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	<title>Panch Prayag Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
	<lastBuildDate>Fri, 02 Sep 2022 13:37:11 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Panch Prayag Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah  &#8211; उत्तराखण्ड में घूमने की जगह</title>
		<link>https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/</link>
					<comments>https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/#comments</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 May 2021 14:28:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hill Station]]></category>
		<category><![CDATA[Natural]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृतिक जगहें]]></category>
		<category><![CDATA[Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Nature]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Prayag]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah की बात करे तो देव भूमि उत्तराखण्ड में घूमने के लिए आपके पास ढेर सारे विकल्प मौजूद है इस प्रदेश में आप प्रकृति की अद्भुत सुन्दरता देखने को पाओगे इसके अलावा यहाँ पर तमाम जाने माने मन्दिर , गुरुद्वारा , चर्च , मस्जिद , पार्क , ट्रेक , रोमांच भी पाओगे &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> की बात करे तो देव भूमि <a href="https://knowindia.gov.in/states-uts/uttarakhand.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">उत्तराखण्ड</a> में घूमने के लिए आपके पास ढेर सारे विकल्प मौजूद है इस प्रदेश में आप प्रकृति की अद्भुत सुन्दरता देखने को पाओगे इसके अलावा यहाँ पर तमाम जाने माने मन्दिर , गुरुद्वारा , चर्च , मस्जिद , पार्क , ट्रेक , रोमांच भी पाओगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">कहने का तात्पर्य बस इतना है की आपको देवभूमि <a href="https://safarjankari.com/tag/uttarakhand/">उत्तराखंड</a> में केदारनाथ बाबा , बद्रीनाथ धाम , हेमकुण्ड साहिब जैसी धार्मिक जगहे भी मिलेंगी वही नैनीताल भीमताल कौसानी रानीखेत अल्मोड़ा औली चोपता मसूरी धनोल्टी जैसी जगहे भी है जहा आप झीले , झरने , पहाड़ , हरियाली का अनन्द ले सकते है वही गंगोत्री यमुनोत्री देवप्रयाग हरिद्वार जैसे स्थल भी है जहाँ आप पावन नदियों में स्नान कर सकते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके आलावा यदि आपको रोमांच पसंद हो तो आप ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग का मजा ले सकते हो वही नैनीताल तरफ आपको और भी साहसिक गेम्स देखने को मिलेंगे , आपको बर्फ देखनी हो तो ठण्डी के मौसम में औली चोपता धनोल्टी में आप यह सुख भी ले सकते हो |</p>



<h3 class="wp-block-heading">अब जानते है Uttarakhand me Ghumne Ki jagah का वर्गीकरण</h3>



<p>देवताओं की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखण्ड को दो मण्डलो में बात दिया गया है जीने नाम कुमायूं और गढ़वाल है और इन्ही दोनों मण्डलो में उत्तराखण्ड के समस्त जिले और <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> आती है आइये अब आपको यह भी बता दे की कौन सा जिला किस मण्डल में आता है <br><br><strong>कुमाऊ मण्डल </strong>&#8211;  बागेश्वर , चम्पावत , अल्मोड़ा, नैनीताल , पिथोरागढ़ और उधमसिंह नगर |<br><br><strong>गढ़वाल मण्डल</strong> &#8211; रुद्रप्रयाग , तिहरी गढ़वाल, पौढ़ी गढ़वाल , देहरादून , हरिद्वार , उत्तरकाशी , चमोली |<br><br>अब आप समझ गये होंगे की उत्तराखण्ड का कौन सा जिला किस मण्डल में आता है आइये अब बात करते है <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> के बारे में जिसके अन्तर्गत हम सम्पूर्ण उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों को कवर करेंगे |</p>



<h4 class="wp-block-heading">उत्तराखण्ड में घूमने की जगहे </h4>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो आप पूरे के पूरे उत्तराखण्ड को घूमिए तो आपको मजा ही आएगा परन्तु आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ खास खास जगाहोके बारे में बताएँगे &#8211; </p>



<h5 class="wp-block-heading">देहरादून </h5>



<p class="has-text-align-justify">इस शहर का नाम आपने जरूर सुना होगा क्यूंकि यह उतराखंड की राजधानी है निसंदेह इस शहर में आपको पर्यटन के लिए बहुत कुछ मिल जाएगा |</p>



<p>देहरादून के लिये आपको भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरो से ट्रेन मिल जाएगी इसके अलावा यहाँ एक एअरपोर्ट भी है जिसका नाम जॉलीग्रांट एअरपोर्ट है |<br><br>इस शाहर में घूमने के इए आपको टपकेश्वर महादेव मन्दिर , सहस्त्रधारा , मालसी मृग विहार , राबर्स केव , लच्छीवाला , मिंद्रोलिंग मठ , फेन वेल्ली , तपोवन मन्दिर , जोनल म्यूजियम आदि है यह सभी पर्यटन स्थल अत्यधिक सुन्दर है आपको यहाँ जरूर जाना चाहिये , यहाँ आपको प्राकृतिक सुन्दरता के साथ साथ मन्दिर भी देखने  को मिलेंगे और आप जब भी देहरादून आये तो साथ में मसूरी और धनोल्टी भी जा सकते है आगे इन दोनों जगहों के बारे में भी बताऊंगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पहाड़ो की रानी मसूरी </h5>



<p>यदि आप एक प्रकृति प्रेमी है आपको पहाड़ पसंद है तो आ जाइए आप मसूरी जो की हिमालय की गोद में स्थित है यह भारत का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है , मसूरी देहरादून से महज 35 किलोमीटर ही है और देहरादून से तमाम सरकारी और प्राइवेट बसे मिल जाएँगी , रहा सवाल रुकने का तो यह एक बड़ा पर्यटन स्थल है तो यहाँ आपको बहुत से होटल मिल जायेंगे आप अपने बजट के अनुसार होटल ले सकते है |<br><br>मसूरी में घूमने के लिये आप गन हिल जा सकते है जो की एक ऊँची छोटी है यहाँ से आप हिमालय का नजारा ले सकते हो इसके आलावा आप केम्पटी फाल जा सकते है जो की एक सुन्दर झरना है , आप लेकमिस्ट जाकर वहां की कृत्रिम झील में नौका विहार कर सकते हो , आप मसूरी झील भी जा सकते हो , लाल टिब्बा आप जरूर जाइये यहाँ से आपको गगनचुम्बी पहाड़ दिखाई देंगे , बौद्ध धर्म का तिब्बती मन्दिर भी यहाँ का प्रमुख पर्यटन स्थल है इसके साथ साथ आप भत्ता फाल , मुनिसिपल गार्डेन या कम्पनी गार्डेन , क्लाउड एंड भी जा सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">धनोल्टी </h5>



<p>यह बेहतरीन पर्यटन स्थल मसूरी से लगभग 60 किलोमीटर और देहरादून से 36 किलोमीटर ही है इस जगह पर आपको सुन्दरता के साथ साथ गज़ब की शांति का अभाष होगा यहाँ आपको प्रकृति से रूबरू होने का मौका मिलता है , यह भी एक जाना मन पर्यटन स्थल है तो हटेल आदि आसानी से मिल जायेंगे और यहाँ आना भी आसान है आपको देहरादून या मसूरी या ऋषिकेश हरिद्वार से बसे भी मिल जाएँगी , <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में धनोल्तो बेहद खास है |<br><br>धनोल्टी आये तो आप ईको पार्क जरूर घुमे यहाँ के देवदार के पेड़ और हरियाली आपका मन मोह लेगी इसके अलावा एप्पल ओर्चार्ड रिसोर्ट में आप ताज़े फलो का स्वाद लेना न भूले , धनोल्टी का प्रमुख धार्मिक स्थल सुरकंडा देवी मन्दिर है यहाँ आप अवश्य जाये , अगर आप एडवेंचर के शुखीं है तो शिशिर गंगधार जाकर देखे आपको मजा आ जायेगा इन सबके आलावा धनोल्टी में आप कही भी घुमो आपको मजा ही आएगा |</p>



<p>ऋषिकेश </p>



<p>अगर <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong> की बात हो तो योगनगरी ऋषिकेश का ज़िक्र होगा ही यह ऐसा पर्यटन स्थल है जो योग के लिए जाना जाता है धर्म के लिए जाना जाता है , प्राकृतिक सुन्दरता के लिए जाना जाता है , राफ्टिंग जैसे साहसिक खेलो के लिए जाना जाता है , यहाँ पहुंचना अत्यन्त आसान है तमाम शहरो से यहाँ के लिए सीधी ट्रेन है और यदि आपके शहर से ऋषिकेश की कोई सीधी ट्रेन नहीं है तो आप हरिद्वार आके ऋषिकेश आ जाइये |<br><br>यहाँ रुकने की तो कोई दिक्कत ही नहीं है होटल तो बहुत से है उसके अलावा आपको ऋषिकेश में ढेर सारी सुव्यवस्थित सस्ती धर्मशालाए भी मिल जायेंगी जहाँ आप आराम से रुक सकते हो |<br><br>इस शहर में घूमने के लिए आप गंगा नदी पर बने राम झुला , लक्ष्मण झुला , जानकी झुला की और जा सकते है राम झूले के पास आपको परमार्थ निकेतन , गीता भवन , चौरासी कुटिया जा सकते हो , त्रिवेणी घाट पर जाकर गंगा स्नान करे , ऋषि कुण्ड , भारत मन्दिर भी देखे , भूतनाथ मंदिर , त्रयम्बकेश्वर मंदिर देखे फिर नीलकंठ महादेव के दर्शन करे |<br><br><a href="https://safarjankari.com/ram-jhula-ke-aas-paas-ke-parytan-sthal/">राम झूला के आसपास के पर्यटन स्थल</a>   <br><br>ऋषिकेश से थोड़ी ही दूरी पर स्थित माँ कुंजापुरी देवी का मन्दिर है यहाँ भी आप अवश्य जाइये , नीरगढ़ और पटना  और गरुण चट्टी वाटरफाल भी आप जा सकते हो आप दो तीन दिन यहाँ जरूर रुके गंगा आरती परमार्थ निकेतन की देखे त्रिवेणी घाट की देखे बहुत ही मजा आएगा आपको ऋषिकेश में |<br></p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="700" height="400" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश.jpg" alt="राम झूला के समीप परमार्थ निकेतन" class="wp-image-2073" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/11/परमार्थ-निकेतन-आश्रम-ऋषिकेश-300x171.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">हरिद्वार </h5>



<p>यह एक ऐसा धार्मिक स्थान है जहाँ हर साल लाखो की संख्या में पर्यटक आते है और पावन माँ गंगा में डूबुकी लगाते है , हरिद्वार में कुम्भ का मेला भी लगता है , हरिद्वार उत्तराखंड का एक जाना मन शहर है और यहाँ आने के लिए आपको भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरो से ट्रेन मिल जाएँगी तो यहाँ आना अत्यंत आसान है |<br><br>हरिद्वार में ठहरने की भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है यहाँ आपको तमाम होटल और धर्मशालाए मिल जाएँगी , धर्मशालाओ में आप रुकोगे तो आपको काफी सस्ता पड़ेगा |<br>यहाँ घूमने के लिए बहुत स्थल है जैसे गंगा के घाट जिनमे हरी की पौड़ी , चंडी घाट,  कनखल का घाट प्रमुख है इसके आलावा आप मनसा देवी मंदिर , चंडी दक्ष महादेव मंदिर , भारत माता मन्दिर, माया देवी मन्दिर, पायलट बाबा आश्रम , सप्तऋषि आश्रम , भूमा निकेतन , माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर , तुलसी मानस मंदिर , शिवानन्द धाम , इण्डिया टेम्पल , पावन धाम , पारद शिवलिंग , शांतिकुंज आदि जगहों पर जा सकते हो |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे </a></p>



<p></p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h5>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखंड के पञ्च प्रयाग में से एक देवप्रयाग टीहरी गढ़वाल जिले में आता है इस स्थल पर आप नदियों और पहाड़ो के सुन्दर द्रश्य देख पाओगे , देवप्रयाग आप ऋषिकेश से आ सकते हो लगभग ७० किलोमीटर पड़ेगा , यहाँ घूमने के ज्यादा स्थल तो नहीं है फिर भी आप यहाँ पर दशरथशिला , भागीरथी और अलकनंदा का  संगम , रघुनाथ मंदिर , चन्द्रबदनी मंदिर आदि स्थल देख सकते है |<br></p>



<h5 class="wp-block-heading">उत्तराखंड के चार धाम </h5>



<p>गंगोत्री , यमुनोत्री , केदारनाथ , बद्रीनाथ ये उत्तराखण्ड के चार धाम है जहाँ की अत्यन्त श्रद्धालु दर्शन हेतु आते है इन चारो धाम की सुन्न्द्रता देखते ही बनती है गज़ब का अलौकिक सा माहोल रहता है , <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में इन धामों को जरूर शामिल करे |<br><br>गंगोत्री माँ गंगा का उद्गम स्थल है यही से माँ गंगा हिमालय से निकलती है यहाँ का सबसे प्रमुख मंदिर गंगोत्री मंदिर है यह स्थान सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है यहाँ आने के लिए आपको हरिद्वार ऋषिकेश से बस मिल जाएगी आप जब भी गंगोत्री आये तो हरसिल , डोडी ताल , केदार ताल , दयार बुग्याल , नादाँ वन तपोवन , गोमुख आदि जरूर जाए ये सभी जगहे अनेको प्राकृतिक द्रश्यो से भरी है |</p>



<p>अब हम बात करते है यमुनोत्री की यहाँआने के लिये आपको  सबसे पहले हनुमान चट्टी आना होगा फिर वहां से ट्रेक करके आप यमुनोत्री आएँग , यह स्थान यमुना नदी का उद्गम स्थल है , यहाँ आप गर्म कुण्ड के जल से स्नान करे जो की यमुनोत्री मंदिर के पास ही है यहाँ से 7 किलोमीटर दूर जानकी चट्टी आप जा सकते हो |<br><br>बद्रीनाथ धाम तो लगभग सबने ही सुना होगा यह हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है यहाँ  जाने के लिए आपको शुरुआत हरिद्वार या ऋषिकेश से करनी होगी हरिद्वार से बद्रीनाथ धाम लगभग 325 किलोमीटर की दूरी पर होगा , बद्रीनाथ में रुकने के लिए आपको तमाम होटल मिल जायेंगे , यहाँ आप जब भी जाये तो यहाँ की पान्ह्क शिलाओ के दर्शन जरूर करे , यहाँ बने तप्त कुण्ड में स्नान भी करे अब आप नारद कुण्ड , चरण पादुका , माना गाँव , भीम पुल , शेष नेत्र जैसे स्थल भी देख सकते है |</p>



<p>केदारनाथ महादेव का दिव्य स्थान जहाँ का धार्मिक महत्त्व और नैसर्गिक सुन्दरता हर किसी को बुलाती रहती है वैसे तो यह स्थल रुद्रप्रयाग जिले में आता है और यह 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है आप यहाँ भी हरिद्वार या ऋषिकेश से बस के द्वारा जा सकते है हरिद्वार से सोनप्रयाग और सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड तो आप वहां से जा सकते हो उसके बाद की यात्रा आपको पैदल / खच्चर / पिट्ठू से  ही करी होगी  यहाँ सबसे पहले तो आप भोले बाबा के अलौकिक दर्शन करे फिर आप गौरीकुंड , वासुकी ताल भी जा सकते है |<br><br>केदारनाथ मंदिर से 4 किलोमीटर की दूरी पर चोखादो ताल इसे गाँधी ताल भी कहते है यहाँ भी आप जा सकते हो |<br><br>त्रियुगीनारायण मंदिर गौरीकुंड से १० किलोमीटर की दूरी पर है आप यहाँ भी दर्शन हेतु जा सकते है |<br><br>केदारनाथ से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उखीमठ भी आप जा सकते है जब  केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते है तो उनकी पूजा उखीमठ में की जाती है |<br><br>देवरिया ताल भी यहाँ से  महज 60 किलोमीटर की दूरी पर है और वासुकी ताल भी आप जा सकते हो |<br><br>नोट &#8211; ध्यान से ये चारो छोटे धाम के कपाट खुलने की जानकारी करके ही यहाँ जाए |</p>



<h5 class="wp-block-heading">उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग </h5>



<p class="has-text-align-justify">प्रयाग शब्द का मतलब नदियों के संगम से होता है तो उत्तराखंड में पांच ऐसे पवित्र स्थल है जहाँ ये संगम हुये है इनको है आइये इनके बारे में भी जान लिया जाय &#8211; </p>



<h6 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h6>



<p>देवप्रयाग के बारे में हम ऊपर बता ही चुके है <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में ये समस्त प्रयाग बड़े ही खास है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल पर मंककिनी और अलकनंदा नदियों का संगम होता है यह स्थल हरिद्वार से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर है , रुद्रप्रयाग संगम से महज ३ किलोमीटर की दूरी पर कोटेश्वर मन्दिर है जहाँ आपको जरूर दर्शन हेतु जाना चाहिए इसके अलावा आप रुद्रनाथ मन्दिर और अगस्त्मुनिजैसे स्थलों पर भी जा सकते है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ पर अलकनंदा और पिंडर नदियों का संगम होता है , ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी लगभग 173 किलोमीटर है , रुद्रप्रयाग से कर्णप्रयाग की दूरी मात्र ३३ किलोमीटर है यहाँ देखने के लिए आप उमा मंदिर , कर्ण मंदिर , आदि बद्री मन्दिर जा सकते है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल पर अलकनंदा और नंदाकिनी नदी का संगम होता है , नंदप्रयाग कर्णप्रयाग से महज २० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहाँ के मुख्या मंदिरों में आप गोपाल मंदिर और चंडिका मंदिर है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग </h6>



<p class="has-text-align-justify">इस  स्थल पर विष्णुगंगा और अलकनंदा नदी का संगम होता है , नंद्प्रयाग से विष्णुप्रयाग की दूरी 70 किलोमीटर है , यहाँ से 40 किलोमीटर की दूरी पर बद्रीनाथ धाम स्थित है |<br><br><a href="https://safarjankari.com/panch-prayag-ki-samast-jankari/">Panch Prayag Ki Samast Jankari yahan se padhiye </a></p>



<h5 class="wp-block-heading">पञ्च केदार </h5>



<p class="has-text-align-justify">पञ्च केदार मतलब भगवान शिव के पांच पवित्र मन्दिर जो उत्तराखण्ड में स्थित  है ये उत्तराखण्ड के काफी उंचाई पर स्थित शिव मंदिर है इनमे केदारनाथ , तुंगनाथ , रुद्रनाथ , मदमहेश्वर और कल्पेश्वर है |<br><br>केदारनाथ के बारे में हम आपको पहले ही बता चुके  है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">तुंगनाथ </h6>



<p>यह पवित्र शिव मन्दिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है इस मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है , यह स्थल चोपता क्षेत्र में आता है , ऋषिकेश से यहाँ की दूरी लगभग 210 किलोमीटर है यहाँ आप तुंगनाथ मंदिर देखे फिर मंदिर से आगे लगभग 3 किलोमीटर पर चंद्रशिला शिखर है वहां भी आप ट्रेक कर सकते है |<br><br>यहाँ पहुचने के लिए आपको चोपता आना होगा वहां से आप तुंगनाथ मंदिर की और जा सकते है , तुंगनाथ मंदिर का ट्रेक बड़ा ही शनदार है और दिसंबर जनवरी में यहाँ आपको बर्फ भी देखने को मिलती है | चोपता भी एक जाना माना हिल स्टेशन है यहं भी आप घूम सकते हो |</p>



<h6 class="wp-block-heading">रुद्रनाथ महादेव </h6>



<p class="has-text-align-justify">भगवान शिव का यह मन्दिर चमोली जनपद में स्थित है यह मंदिर गोपेश्वर केदारनाथ रोड पर स्थित है , यहाँ जाने के लिए आपको सबसे पहले गोपेश्वर आन अहोगा फिर गोपेश्वर से रुद्रनाथ की यात्रा शुरू होती है , यहाँ की यात्रा में आपको बुग्याल कई प्रसिद्ध मंदिर मिलते है यह यात्रा बेहद ही रोचक होती है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">मदमहेश्वर </h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आने के लिए आपको उखीमठ आना होगा फिर उखीमठ से ऊनिआना गाँव और यहाँ से से लगभग 21 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है जिसमे आपको प्रकृति के सुन्दर नज़ारे देखने को मिलते है , यह रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">कलपेश्वर</h6>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ आपको भोलेनाथ की जटा के दर्शन होते है जो की एक चट्टान सी है यह चमोली जिले में है यहाँ आने के लिए आपको हेलंग आना होगा फिर वहां से ट्रेक करके आप इस मन्दिर तक अ सकते है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पञ्च बद्री</h5>



<p class="has-text-align-justify">उत्तराखण्ड में भगवान विश्वु के पांच धाम है जिसमे बद्रीनाथ मन्दिर , ध्यान बद्री ,वृद्ध बद्री , योग बद्री , भविष्य बद्री है बद्रीनाथ धाम के बारे में हम आपको बहा ही चुके है <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong>  में इन बद्री को शामिल करना आवश्यक था |<br><br>योग  ध्यान बद्री जिला चमोली में आता है और यह अलाक्नान्दनादी के किनारे गोविन्द घाट पर बना है यह पांडूकेश्वर नाम की जगह पर है यहाँ भगवान् विष्णु ध्यान की मुद्रा में है |<br><br>भविष्य बद्री भी चमोली जिले में है और यह बद्री जोशीमठ के पास सुभई गाँव में है यहाँ विष्णु जी के नरसिंह रूप की पूजा की जाती है यहाँ आने के लिए आप सबसे पहले जोशीमठ आये फिर सलधर फिर सलधर से 6 किलोमीटर का ट्रेक करके जाए भविष्य बद्री और दर्शन करे |<br><br>वृद्ध बद्री जोशीमठ से लगभग 7 किलोमीटर  दूरी पर स्थित है  नाम के अनुसार इस जगह विष्णु जी की पूजा वृद्ध रूप में की जाती है मतलब बूढ़े रूप में , यह साल के बारह महीने खुला रहता है |<br><br>आदिबद्री यह स्थान कर्णप्रयाग से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्री हेमकुण्ड साहिब चमोली जिला </h5>



<p>श्री हेमकुण्ड साहिब सिख समुदाय का एक बहुत ही पवित्र स्थल है यह चमोली जिले में है यह एक गुरुद्वारा है यह एक बहुत ही सुन्दर गुरुद्वारा है जिसके किनारे पर एक झील भी है , यह स्थल श्रधालुओ के लिए समूचे साल न खुलकर सिर्फ मई से ओक्टूबर के मध्य ही खुलता   है क्यूंकि बाकी के दिनों में अत्यधिक बर्फ पड़ने के कारण यहाँ की यात्रा कठीन हो जाती है |<br>यहाँ अप लक्ष्मण मन्दिर , कागभुसंडी ताल , भीम पुल , पांडूकेश्वर आदि देख सकते हो यहाँ तक आने के लिए आपको सबसे पहले जोशीमठ तक आना होगा फिर वहां से आपको गोविन्द घाट आना होगा अब गोविन्द घाट से आपको २० किलोमीटर ट्रेक करके हेमकुण्ड साहिब तक आना ओगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">औली </h5>



<p class="has-text-align-justify">औली एक ऐसा नाम जिसे आजकल के घुमक्कड़ बहुत ही पसंद करते है क्यूंकि यहाँ आप प्रकृति को बहुत ही पास से देखते है यहाँ आप बर्फ का भरपूर मजा ले सकते है और आइस स्कीइंग यहाँ से बेहतर शायद  ही आप कही और पाए औली में आप क़वारी बुग्याल , गुरसो बुग्याल , चिनाल झील , छन्ना कुंड , सेल्धार , आदि देख सकते हो |<br>यहाँ तक आने के लिए आपको सबसे पहले जोशीमठ आना होगा जोशीमठ से आप औली रोपवे के द्वारा जाइएगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">जोशीमठ </h5>



<p class="has-text-align-justify">आप देख रहे उत्तराखंड के कई पर्यटन स्थलों को केंद्र जोशीमठ ही है तो आपको जोशीमठ के आसपास के और भी टूरिस्ट सोत बता देते है यहाँ आपको बहुत सारे मठ और मंदिर मिलेंगे और ये स्थल ही बाद्रिनाथ का प्रवेश दार है जोशीमठ चमोली जिले में है नरसिंह मंदिर , ज्योतिरमठ , नंदा देवी राष्टीय उद्यान आप देख सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">फूलो की घाटी</h5>



<p>यह बेहद की खूबसूरत स्थान चमोली जनपद में है और यहाँ आप जोशीमठ से आ सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कोटद्वार </h5>



<p class="has-text-align-justify">कोटद्वार उत्तराखण्ड राज्य के पौढ़ी गढ़वाल जिले में स्थित है यहाँ का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिद्धबली हनुमान मन्दिर है जो की खोह नदी के किनारे पर है यह एक बहुत सुन्दर स्थल है इसके अलावा यहाँ से 15 किलोमीटर की दूरी पर कण्वाआश्रम है यहाँ भी आप जा सकते है यहाँ आप बड़ी ही आसानी से आ सकते है यह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है यह स्थान हरिद्वार से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">लैंसडाउन </h5>



<p class="has-text-align-justify">कोटद्वार से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर लैंसडाउन नाम का एक हिल स्टेशन है जो की टिप एन टॉप के लिए फेमस है यहाँ आपको भीड़ बहुत कम दिखेगी तो आप जीवन में कभी यहाँ का भी प्लान बनाये यह हिल स्टेशन <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में लोकप्रिय हो रही है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नैनीताल </h5>



<p class="has-text-align-justify">भारत का एक जाना माना हिल स्टेशन नैनीताल जो की उत्तराखंड राज्य में है यह वाकई में झीलों का शहर है यहाँ घुमने के लिए ढेर सारे विकल्प है यहाँ का सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है और काठगोदाम से नैनीताल लगभग 35 किलोमीटर है , यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल में नैना झील , नैना देवी मंदिर , सातताल, जू , रामनगर , रामगढ , भीमताल , माल रोड , हनुमान गढ़ी , मुक्तेश्वर , नौकुचियाताल , थोड़ी दूरी पर कैंची धाम आदि है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रानीखेत</h5>



<p class="has-text-align-justify">काठगोदाम रेलवे स्टेशन रानीखेत की दूरी महज लगभग 80 किलोमीटर है यहाँ आपको देवदार और चीड़ के ऊँचे ऊँचे पेड़ दिखाई देंगे जो वाकई में बेहद ही खूबसूरत है एक प्रकृति प्रेमी क लिए रानीखेत एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट है यहाँ के मुख्य पर्यटक स्थल चौबटिया , दूनागिरी , गोल्फ का मैदान , शीतला खेत , चिलियानौला , मजखाली , द्वाराहाट , धोलिखेत आदि है यहाँ आने के लिए सबसे पहले आपको काठगोदाम आना होगा फिर काठगोदाम से आप रानीखेत बस , टैक्सी आदि साधनों से पहुँच सकते हो , रानीखेत अल्मोड़ा जिले में है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">अल्मोड़ा </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह खुद एक जिला है और काठगोदाम से लगभग 83 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ आप कथोदम से बस या टैक्सी लेके जा सकते हो यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थलों में चितई मंदिर , डिअर पार्क , मम्यूजियम , कसार देवी प्रमुख है |<br><br>इसके अलावा अल्मोड़ा के आसपास भी ढेरो पर्यटन स्थल है जिन्हें हम नीचे बता रहे है &#8211; <br>अल्मोड़ा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर जागेश्वर है |<br>अल्मोड़ा से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है बिनसर है |<br>प्राकृतिक सौन्दर्यता से ओत प्रोत कोसी अल्मोड़ा से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर है |<br>बैजनाथ जो की एक उत्रुष्ट मंदिरों की श्रंखला है यह अल्मोड़ा से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है |<br>बागेश्वर भी एक जाना माना पर्यटन स्थल है जो की अल्मोड़ा से मात्र 90 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah.jpg" alt="" class="wp-image-10471" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/05/Uttarakhand_me_Ghumne_Ki_jagah-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>
</div>


<h5 class="wp-block-heading">कौसानी </h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ की नैसर्गिक सुन्दरता देखते ही बनती है महात्मा गाँधीजी ने कौसानी को धरती का स्वर्ग कहा है यहाँ पर्यटन के बहुत से विकल्प नहीं है लेकिन आप यहाँ आये यहाँ रहे मजा आ जायेगा , कौसानी अल्मोड़ा से 50 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ के मुख्य पर्यटन केंद्र पन्त संग्रहालय , अनासक्ति आश्रम है इसके अलावा कौसानी से 20 किलोमीटर की दूरी पर पिनाकेश्वर है जो की ट्रेकिंग के लिए बेस्ट है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">माँ पूर्णागिरी मन्दिर टनकपुर </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह धार्मिक स्थल चम्पावत जिले में है , माँ पूर्णागिरी देवी का मंदिर अन्नपूर्ण शिखर पे है और यह 108 सिद्धपीठो में से एक है यहाँ नवरात्र में अताधिक भीड़ होती है यहाँ आने के लिए आपको सबसे पहले टनकपुर आना होगा टनकपुर एक रेलवे स्टेशन है नै दिल्ली से टनकपुर की दूरी लगभग 330 किलोमीटर है और टनकपुर से यह मंदिर 22 किलोमीटर की दूरी पर है जिसे आप जीप द्वारा जा सकते है बस आपको लगभग 3 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके माँ तक पहुचना होगा |<br>यहाँ से अप नेपाल के महेन्द्रनगर में स्थित सिद्ध बाबा जा सकते है और टनकपुर में आप शारदा घाट जा सकते है यदि आपको राफ्टिंग का शौख है तो आप बूम राफ्टिंग सन्टर भी जा सकते हो, <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> में माँ के इस धाम का जिक्र बेहद जरूर है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पिथोरागढ़ </h5>



<p class="has-text-align-justify">पिथोरागढ़ उत्तराखण्ड राज्य का एक जिला है और यहाँ भी पर्यटन के ढेर सारे विकल्प मौजूद है यहाँ आप सीढीनुमा खेत देखने को पाओगे यहाँ का नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है जो की यहाँ स लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ के मुख्य पर्यटन केंद्र थल केदार ध्वज , चन्दाक आदि है इसके आलावा इसके आसपास भी कुह जाने माने टूरिस्ट पॉइंट है  जिन्हें भी आप जान ले तो बेहतर है |<br><br>पिथोरागढ़ से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बेरीनाग यहाँ  आप हरे भरे चाय के बागन और हिमालय के ऊँचे पहाड़ देख सकते हो |<br><br>गंगोली हाट नाम की जगह पिथोरागढ़ से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है |<br><br>नेपाल की सीमा से लगा हुआ धारचूला पिथोरागढ़ से 100 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">मुन्सियारी </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह हिल स्टेशन पिथोराढ़ में स्थित है बहुत से लोग इसे उत्तराखण्ड का छोटा कश्मीर कहते है यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल पंचाचूली चोटी , महेश्वरी कुण्ड , बिरथी फाल , नंदा देवी मंदिर , कालामुनी मंदिर , बैतूली धार, दरकोट है काठगोदाम से मुन्सियारी लगभग 275 किलोमीटर की दूरी पर है और टनकपुर से 285 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पातळ भुवनेश्वर </h5>



<p class="has-text-align-justify">पिथोरागढ़ से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पाताल भुवनेश्वर है जहा बनी गुफाये देखते ही बनती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">चम्पावत</h5>



<p class="has-text-align-justify">यह जिला उत्तराखण्ड राज्य में है यहाँ के मुख्य पर्यटन स्थल ग्वाल देवता , लोहाघाट , लोहाघाट से 40 किलोमीटर पर पंचेश्वर जगह है जो की चमू मंदिर के लिए प्रसिद्ध है , मायावती आश्रम भी आप जा सकते हो | इसके आलावा गुरुद्वारा रीटा साहिब , आदित्य मंदिर , एबट माउंट भी आप जा सकते हो |</p>



<h5 class="wp-block-heading">केदारकंठा</h5>



<p class="has-text-align-justify">केदारकंठा ट्रेकिंग के शौखीन लोगो के लिये एक उत्तम विकल्प है यह उत्तरकाशी जिले में है यहाँ आने के लिए आपको सांकरी गाँव आना होगा सांकरी गाँव आप देहरादून से आ सकते है फिर यहाँ से आप केदारकंठा का ट्रेक शुरू करेंगे यह सर्दियों में भी खुला रहता है यहाँ के लिए आप गाइड कर ले तो ज्यादा सही रहेगा गाइड आपको सांकरी से मिल जायेंगे |</p>



<h5 class="wp-block-heading">श्रीनगर </h5>



<p class="has-text-align-justify">अरे ये श्रीनगर जम्मू कश्मीर वाला नहीं है भैया ये उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल जनपद का एक टाउन है जो की एक पर्यटन केंद्र है यह जगह अलकनंदा नदी के किनारे पर है यह पर्यटन स्थल ऋषिकेश से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p>मैंने इस लेख में <strong><em>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</em></strong> के कई पर्यटन स्थल का जिक्र किया है लेकिन फिर भी अभी भी ढेरो पर्यटन केंद्र जो की उत्तराखंड में होंगे यहाँ आप नहीं पाएंगे क्यूंकि मेरे हिसाब से तो पूरा उत्तराखण्ड ही घूमने वाला है मेरी जानकारी में जो  जो था मैंने यहाँ लिख दिया और भी बहुत से टूरिस्ट स्पॉट जैसे न्यू टिहरी , पौढ़ी , चंबा , जिम कार्बेट , चकराता , कानाताल , पंगोत  आदि भी देखने लायक है |<br><br>खैर कोई नहीं आप सब कमेन्ट करके इस लिस्ट में और भी टूरिस्ट स्पॉट जोड़ दे जिससे जो भी यह लेख पढ़े फिर आपका कमेन्ट पढ़े तो उसे और भी ज्यादा <strong>Uttarakhand me Ghumne Ki jagah</strong> की जानकारी हो जाय धन्यवाद |</p>



<p><br></p>



<p><br><br></p>



<p><br><br><br></p>
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		<title>Panch Prayag of Uttarakhand &#8211; उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग की जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Dec 2019 20:02:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Travel Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Ganga River]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Prayag]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जब आप हरिद्वार या ऋषिकेश से बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर आगे बढोगे तो बद्रीनाथ पहुचने से पहले आपका सामना इन पञ्च प्रयाग से हो जायेगा क्यूंकि Panch Prayag बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर ही स्थित है &#124; अब पञ्च प्रयाग को और भी अच्छे से समझते है देखिये उत्तराखंड की पवित्र नदियाँ अलकनन्दा , भागीरथी , मन्दाकिनी , पिंडर , नंदाकिनी और विष्णुगंगा या धौलीगंगा है और बद्रीनाथ से अलकनंदा नदी निकलती और आगे बढ़ती जाती है और बाकी की नदियाँ एक एक करके इस अलकनन्दा नदी में मिलती जाती है और जिस स्थल पर नदिया मिलती है वही प्रयाग कहलाता है &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> को जानने से पहले यह जान लिया जाय की प्रयाग शब्द का मतलब क्या है प्रयाग शब्द का मतलब नदियों के संगम से होता है मतलब जिस स्थल पर दो या दो से अधिक नदियाँ मिलती है उस स्थल को हम <a aria-label="प्रयाग (opens in a new tab)" href="https://en.wikipedia.org/wiki/Confluence" target="_blank" rel="noreferrer noopener">प्रयाग</a> कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रयागराज पूर्व में <a href="https://safarjankari.com/allahabad-me-ghumne-ki-jagah/">इलाहबाद का त्रिवेणी संगम</a> है क्यूंकि यहाँ गंगा यमुना और अद्रश्य सरस्वती इन तीन नदियों का संगम होता है इसीलिये इस स्थल को प्रयाग बोला जाता है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Panch Prayag of Uttarakhand &#8211; उत्तराखण्ड के पञ्च प्रयाग &#8211; </h2>



<p class="has-text-align-justify">चलिये अब बात करते है <strong>पञ्च प्रयाग</strong> की तो यहाँ पञ्च का मतलब पांच से बाकी पञ्च प्रयाग का सन्दर्भ उत्तराखण्ड राज्य से है उत्तराखंड में पांच ऐसे स्थल है जहाँ पर नदियों का संगम हुआ है तो उन्ही पांच स्थलों को पञ्च प्रयाग का नाम दिया गया है यहाँ से आपको इस प्रश्न <strong>How Many Panch Prayag in Uttarakhand</strong> का जवाब मिल गया होगा |</p>



<p class="has-text-align-justify">इन  <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> को हिन्दू धर्म में बहुत ही धार्मिक स्थल माना गया है यहाँ स्नान और दान पुण्य करने से मनुष्य को अत्यन्त लाभ मिलता है | </p>



<p class="has-text-align-justify">जब आप हरिद्वार या ऋषिकेश से बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर आगे बढोगे तो बद्रीनाथ पहुचने से पहले आपका सामना इन <em>पञ्च प्रयाग </em> से हो जायेगा क्यूंकि ये बद्रीनाथ यात्रा वाले मार्ग पर ही स्थित है | </p>



<p class="has-text-align-justify">अब पञ्च प्रयाग को और भी अच्छे से समझते है देखिये उत्तराखंड की  पवित्र नदियाँ अलकनन्दा , भागीरथी , मन्दाकिनी , पिंडर , नंदाकिनी और विष्णुगंगा  या धौलीगंगा  है और बद्रीनाथ से अलकनंदा नदी निकलती और आगे बढ़ती जाती है और बाकी की नदियाँ एक एक करके इस अलकनन्दा नदी में मिलती जाती है और जिस स्थल पर नदिया मिलती है वही प्रयाग कहलाता है |</p>



<p>चलिये अब एक एक करके उत्तराखण्ड के इन पवित्र<strong> Panch Prayag of Uttarakhand</strong>   को जान लेते है &#8211;</p>



<p><strong>Panch Prayag Ke Naam</strong> &#8211; देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग , कर्णप्रयाग , विष्णुप्रयाग , नंदप्रयाग </p>



<h4 class="wp-block-heading">देवप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify"><em> </em> देवप्रयाग यह स्थल उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी गढ़वाल जिले के अन्तर्गत आता है यह एक बेहद पवित्र प्रयाग है क्यूंकि इसी जगह पर गंगोत्री से आने वाली भागीरथी नदी और बद्रीनाथ धाम से आने वाली अलकनन्दा का संगम होता है और देवप्रयाग से ही यह नदी गंगा के नाम से भारत भर में बहती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग कैसे पहुंचे &#8211; How To Reach Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">देवप्रयाग पहुंचना बहुत ही आसान है सबसे पहले आप हरिद्वार या ऋषिकेश बहुंच जाइए फिर इन दोनों ही जगहों से आपको बस या टैक्सी मिल जायेंगी आपअपने साधन से भी जा सकते यदि दूरी की बात करे तो ऋषिकेश से देवप्रयाग की दूरी लगभग 74 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">देवप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">आप इस पवित्र स्थल पर आप सबसे पहले भागीरथी और अलकनन्दा का संगम देखे उसके बाद यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण रघुनाथ मन्दिर है वैसे देवप्रयाग एक बेहद की खूबसूरत प्राकृतिक स्थल है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके आलावा यहाँ आप चन्द्रबदनी मंदिर और डाडा नागराज मंदिर भी जरूर देखे , अब यदि इतना देखने के बाद आपके पास समय है तो आप ब्रम्ह कुंड , सूर्य कुण्ड , वशिष्ठ कुण्ड आदि भी देख सकते है |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;  <br><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/">हरिद्वार दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी</a> <br> <a href="https://safarjankari.com/ram-jhula-ke-aas-paas-ke-parytan-sthal/">राम झूला ऋषिकेश के आसपास के पर्यटन स्थल </a></p>



<h5 class="wp-block-heading">कब जाये देवप्रयाग &#8211; Best Time to visit Devprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">वैसे तो यहाँ आप साल में किसी भी समय जा सकते है कोई दिक्कत नहीं है फिर भी लेकिन फिर भी मेरी माने तो बारिश में ना जाये तो बेहतर है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" width="600" height="400" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag.jpg" alt="Panch Prayag of Uttarakhand  Devprayag" class="wp-image-2255" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panch_Prayag_DevPrayag-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>Devprayag</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">चलिये अब चलते है दूसरे <strong><em>Panch Prayag of Uttarakhand</em> </strong> की तरफ जिसका नाम रुद्रप्रयाग है और इस पावन स्थल पर केदारनाथ धाम से आने वाले मन्दाकिनी नदी और बद्रीनाथ से आने वाली अलकनन्दा नदी का संगम होता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इस स्थल के बारे में कहा जाता है की नारद मुनि ने संगीत को जानने के लिये यहाँ तपस्या की थी इससे खुश होकर भगवान् शिव यहाँ रूद्र रूप में उपस्थित हुये थे और नारद मुनि को वीणा बजाना सिखाया था  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Rudraprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">रुद्रप्रयाग जिला पहुचना आसान है यह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है और ऋषिकेश से इसकी दूरी लगभग 141 किलोमीटर है वही हरिद्वार से 160 किलोमीटर है और आपको यहाँ के लिए पहले हरिद्वार आना होगा और फिर हरिद्वार से ऋषिकेश बद्रीनाथ वाले मार्ग पर चल देना है |</p>



<p class="has-text-align-justify">देवप्रयाग से रुद्रप्रयाग की दूरी लगभग 67 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">रुद्रप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Rudraprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify"> रुद्रप्रयाग में एक से बढ़कर एक पर्यटन स्थल घुमक्कड़ो को अपनी और आकर्षित करते है यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र कोटेश्वर मंदिर है जो की रुद्रप्रयाग संगम से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<p class="has-text-align-justify">यह भगवान शिव का मन्दिर है यह मन्दिर एक गुफा रूप में है और पावन अलकनन्दा के किनारे बना हुआ है इसके अलावा आप अगस्तमुनि भी जा सकते है , और यहाँ का प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर अलकनंदा नदी और मन्दाकिनी नदी के संगम पर ही है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कब जाये रुद्रप्रयाग  &#8211; Best Time to visit Rudraprayag in Hindi</h5>



<p>रुद्रप्रयाग जाने  का सबसे बढ़िया समय अक्टूबर महीने से लेकर अप्रेल तक का है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित है और यह भी एक <em><strong>पञ्च प्रयाग</strong> </em> है , कर्णप्रयाग में अलकनन्दा और पिंडर ( जिसे कर्णगंगा भी कहा जाता है ) नदियों का संगम होता है , यह स्थान महाभारत के वीर कर्ण के नाम पर है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading"> कर्णप्रयाग कैसे पहुचे  &#8211; How To Reach Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग भी सड़क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है आप ऋषिकेश &#8211; हरिद्वार से यहाँ पर बड़ी ही आसानी से पहुच सकते है ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी लगभग 173 किलोमीटर है आपको हरिद्वार से बस मिल जायेगी और आप अपने साधन से भी आ सकते है |</p>



<p>रुद्रप्रयाग से कर्णप्रयाग के बीच की दूरी 33 किलोमीटर है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">कर्णप्रयाग के मुख्य आकर्षण में उमा मन्दिर और कर्ण मन्दिर है इसके अलावा पिंडर और <a href="https://www.britannica.com/place/Alaknanda-River" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="अलकनन्दा (opens in a new tab)">अलकनन्दा</a> संगम भी देखने योग्य है इनके अलावा कर्णप्रयाग से 20 किलोमीटर की दूरी पर आदि बद्री मन्दिर और 24 किलोमीटर दूर नौटी गाँव भी बढ़िया जगह है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">कर्णप्रयाग कब जाये &#8211; Best Time to visit Karnprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">बारिश में परहेज करो बाकी चाहे जब जाओ बढ़िया जगह है और हा ठंडी में नहाने से डर लगता हो तो ठंडी में ना जाना क्यूंकि यहाँ संगम में नहाना ही जरूरी है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">नन्दप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">यह चौथा पञ्च प्रयाग उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जनपद में स्थित है और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है यहाँ पर नंदाकिनी नदी अलकनंदा नदी में मिल जाती है और यही संगम स्थल नंदप्रयाग एक  <strong>पञ्च प्रयाग</strong> है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> पौराणिक कथानुसार भगवान कृष्ण के पिता नन्द ने इसी स्थान पर पुत्र प्राप्ति के लिये एक महायज्ञ किया था इसके अलावा एक दूसरी कथा के अनुसार नंदप्रयाग को दुष्यन्त और शकुन्तला से भी जोड़ा जाता है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Nandprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">नंदप्रयाग की ऋषिकेश से दूरी लगभग 193 किलोमीटर है और कर्णप्रयाग से महज 20 किलोमीटर है तो आप जब भी कर्णप्रयाग आये तो नंदप्रयाग भी हो ले |</p>



<h5 class="wp-block-heading">नंदप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Nandprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">नंदप्रयाग में मुख्य पर्यटन स्थल में संगम पर बना शिव जी का भव्य मन्दिर , गोपाल जी मन्दिर ,चंडिका मंदिर आदि है बाकी नंदाकिनी और अलकनंदा का संगम तो है ही |</p>



<h4 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग </h4>



<p class="has-text-align-justify">पांचवा <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> जो की विष्णु प्रयाग के नाम से जाना जाता है यह चमोली जनपद के अंतर्गत ही आता है यहाँ पर अलकनंदा और विष्णुगंगा नदी का संगम होता है इस विष्णुगंगा नदी को धौलीगंगा भी कहा जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अगर पौराणिक कथा की बात की जाय तो यहाँ पर <a aria-label="नारद मुनि (opens in a new tab)" href="https://www.speakingtree.in/allslides/the-legacy-of-narad-muni" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नारद मुनि</a> ने भगवान् विष्णु की तपस्या की थी और श्री हरि ने नारद मुनि को दर्शन भी दिए थे |</p>



<h5 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग कैसे पहुचे &#8211; How To Reach Vishnuprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">विष्णुप्रयाग की ऋषिकेश से दूरी लगभग 270 किलोमीटर है और नंदप्रयाग से मात्र 70 किलोमीटर है यहाँ से बद्रीनाथ भी पास में ही है यहाँ आने के लिये आपको ऋषिकेश से साधन मिल जायेगा |</p>



<h5 class="wp-block-heading">विष्णुप्रयाग के पर्यटन स्थल &#8211; Places to visit in Vishnuprayag in Hindi</h5>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ के मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु का मंदिर है जिसे महारानी अहिल्याबाई जी ने करवाया था इसके आलावा यहाँ से 38 किलोमीटर की दूरी पर चार धाम में से एक बद्रीनाथ धाम है , वैसे यहाँ पर स्नान करना बड़ा कठिन होता है क्यूंकि नदियों की गति ज्यादा होती है |</p>



<h5 class="wp-block-heading">पंचप्रयाग का मैप &#8211; Panch Prayag of Uttarakhand Map</h5>



<p class="has-text-align-justify">चलिये जितनी जानकारी है<strong> पंचप्रयाग</strong>  की हमने करी है आप सबसे साझा कर देता हूँ शुरुआत होती है चमोली जनपद के बद्रीनाथ धाम से बदरीनाथ से निकलती है एक दैविक नदी जिसे हम <strong>अलकनंदा</strong> बोलते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">आगे चलकर इसमें <em>धौलीगंगा</em>  नदी मिल जाती है और इस मिलन वाले स्थल को <em>विष्णुप्रयाग</em>  कहते है अब और आगे चलने पर एक और पवित्र नदी <em>नंदाकिनी </em> आकर <em>अलकनंदा</em>  में मिल जाती है और इस संगम को<em> नंदप्रयाग</em>  कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब आगे पिंडार ग्लेशियर से आने वाली <em>पिंडार नदी</em>  भी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को<em> कर्णप्रयाग</em>  कहते है फिर आगे <em>मन्दाकिनी नदी</em>  जो की केदारनाथ धाम से आ रही होती है और आकार इसी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को <em>रुद्रप्रयाग</em>  बोला जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके बाद थोडा और आगे चलकर गंगोत्रो से निकलकर <em>भागीरथी </em> नदी इसी <em>अलकनंदा </em> में मिल जाती है और इस संगम को <em>देवप्रयाग</em>  कहा जाता है यहाँ से आगे यह नदी<strong> गंगा</strong> के नाम से जानी जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify"> नीचे  मैंने  <strong>पञ्च प्रयाग</strong> का मैप बनाने की कोशिश की है |</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="420" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map.jpg" alt="Panch Prayag Map" class="wp-image-2256" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-300x158.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-768x403.jpg 768w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2019/12/Panchprayag_Map-390x205.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption> <em>Panch Prayag </em>  Map</figcaption></figure>



<p>पञ्च प्रयाग से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358423428"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>How Many Panch Prayag in Uttarakhand</strong> ? पञ्च प्रयाग कितने है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">उत्तराखंड में पांच पञ्च प्रयाग है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358489388"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Panch Prayag</strong> ke naam batao ? उत्तराखण्ड में पञ्च प्रयाग  कौन कौन से है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग , कर्णप्रयाग , विष्णुप्रयाग , नंदप्रयाग </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358762368"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; देवप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358905950"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; रुद्रप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">रुद्रप्रयाग में मन्दाकिनी नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659358957245"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कर्णप्रयाग  में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कर्णप्रयाग में कर्णगंगा या पिंडर नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659359016452"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; नंदप्रयाग  में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">नंदप्रयाग में नन्दाकिनी नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659359059683"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; विष्णुप्रयाग में कौन कौन सी नदी मिलती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">विष्णुप्रयाग में विष्णुगंगा नदी और अलकनन्दा नदी मिलती है |</p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify">तो ये थे <strong>Panch Prayag of Uttarakhand</strong> जिनका हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्त्व है यहाँ स्नान करना अति शुभ माना जाता है इसके अलावा ये समस्त <strong>पञ्च प्रयाग</strong> पर्यटन की दृष्टिकोण से बहुत खास है क्यूंकि यहाँ आप प्राकृतिक ख़ूबसूरती का आनंद ले सकते है और आध्यात्म के भी अवसर यहाँ आपको मिलेंगे  | </p>
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