिर की कई कहानिया है जिनका उलेख पोस्ट में किया गया है आप पोस्ट पढ़े आपको सभी जानकारियां मिल जाएँगी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660628765010"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; श्री बद्रीनाथ धाम में कौन से भगवान् की मूर्ति है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">श्री बद्रीनाथ धाम में शालिग्राम पत्थर से बनी भगवन बद्रीनारायण की मूर्ति है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660628930193"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बद्रीनाथ किस जिले है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बद्रीनाथ चमोली  जिले में  है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660629063535"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नर और नारायण पर्वत कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नर और नारायण पर्वत बद्रीनाथ धाम के समीप स्थित है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660629135757"><strong class="schema-faq-question">पश्न &#8211; नर और नारायण कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भगवान नर और नारायण ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म की संतान थे और श्री विष्णु के अवतार थे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660629264176"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नर और नारायण की माँ का नाम क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नर और नारायण की माता का नाम रूचि था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660629344498"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नर और नारायण पर्वतो के मध्य क्या स्थित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नर और नारायण पर्वतो के मध्य श्री बद्रीनाथ धाम स्थित है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660635371502"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बद्रीनाथ धाम का निर्माण किसने करवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">बद्रीनाथ धाम  के निर्माण की शुरुआत आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी लेकिन भविष्य में यह मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ तब इसका पुनर्निमाण गढ़वाल करजो द्वारा करवाया गया यह फिरसे क्षतिग्रस्त हुआ फिर इसका पुनर्निर्माण जयपुर के महाराजा ने करवाया |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हमने <strong>History of Badrinath Temple in Hindi</strong> के बारे में लगभग सब कुछ बता दिया फिर यदि कोई त्रुटि हुई हो या कुछ अधूरा हो तो उसके लिए क्षमा प्रति हूँ क्यूंकि लोक कथाये हमारी बहुत ही विस्तार से होती है फिर भी आप हमें कमेंट करके बता सकते है |</p>
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		<title>दक्ष महादेव मन्दिर कनखल की पौराणिक कथा &#8211; यही है शिवजी की ससुराल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2020 13:00:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[हरिद्वार पर्यटन स्थल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दक्ष महादेव मन्दिर की पौराणिक कथा से आप लोग जानेंगे आखिर हर सावन में ही  क्यों निवास करते है शिवजी कनखल में , कनखल शिव जी की ससुराल है </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> की पौराणिक कथा जानने से पहले थोड़ा सा हम लोग इस मन्दिर के बारे में जान लेते है , दोस्तों यह मन्दिर पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> यह पवित्र मन्दिर <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखण्ड</a> राज्य के जाने माने शहर हरिद्वार में स्थित है यहाँ पहुचना अत्यन्त आसान है आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बड़ी आसानी से ऑटो टेम्पो करके यहाँ आ सकते है यह मंदिर हरिद्वार में <a href="https://www.inditales.com/kankhal-haridwar-heritage-walk/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कनखल</a> नाम की जगह पर स्थित है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">दक्ष महादेव मन्दिर कनखल के बारे में </h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हरिद्वार शहर से मात्र 3-4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर को <strong>दक्षेश्वर महादेव मन्दिर</strong> भी कहा जाता है यह मंदिर<strong> कनखल</strong>  में है , <strong>कनखल </strong>हरिद्वार की एक जानी-मानी मार्किट भी है और कनखल को भोलेनाथ की ससुराल भी कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हरिद्वार स्थित <strong><em>दक्ष महादेव मन्दिर</em></strong>  में आप सती कुंड , दक्ष घाट , शिवलिंग , गंगा चरण , माँ वैष्णो देवी मन्दिर, श्री राम दरबार , लक्ष्मी नारायण मन्दिर, श्री श्री दक्ष महाविद्या मंदिर के दर्शन कर सकते हो |</p>



<h3 class="wp-block-heading">दक्षेश्वर महादेव मन्दिर कनखल की पौराणिक कथा </h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इस मन्दिर की जो पौराणिक कथा है  वह भगवान शिव , माता सती और राजा दक्ष और शिव गणों से सम्बन्धित है | इस कथा को बताने का उद्देश्य यही है की आप सभी भलीभांति <strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> के बारे में जान पाये |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> इसके अलावा आप सबने सुना होगा की सावन में बहुत से लोग यहाँ दर्शन करने आते है कभी सोचा ऐसा क्यों ?</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये सावन में तो लगभग हर शिव मंदिर में अत्यधिक भीड़ होती है लेकिन कुछ एक मंदिर बहुत ही खास है उनमे बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है उसी में से एक है <strong><em>दक्ष महादेव मन्दिर</em></strong>  तो अब पढ़िए कथा और जानिये की आखिर क्यों खास है यह पवित्र मंदिर &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">कौन थे राजा दक्ष </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">दक्ष प्रजापति भगवान ब्रम्हा के मानस पुत्र थे और माता सती के पिता होने का भी इन्हें श्रेय जाता है इस हिसाब से राजा दक्ष भगवान शिव के ससुर हुये अच्छा दक्ष प्रजापति की शादी प्रसूति से हुई थी जो मनु की कन्या थी |</p>



<h4 class="wp-block-heading">इस मन्दिर के पीछे की कहानी </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">राजा दक्ष का राज्य कनखल हरिद्वार में था उनकी पुत्री माता सती ने भोलेनाथ को पाने के लिए कठोर तप किया था जिसके फलस्वरूप भोलेनाथ माता सती से विवाह के लिए मान गए थे और यही बात राजा दक्ष को अच्छी नहीं लगी थी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> पौराणिक किद्वंती के अनुसार एक बार दक्ष प्रजापति ने कनखल में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया जिसमे सभी देवी-देवता , ऋषि-मुनि को निमंत्रण दिया और अपने दामाद भगवान शिव को नहीं बुलाया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">खैर भोले बाबा तो ठहरे भोले उन्हें इस बात से कोई भी फरक नहीं पड़ा लेकिन माता सती को यह बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा और उन्होंने शिवजी से कनखल जाने की अनुमति मांगी और वो आ गई कनखल |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> मामला अब तक फिर भी ठीक था लेकिन इस यज्ञ अनुष्ठान में माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव के लिए कुछ आपत्तिजनक शब्द कहे, अब माता सती अत्यधिक कुपित हुई लेकिन अपने पिता से क्या कहती हो इसीलिए उसी यज्ञ की अग्नि में जलकर अपने प्राण त्याग दिये |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/shri-naina-devi-temple-himachal-pradesh-ki-jankari/">Shri Naina Devi Temple Himachal Pradesh Ki Jankari</a></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब मामला ज्यादा गम्भीर हो गया जगत के स्वामी , विनाश के सबसे बड़े देवता की पत्नी के प्राण चले गए वो भी दक्ष प्रजापति की वजह से यह समाचार सुनकर शिवजी का क्रोध बढ़ गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> उन्होंने शिव गणों के साथ वीरभद्र और भद्रकाली को कनखल भेजा और , शिव अंश <a href="https://hindi.speakingtree.in/allslides/kyun-ki-thi-shiv-ne-veerbhadra-ki-utpatti" target="_blank" rel="noreferrer noopener">वीरभद्र</a> ने क्रोधवश दक्ष प्रजापति का सर काटकर उसी यज्ञ की अग्नि में जला दिया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">भगवान विष्णु एवं अन्य देवताओ के अनुरोध पर शिवजी  वहां प्रकट हुए और  दक्ष प्रजापति को जीवन दिया और उनके सर की जगह बकरे का सर लगा दिया जिससे की वो यज्ञ पूरा हो सके  |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब राजा दक्ष अपने किये पर शर्मिन्दा थे और भोलेनाथ से क्षमा याचना करने लगे तब भगवान शिव ने हर साल सावन के महीने में कनखल में निवास करने का वचन दिया  |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तब से यह मान्यता है की हर साल सावन के महीने में भोलेनाथ कनखल अपनी ससुराल में ही निवास करते है , अच्छा जहाँ पर यज्ञ कुंड था उसी स्थान पर <strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> बनाया गया है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">और सावन के महीने में तो यहाँ अत्यंत  भीड़ भी हो जाती है |</p>



<h3 class="wp-block-heading">कनखल के दक्षेश्वर मन्दिर का निर्माण किसने करवाया</h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मिली जानकारी के अनुसार <strong>दक्ष प्रजापति मन्दिर</strong> <strong>कनखल</strong> का निर्माण सन 1810 में रानी धनकौर जी ने करवाया था और उसके बाद सन 1962 में इसी मन्दिर का पुननिर्माण कराया गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब आप सब सोच रहे होंगे की फिर इस मन्दिर को प्राचीन क्यों कहा जाता है तो बता दूँ मन्दिर बनवाने के तो सन हमें पता है लेकिन इस मंदिर में जो सती कुंड है वो अति प्राचीन है तभी इसे प्राचीन मंदिर कहा जाता है |</p>



<p><strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong>  हरिद्वार से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660623660221"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">दक्ष महादेव मन्दिर उत्तराखण्ड राज्य के हरिद्वार जिले में कनखल नाम की जगह पर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660623703056"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> का निर्माण कब हुआ था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इस मन्दिर का निर्माण सन 1810 में शुरू हुआ था सन 1962 में इसका पुनर्निर्माण हुआ था | </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660623855029"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; दक्षेश्वर महादेव मन्दिर का निर्माण किसने कराया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">ज्ञात जानकारी के अनुसार सबसे पहले सन 1810 में रानी धनकौर ने <strong>दक्ष महादेव मन्दिर</strong> का निर्माण करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660623956596"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कनखल में कौन सी नदी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हरिद्वार के कनखल में माँ गंगा जी है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624025157"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; राजा दक्ष प्रजापति कौन थे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा दक्ष प्रजापति ब्रह्मा जी के पुत्र थे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624105596"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; राजा दक्ष का घर कहाँ था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पौराणिक मान्यता के अनुसार हरिद्वार के कनखल में राजा दक्ष की राजधानी थी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624184300"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कनखल क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कनखल में दक्षेश्वर महादेव मन्दिर है जिसकी मान्यता अत्यधिक है इसीलिये कनखल प्रसिद्ध है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624289692"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार में शिव जी की ससुराल कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कनखल में शिवजी की ससुराल है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624360939"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; राजा दक्ष का वध किसने किया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">शिवजी के अंश वीरभद्र ने राजा दक्ष का वध किया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660624474380"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; प्रसूति कौन थी ?</strong> <p class="schema-faq-answer">प्रसूति राजा दक्ष की प्रथम पत्नी और मनु की कन्या थी |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">आशा करता हूँ आप सभी को यह पोस्ट और <strong>दक्ष महादेव मन्दिर </strong>की कथा अच्छी लगी होगी आपको समझ आया होगा की आखिर <strong>कनखल </strong>में ऐसा क्या हुआ था जिससे हर साल शिव जी यहाँ निवास करने लगे पोस्ट पसन्द आई हो कमेन्ट जरूर करे |</p>
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		<title>Pilot Baba Ashram Haridwar &#8211; भक्ति और देशभक्ति का एक अनूठा संगम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jan 2020 18:52:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Haridwar Me Ghumne Ki Jagah]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[हरिद्वार पर्यटन स्थल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Pilot Baba Ashram Haridwar का एक ऐसा आश्रम है जहाँ आपको भक्ति के साथ साथ देशभक्ति की भी झलक देखने को मिल जाएगी , यहाँ की एक से बढ़कर एक मूर्तियाँ आपको अचंभित करेंगी आप कभी भी हरिद्वार दर्शन को आये तो पायलट बाबा के आश्रम जरूर जाइये &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Pilot Baba Ashram Haridwar</strong> का एक ऐसा आश्रम है जहाँ आपको भक्ति के साथ साथ देशभक्ति की भी झलक देखने को मिल जाएगी , यहाँ की एक से बढ़कर एक मूर्तियाँ आपको अचंभित करेंगी आप कभी भी <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन</a> को आये तो <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Pilot_Baba" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="पायलट बाबा (opens in a new tab)">पायलट बाबा</a> के आश्रम जरूर जाइये |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Pilot Baba Ashram Haridwar</h2>



<p class="has-text-align-justify">हरिद्वार में बहुत सारे आश्रम है मंदिर है उसी में से एक <strong>पायलट बाबा</strong> का आश्रम भी है जहाँ की सुन्दरता देखते ही बनती है इस आश्रम में ऐसी ऐसी मूर्तियाँ है जिन्हें आप घंटो देख सकते है एकदम सजीव सी लगती है , <strong><em>Pilot Baba Ashram</em></strong> में आपको अद्भुत शान्ति का एहसास होगा और यहाँ का वातावरण एकदम भक्तिमय प्रतीत होता है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">How To Reach Pilot Baba Ashram Haridwar &#8211; पायलट बाबा आश्रम कैसे पहुंचे </h4>



<p class="has-text-align-justify">इस आश्रम तक पहुचना बहुत ही आसान है आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन से कोई भी ऑटो / टेम्पो वाले से पूछ ले की पायलट बाबा के आश्रम जाना है वो आपको पंहुचा देगा आपकी जानकारी के लिये बता दूँ की यह आश्रम दक्ष मंदिर की तरफ कनखल में है तो आप जब भी दक्ष महादेव मन्दिर जाये तो  इस अलौकिक स्थल पर भी जरूर जाये |</p>



<p><strong>पायलट बाबा </strong>आश्रम का पता &#8211; जगजीतपुर कनखल , दक्ष रोड , हरिद्वार , उत्तराखंड </p>



<h4 class="wp-block-heading">पायलट बाबा आश्रम कब जाये Best Time to Visit Pilot <strong>Baba Ashram Haridwar</strong> in hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आप साल भर में कभी भी जा सकते है बस आपको थोडा सा समय का ध्यान देना है क्यूंकि इस आश्रम  में दर्शन करने का एक निश्चित समय है |<br><br><strong>Pilot Baba Ashram Haridwar Ki Timing &#8211;</strong> <br>गर्मियों में &#8211; सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक <br>                दोपहर  2 बजे से शाम  6 बजे तक <br>सर्दियों में &#8211; सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक <br>                दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक |</p>



<h5 class="wp-block-heading">महायोगी पायलट बाबा के बारे में &#8211; About Mahayogi Pilot Babain Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify"><strong><em>पायलट बाबा</em></strong>  का जन्म बिहार के सासाराम में हुआ था और बाबाजी के बचपन का नाम कपिल था , बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में पढ़े पायलट बाबा ने भारतीय एयरफोर्स में नोकरी की और पायलट बाबा नाम से मशहूर कपिल भारतीय वायुसेना में पायलट के पद पर  तैनात थे |</p>



<p class="has-text-align-justify"> इन्होने भारतीय वायुसेना की तरफ से पायलट के पद पर रहते हुये  सन 1962,1965,1971 में हुई लड़ाईयो में भाग लिया था , इसके बाद कपिल हरि गिरीजी महाराज के संपर्क में आये बस तबसे कपिल का रुझान आध्यात्म की तरफ हो गया |</p>



<p class="has-text-align-justify">बस यही शुरुआत थे कपिल से <strong>पायलट बाबा </strong>बनने की पायलट बाबा के बारे में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है इनकी समाधियाँ सुनने में यहाँ तक आया है की इन्होने लगभग 100 बार समाधी ली है जिसमे कुछ भूमिगत है और कुछ जल के अन्दर और इनकी एक समाधी तो 33 दिन की थी |<br><br>यह भी पढ़े &#8211;  <a href="https://safarjankari.com/bharat-mata-mandir-haridwar-ek-anokha-mandir/">Bharat Mata Mandir Haridwar – EK Anokha Mandir</a> <br>                    <a href="https://safarjankari.com/ram-jhula-ke-aas-paas-ke-parytan-sthal/">राम झूला ऋषिकेश के आसपास के पर्यटन स्थल </a></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="350" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/Pilot_Baba_Ashram_Haridwar_Hindi_Me.jpg" alt="Pilot Baba Ashram Haridwar Hindi me" class="wp-image-2504" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/Pilot_Baba_Ashram_Haridwar_Hindi_Me.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/Pilot_Baba_Ashram_Haridwar_Hindi_Me-300x191.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Pilot Baba Ashram Haridwar Hindi me</figcaption></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading"> Pilot Baba Ashram Haridwar के बारे में </h5>



<p class="has-text-align-justify">जैसे ही आप <strong>पायलट बाबा आश्रम </strong>के मुख्य गेट के सामने आते हो आपको सामने  एक बड़ा सा गेट और एक सिंह की प्रतिमा और गेट के दोनों तरफ स्वागत में कड़ी भारतीय महिलाओ की प्रतिमा दिखाई देगी | </p>



<p class="has-text-align-justify">यही से इस आश्रम की भव्यता की एक झलक मिल आपको मिल जाती है अब आप अन्दर जाइये और अपनी कोई भी एक आई-डी जैसे आधार कार्ड दिखा के आश्रम को देखिये आपको बता दूँ की यहाँ पर किसी प्रकार का कोई भी प्रवेश शुल्क नहीं है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आश्रम में आपको एक से बढ़कर एक झाँकियो के दर्शन होंगे जो की बेहद ही खूबसूरती से बने गई है आपको यहाँ समुद्र मन्थन , भारत माता , गाँधी जी की दांडी यात्रा , सुभाष चन्द्र बोष , रानी लक्ष्मी बाई , भगवान विष्णु जी के 10 अवतार आदि झाँकियो के मनोहर दर्शन होंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify"> <strong><em>Pilot Baba Ashram Haridwar</em></strong> में आपको श्रवन कुमार  , रामकृष्ण परमहंस, अर्धनारेश्वर जैसी तमाम आकर्षक प्रतिमाये बनी हुई है | </p>



<p class="has-text-align-justify">इस आश्रम में आपको बतख , खरगोश और शुतुरमुर्ग भी देखने को मिल सकते है इसके अलावा यहाँ एक छोटा सा उद्यान है जिसका नाम सुन्दर वन है | इस आश्रम के कई मन्दिर भी है जैसे राम मन्दिर , विष्णु मन्दिर ,शिव मन्दिर ,हनुमान मन्दिर  आदि |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="533" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_अर्धनारेश्वर_प्रतिमा.jpg" alt="पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार अर्धनारेश्वर प्रतिमा" class="wp-image-2506" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_अर्धनारेश्वर_प्रतिमा.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_अर्धनारेश्वर_प्रतिमा-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>अर्धनारेश्वर प्रतिमा</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="533" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_में_शिवजी_की_प्रतिमा.jpg" alt="पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार में शिवजी की प्रतिमा" class="wp-image-2507" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_में_शिवजी_की_प्रतिमा.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/01/पायलट_बाबा_आश्रम_हरिद्वार_में_शिवजी_की_प्रतिमा-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार में शिवजी की प्रतिमा</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">इस आश्रम  की सबसे खास बात यह है कि यहाँ की हर एक प्रतिमा अत्यन्त सुन्दर है इस आश्रम में सबसे ऊँची प्रतिमा भगवान शिव की है सच में वह प्रतिमा विशालकाय और अद्भुत है | </p>



<p><strong>पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार से सम्बन्धित प्रश्न</strong> </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659498164079"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>पायलट बाबा आश्रम हरिद्वार</strong> में कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जगजीतपुर कनखल , दक्ष रोड , हरिद्वार , उत्तराखंड |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659498216402"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Pilot Baba Ashram Haridwar</strong> में क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह एक आश्रम है यहाँ आकर आपको एक शुद्ध दैविक वातावरण मिलेगा धार्मिक झांकियां , मूर्तियां , प्रतिमाये आप देख सकते है हरिद्वार में पायलट बाबा आश्रम एक बढ़िया जगह है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659498559547"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Mahayogi Pilot Baba Kaun the ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong><em>पायलट बाबा</em></strong>  का जन्म बिहार के सासाराम में हुआ था और बाबाजी के बचपन का नाम कपिल था , बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में पढ़े पायलट बाबा ने भारतीय एयरफोर्स में नोकरी की और पायलट बाबा नाम से मशहूर कपिल भारतीय वायुसेना में पायलट के पद पर  तैनात थे |</p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify"> <strong>Pilot Baba Ashram Haridwar</strong> की सबसे खास बात यही है की इस आश्रम में आपको भगवान् के साथ साथ महापुरुषों के भी दर्शन हो जाते है आप अपने देश की झाँकियो को यहाँ देख सकते है तो Finally बोलूँगा की <a aria-label="हरिद्वार (opens in a new tab)" href="https://www.britannica.com/place/Haridwar" target="_blank" rel="noreferrer noopener">हरिद्वार</a> जब भी आये यहाँ जरूर आये |</p>



<p>  </p>
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		<title>Panch Prayag of Uttarakhand &#8211; उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग की जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Dec 2019 20:02:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Travel Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Prayag]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जब आप हरिद्वार या ऋषिकेश से बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर आगे बढोगे तो बद्रीनाथ पहुचने से पहले आपका सामना इन पञ्च प्रयाग से हो जायेगा क्यूंकि Panch Prayag बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर ही स्थित है &#124; अब पञ्च प्रयाग को और भी अच्छे से समझते है देखिये उत्तराखंड की पवित्र नदियाँ अलकनन्दा , भागीरथी , मन्दाकिनी , पिंडर , नंदाकिनी और विष्णुगंगा या धौलीगंगा है और बद्रीनाथ से अलकनंदा नदी निकलती और आगे बढ़ती जाती है और बाकी की नदियाँ एक एक करके इस अलकनन्दा नदी में मिलती जाती है और जिस स्थल पर नदिया मिलती है वही प्रयाग कहलाता है &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> को जानने से पहले यह जान लिया जाय की प्रयाग शब्द का मतलब क्या है प्रयाग शब्द का मतलब नदियों के संगम से होता है मतलब जिस स्थल पर दो या दो से अधिक नदियाँ मिलती है उस स्थल को हम <a aria-label="प्रयाग (opens in a new tab)" href="https://en.wikipedia.org/wiki/Confluence" target="_blank" rel="noreferrer noopener">प्रयाग</a> कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रयागराज पूर्व में <a href="https://safarjankari.com/allahabad-me-ghumne-ki-jagah/">इलाहबाद का त्रिवेणी संगम</a> है क्यूंकि यहाँ गंगा यमुना और अद्रश्य सरस्वती इन तीन नदियों का संगम होता है इसीलिये इस स्थल को प्रयाग बोला जाता है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Panch Prayag of Uttarakhand &#8211; उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग &#8211; </h2>



<p class="has-text-align-justify">चलिये अब बात करते है <strong>पञ्च प्रयाग</strong> की तो यहाँ पञ्च का मतलब पांच से बाकी पञ्च प्रयाग का सन्दर्भ उत्तराखण्ड राज्य से है उत्तराखंड में पांच ऐसे स्थल है जहाँ पर नदियों का संगम हुआ है तो उन्ही पांच स्थलों को पञ्च प्रयाग का नाम दिया गया है यहाँ से आपको इस प्रश्न <strong>How Many Panch Prayag in Uttarakhand</strong> का जवाब मिल गया होगा |</p>



<p class="has-text-align-justify">इन  <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> को हिन्दू धर्म में बहुत ही धार्मिक स्थल माना गया है यहाँ स्नान और दान पुण्य करने से मनुष्य को अत्यन्त लाभ मिलता है | </p>



<p class="has-text-align-justify">जब आप हरिद्वार या ऋषिकेश से बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर आगे बढोगे तो बद्रीनाथ पहुचने से पहले आपका सामना इन <em>पञ्च प्रयाग </em> से हो जायेगा क्यूंकि ये बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर ही स्थित है | </p>



<p class="has-text-align-justify">अब पञ्च प्रयाग को और भी अच्छे से समझते है देखिये उत्तराखंड की  पवित्र नदियाँ अलकनन्दा , भागीरथी , मन्दाकिनी , पिंडर , नंदाकिनी और विष्णुगंगा  या धौलीगंगा  है और बद्रीनाथ से अलकनंदा नदी निकलती और आगे बढ़ती जाती है और बाकी की नदियाँ एक एक करके इस अलकनन्दा नदी में मिलती जाती है और जिस स्थल पर नदिया मिलती है वही प्रयाग कहलाता है |</p>



<p>चलिये अब एक एक करके उत्तराखण्ड के इन पवित्र<strong> Panch Prayag of Uttarakhand</strong>   को जान लेते है &#8211;</p>



<p><strong>Panch Prayag Ke Naam</strong> &#8211; देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग , कर्णप्रयाग , विष्णुप्रयाग , नंदप्रयाग </p>



<h4 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify"><em> </em> देवप्रयाग यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी गढ़वाल जिले के अन्तर्गत आता है यह एक बेहद पवित्र प्रयाग है क्यूंकि इसी जगह पर गंगोत्री से आने वाली भागीरथी नदी और बद्रीनाथ धाम से आने वाली अलकनन्दा का संगम होता है और देवप्रयाग से ही यह नदी गंगा के नाम से भारत भर में बहती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग कैसे पहुंचे &#8211; How To Reach Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">देवप्रयाग पहुंचना बहुत ही आसान है सबसे पहले आप हरिद्वार या ऋषिकेश बहुंच जाइए फिर इन दोनों ही जगहों से आपको बस या टैक्सी मिल जायेंगी आपअपने साधन से भी जा सकते यदि दूरी की बात करे तो ऋषिकेश से देवप्रयाग की दूरी लगभग 74 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">आप इस पवित्र स्थल पर आप सबसे पहले भागीरथी और अलकनन्दा का संगम देखे उसके बाद यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण रघुनाथ मन्दिर है वैसे देवप्रयाग एक बेहद की खूबसूरत प्राकृतिक स्थल है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके आलावा यहाँ आप चन्द्रबदनी मंदिर और डाडा नागराज मंदिर भी जरूर देखे , अब यदि इतना देखने के बाद आपके पास समय है तो आप ब्रम्ह कुंड , सूर्य कुण्ड , वशिष्ठ कुण्ड आदि भी देख सकते है |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;  <br><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी</a> <br> <a href="https://safarjankari.com/ram-jhula-ke-aas-paas-ke-parytan-sthal/">राम झूला ऋषिकेश के आसपास के पर्यटन स्थल </a></p>



<h5 class="wp-block-heading">कब जाये देवप्रयाग &#8211; Best Time to visit Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो यहाँ आप साल में किसी भी समय जा सकते है कोई दिक्कत नहीं है फिर भी लेकिन फिर भी मेरी माने तो बारिश में ना जाये तो बेहतर है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="400" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag.jpg" alt="Panch Prayag of Uttarakhand  Devprayag" class="wp-image-2255" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>Devprayag</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">चलिये अब चलते है दूसरे <strong><em>Panch Prayag of Uttarakhand</em> </strong> की तरफ जिसका नाम रुद्रप्रयाग है और इस पावन स्थल पर केदारनाथ धाम से आने वाले मन्दाकिनी नदी और बद्रीनाथ से आने वाली अलकनन्दा नदी का संगम होता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल के बारे में कहा जाता है की नारद मुनि ने संगीत को जानने के लिये यहाँ तपस्या की थी इससे खुश होकर भगवान् शिव यहाँ रूद्र रूप में उपस्थित हुये थे और नारद मुनि को वीणा बजाना सिखाया था  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Rudraprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">रुद्रप्रयाग जिला पहुचना आसान है यह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है और ऋषिकेश से इसकी दूरी लगभग 141 किलोमीटर है वही हरिद्वार से 160 किलोमीटर है और आपको यहाँ के लिए पहले हरिद्वार आना होगा और फिर हरिद्वार से ऋषिकेश बद्रीनाथ वाले मार्ग पर चल देना है |</p>



<p class="has-text-align-justify">देवप्रयाग से रुद्रप्रयाग की दूरी लगभग 67 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Rudraprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify"> रुद्रप्रयाग में एक से बढ़कर एक पर्यटन स्थल घुमक्कड़ो को अपनी और आकर्षित करते है यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र कोटेश्वर मंदिर है जो की रुद्रप्रयाग संगम से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<p class="has-text-align-justify">यह भगवान शिव का मन्दिर है यह मन्दिर एक गुफा रूप में है और पावन अलकनन्दा के किनारे बना हुआ है इसके अलावा आप अगस्तमुनि भी जा सकते है , और यहाँ का प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर अलकनंदा नदी और मन्दाकिनी नदी के संगम पर ही है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कब जाये रुद्रप्रयाग  &#8211; Best Time to visit Rudraprayag in Hindi</h5>



<p>रुद्रप्रयाग जाने  का सबसे बढ़िया समय अक्टूबर महीने से लेकर अप्रेल तक का है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित है और यह भी एक <em><strong>पञ्च प्रयाग</strong> </em> है , कर्णप्रयाग में अलकनन्दा और पिंडर ( जिसे कर्णगंगा भी कहा जाता है ) नदियों का संगम होता है , यह स्थान महाभारत के वीर कर्ण के नाम पर है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading"> कर्णप्रयाग कैसे पहुचे  &#8211; How To Reach Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग भी सड़क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है आप ऋषिकेश &#8211; हरिद्वार से यहाँ पर बड़ी ही आसानी से पहुच सकते है ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी लगभग 173 किलोमीटर है आपको हरिद्वार से बस मिल जायेगी और आप अपने साधन से भी आ सकते है |</p>



<p>रुद्रप्रयाग से कर्णप्रयाग के बीच की दूरी 33 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग के मुख्य आकर्षण में उमा मन्दिर और कर्ण मन्दिर है इसके अलावा पिंडर और <a href="https://www.britannica.com/place/Alaknanda-River" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="अलकनन्दा (opens in a new tab)">अलकनन्दा</a> संगम भी देखने योग्य है इनके अलावा कर्णप्रयाग से 20 किलोमीटर की दूरी पर आदि बद्री मन्दिर और 24 किलोमीटर दूर नौटी गाँव भी बढ़िया जगह है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग कब जाये &#8211; Best Time to visit Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">बारिश में परहेज करो बाकी चाहे जब जाओ बढ़िया जगह है और हा ठंडी में नहाने से डर लगता हो तो ठंडी में ना जाना क्यूंकि यहाँ संगम में नहाना ही जरूरी है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">नन्दप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह चौथा पञ्च प्रयाग उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जनपद में स्थित है और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है यहाँ पर नंदाकिनी नदी अलकनंदा नदी में मिल जाती है और यही संगम स्थल नंदप्रयाग एक  <strong>पञ्च प्रयाग</strong> है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> पौराणिक कथानुसार भगवान कृष्ण के पिता नन्द ने इसी स्थान पर पुत्र प्राप्ति के लिये एक महायज्ञ किया था इसके अलावा एक दूसरी कथा के अनुसार नंदप्रयाग को दुष्यन्त और शकुन्तला से भी जोड़ा जाता है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Nandprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">नंदप्रयाग की ऋषिकेश से दूरी लगभग 193 किलोमीटर है और कर्णप्रयाग से महज 20 किलोमीटर है तो आप जब भी कर्णप्रयाग आये तो नंदप्रयाग भी हो ले |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Nandprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">नंदप्रयाग में मुख्य पर्यटन स्थल में संगम पर बना शिव जी का भव्य मन्दिर , गोपाल जी मन्दिर ,चंडिका मंदिर आदि है बाकी नंदाकिनी और अलकनंदा का संगम तो है ही |</p>



<h4 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">पांचवा <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> जो की विष्णु प्रयाग के नाम से जाना जाता है यह चमोली जनपद के अंतर्गत ही आता है यहाँ पर अलकनंदा और विष्णुगंगा नदी का संगम होता है इस विष्णुगंगा नदी को धौलीगंगा भी कहा जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अगर पौराणिक कथा की बात की जाय तो यहाँ पर <a aria-label="नारद मुनि (opens in a new tab)" href="https://www.speakingtree.in/allslides/the-legacy-of-narad-muni" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नारद मुनि</a> ने भगवान् विष्णु की तपस्या की थी और श्री हरि ने नारद मुनि को दर्शन भी दिए थे |</p>



<h5 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Vishnuprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">विष्णुप्रयाग की ऋषिकेश से दूरी लगभग 270 किलोमीटर है और नंदप्रयाग से मात्र 70 किलोमीटर है यहाँ से बद्रीनाथ भी पास में ही है यहाँ आने के लिये आपको ऋषिकेश से साधन मिल जायेगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Vishnuprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ के मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु का मंदिर है जिसे महारानी अहिल्याबाई जी ने करवाया था इसके आलावा यहाँ से 38 किलोमीटर की दूरी पर चार धाम में से एक बद्रीनाथ धाम है , वैसे यहाँ पर स्नान करना बड़ा कठिन होता है क्यूंकि नदियों की गति ज्यादा होती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पंचप्रयाग का मैप &#8211; Panch Prayag of Uttarakhand Map</h5>



<p class="has-text-align-justify">चलिये जितनी जानकारी है<strong> पंचप्रयाग</strong>  की हमने करी है आप सबसे साझा कर देता हूँ शुरुआत होती है चमोली जनपद के बद्रीनाथ धाम से बदरीनाथ से निकलती है एक दैविक नदी जिसे हम <strong>अलकनंदा</strong> बोलते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आगे चलकर इसमें <em>धौलीगंगा</em>  नदी मिल जाती है और इस मिलन वाले स्थल को <em>विष्णुप्रयाग</em>  कहते है अब और आगे चलने पर एक और पवित्र नदी <em>नंदाकिनी </em> आकर <em>अलकनंदा</em>  में मिल जाती है और इस संगम को<em> नंदप्रयाग</em>  कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आगे पिंडार ग्लेशियर से आने वाली <em>पिंडार नदी</em>  भी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को<em> कर्णप्रयाग</em>  कहते है फिर आगे <em>मन्दाकिनी नदी</em>  जो की केदारनाथ धाम से आ रही होती है और आकार इसी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को <em>रुद्रप्रयाग</em>  बोला जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके बाद थोडा और आगे चलकर गंगोत्रो से निकलकर <em>भागीरथी </em> नदी इसी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को <em>देवप्रयाग</em>  कहा जाता है यहाँ से आगे यह नदी<strong> गंगा</strong> के नाम से जानी जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> नीचे  मैंने  <strong>पञ्च प्रयाग</strong> का मैप बनाने की कोशिश की है |</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="420" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map.jpg" alt="Panch Prayag Map" class="wp-image-2256" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-300x158.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-768x403.jpg 768w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-390x205.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption> <em>Panch Prayag </em>  Map</figcaption></figure>



<p>पञ्च प्रयाग से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358423428"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>How Many Panch Prayag in Uttarakhand</strong> ? पञ्च प्रयाग कितने है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखंड में पांच पञ्च प्रयाग है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358489388"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Panch Prayag</strong> ke naam batao ? उत्तराखण्ड में पञ्च प्रयाग  कौन कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग , कर्णप्रयाग , विष्णुप्रयाग , नंदप्रयाग </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358762368"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; देवप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358905950"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; रुद्रप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">रुद्रप्रयाग में मन्दाकिनी नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358957245"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कर्णप्रयाग  में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कर्णप्रयाग में कर्णगंगा या पिंडर नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659359016452"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नंदप्रयाग  में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नंदप्रयाग में नन्दाकिनी नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659359059683"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; विष्णुप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">विष्णुप्रयाग में विष्णुगंगा नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify">तो ये थे <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> जिनका हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्त्व है यहाँ स्नान करना अति शुभ माना जाता है इसके अलावा ये समस्त <strong>पञ्च प्रयाग</strong> पर्यटन की दृष्टिकोण से बहुत खास है क्यूंकि यहाँ आप प्राकृतिक ख़ूबसूरती का आनंद ले सकते है और आध्यात्म के भी अवसर यहाँ आपको मिलेंगे  | </p>
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		<title>भारत माता मन्दिर हरिद्वार जो है भारत के महापुरुषों को समर्पित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Nov 2019 07:27:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Haridwar Me Ghumne Ki Jagah]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[हरिद्वार पर्यटन स्थल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bharat Mata Mandir Haridwar की यह पोस्ट आज देवभूमि हरिद्वार के एक अनोखे मन्दिर के बारे में है जिसका दूसरा नाम मदर इण्डिया टेम्पल भी है , हरिद्वार दर्शन करते समय इस मन्दिर को देखना न भूले यहाँ आकर आप अपने देश से भली भान्ति परिचित होंगे इस मन्दिर का उद्घाटन श्रीमती इंदिरा गांधीजी ने किया था यह एक बहुमंजिला मन्दिर है इस तरह का मन्दिर शायद ही आपने पहले कही देखा हो , इस मन्दिर का निर्माण आध्यात्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी ने करवाया था और स्वामी जी का आध्यात्मिक जीवन में आने से पहले नाम श्री अम्बिका प्रसाद पाण्डेय था , यह मन्दिर भारत माता के सम्मान में बनाया गया है &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/bharat-mata-mandir-haridwar-ek-anokha-mandir/">भारत माता मन्दिर हरिद्वार जो है भारत के महापुरुषों को समर्पित</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> की यह पोस्ट आज देवभूमि हरिद्वार के एक अनोखे मन्दिर के बारे में है जिसका दूसरा नाम मदर इण्डिया टेम्पल भी है , <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन</a> करते समय इस मन्दिर को देखना न भूले यहाँ आकर आप अपने देश से भली भान्ति परिचित होंगे |</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत माता मन्दिर हरिद्वार </h2>



<p>इस मन्दिर का उद्घाटन <a href="https://www.britannica.com/biography/Indira-Gandhi" target="_blank" rel="noopener noreferrer">श्रीमती इंदिरा गांधीजी</a> ने किया था यह एक बहुमंजिला मन्दिर है इस तरह का मन्दिर शायद ही आपने पहले कही देखा हो , इस मन्दिर का निर्माण आध्यात्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी ने करवाया था और स्वामी जी का आध्यात्मिक जीवन में आने से पहले नाम श्री अम्बिका प्रसाद पाण्डेय था , यह मन्दिर भारत माता के सम्मान में बनाया गया है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">How to reach Bharat Mata Mandir Haridwar in Hindi <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> कैसे पहुचे</h5>



<p>यहाँ पहुचना अत्यंत आसान है क्यूंकि <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> का एक विख्यात मन्दिर है जिसे हरिद्वार में हर व्यक्ति जानता है यह मन्दिर सप्तऋषि रोड पर भूपतवाला नामक स्थान पर है और इस जगह इस मन्दिर के अलावा भी अन्य कई मन्दिर है तो आप किसी भी ऑटो टेम्पो रिक्शा वाले से कहोगे तो वो आपको इस मन्दिर तक छोड़ देगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">About Bharat Mata Mandir Haridwar in Hindi भारत माता मन्दिर हरिद्वार  के बारे में</h5>



<p>हरिद्वार शहर का सबसे प्रमुख मन्दिर और एक उत्कृष्ट साफ़ सुथरा शान्त स्थान जहाँ किसी प्रकार का कोई हो-हल्ला नहीं आप आराम से जाये मन्दिर के दर्शन करे कुछ सीखे <strong><em>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</em></strong>  अपने आप में खास है क्यूंकि इस मन्दिर में सिर्फ देवी देवताओ की मूर्तियाँ ही नहीं अपितु भारत के स्वंत्रतता सेनानी , संत-महात्मा , वीरांगनाये , अच्छे कृत्य करने वाले महापुरुष और महान नारी की भी प्रतिमाये बनी हुई है |</p>



<p> यह मन्दिर हमें भारत के आध्यात्म , संस्कृति , समाज आदि से परिचित करवाता है , मन्दिर प्रांगण में एक श्री विनोबा भावे भौतिक चिकित्सा&nbsp; एवं अनुसन्धान केंद्र बना है जिसे मन्दिर द्वारा संचालित किया जाता है |</p>



<p>चलिए अब करते है दर्शन इन अनोखे मन्दिर के &#8211;&nbsp;<br>देखिये सबसे पहले आप ले ले दो रुपये का लिफ्ट का टिकट और पहुँच जाइये सबसे उपरी तल पर फिर एक-एक तल के दर्शन करते हुये जीने से उतरते चले आइये&nbsp; &nbsp;|</p>



<h6 class="wp-block-heading">शिव मन्दिर</h6>



<p><strong>Bharat Mata Mandir Haridwar</strong> के सबसे उपरी हिस्से में भोलेनाथ का एक भव्य मन्दिर स्थापित है जहाँ शिवजी की अनेको छवियाँ देखने को मिल जाती है और इस मंजिल पर हिमालय पर्वत की झांकिय भी दिखाई देती है इसके लावा यहाँ से हरिद्वार देखना एक सुखद अनुभव है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/शिव-मन्दिर-भारत-माता-मन्दिर-हरिद्वार.jpg" alt="शिव मन्दिर भारत माता मन्दिर हरिद्वार"/></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">विष्णु मन्दिर</h6>



<p>जब आप शिव मन्दिर से उतारकर जीने से नीचे आओगे तो आपको सामने भगवान विष्णु का एक शानदार मन्दिर होगा जहाँ विष्णुजी के समस्त अवतारों के दर्शन होंगे इस मन्दिर में श्रीराम , श्रीकृष्ण , भगवान परशुराम, मत्स्य अवतार , वराह अवतार , नरसिंह अवतार , वामन अवतार . महात्मा बुद्ध , कल्कि अवतार , कूर्म अवतार की प्रतिमाये बनी हुई है आप इत्मीनान से इन सब अवतारों के दर्शन कर अपने ज्ञान को बढ़ाये |</p>



<h6 class="wp-block-heading">शक्ति मन्दिर</h6>



<p>अब आप विष्णु मन्दिर के दर्शन करने के पश्चात जैसे ही एक मंजिल और नीचे आओगे तो आपसे सामने होगा शक्ति मन्दिर जो मुख्यतः आदि शक्ति को समर्पित है इस मन्दिर में आदि शक्ति के विभिन्न अवतार जैसे माँ दुर्गा , माँ काली , माँ पार्वती , माँ सरस्वती , यमुना माता आदि की सुन्दर प्रतिमाये बनी हुई जो की जीवन्त प्रतीत होती है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">प्रादेशिक चित्रावली</h6>



<p>इस तल पर <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong>&nbsp;का एक अलग ही रूप दिखाई देता है यहाँ हमें अपने देश को जानने का अपनी संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है इस तल पर सभी धर्मो की एक से बढ़कर एक झांकिया है , यहाँ भारत के विभिन्न राज्यों का रहन-सहन , संस्कृति आदि के बारे में बखूबी बताया गया&nbsp; है यहाँ आपको अपना कीमती समय देना चहिये क्यूंकि इस मंजिल पर आपका ज्ञान अपने देश के प्रति बढेगा |</p>



<h6 class="wp-block-heading">सन्त मन्दिर</h6>



<p>संत मन्दिर <strong>भारत माता मन्दिर </strong> का एक ऐसा स्थान जहाँ पर हमारे देश के साधु संतो को महत्त्व दिया गया है इस मंजिल पर कबीर दास , वेदव्यास , श्री परमहंस रामकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द , महर्षि वाल्मीकि , गुरु नानक देव , गुरु गोविन्द सिंह जी आदि महान संतो की भव्य मूर्तियाँ स्थापित है |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;&nbsp;</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0/">माँ विंध्यवासिनी देवी विन्ध्याचल धाम मिर्ज़ापुर की सम्पूर्ण जानकारी&nbsp;</a></p>



<p><a href="https://safarjankari.com/ram-janmbhumi-ayodhya-me-ghumne-ki-jagahe/">अयोध्या दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी&nbsp;</a></p>



<h6 class="wp-block-heading">मातृ मन्दिर</h6>



<p>हम जैसे ही एक एक करके नीचे जा रहे है एक से बढ़कर एक बढ़िया जानकारिया और&nbsp; भव्य मुर्तिया हमारे सामने आ रही है अब आप संत मन्दिर से उतरकर जैसे ही नीचे आओगे आपके सामने होगा विदुषी महिलाओ को समर्पित मातृ मन्दिर सच में<strong> </strong> महान महिलाओ को सम्मान देता है |</p>



<p>मातृ मन्दिर अपने आप में ही विशिष्ट है इस मन्दिर में सती दमयन्ती, सती सावित्री , उर्मिला , गार्गी , <a href="https://www.discogs.com/artist/1212881-Meerabai?noanv=1" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मीराबाई</a> , अहिल्याबाई , एनी बीसेंट आदि नारी शक्तियों की मुर्तिया लगी हुई है जिन्हें देखना अद्भुत है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/मातृ-मन्दिर-भारत-माता-मन्दिर-हरिद्वार.jpg" alt="भारत माता मन्दिर हरिद्वार"/></figure>
</div>


<h6 class="wp-block-heading">शूर मन्दिर</h6>



<p>नारी शक्तियों को देखकर उनके बारे में पढ़कर गर्व हो रहा था हमारे देश से जुडी हुई नारियो पर मन शान से प्रफुल्लित था<strong> <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong></strong> को धन्यवाद दे रहा था और नीचे आ रहा यह लो एक और भव्यता एक नया मन्दिर शूर मन्दिर हमारे सामने था जिसमे भारत के शूरवीरो की प्रतिमाये थी |</p>



<p>शूर मन्दिर में महान देशभक्त भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद , अशफाक उल्ला खान , रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान व्यक्तियों की&nbsp; मूर्तियाँ है |</p>



<p>इसके आलावा लाल बहादुर शास्त्री , महाराजा अग्रसेन , छत्रपति शिवाजी , महाराणा प्रताप , महात्मा गांधी , नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर , वल्लभ भाई पटेल केशव बलिराम हेडगेवार आदि महापुरुषों की ऐसी मूर्तियाँ है जिन्हें देखकर लगता है ये बस अभी बोलने ही वाली है |</p>



<figure class="wp-block-image is-style-default"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/शूर-मन्दिर-भारत-माता-मन्दिर-हरिद्वार-1.jpg" alt="भारत माता मन्दिर हरिद्वार"/></figure>



<h6 class="wp-block-heading"><strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> &#8211; <strong>Bharat Mata Mandir Haridwar</strong></h6>



<p>इस भव्य और दिव्य मन्दिर का सबसे निचला तल जो की ग्राउंड पर ही है यहाँ जैसे ही आप अन्दर प्रवेश करोगे आपके सामने भारत माता की एक अलौकिक मूर्ति होगी भारत माता के एक हाथ में कलश सर पर मुकुट अत्यन्त सुन्दर दिखाई देता है |</p>



<p>इसी तल पर एक रेत का बना हुआ भारत का नक्शा है जो की लाल और नीली बत्तियो से सुसज्जित है  ग्राउंड फ्लोर पर बनी भारत माता की मूर्ति वास्तव में एक बहुत ही शानदार मूर्ति है |</p>



<h6 class="wp-block-heading"><strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> की खुलने का समय</h6>



<p>इस मन्दिर की समय सारणी दो सर्दियों एवं गर्मियों की अलग अलग है ध्यान दे गर्मियों में 1 अप्रेल से लेकर 30 सितम्बर तक यह मन्दिर रोज़ाना प्रातः 8 बजे से सांय 8 बजे तक खुला रहता है , वहीँ सर्दियों में 1 अक्टूबर से लेकर 31 मार्च तक यह मन्दिर प्रातः 8 बजे से सांय 7 बजे तक ही खुला रहता है |</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/Bharat-Mata-Mandir-Haridwar-hindi-me.jpg" alt="Bharat Mata Mandir Haridwar"/></figure>
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<p><strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> <strong>से सम्बन्धित प्रश्न </strong></p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659199377188"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> में कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">सप्तऋषि रोड भूपतवाला</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659199429095"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>भारत माता मन्दिर </strong>कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इस नाम के अपने देश के कई मन्दिर है फ़िलहाल जो मैंने देखे वो तीन  जगहों पर एक हरिद्वार दूसरा बनारस तीसरा झाँसी लेकिन हरिद्वार और बनारस के भारत माता मन्दिर ज्यादा प्रसिद्ध है ?</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659199572805"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> के संस्थापक कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हरिद्वार के इस मन्दिर के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी है | </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659199745977"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Bharat Mata Mandir Haridwar</strong> की टाइमिंग क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659200053769"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हरिद्वार का ऐसा कौन सा मन्दिर है जहाँ पर भारतीय महापुरुषों की प्रतिमाये है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>Bharat Mata Mandir Haridwar</strong> Bhupatwala</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659200262682"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> कैसे पहुचे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह हरिद्वार का एक प्रसिद्ध मन्दिर है शहर में हर ऑटो वाला ई रिक्शा वाला इसे जानता है तो आप आराम से यहाँ तक आ सकते है |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष &#8211; Conclusion</h6>



<p>देखा आपने <strong>Bharat Mata Mandir Haridwar</strong> अपने आप में खास है क्यूंकि यहाँ देवी देवता के साथ साथ महापुरुष , संत-महात्मा , विदुषी महिलाओ , देशभक्त , एवं भारत की प्रादेशिक चित्रावलियो का एक अनूठा संगम है जो की हर पर्यटक को जरूर देखना चाहिए |</p>



<p> मेरी माने तो यहाँ आप समय लेकर आये क्यूंकि हर एक मंजिल पर मूर्ति के साथ साथ उस मूर्ति के बारे में भी लिखा हुआ है जिसे भी जरूर पढना चहिये इन्ही शब्दों के साथ <strong>भारत माता मन्दिर हरिद्वार</strong> की इस पोस्ट को यही पर समाप्त करते है अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर जरूर करे |</p>
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