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	<title>Yatra Vritant Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
	<lastBuildDate>Sat, 28 Sep 2024 14:49:30 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Yatra Vritant Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>ट्रेन यात्रा का  एक कडवा मीठा अनुभव और सज्जन टीटी से मुलाकात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jul 2022 05:47:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बात २०१७ की है जब मै लखनऊ में नोकरी करता था और रहने वाला हरदोई जिले का हु जो की लखनऊ से महज 100 किलोमीटर ही है तो हर शनिवार को ट्रेन से हरदोई भाग आता था एक बार हुआ यह कि काम थोडा ज्यादा था तो मुझे ऑफिस में देर तक रुकना पड़ा करीब रात के ९ बजे मै निकल पाया वैसे तो 6 बजे तक का ही ऑफिस था लेकिन उस दिन काम ज्यादा होने की वजह से मै रात ९ बजे निकला अब मुझे हरदोई अपने घर आना था तो जल्दी जल्दी लखनऊ रेलवे स्टेशन चारबाग की तरफ भागा भागा क्या ऑटो टेम्पो ढूंढी अब यहाँ भी किस्मत ख़राब उस दिन करीब 10-15 बाद एक ऑटो मिला खैर मै ऑटो में बैठ लिया &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ट्रेन यात्रा का  एक कडवा मीठा अनुभव और सज्जन टीटी से मुलाकात</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>ट्रेन यात्रा</strong> तो सभी ने की होगी और आप सभी को कभी न कभी ट्रेन की यात्रा करते समय कुछ मीठे कुछ कडवे अनुभव प्राप्त हुये होंगे खैर मै भी आज आपको अपना एक अनुभव बता रहा हु जिसमे मेरी किस्मत ने मेरा साथ बहुत ही देर में दिया पहले तो यह अनुभव मेरा कड़वा ही रहा अंत मे एक भले टीटी की वजह से मेरे चेहरे पर ख़ुशी थी  मेरी यह यात्रा लखनऊ से <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b2/">हरदोई </a>की है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">ट्रेन यात्रा बिना टिकट की </h2>



<p class="has-text-align-justify">बात २०१७ की है जब मै लखनऊ में नोकरी करता था और रहने वाला हरदोई जिले का हु जो की लखनऊ से महज 100 किलोमीटर ही है तो हर शनिवार को ट्रेन से हरदोई भाग आता था एक बार हुआ यह कि काम थोडा ज्यादा था तो मुझे ऑफिस में देर तक रुकना पड़ा करीब रात के ९ बजे मै निकल पाया वैसे तो 6 बजे तक का ही ऑफिस था लेकिन उस दिन काम ज्यादा होने की वजह से मै रात ९ बजे निकला अब मुझे हरदोई अपने घर आना था तो जल्दी जल्दी लखनऊ रेलवे स्टेशन चारबाग की तरफ भागा भागा क्या ऑटो टेम्पो ढूंढी अब यहाँ भी किस्मत ख़राब उस दिन करीब 10-15 मिनट बाद एक ऑटो मिला खैर मै ऑटो में बैठ लिया |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब ऑटो में बैठ कर मोबाइल में ट्रेन का हाल देखा की कौन सी ट्रेन है इस समय तो उस दिन सभी ट्रेन राईट टाइम थी जैसे शाम ७ बजे की दो ट्रेन है दोनों निकल गई ८:30 वाली भी निकल गई सोचा था कोई लेट होगी तो मिल जाएगी लेकिन नहीं अब थी <a href="https://www.makemytrip.com/railways/lucknow-ne-new-delhi-lucknow-mail-12229-train.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">लखनऊ मेल</a> जो की एक सुपरफास्ट ट्रेन है और रात के करीब 10 बजे लखनऊ से चलती है और उस दिन राईट टाइम थी और मै 9 बजकर 20 मिनट पर ऑटो में बैठा यह जानकारी ले रहा था  मतलब अपनी <strong>ट्रेन यात्रा </strong>का हिसाब किताब देख रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify">ऑटो वाले से बोला थोडा जल्दी चलना एक ट्रेन है अभी मिल जाएगी वरना फिर और लेट हो जायेगा क्यूंकि ट्रेन और भी है लेकिन एक घंटे बाद तो वो बोला चल तो रहा हु मैंने कहा ठीक चल भाई अब क्या हजरतगंज चौराहे पर जाम बर्लिंगटन चौराहे पर जाम लम्बा जाम मन ही मन सोच रहा था आज का दिन ही ख़राब है अब तो शायद यह ट्रेन भी नहीं मिलेगी खैर करते क्या मजबूरी थी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/07/ट्रेन-यात्रा.jpg" alt="ट्रेन यात्रा" class="wp-image-11357" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/07/ट्रेन-यात्रा.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/07/ट्रेन-यात्रा-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/07/ट्रेन-यात्रा-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>लखनऊ रेलवे स्टेशन </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">पूरे के पूरे 10 बजे मै रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ा था और तेजी से भागा टिकट लेने के लिये तब तक रेलवे कहने लगा की भैया लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन चलने वाली है अब मै समझ नही पा रहा था की क्या करू टिकट लू भीड़ ह लाइन है फिर यहाँ टिकट लेके प्लेटफ़ार्म तक जाने में भी 5 मिनट लगेगा तक तक कही ट्रेन निकल ना जाय  यही सब दिमाग में चल रहा था फिर मैंने फ़ौरन ही बिना टिकट चलने का फैसला किया और दौड़ पड़ा प्लेटफ़ार्म की तरफ खैर ट्रेन खडी थी अब लग रहा था की चलो यह <strong>ट्रेन यात्रा </strong> अब हो पायेगी|</p>



<p class="has-text-align-justify">इस ट्रेन में जनरल डिब्बे कम ही होते है तो अब मै रेलवे स्टेशन पर  जीने की तरफ जाने लगा ट्रेन तक पहुचने के लिए तब तक ट्रेन रेंग दी मतलब चल पड़ी अब मेरी स्पीड बहुत ही ज्यादा बढ़ गई जीने पर तेजी से दौड़ा चला जा रहा था उधर ट्रेन स्पीड पकड़ रही थी जैसे ही मै प्लेटफ़ार्म पर आया अब सामने जो डिब्बा जा रहा था वो स्लीपर का था  ट्रेन की स्पीड तेज हो रही टाइम नहीं था बिलकुल भी आनन फानन में स्लीपर में घुस गया |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब किस्मत देखिये एक तो बिना टिकट ऊपर से स्लीपर डिब्बा अभी रुकिए जरा देखिये जैसे ही मै स्लीपर डिब्बे में चढ़ा डिब्बे में आकर थोड़ी राहत महसूस की तब तक सामने टीटी अब लो होश उड़ गए टीटी सर मुस्कुराते हुये बोले भाई साहब टिकट दिखाइये उनको पूरी बात बताई तो उन्होंने वहां पर तो कायदे से बात नहीं की बोला साथ आओ क्या करता चल दिया साथ फिर पीछे एक डिब्बे में एक सीट पर उसने बिठा दिया बोला यही रुको आते है अभी वो ५ मिनट बाद आये और अब बोले फाइन पड़ेगा हमने कहा काट दो सर जी क्या करे अब हुई है गलती |</p>



<p class="has-text-align-justify">खैर उन सर ने फाइन नहीं काटा और कहाँ उतरोगे क्या करते हो यही सब बाते करने लगे फिर टीटी सर बोले ऐसा है अगली बार ये गलती न करना एक तो चलती हुई ट्रेन में चढ़ा न करो कही कोई हादसा हो जाय तो फिर बोला यही बैठो हरदोई आये तो उतर जाना बड़े ही भले सज्जन थे वो जबकि मैंने सुना था तगड़ा फाइन काटते है ये वो खैर दुनिया में हर तरह के इंसान है वो बहुत ही सज्जन टीटी थे हालाँकि जब तक हरदोई नहीं आया उन्होंने मुझे <strong>ट्रेन यात्रा </strong> से संबंधित कई सुझाव दिये और डाटते ही रहे |</p>



<p class="has-text-align-justify">डाटना मतलब यही की पहली बात तो जल्दी में ना रहा करो बिना टिकट लिये आज के बाद कभी न बैठना ट्रेन में लेट हो रहा है तो दूसरी ट्रेन से आओ लेकिन इत्ती जल्दी क्या है ये वो उनकी सभी बाते सही ही थी गलती मेरी ही थी मुझे एक घंटा रुककर दूसरी ट्रेन से आना चाहिये था खैर अपनी गलती की मैंने उनसे माफ़ी मागी थी लेकिन वो सज्जन थे उन्होंने किसी प्रकार न कोई फाइन लिया न कुछ बस भविष्य के लिये नसीहत ही दी |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो यह मेरी ऐसी <strong>ट्रेन यात्रा</strong> थी जिसमे किस्मत ने बिलकुल भी साथ नहीं दिया और फाइनली लास्ट में किस्मत ने साथ भी दे दिया था और यही मेरी पहली बिना टिकट यात्रा भी थी तो आप लोगो ने भी बिना टिकट की ट्रेन यात्रा जरूर की होगी वैसे मै तो बिलकुल भी किसी को सलाह नहीं दूंगा की रेलगाड़ी का सफ़र बिना टिकट किया जाय क्यूंकि थोड़े रूपये की वजह से एक तो फाइन ज्यादा पड़ेगा दूसरा बदनामी अलग होगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो आप कभी भी<strong> ट्रेन यात्रा </strong>करे तो आपकी ट्रेन के समय से थोड़ा पहले ही घर से निकले टिकट ले बहुत ही आराम से अपनी सीट पर बैठे इस ट्रेन के सफ़र में  जल्दबाजी कभी न करे यह बहुत ही घातक साबित हो सकता है तो ध्यान रखियेगा फिर भी यदि आपका कोई ऐसा किस्सा है जिसमे आपने बिना टिकट यात्रा की हो या जनरल डिब्बे का टिकट लेकर स्लीपर में बैठ गये हो तो कमेन्ट करके बताइए |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ट्रेन यात्रा का  एक कडवा मीठा अनुभव और सज्जन टीटी से मुलाकात</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>ओरछा धाम और बरुआसागर की घुमक्कड़ी के मेरे किस्से</title>
		<link>https://safarjankari.com/orchha-dham-aur-baruasagar-ka-yatra-vritant-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Apr 2022 15:40:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Nature]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[ओरछा धाम]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आपने मेरे साथ झाँसी को घूमा और रात में आकर मै अपने होटल रूम में सो गया सुबह 6 बजे  उठकर और नहा धोकर ओरछा जाने के लिये रेडी हो गया वही सीपरी से ऑटो में बैठकर सुबह के सात बजे मै झांसी के बसड्डे पर था वहां जानकारी की तो पता चला की ओरछा के लिये  टेम्पो जाते है  तो बस मै देर न करते हुये टेम्पो मै बैठ लिया &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/orchha-dham-aur-baruasagar-ka-yatra-vritant-hindi/">ओरछा धाम और बरुआसागर की घुमक्कड़ी के मेरे किस्से</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>ओरछा धाम</strong> जो की मध्य प्रदेश में है हमारी पिछली पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/jhansi-trip-ka-yatra-vritant/">झांसी महारानी लक्ष्मीबाई का शहर की घुमक्कड़ी का यात्रा वृतान्त</a> में आपने मेरे साथ <a href="https://www.britannica.com/place/Jhansi">झाँसी</a> को घूमा और रात में आकर मै अपने होटल रूम में सो गया सुबह 6 बजे  उठकर और नहा धोकर ओरछा जाने के लिये रेडी हो गया वही सीपरी से ऑटो में बैठकर सुबह के सात बजे मै झांसी के बसड्डे पर था वहां जानकारी की तो पता चला की ओरछा के लिये  टेम्पो जाते है  तो बस मै देर न करते हुये टेम्पो मै बैठ लिया |</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ओरछा धाम</strong> यहाँ एक बार आकर देखिये आपको अच्छा लगेगा </h2>



<p class="has-text-align-justify">जब मै टेम्पो में बैठा था तो टेम्पो में सिर्फ मै ही बैठा था और टेम्पो भरने में लगभग 50 मिनट लग गए क्यूंकि सुबह-सुबह सवारियां कम ही थी खैर टेम्पो चल पड़ा और टेम्पो की गति के साथ मै फिर से <strong><em>ओरछा धाम</em></strong>  ऐसा होगा वहा रूम जो मिलेगा वो कैसा होगा बेतवा नदी कैसी होगी राम राजा सरकार मन्दिर कैसा होगा तरह तरह के जिज्ञासा वाले प्रश्नों की  उत्तरों की एक  धुंधली-धुंधली तस्वीर  मन में बन रही थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">झांसी से <strong>ओरछा धाम </strong>तक का रास्ता बढ़िया था जल्द ही टेम्पो ने मुझे ओरछा उतार दिया था जहाँ पर मै उतरा सामने एक गेट था जानकारी की तो मालूम हुआ थोडा पैदल चलो आगे ही श्री राम राजा सरकार मन्दिर और किला है बस मैंने टांगा अपना पिट्ठू बैग और रास्ते को निहारते हुये आगे बढ़ लिया रास्ते में तमाम होटल गेस्ट हाउस दिखाई दे रहे थे मन तो किया चलो यही कही रूम ले लिया जाय लेकिन फिर सोचा चलो एक बार देख ले मेरी जानकारी में यहाँ पर एक धर्मशाला भी है जो की श्री राम राजा मन्दिर परिसर में है |</p>



<p class="has-text-align-justify">लेकिन भूख लग आई थी तो मैंने एक दुकान में चाय और ब्रेड के पकोड़ो का नाश्ता किया स्वाद कोई बेहतर नहीं था लेकिन ठीक-ठाक था फिर आगे आकर मुझे श्री राम राजा सरकार मन्दिर का गेट दिखाई दिया और इसी मन्दिर के सामने ही ओरछा का किला भी है और  राम राजा मन्दिर के पास ही चतुर्भुज मन्दिर भी है अब जो मुख्य रोड से एक गली श्री राम राजा सरकार मन्दिर की और गई थी मै उसमे चल दिया |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="499" height="412" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर-ओरछा-धाम.jpg" alt="श्री राम राजा सरकार मन्दिर ओरछा धाम" class="wp-image-11147" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर-ओरछा-धाम.jpg 499w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर-ओरछा-धाम-300x248.jpg 300w" sizes="(max-width: 499px) 100vw, 499px" /><figcaption>श्री राम राजा सरकार मन्दिर </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">इस गली में आपको होटल रहने वाले खाने पीने के और खेल खिलौनों की दुकाने और धार्मिक सामान की दुकाने दिखाई देंगी  आगे मन्दिर परिसर में जैसे ही आप एंट्री करोगे सामने तो मंदिर जाने के लिए रास्ते और चप्पल जूता स्टैंड है यदि आपको भूख लगी हो तो यही पर दो तीन दुकाने है जहाँ आप पुड़ी सब्जी रायता का स्वाद चख सकते है बाकी मन्दिर परिसर में तमाम प्रसाद की फूल की दुकाने है जहाँ आप चाहो तो प्रसाद ले लो  ऐ परिसर में मान के चलो मेला सा लगा रहता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="677" height="307" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राजा-राम-मन्दिर-परिसर-ओरछा-धाम.jpg" alt="श्री राजा राम मन्दिर परिसर ओरछा धाम" class="wp-image-11146" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राजा-राम-मन्दिर-परिसर-ओरछा-धाम.jpg 677w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राजा-राम-मन्दिर-परिसर-ओरछा-धाम-300x136.jpg 300w" sizes="(max-width: 677px) 100vw, 677px" /><figcaption>श्री राजा राम मन्दिर परिसर </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब मैंने अपने जूते उतारे और  बिना प्रसाद लिए अपना बैग टाँगे ही चल पड़ा श्री राम राजा के दर्शन हेतु जनवरी २०२२ थी तो कोरोना के मद्देनजर भीड़ ज्यादा नहीं थी मैंने मुख्य गेट को प्रणाम किया और मुख्य मन्दिर में प्रवेश कर गया रामजी के भजन की गूँज से यहाँ पर एक दिव्य  वातावरण था सकारात्मका प्रचुर मात्रा में यहाँ पर थी मेरे भी रोम रोम में बस श्रीराम की भक्ति समाई जा रही थी फिर लाइन में लगकर मैंने राम राजा के दर्शन किये मै श्रीराम के दर्शन कर खुद को धन्य समझ रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify">फिर यहाँ और भी देवी देवताओ के मन्दिर थे उन सबके दर्शन किये एक जगह लिखा हुआ था महाप्रसाद तो वहा गया देखा कि मुख्य मंदिर के अन्दर महाप्रसाद मिल रहा था तो यह महाप्रसाद 25 रूपये का 60रूपये का और 120 रूपये का था मैंने 25 वाला लेने का मन बनाया पहले एक काउन्टर पर जाकर 25 रूपये का टोकन लिया फिर जाकर महाप्रसाद लिया जिसमे दो लड्डू एक पान का बीड़ा और एक इत्र की कली थी अब मुझे <strong>ओरछा धाम</strong> रुकने का भी जुगाड़ करना था तो मै बाहर आकर <strong>श्री राम राजा धर्मशाला</strong> की खोज करने लगा |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="405" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-मन्दिर-का-महाप्रसाद.jpg" alt="श्री राम राजा मन्दिर का महाप्रसाद - Orchha Tourist Places" class="wp-image-10982" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-मन्दिर-का-महाप्रसाद.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-मन्दिर-का-महाप्रसाद-296x300.jpg 296w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>श्री राम राजा मन्दिर का  महाप्रसाद</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">खोज मेरी जल्दी ही  समाप्त हो गई क्यूंकि यह धर्मशाला मन्दिर परिसर में ही थी जैसे ही आप मुख्य रोड से मंदिर वाली गली में घुसेंगे और जहाँ पर मंदिर का मुख्य द्वार होगा उसके बाई और तो पुड़ी की दूकान है और दाई और आप सीधा चले जाओ तो आपको <strong>श्री राम राजा धर्मशाला</strong> दिखाई देगी मै अन्दर गया तो पता चला की एक रूम 100 रूपये का है लेकिन उसमे बाथरूम बाहर जाना पड़ेगा मैंने कहा ओके जी कोई दिक्कत नहीं अकेले इन्सान को 100 रूपये में रूम मिल जा रहा था और क्या चाहिए |</p>



<p class="has-text-align-justify">वैसे इस धर्मशाला में अटैच वाशरूम वाले भी रूम है लेकिन मैंने 100 रूपये वाला रूम लिया था आइये आपको धर्मशाला के बारे में बता यह एक खुली सी विशाल धर्मशाला है जहाँ आपको अच्छा लगेगा पानी पीने के लिए वाटर कूलर लगा है  रूम के बाहर बड़ा सा आंगन है कमरे भी ठीक ठाक औसत दर्जे के है अत्याधुनिक सुविधाये यहाँ आपको नहीं मिलेंगी हां जो इनके कामन टॉयलेट है वो गंदे थे बस यही बात थोड़ी अखरी थी खैर मैंने फोर्मैलिटी पूरी करके कमरे की चाभी ली और आया रूम में बैग उतारा जूते उतारे और लेट गया |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="549" height="630" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-धर्मशाला-ओरछा-धाम.jpg" alt="श्री राम राजा धर्मशाला ओरछा धाम" class="wp-image-11150" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-धर्मशाला-ओरछा-धाम.jpg 549w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/श्री-राम-राजा-धर्मशाला-ओरछा-धाम-261x300.jpg 261w" sizes="auto, (max-width: 549px) 100vw, 549px" /><figcaption>श्री राम राजा धर्मशाला </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">20 मिनट आराम करने के बाद बाहर आया और फिर से मंदिर परिसर में ही भ्रमण करने लगा मुझे दो ऊँची ऊँची मीनारे दिखाई दे रही थी उनके पास गया तो पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा देखा तो जानकारी मिली कि ये <strong>सावन भादो पिलर</strong> है इन मीनारों के नीचे से सुरंग बनी है जिससे पहले राजपरिवार के लोग किले से <strong>श्री राम राजा सरकार मन्दिर </strong>तक आया करते है फिलहाल तो सुरंगे बंद करवा दी गई |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब मुझे यह <strong><em>ओरछा धाम  </em></strong>बहुत ही  खूबसूरत लग रहा था क्यूंकि <strong>सावन भादो पिलर</strong> के पास से  <strong>श्री राम राजा मंदिर </strong>और <strong>चतुर्भुज मन्दिर </strong>की भव्यता एक साथ दिखाई दे रही थी खैर मै इन दोनों पिलर से थोडा आगे बढ़ा रास्ते में सब दुकाने ही थी छोटा मोटा मेला सा लगा था बच्चो के खिलौनों की दुकाने पूजा सामग्री की दुकाने आदि सजी हुई थी थोड़ी ही दूरी पर श्री हरदौल बैठक आ गई  मै उत्सुकता वश यहाँ आ गया यहाँ पर बाग़ सा था जिसमे ढेरो पेड़ पौधे लगे थे हरियाली थी ठण्डा था और बाग़ के बीच में एक चबूतरा बना था जिसे ही <strong>श्री हरदौल बैठका</strong> कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब ये <strong>श्री हरदौल बैठका</strong> क्या है और श्री हरदौल कौन थे यह सब जानने के लिये आप हमारी पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ओरछा का इतिहास | श्री राम राजा मन्दिर की कहानी | राजा हरदौल की कहानी</a> जरूर पढ़े खैर आपको बता दे हरदौल राजा वीर सिंह देव के सबसे छोटे पुत्र थे बुन्देलखण्ड के स्थानीय लोग राजा हरदौल की पूजा करते है<strong> हरदौल बैठका</strong> पर राजा हरदौल की बहुत ही सुन्दर प्रतिमा बनी है मैंने भी राजा हरदौल के दर्शन किये और वापस आ गया फिर <strong>चतुर्भुज मन्दिर </strong>की उत्कृष्ट बनावट को निहारता रहा यह भगवान विष्णु को समर्पित एक बहुमंजिला भव्य मन्दिर है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="413" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-हरदौल-बैठका-ओरछा.jpg" alt="श्री हरदौल बैठका ओरछा" class="wp-image-10984" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-हरदौल-बैठका-ओरछा.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-हरदौल-बैठका-ओरछा-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>श्री हरदौल बैठका ओरछा</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">मैंने यहाँ पर फोटो शोटो ली और अब कहाँ की घुमक्कड़ी की  जाए ये सोचने लगा तब तक दिमाग में आया की बरुआसागर चले क्या आपको बता दे <strong>बरुआसागर</strong> झांसी जिले में है और आप <strong>ओरछा धाम</strong> से भी बरुआसागर जा सकते हो फिर क्या था पैदल पैदल आ गया टेम्पो स्टैण्ड के पास और जानकारी की तो बताया गया या तो बुक करके जाओ या फिर एक टिगेला तक जाने वाले टेम्पो में बैठो फिर टिगेला से <strong>बरुआसागर </strong>तक का टेम्पो मिल जायेगा मै फटाफट टिगेला वाले टेम्पो में बैठा और फिर टिगेला से <strong>बरुआसागर</strong> टेम्पो में बैठकर आ गया बरुआसागर जो की झाँसी से 21 किलोमीटर है |</p>



<p class="has-text-align-justify">जहाँ टेम्पो वाले ने उतरा वही पे <strong>बरुआसागर </strong>की सुप्रसिद्ध मिठाई की दुकान <strong>न्यू पाण्डेय मिष्ठान भण्डार</strong> था जहाँ के देशी घी के रसगुल्ले सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड में प्रसिद्ध है मैंने इनके रसगुल्ले को चखा काफी बड़ा और स्वादिष्ट था रसगुल्ला अब मेरा अगला पड़ाव था <strong>बरुआसागर झील और झरना</strong> अब निकल पड़ा जानकारी मिली की थोडा सा दूर है टेम्पो से निकल जाओ मैंने कहा ठीक बैठा ऑटो में आ गया  बरुआसागर के पास और पैदल पैदल आगे बढ़ने लगा |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झरना-झाँसी.jpg" alt="बरुआसागर झरना झाँसी" class="wp-image-10933" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झरना-झाँसी.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झरना-झाँसी-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झरना-झाँसी-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>बरुआसागर झरना</figcaption></figure>
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<p><a href="https://safarjankari.com/baruasagar-ghumne-ki-jankari/">बरुआसागर घूमने की समस्त जानकारी कैसे पहुंचे क्या क्या देखे Baruasagar Fort </a></p>



<p class="has-text-align-justify">थोड़ी ही दूरी पर झरना तो दिखाई दिया लेकिन पानी बहुत कम था तो झरने में तो मजा आया नहीं अब झील की तरफ बढ़ चला जिसका रास्ता तमाम मंदिरों से होकर था और सीढियों से ऊपर जाकर झील थी झील क्या एक डैम था ऊपर आया तो मन प्रसन्न हो गया   बेहद ही खूबसूरत नजारा था चारो तरफ दूर दूर तक पानी ही दिखाई दे रहा था वहां एक स्थानीय से जानकारी की तो मालूम हुआ की जब डैम में पानी ज्यादा हो जाता है तब पानी नीचे छोड़ दिया जाता है यही पानी आगे जाकर झरना बन जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify">खैर मुझे यह झील पसंद आई अच्छा  जो झील का रास्ता था उसमे एक दो छोटे छोटे झरने थे कई कुण्ड थे जिनमे पवित्र जल था हर एक  कुंड का अपना अलग महत्त्व था अब मै बरुआसागर किले को देखने आ गया जो की झरने से थोड़ी दूरी पर है और यह किला उंचाई पर बना है यह ज्यादा बड़ा तो नहीं है लेकिन यदि आप <strong>बरुआसागर</strong> आये तो किले को भी जरूर देखे किले के ऊपर से <strong>बरुआसागर झील </strong>दिखती है किले की शिल्पकला बढ़िया है मै थोड़ी देर किले के ऊपर से बरुआसागर झील के पानी को देखता रहा फिर वहां से निकल पड़ा थोड़ी ही दूरी पर <strong>जराय का मठ</strong> था |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="699" height="453" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झील.jpg" alt="बरुआसागर झील" class="wp-image-10934" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झील.jpg 699w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बरुआसागर-झील-300x194.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 699px) 100vw, 699px" /><figcaption>बरुआसागर झील</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify"><strong>जराय का मठ</strong> मुझे तो थोडा थोडा खजुराहो के मंदिरों की तरह लगा फिलहाल मस्ट विजिट प्लेस है इसके अलावा<strong> बरुआसागर</strong> में माँ मंसिल दरबार भी जा सकते है अब शाम होने को थी मै फटाफट निकला और टेम्पो टेम्पो करते हुये आ गया <strong>ओरछा धाम</strong> और धर्मशाला ले  रूम में फिर से आधे घंटे विश्राम करके कपडे बदले लोवर पहना और फिर निकल पड़ा शाही छतरियो की तरफ जो की <strong>बेतवा नदी</strong> के किनारे पर है मै रूम से टहलता हुआ पैदल ही बेतवा नदी के किनारे बनी इन छतरियो तक आ गया अब यहाँ का जो नजारा था क्या ही कहू बस मुझे तो ओरछा से प्यार हो गया था |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/ओरछा-धाम.jpg" alt="ओरछा धाम" class="wp-image-11143" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/ओरछा-धाम.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/ओरछा-धाम-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>ओरछा धाम</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">सामने बेतवा नदी और किनारे पर बनी<strong> शाही छतरियां</strong> जो सचमुच शाही ही थी यहाँ पर आप राफ्टिंग का भी लुत्फ़ उठा सकते है मेरा यहाँ से उठने का मन ही नहीं हो रहा था यहाँ पर एक I LOVE ORCHHA लिखा हुआ सेल्फी पॉइंट भी था हमने टशन में फोटो वोटो लिये और अब अँधेरा हो रहा था अँधेरा तो हो रहा था लेकिन इस जगह की ख़ूबसूरती अब और बढ़ रही थी जैसे ही इन <strong>शाही छतरियो </strong>में लाईटे जलने लगी इन छतरियो में तो चार चाँद लग गए अब तो और मै वहां से उठ नहीं पा रहा था |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="667" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/बेतवा-नदी-के-किनारे-ओरछा-धाम.jpg" alt="बेतवा नदी के किनारे ओरछा धाम" class="wp-image-11144" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/बेतवा-नदी-के-किनारे-ओरछा-धाम.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/बेतवा-नदी-के-किनारे-ओरछा-धाम-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>बेतवा नदी के किनारे </figcaption></figure>
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<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="828" height="474" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/शाही-छतरियां.jpg" alt="शाही छतरियां - Orchha Tourist Places" class="wp-image-10979" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/शाही-छतरियां.jpg 828w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/शाही-छतरियां-300x172.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/शाही-छतरियां-768x440.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 828px) 100vw, 828px" /><figcaption>शाही छतरियां शाम के समय </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">खैर 8:30 हो रहा था भूख भी लग रही थी तो मै अपने रूम / श्री राम राजमंदिर की और आ गया वही पर एक और मंदिर था जानकी जू मंदिर मैंने इस मन्दिर में जानकी माँ के सुन्दर दर्शन किये और एक होटल से दो आलू के पराठे पैक कराये और रूम में आकर खाये उसके बाद जो सुबह <strong>श्री राम राजा सरकार मन्दिर</strong> में महाप्रसाद लिया था उसका एक लड्डू खाया गज़ब का स्वाद था इस महाप्रसाद में अब मोबाइल उठाया और यार दोस्तों परिवार वालो से बात करते करते सो गया सुबह 7 बजे नींद खुली |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो फ्रेश होकर नहा धोकर सबसे पहले <strong>श्री राम राजा सरकार मन्दिर</strong> के दर्शन किये फिर निकल गया लक्ष्मी नारायण मन्दिर की इस मंदिर की शिल्पकला अद्भुत है यह मन्दिर क्या एक महल सा लगता है यह मंदिर मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी को समर्पित है और यहाँ की चित्रकारी बहुत सुन्दर है यहाँ दर्शन करके मै सीधे ओरछा के किले के गेट पर आया टिकट ली और शुरू हो गया यह भव्य किला का टूरिज्म सबसे पहले मै <strong>जहाँगीर महल</strong> गया जहाँ पड़ी बेंच पर बैठकर इस महल को निहारता रहा |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको बता दे <strong>जहाँगीर महल</strong> राजा वीर सिंह देव ने जहाँगीर के सम्मान में बनवाया था यह महल वर्गाकार है और इस महल में आप बालकनी , गुम्बद , कमरे जगह जगह पर बनी नक्खाशी देख सकते है हर एक चीज की बनावट काबिलेतारीफ है मै बड़ा इत्मीनान से <strong>जहाँगीर महल</strong> घूम रहा था मै जीने से ऊपर भी गया वहां के भी नज़ारे देखे जहाँगीर महल के दूसरे गेट से जब मै बाहर निकला तो मुझे ऊँट खाना दिखाई दिखाई दिया जो की एक ऊँचे से चबूतरे पर बना हुआ है यहाँ ऊँट बांधे जाते होंगे अब मै इस ऊँट खाने के पास से नीचे उतरा तो सामने <strong>राय प्रवीण महल</strong> था |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="488" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/जहाँगीर-महल-ओरछा.jpg" alt="जहाँगीर महल ओरछा" class="wp-image-10970" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/जहाँगीर-महल-ओरछा.jpg 650w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/जहाँगीर-महल-ओरछा-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /><figcaption>जहाँगीर महल</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">लगे हाथो इस महल की भी घुमक्कड़ी कर ली यह भी एक बेहतरीन शिल्प कला का उदहारण है राय प्रवीण एक कुशल नृत्यांगना कुशल गायक और बहुत ही सुन्दर ही तो यह महल राजा इन्द्रजीत ने राय प्रवीण के लिए बनवाया था दो मंजिल के इस महल का उद्यान भी काफी हरा भरा था अब यहाँ से आगे तीन दासियों का मंदिर , पंचमुखी महादेव मंदिर , राधिका बिहारी मंदिर , बनवासी मंदिर देखा फिर वापस आकर जहाँगीर महल से होते हुये <strong>राजा महल</strong> की तरफ आया |</p>



<p class="has-text-align-justify">राजा महल भी ओरछा किला काम्प्लेक्स का  एक खूबसूरत महल है इस महल में भी आपको काफी समय लगेगा क्यूंकि एक तो यह बड़ा है ऊपर से अत्यंत सुन्दर तो फोतोबाजी भी करोगे न एक और बात जो किले में साउंड एंड लाइट शो होता है वह <strong>राजा महल </strong>में ही आयोजित किया जाता है | <strong>राजा महल </strong>के बाद अब मै किले को अलविदा कर रहा था और अलविदा करते करते तोपखाना भी देख लिया आप ढेर सारा समय लेकर आये |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="667" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-महल-ओरछा-धाम.jpg" alt="राजा महल ओरछा धाम" class="wp-image-11145" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-महल-ओरछा-धाम.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-महल-ओरछा-धाम-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>राजा महल </figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">देखिये यदि आप कबड्डी खेलना चाहते हो तो तब तो आधा घंटे में सारे महलों के पाले को छूकर आप आ जाओ लेकिन यदि आप बुंदेलखंड स्थापत्य कला , राजपूत स्थापत्य कला को महसूस करना चाहते तो आप यहाँ सकून के साथ घूमिये और यहाँ कम से कम 3 घंटे बिताइए फोटो वोटो लीजिये इस किला परिसर में पप्री वेडिंग शूट खूब होते है अब मै <strong><em>ओरछा धाम</em></strong>  से विदा लेने वाला था तब तक मन किया क्यों न एक बार फिर राम राजा के दर्शन हो जाए तो लो आ गए फिर से राम दरबार में दर्शन करे और इस बार निकल लिए मंदिर के दूसरे गेट से |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब दूसरे गेट से एक रोड पर टहल रहे थे तो एक और  मन्दिर दिखाई दिया जो की पहाड़ी पर काफी उंचाई पर बना था अब ये कौन सा मन्दिर है उत्सुकतावश मै सरपट मन्दिर की और दौड़ लिया और ऊपर एक छोटी सी लड़की थी जो मन्दिर की देखरेख करने वाले की बिटिया थी उससे जानकारी करी तो वो बिटिया बताई ये माँ संतोषी का मंदिर है यह मंदिर भी खूबसूरत था मैंने संतोषी माँ के दर्शन किये फिर आपको बताऊ इस मन्दिर से जो व्यू मिल रहे थे वाह |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/orchha-ghumne-ki-samast-jankari/">ओरछा में घूमने की जगहों की A to Z जानकारी – Orchha Tourist Places </a></p>



<p class="has-text-align-justify">इस मंदिर से आपको <strong>चतुर्भुज मन्दिर</strong> और <strong>श्री राम राजा मन्दिर</strong> के बहुत ही आकर्षक व्यू दिखाई दे रहे थे तो यदि आप के पास समय हो तो आप माँ संतोषी के मन्दिर भी हो ले  मुझे अभी ओरछा अभयारण्य जाना था लेकिन शाम होने को थी और मुझे आज दतिया भी निकलना था तो फिर मैंने अभ्यारण्य का प्लान कैंसल किया और निकल पड़ा दतिया की और अब दतिया कैसे क्या घूमा अगली पोस्ट में बताऊंगा फिलहाल मेरी ओरछा धाम की यात्रा बहुत ही अच्छी रही |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="900" height="403" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/संतोषी-माता-मन्दिर-से-लिया-गया-फोटो-ओरछा-धाम.jpg" alt="संतोषी माता मन्दिर से लिया गया फोटो Orchha Tourist Places" class="wp-image-10985" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/संतोषी-माता-मन्दिर-से-लिया-गया-फोटो-ओरछा-धाम.jpg 900w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/संतोषी-माता-मन्दिर-से-लिया-गया-फोटो-ओरछा-धाम-300x134.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/संतोषी-माता-मन्दिर-से-लिया-गया-फोटो-ओरछा-धाम-768x344.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px" /><figcaption>संतोषी माता मन्दिर से लिया गया फोटो ओरछा धाम</figcaption></figure>
</div>


<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663230012223"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओरछा धाम कौन से राज्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">ओरछा धाम  मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663230099816"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओरछा धाम से सम्बन्धित यात्रा वृतान्त बताइये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पोस्ट को शुरू से पढिये |</p> </div> </div>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/orchha-dham-aur-baruasagar-ka-yatra-vritant-hindi/">ओरछा धाम और बरुआसागर की घुमक्कड़ी के मेरे किस्से</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>जिला झांसी महारानी लक्ष्मीबाई का शहर की घुमक्कड़ी का यात्रा वृतान्त</title>
		<link>https://safarjankari.com/jhansi-trip-ka-yatra-vritant/</link>
					<comments>https://safarjankari.com/jhansi-trip-ka-yatra-vritant/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Apr 2022 15:18:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी पर्यटन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>झांसी शहर की मेरी घुमक्कड़ी के मजेदार किस्सों को पढिये लखनऊ से झाँसी का मेरा सफ़र साबरमती ट्रेन से शुरू हुआ था जो की रात 11 बजे लखनऊ से चलती है<br />
झांसी जिसका नाम सुनते ही रानी लक्ष्मीबाई की वीरता याद आ जाती है मन में एक कुलबुलाहट सी हुआ करती थी कि एक बार झाँसी देखे वहां का किला देखे जहाँ से रानी लक्ष्मीबाई कूदी थी वह स्थल देखे खैर एक दिन मन में आया और लखनऊ से यहाँ की सीट रेलगाड़ी में बुक कर ली अकेले की तो अब मै अकेला ही झांसी घूमने जा रहा था और ये बात है जनवरी २०२२  की है &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/jhansi-trip-ka-yatra-vritant/">जिला झांसी महारानी लक्ष्मीबाई का शहर की घुमक्कड़ी का यात्रा वृतान्त</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>जिला झांसी</strong> जिसका नाम सुनते ही रानी लक्ष्मीबाई की वीरता याद आ जाती है मन में एक कुलबुलाहट सी हुआ करती थी कि एक बार <a href="https://safarjankari.com/place-to-visit-in-jhansi-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">झाँसी</a> देखे वहां का किला देखे जहाँ से रानी लक्ष्मीबाई कूदी थी वह स्थल देखे खैर एक दिन मन में आया और लखनऊ से यहाँ की सीट रेलगाड़ी में बुक कर ली अकेले की तो अब मै अकेला ही झांसी घूमने जा रहा था और ये बात है <a href="https://www.britannica.com/topic/January" target="_blank" rel="noreferrer noopener">जनवरी </a>२०२२  की है |</p>



<p class="has-text-align-justify">मेरी ट्रेन लखनऊ से रात के ग्यारह बजे की थी मै तय समय से पहले ही लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर था खैर ट्रेन राईट टाइम थी ट्रेन आई मैंने अपनी सीट ढूंढ़ी और बैठ गया अब थोड़ी ही देर बाद ट्रेन लखनऊ को बाय बाय बोल रही थी यकीन मानिये ये एक सुखद अनुभव होता है जब आप कही घूमने जा रहे हो ट्रेन में बैठे और ट्रेन चल दे  अच्छा मेरी ट्रेन साबरमती एक्सप्रेस थी जिसकी टाइमिंग लखनऊ चारबाग में 11 बजे है और यह ट्रेन <strong><strong>झांसी</strong></strong> सुबह 5 बजे पहुँच जाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify">खैर  यह जो ट्रेन का सफ़र  होता है उसमे भी बड़ा मजा आता है उत्सुकता होती है जैसे मुझे थी कि <strong><em>जिला झांसी</em></strong>  कैसा होगा रेलवे स्टेशन कैसा होगा प्लेटफ़ार्म नम्बर एक किधर होगा ऑटो कहा मिलेगा होटल कैसा मिलेगा आदि आदि खैर यही सब सोचते सोचते मुझे पता नहीं कब झपकी आ गई हालाँकि यह झपकी कोई ज्यादा नहीं थी थोड़ी ही देर में आँख खुल गई थी  और मै उरई रेलवे स्टेशन पर था अगला स्टेशन झाँसी ही था |<br><br>साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन लखनऊ से चलती है और उन्नाव , कानपुर , पोखरायां , कालपी , उरई  रुकते हुए वीरांगना लक्ष्मीबाई ( झाँसी ) रेलवे स्टेशन आ जाती है मै करीब सवा 5 बजे<strong> जिला झांसी</strong> के रेलवे स्टेशन पे था हलकी हलकी बरसात हो रही थी झाँसी का रेलवे स्टेशन काफी साफ़ सुथरा था खैर थोड़ी देर मै रेलवे स्टेशन पर बैठा रहा की सुबह हो जाय और बारिश कम हो जाय लेकिन यार दिल नही माना और हलकी हलकी बरसात की फुहार में ही मै बाहर आ गया और पैदल ही चल दिया |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="420" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/वीरांगना-लक्ष्मीबाई-रेलवे-स्टेशन-झांसी.jpg" alt="वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन जिला झांसी" class="wp-image-11135" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/वीरांगना-लक्ष्मीबाई-रेलवे-स्टेशन-झांसी.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/वीरांगना-लक्ष्मीबाई-रेलवे-स्टेशन-झांसी-300x210.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/वीरांगना-लक्ष्मीबाई-रेलवे-स्टेशन-झांसी-130x90.jpg 130w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन झांसी</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब थोड़ी  सी बात झाँसी रेलवे स्टेशन अरे माफ़ करियेगा झाँसी रेलवे स्टेशन का नाम अब वीरांगना लक्ष्मीबाई हो गया है जैसे ही  मै ट्रेन से उतरा झांसी का रेलवे स्टेशन देख कर मन प्रसन्न हो गया मैंने सबसे पहले तो वीरांगना लक्ष्मीबाई लिखे हुए बोर्ड के पास सेल्फी ली ,  बहुत ही उत्तम साफ़ सफाई थी बुन्देलखण्ड के इतिहास को बैनर के माध्यम से रेलवे स्टेशन पर ही दर्शाया गया था फिर आप जैसे ही रेलवे स्टेशन से बाहर आते हो सामने ही एक लहराता तिरंगा और वीरांगना लक्ष्मीबाई की प्रतिमा दिखाई देती है जो की देशभक्ति की लहर पैदा कर देती है बाकी <strong><em><strong>झांसी</strong></em></strong>  का रेलवे स्टेशन बाहर से भी सुन्दर है खासकर रात में जब रंग बिरंगी रौशनी में आप इस स्टेशन को देखेंगे तो मजा आ जायेगा |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="751" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/झांसी-का-रेलवे-स्टेशन.jpg" alt="जिला झांसी का रेलवे स्टेशन" class="wp-image-11129" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/झांसी-का-रेलवे-स्टेशन.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/झांसी-का-रेलवे-स्टेशन-180x300.jpg 180w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption>झांसी का रेलवे स्टेशन</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के सामने मतलब एकदम सामने कोई होटल नहीं है ना ही खाने पीने की कोई ठिये है आपको थोडा आगे जाना होगा आप चाहे तो चित्रा चौराहे की तरफ जाए या फिर इलाईट की तरफ मै निकल लिया था चित्रा चौराहे की तरफ और समय था सुबह के 6 हलकी बरसात थी तो रोड पे सन्नाटा था लगभग समस्त दुकाने बंद थी बस एक पान पुडिया का खोखा खुला दिखाई दिया तो उससे होटल के बारे में पूछा तो जानकारी मिली की चित्रा चौराहे के आसपास होटल है कुछ मुख्य रोड पे है और कुछ गलियों में है खैर मै आगे बढ़ा |</p>



<p class="has-text-align-justify">एक दो होटल दिखे लेकिन उनमे सब सोते दिखाई दिये तब तक झांसी की सुप्रसिद्ध बसंत यादव की चाय की दुकान दिखी जहाँ मैंने चाय की चुस्की ली निसंदेह चाय बेहतरीन थी थकान कम हो गई अब एक नयी उर्जा से आगे बढ़ा और एक गली में एक होटल देख वहां एक कमरा लिया और सामन रखके लेट गया तुरंत ही नींद आ गई जब नींद खुली तो सुबह के 9 बज रहे थे अब फटाफट नहा धो के रेडी हो गया और आ गया बाहर अब बारी थी घुमक्कड़ी की सबसे पहले जाना था मुझे मेजर ध्यान चंद की प्रतिमा की और और यहाँ जाने के लिये सीपरी बाजार से ऑटो मिल गया जिसने मुझे मेजर ध्यान चंद की प्रतिमा के समीप उतार दिया |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब थोडा सा पैदल चलने के बाद आ गई सीढियां इन सीढियों के माध्यम से ही मेजर ध्यान चंद की प्रतिमा तक जाना था आपको बता दू यह प्रतिमा एक पहाड़ी पर है और काफी ऊंचाई पर है सीढियां चढ़ते चढ़ते आप थक जायेंगे रास्ते में गन्दगी भी है  आखिरकार मै प्रतिमा तक आ गया था बहुत ही विशाल और भव्य प्रतिमा बनी हुई है जिसमे ध्यान चंद जी को हॉकी खेलते हुए दिखाया गया है यही पे I LOVE JHANSI लिखा हुआ एक बोर्ड है जो की इस तरह से लगाया है की इसकी फोटो लेना बड़ा कठिन काम है |</p>



<p class="has-text-align-justify">जहाँ पर यह प्रतिमा है यहाँ से <strong>जिला झांसी</strong> का बेहतरीन व्यू मिलता है तो मैंने भी देर न करते हुए एक आध फोटो व्यू की और अपनी सेल्फी के साथ व्यू की ले डाली यहाँ पर  धूप और बरसात से बचाव के लिए प्रशासन ने एक बरामदा सा बनवाया और इस बरामदे में बैठने के लिये सीट भी है  खैर अब मै यहाँ से  वापसी कर रहा था |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="571" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/मेजर-ध्यान-चंद-प्रतिमा-झांसी.jpg" alt="मेजर ध्यान चंद प्रतिमा झांसी" class="wp-image-11036" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/मेजर-ध्यान-चंद-प्रतिमा-झांसी.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/मेजर-ध्यान-चंद-प्रतिमा-झांसी-236x300.jpg 236w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption>मेजर ध्यान चंद प्रतिमा</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">भूख जोरो की लगी थी तो अब मै सीपरी बाज़ार आकर वृन्दावन स्वीट्स रेस्टोरेंट में बैठ गया  थोड़ी सी पेट पूजा की फिर बसन्त यादव की चाय के पास दो प्राचीन मंदिर है दोनों आमने सामने है नाम है श्री श्री १००८ गोपाल जी का मंदिर और श्री श्री १००८ रघुनाथ जी का मंदिर यहाँ मैंने दर्शन किये फिर अपने रूम आकर आधे घंटे आराम करके निकल पड़ा चित्रा चौराहे से पंचतंत्र पार्क की तरफ यह पार्क चौराहे के पास ही था |</p>



<p class="has-text-align-justify"> पार्क देखा जो की बच्चो के लिए बढ़िया है और पंचतंत्र पार्क में पंचतंत्र की कहानियो की तरफ ही जगह जगह जानवरों के कार्टून की प्रतिमाये बनी है  अब यहाँ से मैंने ऑटो किया और अ गया रानी लक्ष्मी बाई पार्क इस पार्क के अन्दर गया बढ़िया शांत और हरी भरी जगह है रानी लक्ष्मीबाई की एक प्रतिमा बनी है यही पास में ही राष्टकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क भी है आप इन दोनों पार्क में घुमियेगा यहाँ ज्यादातर झाँसी के स्थानीय जागिंग करने आते है यहाँ एक ओपन जिम भी है और सबसे बढ़िया यहाँ की हरियाली  |</p>



<p class="has-text-align-justify"> इनके दोनों पार्क के समीप ही  राजकीय संग्राहलय है जहाँ<strong><em> </em>जिला झांसी</strong> से जुड़े तमाम अवशेष रखे हुये यदि आप इतिहास प्रेमी है तो इस संग्रहालय में आपको समय जरूर लगेगा  आपको बता दे रानी लक्ष्मीबाई पार्क , राष्ट्कवि मैथिलिशरण गुप्त पार्क , राजकीय संग्रहालय , झांसी का किला सब आसपास ही है राजकीय संग्रहालय देखने के बाद मै किले की तरफ बढ़ लिया और किले की विशाल दीवारे दूर से ही दिखाई दे रही थी रास्ते में डॉ वृन्दावन लाल वर्मा पार्क पड़ा जो की बढ़िया था हरा भरा सकून देने वाला लेकिन मै इस पार्क में नहीं गया|</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="520" height="390" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/महारानी-लक्ष्मीबाई-पार्क-झांसी.jpg" alt="महारानी लक्ष्मीबाई पार्क झांसी" class="wp-image-11035" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/महारानी-लक्ष्मीबाई-पार्क-झांसी.jpg 520w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/महारानी-लक्ष्मीबाई-पार्क-झांसी-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 520px) 100vw, 520px" /><figcaption>महारानी लक्ष्मीबाई पार्क </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify"> मै किले की तरफ बढ़ रहा था दूर से किले की विशाल दीवारे और ऊपर लगा तिरंगा देशभक्ति को बढ़ा रहा था  मै बढ़ गया सीधे किले के टिकट काउंटर की तरफ 25 रूपये की टिकट लेकर आ गया किले के अन्दर जहाँ इस किले का मैप लगा था मैप की फोटो ली और समझने की कोशिश की कि कहाँ क्या है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब सबसे पहले मैंने किले के अन्दर कड़क बिजली तोप देखी जो की देखने में बढ़िया थी और चलाने में कैसी थी ये तो गुलाम गॉस खां साहब जाने क्यूंकि वही इसे इस्तेमाल करते थे इसके बाद मैआगे बढ़ा और पंचमहल देखा ऊपर जाकर कुदान स्थल मतलब जहाँ से रानी कूदी थी वह स्थल देखा यकीन करिए जब मैंने कुदान स्थल से नीचे देखा तो मेरी तो रूह काँप गई कि कैसी रानी कूदी होंगी कमाल की वीर थी रानी यही पास में झंडा बुर्ज देखा और ऊपर से शहर का बढ़िया सा व्यू लिया |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="667" height="331" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/रानी-लक्ष्मी-बाई-का-किला.jpg" alt="रानी लक्ष्मी बाई का किला" class="wp-image-11132" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/रानी-लक्ष्मी-बाई-का-किला.jpg 667w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/रानी-लक्ष्मी-बाई-का-किला-300x149.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 667px) 100vw, 667px" /><figcaption>रानी लक्ष्मी बाई का किला</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">फिर नीचे आकर गुलाम गौस खां , मोती बाई , खुदा बक्श की समाधियाँ देखि फिर आ गया किले के मुख्य आकर्षण गणेश मन्दिर की तरफ कहा जाता है की दो मंजिला बने इस गणेश मन्दिर में रानी नित्य पूजा करने आती थी यह मराठा शैली में बना हुआ मन्दिर है गणेश मंदिर के पास से ही एक जीना ऊपर गया है अब मै इस जीने से ऊपर गया तो देखा यहाँ भवानी शंकर तोप राखी है अब पुनः जीने से नीचे आया था और बढ़ लिया बारादरी की तरफ जिसे रजा गंगाधर राव ने अपने भाई के लिए बनवाया था |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/jhansi-ka-kila-ghumne-ki-jankari/">झांसी का किला घूमने की समस्त जानकारी टाइमिंग प्रवेश शुल्क किले के अन्दर क्या देखे</a></p>



<p class="has-text-align-justify">कुल मिलाकर मुझे<strong> <strong>झांसी</strong></strong> की रानी का किला बहुत ही पसंद आया यहाँ आप रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से रूबरू होते है और अपने भारतीय होने पर गर्व महसूस करते है ढेर सारे फोटो क्लिक करने के बाद मेरा अगला पॉइंट था रानी महल जानकारी की तो पता लगा की ऑटो ई रिक्शा जाते है और रानी महल किले पास ही है आप पैदल भी जा सकते है तो मैंने रास्ते का मजा लेते हुये पैदल जाने का निर्णय लिया और स्थानीय लोगो से जानकारी करते करते आ गया रानी महल यहाँ पहले रानी रहा करती है यह महल बहुत ही खूबसूरत है यहाँ आप जरूर आइयेगा  |</p>



<p class="has-text-align-justify">अरे सुनिए एक और बात यही कही पे <strong><em>जिला झांसी</em></strong>  के प्रसिद्ध दाऊ के समोसे मिलते है मुझे जानकारी नहीं थी तो मै स्वाद न ले सका लेकिन आप किसी भी स्थानीय व्यक्ति से जानकारी करके  दाऊ के समोसे जरूर चखियेगा अब मै राजा गंगाधर राव की छतरी की तरफ जाने के लिए पूछताछ  करने लगा तो एक सज्जन बोले देख भाई बहुत ज्यादा दूर नहीं है मजा लेते हुए <strong><em>झाँसी</em></strong>  की सड़को को देखते हुये पैदल ही निकल जाओ या भाई बैठो रिक्शे पे सीधे जाओ मैंने पैदल विकल्प चुना |</p>



<p class="has-text-align-justify">थोड़ी दूर जाकर आ गया था लक्ष्मी गेट और इस गेट में ही श्री हनुमान मंदिर है इसी गेट से होकर रास्ता गया है राजा गंगाधर राव की छतरी की तरफ का इधर की सड़के थोड़ी तंग है लक्ष्मी गेट पर हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ा थोड़ी ही दूर पे महाकाली मन्दिर आ गया तो मै मंदिर  के मुख्य द्वार से अन्दर गया यहाँ ज्यादा भीड़-भाड़ नहीं थी और एक दिव्य वातावरण था काफी शान्ति का यहाँ एह्सास हो रहा था मै पैदल आ रहा था तो थका था थोड़ी देर यही बैठा माँ का आशीर्वाद लिया महाकाली मंदिर का प्रांगण बड़ा सा है और पेड़ पौधे भी लगे है तो ठंडा भी रहता है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="467" height="454" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/लक्ष्मी-गेट-झांसी.jpg" alt="लक्ष्मी गेट जिला झांसी" class="wp-image-11134" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/लक्ष्मी-गेट-झांसी.jpg 467w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/लक्ष्मी-गेट-झांसी-300x292.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 467px) 100vw, 467px" /><figcaption>लक्ष्मी गेट झांसी</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">अब जब मै पैदल था तो रास्ते में पड़ने वाले हर एक स्थल को देख रहा था श्री महाकाली मंदिर के पास ही श्री श्री १००८ महावीर जी मंदिर है जो सफ़ेद रंग का भव्य बना हुआ है अब मै राजा गंगाधर राव की छतरी के समीप था यहाँ पर लक्ष्मी ताल है जिसमें मरम्मत का कार्य हो रहा था मेरे ख्याल से लक्ष्मी ताल को और ज्यादा सुन्दर बनाये जाने की कोशिश की जा रही थी अब आपको बता दू राजा गंगाधर राव की छतरी की बनावट भी भव्य है इसे रानी लक्ष्मीबाई ने बनवाया था राजा गंगाधर की समाधी को एक चौकोर चबूतरे के ऊपर बनाया गया है और चारो तरफ हरियाली है एक छोटा सा जलाशय भी इसी में था लेकिन उसका पानी साफ़ नहीं था |</p>



<p class="has-text-align-justify">राजा गंगाधर की समाधी के सामने ही एक बड़ा ही खूबसूरत सफ़ेद रंग का मंदिर है जिसका नाम नवग्रह मंदिर है यहाँ भी आप दर्शन हेतु जा सकते है अब मेरा अगला पॉइंट था लक्ष्मी मंदिर जो बिलकुल राजा गंगाधर की समाधी के सामने ही था लक्ष्मी मंदिर में रानी लक्ष्मीबाई रोज पूजा करने आती थी मुख्य मंदिर तक जाने के लिये आपको सीढियों से जाना होगा यह मंदिर भी पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है आप लक्ष्मी मन्दिर जरूर आइयेगा तो अब मै यहाँ से निकलने की सोच रहा था और दिमाग में अगला पॉइंट था   सखी के हनुमान मन्दिर |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="681" height="447" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी.jpg" alt="राजा गंगाधर राव की छतरी" class="wp-image-11131" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी.jpg 681w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी-300x197.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 681px) 100vw, 681px" /><figcaption>राजा गंगाधर राव की छतरी</figcaption></figure>
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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="481" height="361" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी-में-बना-जलाशय.jpg" alt="राजा गंगाधर राव की छतरी में बना जलाशय" class="wp-image-11130" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी-में-बना-जलाशय.jpg 481w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/राजा-गंगाधर-राव-की-छतरी-में-बना-जलाशय-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 481px) 100vw, 481px" /><figcaption>राजा गंगाधर राव की छतरी में बना जलाशय</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">जानकारी की तो नाम तो सबने सुना था लेकिन सब यही कह रहे शहर के बाहर है ऑटो शायद ही मिले खैर मै लक्ष्मी गेट तक वापस आ गया वहां मुझे एक ई-रिक्शा वाला मिला मैंने उससे बात की वो सखी के हनुमान मन्दिर चलने के लिये तैयार हो गया अब मै और ई-रिक्शा वाला दोनों दौड़ पड़े मंदिर की ओर मतलब भर की दूरी थी और मंदिर हाईवे पर ही था लो जी रोड में सखीके हनुमान मन्दिर लिखा दिखाई दिया और मुख पे मेरे प्रसन्नता के भाव चमक उठे |</p>



<p class="has-text-align-justify">सखी के हनुमान मंदिर का <strong><strong><strong>जिला झांसी</strong></strong></strong> में बड़ा नाम सुना था जब मन्दिर पहुंचे तो देखा एक विशाल प्रांगण बाहर प्रसाद इत्यादि की दुकाने और जो मन्दिर का मुख्य गेट था वो अद्भुत था श्रीराम की धनुष लिए प्रतिमा और श्री राम के दोनों और बने थे शेर और ऊपर लहरा रहा था भगवा ध्वज राम भक्ति नस नस में घुस गई थी इतना ही देखकर , जैसे ही मन्दिर के अन्दर प्रवेश किया सामने भगवान शिव और माँ पार्वती की अत्यंत सुन्दर प्रतिमाये देखकर मन राम भक्ति के साथ साथ शिव भक्ति में भी लीन हो गया सामने ही हनुमान जी का मंदिर था और भी इस प्रांगण में कई मंदिर थे और सारे बड़े ही भव्य बनाये गए थे |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="487" height="562" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/सखी-के-हनुमान-मन्दिर-झांसी.jpg" alt="सखी के हनुमान मन्दिर जिला झांसी" class="wp-image-11136" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/सखी-के-हनुमान-मन्दिर-झांसी.jpg 487w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/04/सखी-के-हनुमान-मन्दिर-झांसी-260x300.jpg 260w" sizes="auto, (max-width: 487px) 100vw, 487px" /><figcaption>सखी के हनुमान मन्दिर झांसी</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब मेरे बहुत ही सुन्दर दर्शन हो गये थे अब मैंने उसी ई-रिक्शे वाले से बोला भाई इलाइट उतार दे वो बोला अब जाओगे कहा मैंने कहा यार मन तो है सैंट जुड चर्च जाने का लेकिन पता नहीं कहा पे है वो बोला भैया मैप में डालो वही चलते है तो मैंने पहले इलाईट चलो वही कही है हम दोनों बड़ी तेजी से इलाईट आ गये और इलाईट से थोड़ी ही दूरी पे थी सैंट जूड चर्च लेकिन चर्च के गेट पर तैनात सिक्यूरिटी गार्ड ने बताया की चर्च बंद है सुबह 7 बजे आना मैंने कहा कोई बात नहीं बंद है लेकिन क्या बाहर से देखने की इजाजत है तो उसने बोला अरे बिलकुल जाओ देख आओ |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो सड़क पे बने गेट से चर्च थोड़ी दूरी पर थी  वहां मै पैदल ही गया बाहर से यह चर्च बहुत ही सुन्दर थी इसकी उत्कृष्ट बनावट काबिलेतारीफ थी मैंने फोटो वोटो लिए और अब जब दुबारा <strong><strong>झांसी</strong></strong> आऊंगा तो सैंट जूड चर्च के अन्दर भी जाऊंगा मै बाहर आया और उस सिक्यूरिटी गार्ड को धन्यवाद बोलकर ऑटो से इलाईट चौराहा आ गया अब दिन ख़तम हो गया था करीब 6 बज रहे थे अब मै इलाईट चौराहा घूम रहा था ये झाँसी की सबसे खास जगह है मै तो रुका था सीपरी बाज़ार की तरफ लेकिन यदि आप इलाईट की तरफ रुके तो और भी बढ़िया है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="807" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/सैंट-जूड-चर्च-झांसी.jpg" alt="सैंट जूड चर्च झांसी" class="wp-image-11045" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/सैंट-जूड-चर्च-झांसी.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/सैंट-जूड-चर्च-झांसी-149x300.jpg 149w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>सैंट जूड चर्च</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">इलाईट पर <strong>जिला झांसी</strong> के कई प्रसिद्ध खाने पीने के अड्डे है जैसे गीता भोजनालय , जनकस रेस्टोरेन्ट , अवध फ़ूड , वंदना स्वीट्स , हवेली रेस्टोरेंट , शिल्पी होटल आदि  मैंने खाना इधर नहीं खाया सोचा चलो जहाँ रूम है चित्रा चौराहा सीपरी बाजार वहा भी टहल लेंगे और वही भोजन कर लेंगे तो अब मै आ गया था सीपरी बाजार और अपने रूम में जाकर लेट गया करीब रात के 9 बजे उठा और सीपरी बाज़ार घूम रहा था इस बाज़ार में आपको जरूरत का हर एक सामान मिल जायेगा काफी बड़ी बाजार है मुझे रसबहार नाम का एक रेस्टोरेन्ट दिखाई दिया मै उसमे घुस गया भूख जोरो से लगी थी मैंने यहाँ की एक स्पेशल थाली माँगा ली जो की बहुत ही स्वादिष्ट और पेट भर जाय ऐसी थी खाने में मजा आ गया |</p>


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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/03/Best-Food-in-Jhansi.jpg" alt="Best Food in Jhansi" class="wp-image-11104" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/03/Best-Food-in-Jhansi.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/03/Best-Food-in-Jhansi-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/03/Best-Food-in-Jhansi-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>रस बहार रेस्टोरेन्ट की थाली </figcaption></figure>
</div>


<p><a href="https://safarjankari.com/best-food-in-jhansi-hindi-me/">Best Food in Jhansi – झांसी आये तो खाने पीने की इन ठियो पर जरूर जाये</a></p>



<p class="has-text-align-justify">थोडा इधर उधर घूमकर एक फिर से बसंत यादव की चाय की चुस्की ली और आ गया रूम में और आज का दिन मैंने पूरा घूमा था <strong><strong>जिला झांसी</strong></strong> को लेकिन अब भी झाँसी की इतनी घूमने वाली जगहे बाकी थी की उन्हें घूमने में दो दिन तक लग जाए वैसे ये सभी पॉइंट शहर से बाहर थे और ज्यादातर झील और बांध थे जैसे गढ़मउ झील , पहुज बाँध , सुकमा दुक्मा बाँध , माताटीला बाँध आदि अब जब दुबारा झाँसी आना होगा इस बार सबसे पहले यही सब घूमूँगा यही सब सोचते सोचते कब नींद ने मुझे अपने आगोश में ले लिया पता नहीं तो <strong>झाँसी</strong> यात्रा के किस्से यही समाप्त होते है लेकिन यह मेरी ट्रिप का एन्ड नहीं है अगले दिन मै उठकर  ओरछा और बरुआसागर गया था वो किस्से अब ओरछा के किस्से वाली पोस्ट में सुनाऊंगा तब के लिये नमस्कार |</p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1663229481102"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>जिला झांसी</strong> का यात्रा वृतान्त बताइये ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>जिला झांसी</strong> का यात्रा वृतांत पढने के लिये यह पोस्ट पढ़े इसमें मेरा खुद का अनुभव भी आप जान पायेंगे |</p> </div> </div>



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<p>The post <a href="https://safarjankari.com/jhansi-trip-ka-yatra-vritant/">जिला झांसी महारानी लक्ष्मीबाई का शहर की घुमक्कड़ी का यात्रा वृतान्त</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>एक ऐसी विदेश यात्रा जो ई-रिक्शा और स्प्लेंडर बाइक से की गई &#8211; बाबा सिद्धनाथ नेपाल</title>
		<link>https://safarjankari.com/baba-siddhnath-nepal-aur-nanakmatta-trip-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Jan 2022 10:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गाड़ी वाले ने हमको कहाँ उतारा ये तो हमको जानकारी नहीं लेकिन हमको अब टनकपुर से नेपाल जाना था जी हा नेपाल यानी विदेश और करने थे दर्शन नेपाल के ब्रम्हदेव कंचनपुर जिले में स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर के  , पूर्णागिरि के दर्शन करने के बाद नेपाल स्थित बाबा सिद्धनाथ के दर्शन करने की मान्यता है तो अब था कौतुहल विदेश जाने का हम लोगो ने एक ई-रिक्शा वाले से जानकारी की कि  भैया सिद्धबाबा के दर्शन करने जाना है कैसे जाया जाय तो उस सज्जन व्यक्ति ने समझाया की पहले आपको जाना होगा शारदा बैराज फिर वहां से पैदल ही आपको बैराज के पुल से होकर जाना पड़ेगा फिर आपको को मिलेंगे बाइक वाले जो आपको बाबा सिद्धनाथ तक ले जायेंगे &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify">आप सबने हमारी पिछली पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-tanakpur-ka-yatra-vritant/">माँ पूर्णागिरि टनकपुर ट्रिप का यात्रा वृतान्त</a> पढ़ी जिसमे हम माँ पूर्णागिरि के दर्शन करकर टनकपुर आ गए थे अब आगे &#8211;  गाड़ी वाले ने हमको कहाँ उतारा ये तो हमको जानकारी नहीं लेकिन हमको अब टनकपुर से नेपाल जाना था जी हा नेपाल यानी विदेश और करने थे दर्शन नेपाल के ब्रम्हदेव कंचनपुर जिले में स्थित <strong>बाबा सिद्धनाथ </strong>मंदिर के  , पूर्णागिरि के दर्शन करने के बाद नेपाल स्थित <strong>बाबा सिद्धनाथ </strong>के दर्शन करने की मान्यता है तो अब था कौतुहल विदेश जाने का हम लोगो ने एक ई-रिक्शा वाले से जानकारी की कि  भैया <a href="https://www.amarujala.com/uttarakhand/champawat/baba-siddhnath-dham-is-releted-to-maa-poornagiri-dham" target="_blank" rel="noreferrer noopener">सिद्धबाबा</a> के दर्शन करने जाना है कैसे जाया जाय तो उस सज्जन व्यक्ति ने समझाया की पहले आपको जाना होगा शारदा बैराज फिर वहां से पैदल ही आपको बैराज के पुल से होकर जाना पड़ेगा फिर आपको को मिलेंगे बाइक वाले जो आपको <strong>बाबा सिद्धनाथ</strong> तक ले जायेंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब पहला सवाल शारदा बैराज कैसे जाए तो ई रिक्शा वाले सज्जन बोले की कैसे क्या जाये बैठो छोड़ देता हु हम दोनों कहे अरे वाह विदेश जाने की शुरुआत ई-रिक्शा से वाह फिर हम दोनों बैठ लिए और टनकपुर को निहारते हुए नेपाल की और दौड़े जा रहे थे थोड़ी देर बाद शारदा नदी दिखाई देना शुरू हो गई हमारा ई-रिक्शा अब शारदा नदी के साथ-साथ किनारे दौड़ा जा रहा था अब एक पुल सा बैराज सा दिखने लगा हम समझ गये की यही होगा शारदा बैराज और हम सही भी थे यही था शारदा बैराज या टनकपुर बैराज हम दोनों ई-रिक्शा से उतरे उसको 40 रूपये दिये और आगे की नेपाल यात्रा पैदल ही शुरू कर दी  समय सुबह के 9 बजकर 55 मिनट हो रहा था हालाँकि कोई स्पेशल इंतजाम नहीं था यहाँ का लेकिन थे तो हम भारत-नेपाल की सीमा पर तो अलग तरह की फीलिंग आ रही थी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="243" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भारत-नेपाल-सीमा.jpg" alt="भारत नेपाल सीमा" class="wp-image-10876" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भारत-नेपाल-सीमा.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भारत-नेपाल-सीमा-300x162.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption class="wp-element-caption">भारत नेपाल सीमा</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">हम थोडा चले की बैराज  आ गया और दूर सामने एक चेक पोस्ट का गेट दिखाई दिया यही था नेपाल मतलब शारदा नदी के एक तरफ भारत और दूसरी तरफ नेपाल और अगर जाना हो नेपाल तो इस बैराज के पुल को पार करके ही जाना होगा हम दोनों बैराज को निहारते हुये आगे बढ़ रहे थे अब हम बिलकुल चेक पोस्ट पर आ गए थे वहां के सुरक्षा कर्मियों ने हमारा आधार कार्ड देखा और आगे जाने को बोल दिया हम दोनों अब नेपाल यानि विदेश में थे आगे देखा ढेरो बाइक खड़ी थी तब तक एक व्यक्ति आया और बोला भैया आइये छोड़ देते है हमने पुछा कहाँ छोड़ दोगे तो वो बोला हम आपको  मार्किट में छोड़ देंगे वहां से दो मिनट की दूरी पर ही मन्दिर है फिर हमारा अगला प्रश्न था पैसे वो बोला एक लोग का 10 रूपये तो मन में ख्याल आया क्या गज़ब की सस्ती विदेश यात्रा है खैर हम दोनों बैठ लिए उसकी बाइक पे रास्ता एक जगह थोडा ख़राब था 10 मिनट बाद उसने हमे मार्किट के पास ड्राप कर दिया | हम इस अद्भुत विदेश यात्रा में इतने व्यस्त थे कि फोटो क्लिक करना ही भूल गए थे खैर अब फोटो का याद आया तो फटाक से  फोन निकाला और मार्केट की एक दो फोटो ले ली तो नेपाल की सरजमी पर मैंने पहली फोटो सुबह 10 बजकर 10 मिनट पे ले ली थी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="467" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-नेपाल-का-रास्ता.jpg" alt="बाबा सिद्धनाथ मन्दिर नेपाल का रास्ता" class="wp-image-10874" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-नेपाल-का-रास्ता.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-नेपाल-का-रास्ता-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सिद्धनाथ मन्दिर नेपाल का रास्ता</figcaption></figure>
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<p class="has-text-align-justify">अब हम दोनों निकल लिए आगे और धीरे धीरे इस नेपाल की बाजार को देखते हुए जा रहे थे यहाँ तमाम होटल थे कपड़ो की दुकाने थे और इन सभी दुकानों पर नेपाल के ही लोग बैठे थे मुझे एक बात अजीब लगी वो ये की यहाँ दुकानो पर ज्यादातर औरते ही थी खैर चलते-चलते हम आ गये <strong><em>बाबा सिद्धनाथ</em></strong>  मन्दिर परिसर में जो की नेपाल देश के कंचनपुर जिले के ब्रम्हदेव नाम की जगह पर है एक बात और यहाँ की मार्किट में  जूते-चप्पल बहुत बिक रहे थे खैर इस परिसर में कई सुन्दर मंदिर है सबसे पहले हमको दिखाई पड़ा विष्णु मंदिर तो मेरे मित्र बोले अरे यहाँ भी भगवान् विष्णु का मन्दिर तो हम उनसे कहे अरे यार नेपाल ही तो है कोई अमेरिका थोड़ी है (वैसे मन्दिर तो अमेरिका में भी है) यहाँ पर हलकी सी भीड़ थी हम दोनों को दर्शन करने थे और प्रसाद चढ़ाना था तो हम लाइन में लग गये लाइन अंगस-बंगस थी मतलब सिस्टेमेटिक नही थी  तो धक्का-मुक्की करके हम लोग पुजारी जी के पास आ गये उन्हें प्रसाद दिया टीका लगवाया और एक चुनरी को वही बाँध दिया चुनरी सभी बाँध रहे थे तो हम दोनों ने भी बाँध दी सोचे क्या पता चुनरी से कुछ भाग्योदय हो जाय अब आगे एक नल था हैंडपंप तो वहां आकर  पानी पिया और थोड़ी देर वही बैठे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="417" height="341" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल.jpg" alt="विष्णु मन्दिर कंचनपुर नेपाल" class="wp-image-10877" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल.jpg 417w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल-300x245.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 417px) 100vw, 417px" /><figcaption class="wp-element-caption">विष्णु मन्दिर कंचनपुर नेपाल</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="513" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="विष्णु मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10878" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/विष्णु-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-205x300.jpg 205w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption class="wp-element-caption">विष्णु मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब बैठने से थकावट कम हो गई थी तो कुछ  कदम दूर स्थित <strong>बाबा सिद्धनाथ</strong> मन्दिर की और चल दिए अब मुख्य मन्दिर हमारे सामने था वहां भी हलकी सी भीड़ थी खैर कोई नहीं हम दोनों आगे बढे और अपना प्रसाद पुजारी जी को दिया और <strong>बाबा सिद्धनाथ</strong> की प्रतिमा को देखा मन ही मन बाबा को नमन किया अपना प्रसाद वापस लिया फिर इस मन्दिर को देखा आके श्री सिद्धनाथ बाबा का यह मंदिर भव्य था अब हम दोनों ने बाबा सिद्धनाथ  के दर्शन प्राप्त कर लिए थे लेकिन अभी भी यहाँ आसपास कई और मंदिर थे तो हमने सब कही दर्शन किये सबसे पहले गये प्राचीन अखंड सिद्ध धुना की और फिर प्राचीन इनार मतलब कुवां जो की बंद था लेकिन अन्दर उसमे एक हैंडपंप लगा था इसके बाद यहाँ बने हुए पार्क में बैठके विश्राम किया अब यार भूख भी लग रही थी और हमारे श्री सिद्धनाथ बाबा के दर्शन भी हो गये तो सोचा क्यों न नेपाल में ही कुछ खाया जाये तो मित्र कहने लगे हा यार विदेश में पेटपूजा तो बनती है आ गए हम एक रेस्टोरेंट तो वहां एक नेपाली महिला थी तो मेनू देखा ज्यादा समझ नहीं आया तो मैगी मगा ली 40 रूपये की एक प्लेट मैगी थी जब वो महिला मैगी बना रही थी तो हमने मैगी का पैकेट देखा ये जो मैगी हम खाने जा रहे थे इसकी मैनूफैकचरिंग नेपाल की ही थी |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="450" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg" alt="सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल" class="wp-image-10616" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/सिद्धबाबा-मन्दिर-ब्रम्हदेव-नेपाल-267x300.jpg 267w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption class="wp-element-caption">सिद्धबाबा मन्दिर ब्रम्हदेव नेपाल</figcaption></figure>
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<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="397" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-में-स्थित-प्राचीन-मन्दिर.jpg" alt="बाबा सिद्धनाथ मन्दिर में स्थित प्राचीन मन्दिर" class="wp-image-10875" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-में-स्थित-प्राचीन-मन्दिर.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-में-स्थित-प्राचीन-मन्दिर-300x298.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-में-स्थित-प्राचीन-मन्दिर-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सिद्धनाथ मन्दिर में स्थित प्राचीन मन्दिर</figcaption></figure>
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<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="533" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल.jpg" alt="बाबा सिद्धनाथ मन्दिर कंचनपुर नेपाल" class="wp-image-10873" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/बाबा-सिद्धनाथ-मन्दिर-कंचनपुर-नेपाल-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सिद्धनाथ मन्दिर कंचनपुर नेपाल</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">हमारी नेपाली मैगी बन रही थी तब तक मैंने उस महिला से चाय बनाने का आग्रह किया तो वो एक भगोने में चाय भी बनाने लगी थोड़ी ही देर में हमारे सम्मुख मैगी और चाय थी और स्वाद की बात करू तो ठीक ठाक न बढ़िया न ख़राब चाय की कीमत 10 रूपये थी अब नेपाल से वापसी करनी थी तो फिर मार्केट से भारत की और निकले तब तक वही स्प्लेंडर वाले भाई मिल गये जिनके साथ हम सुबह यहाँ आये थे वो बोले अरे भैया आप दोनों कर लिए दर्शन हम लोग जी सर बिलकुल बहुत ही उत्तम दर्शन हुये है अब आप ही हमको फिर से चेक पोस्ट तक छोड़ दीजिये फिर हम दोनों उनकी स्प्लेंडर पर सवार उनसे बाते करते हुए आ रहे थे आपको बता दू इस मार्केट में  होटल भी है यदि कोई रुकना चाहे तो रुक सकता है खैर अब हम नेपाल को बाय बाय बोलके वापस बैराज को पार करके भारत में आ गये थे अब समय 11:30 हो रहा था और हमारा अगला पड़ाव नानकमत्ता था तो मैंने वही एक ई रिक्शे वाले से जानकारी ली तो वो बोला नानकमत्ता तक टनकपुर बस स्टैण्ड से बस भी जाती है और टेम्पो भी मैंने कहा चल भाई जल्दी से बस स्टैण्ड पहुंचा दे |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/gurudwara-shree-nanakmatta-sahib-darshan-ki-jankari/">गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब कैसे पहुँचे कहाँ रुके क्या-क्या देखे भोजन आदि की जानकारी</a></p>



<p class="has-text-align-justify">बस स्टैण्ड आकर जनकारी की तो पता चला जो बसे रुद्रपुर काशीपुर जाती है वो नानकमत्ता होकर ही जाती है तो हम दोनों एक काशीपुर वाली बस में सवार हो लिए यहाँ से नानकमत्ता लगभग 40 किलोमीटर रहा होगा आराम से बस में बैठकर उत्तराखण्ड राज्य की सडको को निहार रहे थे सड़के बढ़िया थी बस तेजी से दौड़े जा रही थी किराया थोडा सा भूल रहा हु पर शायद 60-65 रूपये था करीब दोपहर के १ बजे बस ने हमको नानकमत्ता गुरूद्वारे के प्रवेश द्वार पर उतार दिया हम उतर गये और एक व्यक्ति से गुरूद्वारे के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने बढ़िया जानकारी दी की सीधे चले जाओ लगभग 500-600 मीटर बाद आ जायेगा गुरुद्वारा फिर मैंने उन्ही सज्जन व्यक्ति से नानकमत्ता में ठहरने के विकल्प की जानकारी ली कि होटल कहा मिलेंगे तो बोले अरे भैया क्यों लोगे होटल आप लोग जाओ सीधे गुरुद्वारा फिर गुरुद्वारा में अन्दर न जाना उसके पास से एक रास्ता गया है वही एक सराय है वाही रुक जाना अब हम दोनों बड़े खुश थे क्यूंकि आज हमको रुकना था हमारी वापसी की ट्रेन सुबह 9 बजे थी तो हमारे मित्र कहने लगे  सनी भाई  पहले सराय ही देखते है और रुकने का कन्फर्म करते है अगर सराय मिली तो ठीक वरना कुछ और देखेंगे हम दोनों चल दिए |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="496" height="474" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-का-प्रवेश-मार्ग.jpg" alt="नानकमत्ता गुरुद्वारा का प्रवेश मार्ग" class="wp-image-10870" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-का-प्रवेश-मार्ग.jpg 496w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-का-प्रवेश-मार्ग-300x287.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 496px) 100vw, 496px" /><figcaption class="wp-element-caption">नानकमत्ता गुरुद्वारा का प्रवेश मार्ग</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">थोड़ी देर बाद नानकमत्ता गुरुद्वारा दिखाई देने लगा था भाई साहब क्या गज़ब का गुरुद्वारा था इसे देखते ही हम सराय भूल गए और इसकी ख़ूबसूरती को मोबाइल में कैद लिया फिर याद आया अरे सराय देखी जाय तो एक व्यक्ति से पूछा तो उन्होंने बताया यही आगे गली में जाओ हम दोनों चले तो सबसे पहले एक भवन दिखा लगा यही सराय होगी तो देखा ये लंगर था जिसका नाम श्री गुरु का लंगर था थोडा आगे गए तो दिखी श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास हम दोनों खुश हुए अब बस यही मन में था की कोई रूम मिल जाता बस बिना देर किये पहुँच गये रिसेप्शन पर वहां कोई था नहीं आसपास मालूम किया तो बताया गया लंगर में गये है अभी आते होंगे 15 मिनट बाद एक सरदार जी आये हम लोगो ने उनको नमस्कार किया तो उन्होंने भी हमारा अभिवादन स्वीकार किया फिर बताया की यहाँ नार्मल रूम 100 रूपये में है और AC 500 में तो हम दोनों ने डिमांड की नार्मल 100 रूपये वाले रूम की रूम मिल गया आधार कार्ड दिखाकर पैसे जमा किये और सरदार जी ने हमको चाभी दी हम दोनों आ गए रूम में |</p>



<p class="has-text-align-justify">आपको बता दे श्री गुरु हर्गोबिंस निवास काफी बड़ा था यहाँ बहुत से कमरे थे और सामने एक बड़ा सा मैदान था कुल मिलाकर रुकने के लिए बहुत ही उत्तम जगह थी और मात्र  100 रूपये में हम लोग रूम में गये तो देखा रूम में ही वाशरूम भी था अरे वाह मजा गई भाई 100 रूपये में attach वाशरूम वाला रूम हा आपको बता दे रूम का इंटीरियर औसत दर्जे का था वाशरूम में भी सब औसत था और यहाँ पंखा लगा था लेकिन लाइट के जाने बाद पंखा भी बंद हो जाता है मतलब इन्वेर्टर और जनरेटर सेवा नहीं है यदि आपको सुख सुविधा वाला रूम चाहिए हो तो आप 100 रूपये वाला रूम न ले खैर हम दोनों तो बहुत खुश थे थोड़ी देर आराम किये फिर नहा लिए और निकल लिये भोजन की तलाश में और दिमाग में आया  क्यों न लंगर में प्रसाद ग्रहण करे तो आ गये लंगर में सर को ढकना यहाँ अनिवार्य है हम दोनों ने सर को ढका और अपने जूते निकाले अपनी थाली ली जाकर फिर लंगर में चने की सब्जी दाल रोटी चावल का प्रसाद ग्रहण किया बहुत ही बढ़िया स्वाद था आत्मा तृप्त हो गई बाद में हमने अपनी थाली धुली और आकर लंगर में आधे घंटे लोगो को खाना परोसा फिर आकर रूम में लेट गये और सो गए |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता.jpg" alt="श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास नानकमत्ता" class="wp-image-10632" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरु-हरगोबिन्द-साहिब-निवास-नानकमत्ता-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption class="wp-element-caption">श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब निवास नानकमत्ता</figcaption></figure>
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<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="578" height="252" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय.jpg" alt="नानकमत्ता गुरुद्वारा सराय" class="wp-image-10628" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय.jpg 578w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-गुरुद्वारा-सराय-300x131.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 578px) 100vw, 578px" /><figcaption class="wp-element-caption">नानकमत्ता गुरुद्वारा सराय</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="537" height="405" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib.jpg" alt="shree guru ka langar Nanakmatta Sahib" class="wp-image-10627" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib.jpg 537w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/shree-guru-ka-langar-Nanakmatta-Sahib-300x226.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 537px) 100vw, 537px" /><figcaption class="wp-element-caption">shree guru ka langar Nanakmatta Sahib</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">शाम करीब  4 बजे मेरी आँख खुली तो दोस्त को उठाया कपडे पहने रूम लाक किया और निकल पड़े गुरूद्वारे में मत्था टेकने तक तक रूम के बार एक व्यक्ति मिले उन्होंने बताया अरे बाउली साहिब के भी दर्शन कर आओ यहाँ से 10 मिनट की दूरी पे है उन्होंने रास्ता बताया हम दोनों 15 मिनट बाद आ गए बाउली साहिब यार क्या गज़ब जगह थी वास्तव में ये एक बहुत ही सुन्दर झील थी जिसमे झील के अन्दर ही एक गुरुद्वारा था और उसमे एक बाउली थी हम दोनों इसे निहारते ही रह गए इतना मनोरम द्रश्य था की कैसे लिखू समझ नहीं आ रहा एक रास्ता बना हुआ था जिसमे दोनों और झील थी और आगे जाकर एक बाउली थी यहाँ हम दोनों ने बहुत फोटो क्लिक किये यहाँ आप नौका विहार भी कर सकते हो लेकिन हम दोनों ने ही नौका विहार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई बस हम लोग इस झील को देखते ही रहे |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="733" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib.jpg" alt="Bowli Sahib Nankmatta Sahib" class="wp-image-10626" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Bowli-Sahib-Nankmatta-Sahib-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption class="wp-element-caption">Bowli Sahib Nankmatta Sahib</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg" alt="Nanak Sagar Near tanakpur tourist places" class="wp-image-10649" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Nanak-Sagar-Near-tanakpur-tourist-places-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption class="wp-element-caption">Nanak Sagar Near tanakpur tourist places</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">शाम के  5 बज रहे थे तो सूर्यास्त का इतना अद्भुत और सुन्दर द्रश्य मैंने यहाँ पर देखा की आप सभी से यही कहूँगा आप लोग यहाँ पर जरूर आये सूर्यास्त देखा फिर बाउली साहिब के गेट पर आकार आइसक्रीम को खाते खाते इस झील को देखा इसे शायद नानक सागर झील कहते है अब हम वापस आ गए और आकर सबसे पहले पहुँच गये जूता चप्पल काउन्टर पर और अपने जूते जमा करवा दिए अब इस भव्य नानकमत्ता गुरूद्वारे के अन्दर जा रहे थे हाथ धुले फिर अन्दर गये प्रसाद लिया वहा हलुआ दिया था प्रसाद में जिसकी पर्ची कटवानी पड़ती थी फिर मुख्य गुरूद्वारे में जाकर मत्था टेका अन्दर का वातावरण इतना दिव्य था की हम दोनों वही देर तक बैठे रहे कभी गुरूद्वारे की भव्यता देखते कभी दुसरो को मत्था टेकते देखते फिर हम बाहरआये और बाहर से देखा संगमरमर चारो तरफ लगा था नानकमत्ता गुरूद्वारे की भव्यता वाकई में अद्भुत है |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब.jpg" alt="श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब" class="wp-image-10633" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/श्री-गुरुद्वारा-नानकमत्ता-साहिब-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption class="wp-element-caption">श्री गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">अब हम लोग आगे गए और देखा एक सरोवर भी यहाँ था सरोवर भी इतना भव्य की बस आप नज़ारे न हटा पाओ हम दोनों सरोवर के पास गये और देखा यहाँ  पर रंगीन मछलिया भी थी जो की बहुत प्यारी थी तो हम तो वही बैठकर मछालियो को देख रहे थे वैसे यहाँ फोटोग्राफी तो मना थी फिर मैंने यहाँ पर चुपके से वीडियो बने क्या करता इतनी प्यारी मछलियां ही  थी  तब तक हमारे मित्र पूरे सरोवर का एक चक्कर काट आये फिर हम दोनों सरोवर के किनारे थोड़ी देर बैठे रहे फिर उठे , यही गुरुद्वारा परिसर में ही स्थित पवित्र पीपल के वृक्ष के पास गए इस वृक्ष की यहाँ पर बड़ी मान्यता था यह पीपल का वृक्ष एकदम हरा भरा है पीपल के वृक्ष के सामने ही एक और गुरुद्वारा सा बना हुआ था हम दोनों वहां भी गये फिर इस परिसर की खूबसूरती को निहारने के बाद वापस अपने रूम की तरफ चल दिए |</p>



<figure class="wp-block-video aligncenter"><video height="1280" style="aspect-ratio: 720 / 1280;" width="720" controls poster="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पवित्र-सरोवर-नानकमत्ता-गुरुद्वारा.jpg" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/नानकमत्ता-सरोवर-ऊधमसिंहनगर.mp4"></video></figure>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="667" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg" alt="नानकमत्ता टनकपुर के समीप" class="wp-image-10651" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/नानकमत्ता-टनकपुर-के-समीप-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption class="wp-element-caption">नानकमत्ता टनकपुर के समीप</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="467" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता.jpg" alt="पीपल का वृक्ष नानकमत्ता" class="wp-image-10630" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/पीपल-का-वृक्ष-नानकमत्ता-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption class="wp-element-caption">पीपल का वृक्ष नानकमत्ता</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify">गुरुद्वारा परिसर से बाहर आकर थोडा आसपास स्थित मार्केट को देखा फिर आ गए रूम में और अब आराम करने लगे क्यूंकि सुबह हम लोगो को निकलना था आपको बता दे नानकमत्ता जगह जो है वो ऊधमसिंहनगर जिले में स्थित है जो की उत्तराखंड राज्य में है हमारा वापसी का टिकट टनकपुर से था लेकिन यहाँ से टनकपुर 40 किलोमीटर था और खटीमा 15 किलोमीटर और जो टनकपुर से ट्रेन थी वो टनकपुर से चलती है फिर खटीमा भी रूकती है तो जब ट्रेन खटीमा आएगी तो हम टनकपुर क्यों जाए खटीमा से ही निकल लेंगे ये सब विचार करते करते हम दोनों अलार्म लगाकर सो गए अज खूब पैदल चले थे जल्दी ही नींद आ गई एक बार जो नींद आई तो सुबह ही खुली उठके हम दोनों फ्रेश हुये नहा धो के रेडी हो गए और रूम की चाभी सरदार जी को सौंपी और उनको अभिवादन करके वहां से चल दिये , अब हम दोनों को जल्दी थी खटीमा पहुँचने की खैर रोड पे एक टेम्पो मिल गया और उसने हम जल्द ही खटीमा उतार दिया फिर वहां से 10 मिनट पैदल चलकर सुबह के 8 बजकर 15 मिनट पर  हम लोग आ गए थे खटीमा रेलवे स्टेशन भूख लग रही थी तो स्टेशन पर ही समोसे लिये और  चाय आराम से एक बेंच पर बैठकर समोसे चाय के मजे लिए थोड़ी देर बाद हमारी ट्रेन आ गई और हम दोनों अपनी अपनी सीट पर बैठ गए और 9 बजे हमारी ट्रेन ने खटीमा रेलवे स्टेशन को अलविदा कह दिया  |</p>



<p class="has-text-align-justify">हम दोनों इस ट्रिप की बाते कर रहे थे और बहुत ही खुश थे क्यूंकि इस ट्रिप में धार्मिक जगहे थी साथ साथ प्राकृतिक नज़ारे भी थे और यह एक बजट ट्रिप थी हम दोनों अपने अपने फोन में इस ट्रिप में ली गई फोटो देखने लगे और बाते करते करते आगे की ट्रिप का प्लान करने लगे की अब कहाँ जाए कब जाए यही सब खैर ट्रेन राईट टाइम थी और हम दोनों दोपहर के 2 बजे हरदोई रेलवे स्टेशन पर थे अब हम दोनों अपने अपने घर की ओर चल दिये , तो इस तरह हमारी  <strong>बाबा सिद्धनाथ </strong> नेपाल और नानकमत्ता उत्तराखंड की यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई  |</p>
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		<title>माँ पूर्णागिरि टनकपुर ट्रिप का यात्रा वृतान्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Jan 2022 08:18:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुबह सुबह मोबाइल बजने लगा देखा तो एक पुराने मित्र का कॉल था तो उससे बात की वो बोला कि चलोगे माँ पूर्णागिरि के दर्शन करने अब मुझमे तो घुमक्कड़ी का कीड़ा है तो मैंने तुरंत ही बोला की हा जरूर चलेंगे माँ के दर्शन करने तो बस थोड़ी और बात हुई फिर तय हुआ देर क्या करनी कल ही निकलते है मैंने बोला रुको जरा ट्रेन टिकट देखके फाइनल करता हु तो तुरन्त ही मैंने IRCTC खोली</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify">सुबह सुबह मोबाइल बजने लगा देखा तो एक पुराने मित्र ( मतलब स्कूल फ्रेंड ) का कॉल था तो उससे बात की वो बोला कि चलोगे माँ पूर्णागिरि के दर्शन करने अब मुझमे तो घुमक्कड़ी का कीड़ा है तो मैंने तुरंत ही बोला की हा जरूर चलेंगे माँ के दर्शन करने तो बस थोड़ी और बात हुई फिर तय हुआ देर क्या करनी कल ही निकलते है मैंने बोला रुको जरा ट्रेन टिकट देखके फाइनल करता हु तो तुरन्त ही मैंने <a href="https://www.irctc.co.in/nget/">IRCTC</a> खोली और हरदोई से टनकपुर की ट्रेन देखी अरे बताना भूल गया हम हरदोई उत्तर प्रदेश से है , हमारे हरदोई से टनकपुर के लिए त्रिबेनी एक्सप्रेस ट्रेन रोजाना चलती है तो मैंने जब जनरल डिब्बे की अवैलेबिलिटी चेक (कोरोना काल से अब जनरल डिब्बे में भी रिजर्वेशन होते है ) की तो मुझे आराम से दो सीट मिल गई मैंने फटाक से आने और जाने की  बुकिंग की और मित्र को फोन करके बता दिया की भैया कल सुबह अपना झोला पैक करके रेलवे स्टेशन पर मिलो वो बोला ठीक , जनरल डिब्बे का हरदोई से टनकपुर का मात्र 100 रूपये किराया है वही स्लीपर का 170 रूपये है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">तो हमने जनरल डिब्बे से ही टनकपुर तक जाने का टिकट करा लिया था और ट्रेन सुबह 9 बजकर 52 मिनट पे थी हम दोनों मित्र 9:30 पे अपने बैग टाँगे मास्क लगाये हरदोई रेलवे स्टेशन पर खड़े ट्रेन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे  ट्रेन राईट टाइम थी थोड़ी ही देर में ट्रेन आई हम दोनों अपनी सीट पे हो लिये अब बस ख़ुशी हम दोनों के चेहरे पे झलक रही थी ये घूमने का चस्का होता ही अलग है हमारे पड़ोस में एक महिला बैठी हुई थी उनके साथ एक छोटा बच्चा था उन महिला को बरेली जाना था मेरी उनसे बात हुई तो उन्होंने मुझे एक काम की जानकारी दी  कि माँ के दर्शन करने जा रहे हो तो वहां से थोड़ी दूरी पर नानकमत्ता एक जगह है वहां जरूर जाना तो हमने ट्रेन में ही टनकपुर से नानकमत्ता की दूरी देखी जो की 40 किलोमीटर थी और अपनी लिस्ट में नानकमत्ता को शामिल किया फिर हमारी ट्रेन दौड़े चली जा रही थी |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब थोड़ी ही देर बाद चाय की हुड़क सता रही थी खैर ज्यादा इन्तजार न करना पड़ा बरेली सिटी रेलवे स्टेशन के पास चाय-चाय की आवाज से एक प्रसन्नता मुख पे आ गई फिर चाय की चुस्किया लेते हुए ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए हम बढे जा रहे थे  और हम लोग शाम को 3 बजकर 35 मिनट पे टनकपुर की रेलवे स्टेशन पे खड़े हिसाब लगा रहे की किधर से बाहर निकले खैर हम ज्यादा बुद्धि नहीं लगाये और भीड़ के साथ हो लिए सच कहू तो हरदोई से टनकपुर तक आना फिर यहाँ खड़े होना सब बहुत ही बढ़िया लग रहा था ये बात मेरी घुमक्कड़ लोगो को समझ आ गई होगी  |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="495" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg" alt="टनकपुर रेलवे स्टेशन" class="wp-image-10650" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन.jpg 700w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-300x212.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /><figcaption>टनकपुर रेलवे स्टेशन</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">टनकपुर रेलवे स्टेशन पर लगे एक बोर्ड में विवेकानंद जी की तस्वीर देखकर  मैंने उस बोर्ड को पढ़ा तो जानकारी मिली कि टनकपुर में विवेकानंद जी एक रात रुके थे अब हम जब स्टेशन के बाहर निकले तो तमाम गाड़ी वाले खड़े मिले तो माँ पूर्णागिरि जाने को थे लेकिन हमारा विचार अभी टनकपुर कस्बे को देखना था तो हम दोनों पैदल ही निकल पड़े एक गन्ने के जूस के ठेले पे आकर जूस पिया गन्ना का जूस पीते ही शरीर तरोताजा हो गया  फिर जूस वाले ने बताया आप शारदा घाट पर स्नान कर लो पुण्य मिलेगा यहाँ एक बात बोलना चाहूँगा आप कभी भी ट्रिप करो तो लोकल लोगो से बातचीत जरूर करो  तो हम पुण्य कमाने पैदल ही शारदा घाट की और निकल लिए और रास्ते में हम टनकपुर की मार्किट  निहारते हुये जा रहे थे क्यूंकि कोई भी नयी जगह आप जाओ तो बड़ा कौतूहल रहता है मार्किट देखने का करीब एक या डेढ़ किलोमीटर के बाद हम शारदा घाट पर थे यहाँ का द्रश्य मनोरम था शारदा नदी और नदी के सामने हरे-हरे पहाड़ यह घाट ठीक ठाक है आपको मूलभूत सुविधाए यहाँ मिल जाएँगी |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="389" height="311" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-पर-लगा-विवेकानन्द-जी-के-बारे-में-बोर्ड.jpg" alt="टनकपुर रेलवे स्टेशन पर लगा विवेकानन्द जी के बारे में बोर्ड" class="wp-image-10842" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-पर-लगा-विवेकानन्द-जी-के-बारे-में-बोर्ड.jpg 389w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/टनकपुर-रेलवे-स्टेशन-पर-लगा-विवेकानन्द-जी-के-बारे-में-बोर्ड-300x240.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 389px) 100vw, 389px" /><figcaption>टनकपुर रेलवे स्टेशन पर लगा विवेकानन्द जी के बारे में बोर्ड</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="751" height="418" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg" alt="शारदा घाट टनकपुर" class="wp-image-10652" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर.jpg 751w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/शारदा-घाट-टनकपुर-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 751px) 100vw, 751px" /><figcaption>शारदा घाट टनकपुर</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify"> हम दोनों ने एक एक करके शारदा नदी में स्नान किया नदी का जल अत्यंत ठंडा था लेकिन अक्टूबर का महिना था तो कोई दिक्कत नहीं हुई हमने एक अखबार बिछा लिया हा अख़बार को हम अपने घर से लेकर आये थे वो भी अंग्रेजी भाषा का अख़बार था  उसपर सारे कपडे रखकर गए नदी में स्नान करने स्नान किया माँ शारदा में डुबुकी लगाई फिर वापस आकर कपडे बदले और जो कपड़े गीले हो रखे थे उनको एक पालीथीन में कर लिया गया  , स्नान करके हमने कपडे इत्यादि पहने और गीले कपड़ो को संभाल के रखा बहुत ही सुखद अनुभूति हुई अब आइये आपको घाट घुमाते है यहाँ मुझे थोड़ी सी साफ़ सफाई की कमी दिखाई दी बाकी सब बढ़िया था घाट पे ही एक शनि मन्दिर है हमने वहां दर्शन किये शनि मंदिर के पास ही हनुमान जी की प्रतिमा और शारदा मैया जी है हम लोगो ने सभी देवी देवताओ के दर्शन किये , शारदा घाट पे आपको लिया अगरबत्ती इत्यादि प्रसाद से सम्बंधित वस्तुये मिल जाएँगी यहाँ मुंडन संस्कार के लिए अलग से एक व्यवस्था की गई है कुल मिलकर आप यहाँ जरूर आना |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/शारदा-घाट-पर-बने-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="शारदा घाट पर बने मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10851" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/शारदा-घाट-पर-बने-मन्दिर-टनकपुर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/शारदा-घाट-पर-बने-मन्दिर-टनकपुर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>शारदा घाट पर बने मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="522" height="333" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/मुंडन-संस्कार-स्थल-शारदा-घाट-टनकपुर.jpg" alt="मुंडन संस्कार स्थल शारदा घाट टनकपुर" class="wp-image-10850" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/मुंडन-संस्कार-स्थल-शारदा-घाट-टनकपुर.jpg 522w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/मुंडन-संस्कार-स्थल-शारदा-घाट-टनकपुर-300x191.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 522px) 100vw, 522px" /><figcaption>मुंडन संस्कार स्थल शारदा घाट टनकपुर</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">अब हम निकले  अगले पड़ाव श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर की और जब हम शारदा घाट आ रहे तो बिलकुल घाट के समीप ही यह मन्दिर था जानकारी की तो मालूम हुआ की यह टनकपुर का काफी प्रसिद्ध मंदिर है तो थोडा पैदल चलके हम आ गए थे श्री पंचमुखी महादेव मंदिर परिसर में यहाँ बिलकुल भी भीड़ नहीं थी हमने बहुत ही आराम से महादेव के दर्शन किये वहां लगे नल से पानी पिया और वही पड़ी एक बेंच पे कुछ देर बैठकर मंदिर परिसर को निहारते रहे यहाँ पर काफी शांति थी थोड़ी देर बाद मन्दिर के पुजारी आई मतलब एक महिला थी वो उन्होंने दुबारा दर्शन करने को बोला और प्रसाद दिया इस मंदिर परिसर में और भी मंदिर है जैसे श्री राधा कृष्ण मन्दिर और श्री शीतला माता श्री दुर्गा माता श्री संतोषी माता मन्दिर आप समस्त देवी देवताओ के दर्शन कर ले  , यही आसपास में धर्मशाला भी है आप ठहर भी सकते है बाकी शारदा घाट के समीप भी कई बजट धर्मशला दिखाई दी थी यदिआप टनकपुर में रुकने के  इच्छुक हो तो आप शारदा घाट &#8211;  श्री पंचमुखी महादेव मन्दिर की तरफ कही भी रुक सकते है  |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="328" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मन्दिर-का-गेट-टनकपुर.jpg" alt="पंचमुखी मन्दिर का गेट टनकपु" class="wp-image-10845" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मन्दिर-का-गेट-टनकपुर.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मन्दिर-का-गेट-टनकपुर-300x246.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>पंचमुखी मन्दिर का गेट टनकपुर</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मंदिर-परिसर-टनकपुर.jpg" alt="पंचमुखी मंदिर परिसर टनकपुर" class="wp-image-10844" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मंदिर-परिसर-टनकपुर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/पंचमुखी-मंदिर-परिसर-टनकपुर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>पंचमुखी मंदिर परिसर टनकपुर</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">अब हम इस मंदिर से कुछ ही  दूरी पर स्थित श्री बालाजी धाम हनुमान गढ़ी मन्दिर पर थे वहां हमने हनुमान जी के दर्शन किये यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा बहुत ही आकर्षक है यहाँ की साफ़ सफाई देखकर मन प्रफुल्लित हो उठा  आपको यहाँ भी आना चाहिये अब हम  निकल पड़े माँ पूर्णागिरि जाने के साधन की तलाश में खैर किस्मत सही थी तो 20 मिनट बाद की एक गाड़ी मिल गई जिसमे हम बैठ गये करीब आधे घंटे बाद जब उस गाड़ी ने कोरोना के एक शब्द शोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा के अपनी गाड़ी को खचाखच भर लिया था मतलब वो गाड़ी जब सवारियों से फुल हुई तो दौड़ पड़ी माँ पूर्णागिरि मन्दिर की ओर रास्ता सुहाना था लेकिन यहाँ के ड्राईवर बड़ी तेजी से चलाते है हम तो राम-राम करते हुए डर के साथ जा रहे थे हमारी गाड़ी रुकी सारे यात्री उतरे तो मालूम पड़ा की हम लोग ठूलीगाड आ गए है यहाँ से दूसरी गाड़ी में जाना होगा तुरंत ही हम दुबक लिए आगे की तरफ जाने वाली गाडी में जिसने हमें टुन्यास में उतार दिया टुन्यास वही जगह है जहाँ से माँ पूर्णागिरि की पैदल चढ़ाई शुरू होती है आपको बता दे कि टनकपुर से मुख्य मंदिर तक की दूरी लगभग 22 किलोमीटर है जिसमें  टुन्यास से 3 किलोमीटर आपको पैदल ही जाना पड़ेगा जो ये 22 किलोमीटर की दूरी है इसे आप अपने साधन से भी तय कर सकते हो या फिर टनकपुर से गाड़ियाँ जाती है जो 50-60 रूपये लेकर आपको टुन्यास  में छोड़ देंगी  |.</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg" alt="हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर" class="wp-image-10852" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/हनुमान-गढ़ी-मन्दिर-टनकपुर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>हनुमान गढ़ी मन्दिर टनकपुर</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="330" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/यही-से-माँ-पूर्णागिरि-की-पैदल-यात्रा-शुरू-होती-है.jpg" alt="यही से माँ पूर्णागिरि की पैदल यात्रा शुरू होती है " class="wp-image-10853" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/यही-से-माँ-पूर्णागिरि-की-पैदल-यात्रा-शुरू-होती-है.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/यही-से-माँ-पूर्णागिरि-की-पैदल-यात्रा-शुरू-होती-है-300x283.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>यही से माँ पूर्णागिरि की पैदल यात्रा शुरू होती है </figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">हम टुन्यास में खड़े थे बिलकुल भैरव मन्दिर के सामने और विचार कर रहे थे की भोजन यही कर ले की ऊपर करे तो कुछ समझ नही आया तो हमने चढ़ाई शुरू कर दी करीब शाम के 7 बज रहे थे यहाँ काफी चहल पहल थी  रास्ते में तमाम खाने पीने की दुकाने प्रसाद आदि की दुकाने और रुकने की धर्मशाला टाइप की थी थोडा आगे जाकर हमको  रास्ते दो दिखाई दिए तो हमने सीधी वाला रास्ता चुना हालाँकि इस रास्ते में इतनी सीढियां थी कि आप थक जाओ लेकिंन जगह-जगह पर रुकने की व्यवस्था है हमने दो किलोमीटर की रास्ता तय कर ली तब भूख बहुत तेज लग रही तो हमने एक जगह रुकने का निर्णय लिया जानकारी की यहाँ जो प्रसाद की दुकाने है वहां आप ठहर सकते है  नहा सकते हो फ्रेश हो सकते हो वो भी मुफ्त में बस शर्त ये की आपको प्रसाद उनसे ही लेना पड़ेगा ये प्रसाद वाले जो रुकने की व्यवस्था किये है उसमे एक हालनुमा बना देते है और उसमे गद्दे  डाल देते है कम्बल दे देते है  हम थके थे  तो तुरंत ही एक प्रसाद की दुकान पे ठहर गये उसमे सबसे पहले हमारे जूतों को एक बोरी में रखा फिर हम वही गद्दों पर लेटकर आराम करने लगे और देखा की इसी दुकान में चाय का जुगाड़ था तो हमने वही चाय पी फिर भोजन के बारे में पता किया तो पड़ोस में ही एक भोजनालाय था  वहां गये और एक एक थाली ली 100 रूपये की स्पेशल थाली थी जिसमे कोई भी स्वाद स्पेशल नहीं था बस पेट भरना था खैर कोई नही यहाँ इतनी ऊपर पहाड़ो में दुर्गम रास्ते पे जो मिल जाय बहुत है |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir ke do Raste" class="wp-image-10610" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-ke-do-Raste-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>माँ पूर्णागिरि पैदल मार्ग के यही से दो रास्ते है </figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="467" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-रास्ते-में-रुकने-की-व्यवस्था.jpg" alt="माँ पूर्णागिरि रास्ते में रुकने की व्यवस्था" class="wp-image-10849" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-रास्ते-में-रुकने-की-व्यवस्था.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-रास्ते-में-रुकने-की-व्यवस्था-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>माँ पूर्णागिरि रास्ते में रुकने की व्यवस्था</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">खैर स्वाद कैसा भी हो पेट भर गया था अब हम फिर आकर लेट गये तब तक प्रसाद की दुकान वाला आया और बोला भैया आप लोग आराम कर लो फिर नहा लो और रात में ही दर्शन कर लो तो हमारे मित्र कहने लगे यार 9 बजे रात में क्या नहाया जाय तो दुकान वाला बताया कि  अभी रात में भीड़ कम होती है अब फिर हमारे मित्र बोले सही है रात में ही दर्शन करेंगे मैंने कहा ठीक लेकिन रात में करेंगे वो भी 12 बजे के पहले तो हम दोनों आराम करने लगे और पौने ग्यारह पे उठके नहा धोके निकल लिए माँ के मंदिर की और थोड़ी ही दूरी पे झूठे बाबा का मंदिर पड़ा हमने बाद में यहाँ दर्शन करने का निर्णय लिया और आगे बढ़ चले रास्ते में हम लोगो को जो भी देवी देवता की प्रतिमा दिखाई दे रही थी हम सब कही चरण स्पर्श करते हुए आगे जा रहे थे तब तक एक और प्रसिद्द मंदिर माँ काली मंदिर मिला लेकिन यहाँ भी हमने बाद में ही दर्शन करने का निर्णय लिया अब रास्ता जो था वो एकदम खड़ी चढ़ाई का था तो अब दिक्कत हो रही थी हम दोनों को बार बार रुकना पड़ रहा था और थकान भी थी लेकिन रास्ते में जब जय माता दी के जयकारे सुने देते थे तो फिर से जोश आ जाता था  |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="467" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-मार्ग.jpg" alt="माँ पूर्णागिरि पैदल चढ़ाई मार्ग" class="wp-image-10848" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-मार्ग.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-मार्ग-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>माँ पूर्णागिरि पैदल चढ़ाई मार्ग</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-का-रास्ता.jpg" alt="माँ पूर्णागिरि पैदल चढ़ाई का रास्ता" class="wp-image-10847" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-का-रास्ता.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/माँ-पूर्णागिरि-पैदल-चढ़ाई-का-रास्ता-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>माँ पूर्णागिरि पैदल चढ़ाई का रास्ता</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">खैर देवी माँ के दर्शन की अभिलाषा थी तो हमारा उत्साह चरम पर था अब हमारे बिलकुल सामने माँ पूर्णागिरि का सुप्रसिद्ध मंदिर था और भीड़ न के बराबर थी मन ही मन मैंने उस प्रसाद की दुकान वाले के इस उत्तम सुझाव का धन्यवाद अदा किया हम दोनों को माँ के बहुत ही सुन्दर दर्शन मिले थे हम वहां माँ के सानिध्य में लगभग 5 मिनट रुके मुख्या मन्दिर में फोटोग्राफी मन थी  अब हम एक नयी उमंग के साथ वापसी कर रहे थे न कोई थकान न किसी प्रकार की कोई चिंता थोड़ी दूर ही चले थे की एक भगोने में चाय खौलती दिख गई बस फिर क्या था हम दोनों वही एक-एक कुर्सी पकड़ के दो चाय का आर्डर देके बैठ गए , चाय समाप्त कर हम दोनों आगे बढे और रास्ते में माँ काली के दर्शन किये वहां पुजारी जी से आशीर्वाद लेकर  वही प्रसाद की दुकान पे आ गये जहाँ हमारा सारा सामान बैग आदि रखे थे आते ही हम दोनों लेट गये और शायद 5 मिनट में ही नींद के आगोश में थे सुबह करीब 5 बजे मेरी आँख खुली तो देखा लोग माँ के दर्शन हेतु जा रहे थे मै फिर से सो गया अब सुबह 6 बजे उठकर फ्रेश होकर स्नान वगैरह करकर रेडी  हुआ फिर अपने सहयोगी को उठाया अब हम दोनों अपने आगे की सफ़र की और निकल पड़े अब हमको पास ही स्थित झूठे के मंदिर जाना था |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/tanakpur-tourist-places-ki-a-to-z-jankari-hindi-me/">टनकपुर में घूमने की जगहें – Tanakpur Tourist Places की A to Z जानकारी</a></p>



<p><a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-yatra-ki-a-to-z-jankari/">Maa Purnagiri Yatra ki A to Z Jankari – माँ पूर्णागिरि मन्दिर कैसे जाये कहा ठहरे</a></p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="413" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg" alt="Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri" class="wp-image-10613" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Mahakali-Mandir-Near-Maa-Purnagiri-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>Mahakali Mandir Near Maa Purnagiri</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="375" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg" alt="झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर" class="wp-image-10614" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/झूठे-का-मन्दिर-माँ-पूर्णागिरि-मंदिर-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>झूठे का मन्दिर माँ पूर्णागिरि मंदिर</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">आपकी जानकारी के लिये बता दू जो माँ पूर्णागिरि की चढ़ाई के दो रास्ते है  वे दोनों ही झूठे के मन्दिर की ओर आकर मिलते है  जब हम लोग कल रात चढ़ाई किये थे तब हमने सीढियों वाला रास्ता चुना था लेकिन वापसी में हमने दूसरा रास्ता चुना और दूसरे रास्ते में प्रसाद की दुकाने इत्यादि कम है लेकिन आपको इस रास्ते में बहुत ही मनोरम नज़ारे मिल जायेंगे आप जगह-जगह पर रूककर फूटू क्लिक करवाने को मजबूर हो जायेंगे आपको इस रास्ते में बेहतरीन हरियाली दिखाई पड़ेगी जब रास्ता इतना मनोरम था तो भैया हमने भी अपना कैमरा मोबाइल वाला निकाल लिया और फूटू पे फूटू क्लिक होने लगी दो लोग थे एक दुसरे की फूटू क्लिक कर रहे थे इस रास्ते में नीचे देखने से भी बहुत ही बढ़िया व्यू आता है कही कही से तो पहाड़ का बड़ा सुन्दर व्यू मिल जाता है तो मेरी एक और टिप्स आप वापसी हमेशा कम सीढियों वाले रास्ते से  ही करे खैर फूटूबाजी करते करते हम नीचे आ गये और भैरव मंदिर के पास आकर भैरव बाबा के दर्शन किये एक और टिप्स आप जब भी माँ पूर्णागिरि के दर्शन करे तो रास्ते में आपको भैरव मन्दिर , झूठे का मन्दिर , माँ श्री काली मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="300" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg" alt="Maa Purnagiri Mandir Ka rasta" class="wp-image-10609" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/10/Maa-Purnagiri-Mandir-Ka-rasta-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>Maa Purnagiri Mandir Ka rasta</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="533" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg" alt="भैरव मन्दिर टुन्यास" class="wp-image-10846" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भैरव-मन्दिर-टुन्यास.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/भैरव-मन्दिर-टुन्यास-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>भैरव मन्दिर टुन्यास</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="350" height="388" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/ठूलीगाड-टनकपुर-के-पास-का-व्यू.jpg" alt="ठूलीगाड टनकपुर के पास का व्यू" class="wp-image-10843" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/ठूलीगाड-टनकपुर-के-पास-का-व्यू.jpg 350w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/01/ठूलीगाड-टनकपुर-के-पास-का-व्यू-271x300.jpg 271w" sizes="auto, (max-width: 350px) 100vw, 350px" /><figcaption>ठूलीगाड टनकपुर के पास का व्यू</figcaption></figure></div>



<p class="has-text-align-justify">हम लोगो ने भैरब मंदिर में दर्शन करके सीधे गाड़ी स्टैंड के पास आकर एक गाड़ी में बैठ लिए जो ठूलीगाड तक जा रही थी उस गाडी वाले ने हम को ठूलीगाड में एक पुल के पास उतार दिया हम जैसे ही उतरे वहां के नजारा देख स्तब्ध रह गये नीचे शारदा नदी जो पहाड़ो से आ रही थी और सामने हरे हरे पहाड़ वाह क्या सुन्दर नजारा था यहाँ हम लोग फूटू क्लिक करने को मजबूर हो गये फटाफट फूटू लिए और बैठ लिए अगली गाड़ी मे जिसने हमें टनकपुर में पटक दिया वैसे हम दोनों को विदेश जाना था  अब आप मेरी अगली पोस्ट में मेरी पहली विदेश यात्रा को पढेंगे |</p>
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		<title>Kannauj Attar Ka Shahar &#8211; यहाँ की गलियां भी महकती है और गट्टे में भी मिठास है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Mar 2021 15:22:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नाम तो बहुत सुना था और मेरे शहर से पड़ोस में है कन्नौज लेकिन कभी जाना नहीं हुआ था एक शाम को एकदम से सोचा क्यों न कन्नौज ही घूम आये पड़ोस में ही तो है तो बस कर ली  तैयारी अरे तैयारी में क्या बस एक बोतल पानी सेनेटाईज़र मास्क आधार कार्ड बस ,  कन्नौज हमारे शहर हरदोई से महज 60 किलोमीटर है तो मैंने बस से जाने का तय किया और अगले  ही दिन सुबह मै कन्नौज जाने वाली बस में था पड़ोस में एक व्यक्ति  आके बैठ गए और थोड़ी ही देर में हमारी बस कन्नौज की और चल दी &#124;</p>
<p>जो सज्जन पास बैठे थे उनसे मैंने थोड़ी हाई हेल्लो की तो पता चला की वो कन्नौज के ही निवासी है  तो मैंने उनसे जानकारी मांगी की आपके शहर में क्या क्या घुमक्कड़ी की जा सकती है तो उन्होंने मुझे बाबा गौरी शंकर मन्दिर , फूलमती देवी मन्दिर , जयचंद का किला , मेहंदी घाट , माँ अन्नपूर्णा देवी मंदिर, , मखदूम जहानिया का नाम बताया अब मै ठहरा भुलक्कड़ तो ये सब मैंने मोबाइल में ही नोट कर लिया बस अब मै Kannauj Attar  के शहर के आने का इंतज़ार करने लगा &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/kannauj-attar-ka-shahar/">Kannauj Attar Ka Shahar &#8211; यहाँ की गलियां भी महकती है और गट्टे में भी मिठास है</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>बेशक<strong> Kannauj Attar</strong> का शहर है यहाँ प्राचीन काल से इत्र बनाया जाता है और सबसे बढ़िया बात जो <a href="https://kannauj.nic.in/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कन्नौज</a> को औरो से अलग बनाती है वो है इत्र बनाने का तरीका आपको बता दे यहाँ आज भी पुराने तरीके से खुशबू से भरपूर इत्र बनाया जाता है आज इस पोस्ट में  हम आपको अपने यात्रा वृतांत के माध्यम से <strong>Kannauj Jila</strong> की सैर करायेंगे तो यह ब्लॉग पूरा पढ़े और उत्तर प्रदेश की परफ्यूम कैपिटल को जानिये |</p>



<h2 class="wp-block-heading">मेरा Kannauj Attar Ke Shahar का यात्रा वृतान्त</h2>



<p>नाम तो बहुत सुना था और मेरे शहर से पड़ोस में है कन्नौज लेकिन कभी जाना नहीं हुआ था एक शाम को एकदम से सोचा क्यों न कन्नौज ही घूम आये पड़ोस में ही तो है तो बस कर ली  तैयारी अरे तैयारी में क्या बस एक बोतल पानी सेनेटाईज़र मास्क आधार कार्ड बस ,  कन्नौज हमारे शहर हरदोई से महज 60 किलोमीटर है तो मैंने बस से जाने का तय किया और अगले  ही दिन सुबह मै कन्नौज जाने वाली बस में था पड़ोस में एक व्यक्ति  आके बैठ गए और थोड़ी ही देर में हमारी बस कन्नौज की और चल दी |<br><br>जो सज्जन पास बैठे थे उनसे मैंने थोड़ी हाई हेल्लो की तो पता चला की वो <strong>Kannauj Jila</strong> के ही निवासी है  तो मैंने उनसे जानकारी मांगी की आपके शहर में क्या क्या घुमक्कड़ी की जा सकती है तो उन्होंने मुझे बाबा गौरी शंकर मन्दिर , फूलमती देवी मन्दिर , जयचंद का किला , मेहंदी घाट , माँ अन्नपूर्णा देवी मंदिर, , मखदूम जहानिया का नाम बताया अब मै ठहरा भुलक्कड़ तो ये सब मैंने मोबाइल में ही नोट कर लिया बस अब मै <strong><em>Kannauj Attar</em></strong>  के शहर के आने का इंतज़ार करने लगा |</p>



<p>मेरी बस कन्नौज के बसड्डे पे आ चुकी थी यहाँ का बस स्टैंड ज्यादा बड़ा नहीं था अब मुझे सर्वप्रथम जाना था <strong>बाबा गौरीशंकर के मंदिर</strong> जो की कन्नौज में अति प्रसिद्द है  मैंने एक ऑटो किया और निकल लिया मन्दिर की और रास्तो की ज्यादा जानकारी थी नहीं मुझे ऑटो वाला तंग गलियों से होते हुए  ले आया था मन्दिर पर ,  मै उतरकर  मंदिर की और बढ़ चला रास्ते में प्रसाद और फूलो की ढेर सारी दुकाने पड़ी मैंने वहां से फूल लिए और आ गया मन्दिर प्रांगण में , बाबा गौरी शंकर महादेव का यह मन्दिर अत्यधिक बड़ा सा था इसमें कई अन्य छोटे मंदिर थे और यहाँ गेट पे बंधे घंटे बहुत ही खूबसूरत दिखाई दे रहे थे |<br><br><a href="https://safarjankari.com/kannauj-itra-nagri-me-ghumne-ki-jagah/">Kannauj Itra Nagri में घूमने की समस्त जानकारी </a></p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Baba-Gauri-Shankar-Mandir-Kannauj-Attar-Ka-Shahar.jpg" alt="Baba Gauri Shankar Mandir " class="wp-image-10337" width="232" height="444"/><figcaption>Baba Gauri Shankar Mandir </figcaption></figure></div>



<p>इसी मन्दिर में जानकारी मिली कि राजा हर्ष के समय इस मंदिर की पूजा के लिए 1000 पुजारी नियुक्त थे और यहाँ स्थापित गौरी मुखी शिवलिंग छठी शताब्दी का है इस मन्दिर में एक सुन्दर सा पार्क भी है जो बंद था लेकिन मंदिर प्रांगण बहुत ही बड़ा और अच्छा बना हुआ है अब मैंने बही के प्रसाद वाले से जयचंद फोर्ट के बारे में पूछा तो उसने बोला अरे भैया पास में ही है तो मै निकल पड़ा फोर्ट देखने पैदल पैदल फोर्ट से पहले ही एक मन्दिर पड़ा जिसके बारे में पता किया तो मालूम हुआ की यह <strong><em>Kannauj Jila</em></strong>  का प्राचीन मन्दिर है इसका नाम क्षेमकलि देवी था |<br><br>मैंने<strong> माँ क्षेमकली देवी</strong> के दर्शन किये यहाँ जाने के लिए आपको सीढियों से होकर जाना होगा यहाँ भी कई अन्य मंदिर है अच्छा इस मंदिर के समीप में ही अत्यन्त भव्य श्री राधा बांके बिहारी मन्दिर था यह सच में अत्यंत भव्य प्रतीत हो रहा था इसकी एक फोटो लेने के लिए मुझे सड़क से थोडा दूर हटना पड़ा अब मै <strong>जयचंद के एतिहासिक किले</strong> की और बढ़ रहा था और निराशा मेरा इंतज़ार कर रही थी जैसे ही मै फोर्ट के पास पहुंचा मैंने वहा सिर्फ  राजा जयचंद की प्रतिमा पाई और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का एक बोर्ड जिसमे लिखा था  प्राचीन किला कन्नौज और राजा जयचंद की प्रतिमा के पीछे एक ऊँचा सा टीला है तो मैंने वहा से गुजरते हुए एक व्यक्ति से पूछताछ की तो उन्होंने बताया भैया किला विला तो नहीं हा ऊपर चढ़ जाओ तो आपको पूरा कन्नौज दिखाई देगा |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="435" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/02/Kannauj_Itra_Nagri_Ka_Jaichand_Fort.jpg" alt="Kannauj Itra Nagri Ka Jaichand Fort" class="wp-image-10249" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/02/Kannauj_Itra_Nagri_Ka_Jaichand_Fort.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/02/Kannauj_Itra_Nagri_Ka_Jaichand_Fort-276x300.jpg 276w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>राजा जयचंद का किला </figcaption></figure></div>



<p>तो बस मै चल दिया पूरा कन्नौज देखने और वाकई में किला तो ऊपर था नहीं न ही कोई अवशेष थे किले लेकिन कन्नौज जरूर दिखाई दे रहा मैंने कन्नौज देखा और उतर आया संभल के रोड पे अब मै वहां जाना चाह रहा था जिसके लिए यह शहर विश्व भर में प्रसिद्ध है जी हा<strong> Kannauj Attar</strong> बाजार में ,  वैसे तो पूरे <strong>Kannauj Jila</strong> में आपको इत्र की कई दुकाने मिल जाएँगी लेकिन मै आ पहुंचा था एक ऐसी मार्किट में जहा ढेर सारे इतर की दुकाने थी यह गली क्या पूरी मार्किट थी लेकिन अत्यंत संकरी रोड थी इसलिए मैंने इसे गली कहा |</p>



<p>परन्तु यहाँ आके एहसास हो रहा था की अब मै <strong><em>Kannauj Attar</em></strong>  के शहर में हु टहलते हुए मुझे भीनी भीनी खुशबू आ रही थी ऐसा लग रहा जैसे किसी ने इत्र की कई बोतलों को हवा में घोल दिया हो और पूरा वातावरण खुशनुमा हो गया हो एक अलग तरह की सकारात्मक उर्जा थी यहाँ अब मै एक इत्र की दूकान में था तो दूकान के मालिक से इत्र की जानकारी ली तो पता चला यहाँ फूलो का जड़ी बूटियों का मिटटी का इत्र मिलता है और यही पर इत्र बनाने के कारखाने भी है और इन कारखानों में पुरानी विधि से बेहतरीन गुणवत्ता वाला इत्र आज भी  बनाया जाता है जिसकी सप्लाई पूरे हिन्दुस्तान में है |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="358" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar.jpg" alt="Kannauj Attar" class="wp-image-10342" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-300x215.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>Kannauj Attar</figcaption></figure></div>



<p>यहाँ अगरबती धूपबत्ती भी सही दामो पर मिल रही थी और ये भी कन्नौज की ही बनी हुई थी अब मै इसी दुकान में खरीददारी कर रहा था मैंने तीन तरह  के  इत्र लिए और धूपबत्ती ली  ली फिर दुकान के ओनर बोले जरा यह खाने वाला गुलाब जल चख के देखिये ये भी कन्नौज का बना है और बहुत ही बढ़िया चीज है तो मैंने गुलाबजल की  दो तीन बूंदे अपने हाथ पे लेके मुह में डाली जैसे ही यह बूंदे मेरे मुंह में गई ऐसा लगा जैसे मैंने सैकड़ो गुलाब खा लिए हो मुझे अपने अन्दर से गुलाब की खुशबू आने लगी लाजवाब था यह कन्नौज  का गुलाबजल |</p>



<p>अब मुझे भूख लग रही थी और मैंने थोड़ी ही दूर जाकर एक दूकान देखी जहाँ आलू टिक्की पानी के बताशे दही बड़े थे तो मैंने एक पत्ता टिक्की लगवाया स्वाद यहाँ का एवरेज था फिर मैने दही बड़ा भी खाया जो की स्वादिष्ट था इस शॉप का दही बड़ा मीठा था और मुझे मीठा है पसन्द,  जैसे ही थोडा आगे बढ़ा <strong>Kannauj Attar</strong> के शहर की दूसरी प्रसिद्ध चीज के दर्शन हो गए वो थी यहाँ के गट्टे और गट्टे की प्रसिद्ध और पुरानी दूकान <strong>कलावती के गट्टे</strong> मेरे सामने थे तो आपको बता दू इनके गट्टे देशी घी से बने होते है और इन पर ढेर सारी मेवा चिपकी रहती है इनको आप जैसे ही मुह में डालोगे यह अपनी मिठास और महक को आपके मुह के माध्यम से आपके तन मन में घोल देंगे हालाँकि इनका मूल्य मुझे ज्यादा लगा शायद 225 रूपये प्रति किल्लो था खैर मैंने आधे किलो का एक  गट्टे का डिब्बा लिया और निकल पड़ा अपने अगले गंतव्य स्थल की और जो की मखदूम जहानियाँ था |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="322" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kalawati-Gatta-Bhandar-Kannauj-Jila.jpg" alt="Kalawati Gatta Bhandar" class="wp-image-10338" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kalawati-Gatta-Bhandar-Kannauj-Jila.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kalawati-Gatta-Bhandar-Kannauj-Jila-300x193.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>Kalawati Gatta Bhandar Kannauj Jila</figcaption></figure></div>



<p>लेकिन समस्या थी की जहनिया  तक पहुंचे कैसे खैर तब तक एक ऑटो दिखाई दिया उससे कहा भाई छोड़ दो बोला छोड़ दूंगा मै बैठ लिया और हम दोनों दौड़ पड़े कन्नौज की सड़को पर और चंद मिनटों में हम मखदूम जहनिया के समीप थे अब मुझे पद यात्रा  करनी थी कोई नही इसमें तो मै एक्सपर्ट हु यह स्थल काफी उंचाई पर बना है  मै चढ़ के अगले 3-4 मिनट में मखदूम जहानिया  के गेट पे था यहाँ तो यार एकदम सन्नाटा था बाकी यह मकबरा था तो डर भी लगा लेकिन  डरते हुये मै अन्दर गया और अन्दर वाकई में मकबरे थे और मकबरों में मजारे ये मकबरे देखने वाले थे यहाँ की नक्खाशी अच्छी थी  मकबरों के आगे यहाँ एक अन्य ईमारत है जिसे 52 खम्भा बोलते है क्यूंकि इसमें अत्यंत सुन्दर 52 खम्भे बने है और यहाँ एक मस्जिद भी है यहाँ आपको एक सकून मिलेगा और यहाँ उपस्थित हर एक ईमारत की शिल्पकला बेजोड़ है |</p>



<p>अब मै <strong>Kannauj Attar</strong> के शहर की गलियों में पैदल ही चला जा रहा था ये तय नही था की कहा जाऊ थोडा सा आगे बढ़ने में मुझे एक सुन्दर सा मंदिर दिखाई दिया जिसका नाम बाबा आनंदेश्वर नाथ मन्दिर था यहाँ भी मैंने दर्शन किये और यहाँ मौजूद के महिला के कहने पर  मै निकल लिया माँ फूलमती देवी मन्दिर की ओर रास्तो से अनजान गूगल मैप के सहारे चला जा रहा था लगभग 20 मिनट बाद आखिर माँ फूलमती देवी का मन्दिर मेरे सामने था यहाँ की मान्यता है की यहाँ जिस नीर से माता को स्नान कराया जाता है अह अत्यधिक पवित्र होता है उससे आँख सम्बन्धी बीमारिया दूर हो जाती है खैर मैंने माँ के अच्छी तरह से दर्शन किये |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="300" height="696" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ka-Shahar-Ka-Mandir.jpg" alt="Kannauj Attar Ka Shahar Ka EK Mandir" class="wp-image-10339" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ka-Shahar-Ka-Mandir.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ka-Shahar-Ka-Mandir-129x300.jpg 129w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption>baba Anandeshwar Nath Mandir</figcaption></figure></div>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-ke-Shahar-me-Ma-Foolmati-Mandir.jpg" alt="Kannauj Attar ke Shahar me Ma Foolmati Mandir" class="wp-image-10341"/><figcaption>Kannauj Attar ke Shahar me Ma Foolmati Mandir</figcaption></figure></div>



<p>अब मन चाय की चुस्की का करने लगा खैर एक चाय का खोखा (छोटी सी दूकान) दिखाई दी वहां एक बुजुर्ग बैठे तो बड़े ही मन से उन्होंने मुझे चाय दी वाकई में चाय बिलकुल घर जैसी थी उस चाय ने मेरी थकान सुस्ती को मिटा दिया था चाय की चुस्कियो के साथ मै सोच रहा था अब कहा जाऊ फिर उन बाबा से वार्तालाप हुई तो उन्होंने बता की यही थोड़ी दूरी पे एक छोटा सा <strong>माँ पचकुइयां देवी का मन्दिर</strong> है <strong>Kannauj Jila</strong> के स्थानीय लोगो में इस मंदिर का भी बड़ा महत्त्व है तो बस  तांगा झोला और निकल पड़ा मंदिर की ओर पूछते पूछते आखिर मै आ गया था माँ पचकुइयां देवी के मंदिर पर बहुत ही छोटा सा पुराना मन्दिर था खैर मैंने दर्शन किये और वापस रोड पे आ गया |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Jila-ka-Pachkuiya-Devi-Mandir.jpg" alt="Pachkuiya Devi Mandir" class="wp-image-10343"/><figcaption>Kannauj Jila  ka Pachkuiya Devi Mandir</figcaption></figure></div>



<p>अब शाम होने को आई थी और मै अभी माँ अन्नपूर्णा देवी मंदिर जो की तिर्वा में है वहां जाने की सोच  रहा था और माँ गंगा में नहाने का भी मन था और वापसी भी करनी थी तो मैंने मेहंदी घाट जाने का निर्णय लिया और आ गया <strong>Kannauj Jila</strong> बस स्टैंड जहाँ से मुझे मेहंदी घाट के लिए एक टेम्पो मिला जो की जब तक फुल न हो गया तन तक वहा से हिला भी नहीं मार ठूस ठूस के सवारियों को भरके टेम्पो दौड़ पड़ा माँ गंगा के पावन मेहंदी घाट की ओर , लगभग 30 मिनट में टेम्पो ने हमे मेहंदी घाट पे उतार दिया था मेरे दिमाग में सबसे पहले गंगा स्नान था तो फटाफट मै जाकर स्नान करने पहुंचा यह घाट ठीक ठाक है न बहुत ही सफाई है यहाँ न ही गंदगी है यहाँ आप नाव की सवारी का भी आनंद ले सकते हो |</p>



<p>मै <strong>Kannauj Attar</strong> के शहर में  गंगा स्नान करके खुश था अब मै घाट के आसपास की घुमक्कड़ी कर रहा था तो मैंने देखा बिलकुल घाट पे ही भोलेबाबा की एक प्रतिमा बनी जो की मुझे बहुत सुन्दर लगी मैंने उसे अपने कैमरे में कैद किया और आगे देखा वहां एक भोले बाबा का मंदिर भी है मैने  मंदिर में जाके भोलेबाबा की शिवलिंग और नंदी के दर्शन किये अबी बिलकुल शाम हो चुकी थी मेरी कन्नौज यात्रा में एक महत्वपूर्ण मंदिर माँ अन्नपूर्णा मन्दिर छूट गया था मैंने माँ अन्नपुर्णा से क्षमा मांगी और निकल पड़ा  अपने घर की ओर हालाँकि मेरा यह यात्रा वृतांत अभी अधूरी है अबकी जब भी मेरा कन्नौज की तरफ जाना होगा मै माँ अन्नपूर्ण देवी मंदिर जरोर जाऊंगा  और दुबारा से इस पोस्ट को कम्प्लीट करूँगा |</p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="430" height="503" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ke-Shahar-ka-Mehandi-Ghat.jpg" alt="Kannauj Attar Ke Shahar ka Mehandi Ghat" class="wp-image-10340" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ke-Shahar-ka-Mehandi-Ghat.jpg 430w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/03/Kannauj-Attar-Ke-Shahar-ka-Mehandi-Ghat-256x300.jpg 256w" sizes="auto, (max-width: 430px) 100vw, 430px" /><figcaption>Kannauj Attar Ke Shahar ka Mehandi Ghat</figcaption></figure></div>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/kannauj-attar-ka-shahar/">Kannauj Attar Ka Shahar &#8211; यहाँ की गलियां भी महकती है और गट्टे में भी मिठास है</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी यह मन्दिर गोमती नदी के मध्य बना हुआ है</title>
		<link>https://safarjankari.com/gomeshwar-shiv-mandir-lucknow-up-ki-jankari/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Jan 2021 13:30:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[Tourist Spot in Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow Parytan]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Lko Me Ghumne Ki Jagah में हम आपको शहर लखनऊ के एक ऐसे मन्दिर के दर्शन कराएँगे जो गोमती नदी के मध्य बना हुआ है इस मंदिर का नाम गोमेश्वर शिव मन्दिर है  और रोचक  बात ये की इस मन्दिर में जाने के लिए हमें नाव का सहारा लेना होता है कुल मिलाके आप कह सकते हो की हम इस शिव मंदिर तक नाव में  बैठकर जायेंगे क्यूंकि यह गोमती के मध्य एक टापू पर है  इस पोस्ट में हम  आपको बताएँगे की इस शिव मन्दिर तक कैसे पहुंचे नाव का किराया क्या है और यहाँ क्या क्या है  &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> का एक शिव मंदिर है जो गोमती नदी के मध्य बना हुआ है रोचक बात ये की इस मन्दिर में जाने के लिए हमें नाव का सहारा लेना होता है कुल मिलाकर आप कह सकते हो की हम इस शिव मंदिर तक नाव में  बैठकर जायेंगे क्यूंकि यह <a href="https://www.britannica.com/place/Gomati-River" target="_blank" rel="noreferrer noopener">गोमती</a> के मध्य एक टापू पर है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की इस शिव मन्दिर तक कैसे पहुंचे नाव का किराया क्या है और यहाँ क्या क्या है  |</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> &#8211; Gomeshwar Shiv Mandir Lucknow </h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">साल 2021 में घुमक्कड़ी की शुरुआत मै किसी मन्दिर से करना चाह रहा था तो इधर उधर किसी ऐसे मन्दिर को खोज में था जो थोडा सा अनोखा हो फिर मुझे शहर लखनऊ के एक शिव मन्दिर के बारे में जानकारी मिली जो गोमती नदी के बीचोबीच स्थित है और यहाँ नाव पर बैठ के जाया जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह सुनकर मै उत्सुक हुआ कि अरे इस तरह का मतलब नाव से नदी में जाने वाला  मन्दिर लखनऊ में भी बस फिर क्या था अगले ही दिन निकल पड़ा उत्तर प्रदेश की राजधानी की ओर जो की मेरे मूल निवास से महज 105 किलोमीटर की दूरी पर है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> मै पहुँच गया लखनऊ और अपने मोबाइल के गूगल मैप में इस मन्दिर को ढूंढा और रास्ते की तरफ निकल लिया यह मेरी वर्ष 2021 की पहली घुमक्कड़ी थी तो उत्साह अत्यधिक था |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसे पहुंचे  How to reach Gomeshwar Shiv Mandir Lucknow</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">गोमती नदी के मध्य बना यह पवित्र शिव मन्दिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित  है और इसके पते की बात करे तो यह मुकरिमनगर हसनगंज में स्थित है ,  अब मै आपको यहाँ पहुँचने का तरीका भी बताता हु |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये <strong>गोमेश्वर शिव मंदिर </strong>जाने के लिए आपको केसरबाग , रेजीड़ेंसी , कारगिल शहीद स्मारक वाटिका से होते हुए डालीगंज पुल को पार करके आपको मनकामेश्वर मंदिर की तरफ आना है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> वही आपको उपासना स्थल लिखा हुआ एक ग्रीन कलर का बोर्ड दिखाई देगा बस उसी बोर्ड के पास से ही रास्ता है बाकी आप इस मंदिर तक गूगल मैप की सहायता से भी भी आ सकते हो |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इस मन्दिर का सबसे बड़ा लैंडमार्क <strong>मनकामेश्वर शिव मन्दिर</strong> ही है बस रोड की एक तरफ मनकामेश्वर शिव मंदिर है और दूसरी तरफ गोमेश्वर शिव मन्दिर , अच्छा इस मंदिर तक आने के लिए आपको रोड से नीचे आना होगा |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यदि आप उपासना स्थल वाले बोर्ड के पास से नीचे उतारोगे तो आप अपने बाइक या अन्य किसी साधन से भी आ सकते हो अब आप थोडा आगे आयेंगे तो आपको गोमती नदी दिखाई देगी जहाँ से आपको नाव द्वारा इस मन्दिर तक आना है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="505" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/गोमेश्वर_शिव_मंदिर_लखनऊ.jpg" alt="गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी" class="wp-image-10136" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/गोमेश्वर_शिव_मंदिर_लखनऊ.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/गोमेश्वर_शिव_मंदिर_लखनऊ-297x300.jpg 297w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>गोमेश्वर शिव मंदिर </figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हालाँकि यहाँ कोई बहुत ज्यादा दूरी नहीं है नाव से आपको महज 5 मिनट ही लगेंगे और जहाँ से नाव मिलेगी वहां से मंदिर दिखाई देता है बस नाव इसलिये क्यूंकि मंदिर नदी के मध्य है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">रही नाव के किराए की बात तो मैंने तो 50 रूपये दिए थे जिसमे आना जाना दोनों शामिल था  , नाविक हमें मंदिर तक लेके गया फिर जब हम दर्शन कर चुके तो वही नाविक हमें वापस छोड़ गया |</p>



<p class="has-medium-font-size">गोमेश्वर शिव मन्दिर की लोकेशन  &#8211;<a href="https://maps.google.com/?cid=15837031017438769726" target="_blank" rel="noreferrer noopener"> https://maps.google.com/?cid=15837031017438769726</a><br><br>लखनऊ से सम्बन्धित अन्य पोस्ट भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/lucknow-ka-mandir-lord-ayyappa-temple/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">Lord Ayyappa Temple Lucknow Ki Samast Jankari </a><br><a href="https://safarjankari.com/kukrail-picnic-spot-lucknow-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">Kukrail Picnic Spot Lucknow&nbsp; Ki Samast Jankari</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">इस यात्रा का यात्रा वृतान्त</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">जैसा की आप सबको बता दिया है की वर्ष 2021 की यह मेरी पहली घुमक्कड़ी थी तो उत्साह का होना तो बनता हम घुमक्कड़ी के शौखीन लोगो के लिए कोई भी घुमक्कड़ी छोटी या बड़ी नहीं होती |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">खैर मै खड़ा था लखनऊ के बस स्टैंड केसरबाग में और वहा से गूगल मैप ने मुझे बताया की आज आप जिस शिव मंदिर के दर्शन करना चाहते है वह लखनऊ के एक प्रतिष्ठित शिव मन्दिर मनकामेश्वर के समीप है तो मै आगे बढ़ चला |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब मै इस मन्दिर के समीप आ गया था यहाँ आके देखा तो वाकई में मंदिर गोमती नदी के मध्य में बना हुआ है और वहां सिर्फ नाव से ही जा सकते है तो मैंने वहां उपस्थित एक सज्जन से बात की तो उन्होंने बताया की आप 50 रूपये दीजिये मै आपको भोलेबाबा के दर्शन करवा के लाता हु |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> मैंने बोला ओके चलिए और फिर मै नाव पर बैठ गया नाव को अच्छे से सजाया था मतलब नाव देखने में अच्छी लग रही थी जैसे ही नाव आगे बढ़ी हमारे सामने एक सुन्दर नजारा था गोमती नदी में ढेर सारी बतखे मौज मस्ती कर रही थी जो देखना वाकई में आनंददायक था |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="550" height="300" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/लखनऊ_में_बोटिंग.jpg" alt="लखनऊ में बोटिंग" class="wp-image-10137" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/लखनऊ_में_बोटिंग.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/लखनऊ_में_बोटिंग-300x164.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption>लखनऊ में बोटिंग</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="350" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Gomti_Nadi_ke_Beech_Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah.jpg" alt="गोमती नदी लखनऊ में बतखे" class="wp-image-10133" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Gomti_Nadi_ke_Beech_Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah.jpg 600w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Gomti_Nadi_ke_Beech_Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">बस 5 मिनट की नाव की सैर के बाद  हम मन्दिर आ गए थे इस <strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ</strong> में अत्यधिक शान्ति थी और चारो तरफ आँखों को सकून देने वाली हरियाली थी सबसे पहले मैंने मुख्य मंदिर में जाकर भोलेबाबा के दर्शन किये |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> यह मन्दिर ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन इसमें फूलो की सजावट देखते ही बन रही था मंदिर के अन्दर अत्यधिक सुन्दरता थी मैंने शिवलिंग पर मत्था टेका और बाहर निकल आया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">सच मानिये यहाँ आकार आपको एक अलग सा सकूं मिलेगा क्यूंकि चारो और हरे भरे पेड़ , सुन्दर बतखे और चारो और गोमती नदी है तो आप बिलकुल प्रकृति  से रूबरू हो जायेंगे अच्छा यह शिव मंदिर अति प्राचीन है क्यूंकि मुख्य मन्दिर में मंदिर का स्थापना वर्ष 1932 लिखा हुआ था  |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> गोमती नदी के मध्य बने एक टापू पर स्थित <strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> के प्रांगण में एक तो शिव मन्दिर है और इसके लगे में ही एक बरामदा सा है जहाँ आप हवन  इत्यादि भी कर सकते है एवं इसी बरामदे में अन्य देवी देवताओ की भी मूर्तियाँ है आप उन सभी के दर्शन कर सकते हो |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah_Gomeshwar_Shiv_Mandir.jpg" alt="गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी" class="wp-image-10134" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah_Gomeshwar_Shiv_Mandir.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah_Gomeshwar_Shiv_Mandir-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lko_Me_Ghumne_Ki_Jagah_Gomeshwar_Shiv_Mandir-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>गोमेश्वर शिव मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">कुल मिलाकर मुझे तो यह टापू पर बना मन्दिर बहुत ही सुन्दर लगा क्यूंकि लखनऊ की भागमभाग से आकर आप बिलकुल प्रकृति की गोद में आ जाते हो अब मैंने सम्पूर्ण मन्दिर के दर्शन कर लिए थे और वापस नाव में बैठकर उसी जगह आ गए जहा से नाव में बैठे थे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब सोचा क्यों न आसपास भी देखा जाय क्या है तो आपको बता दू यह पूरा स्थल  पर्यटन स्थल ही है और इस मन्दिर के आसपास एक सुन्दर पार्क बना है जहाँ हरी भरी घास है मैंने थोड़ी देर यहाँ घुमक्कड़ी की और यहाँ पर बने एक आरती स्थल को देखा जो वाकई में सुन्दर था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब मेरी ये समझ आ रहा था की इस मन्दिर का नाम तो <strong>गोमेश्वर शिव मंदिर</strong> है लेकिन इस क्षेत्र का नाम उपासना स्थल है और  तो इस तरह मेरी सन 2021 की पहली घुमक्कड़ी सफल रही और मुझे बहुत ही मजा आया , और मन्दिर का वातावरण देखके मुझे लगा की गर्मियों में यहाँ ठंडा रहता होगा |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="530" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lucknow_Ka_Shiv_Mandir.jpg" alt="गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी" class="wp-image-10135" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lucknow_Ka_Shiv_Mandir.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2021/01/Lucknow_Ka_Shiv_Mandir-226x300.jpg 226w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>गोमेश्वर शिव मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-medium-font-size"><strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661086684216"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; लखनऊ में कौन सी नदी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लखनऊ में गोमती नदी है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661086714653"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; गोमेश्वर शिव मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> मतलब उत्तर प्रदेश में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661086760749"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; लखनऊ का <strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर </strong>किस नदी के मध्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">गोमती नदी </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661086816189"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Gomeshwar Shiv Mandir Lucknow me kya khas hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">Gomeshwar Shiv Mandir Lucknow Ki Khas bat hai ki yah mandir nadi ke madhy ek Tapu par bana hai .</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661086905317"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; गोमेश्वर शिव मंदिर क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">क्यूंकि यह एक पुराना शिव मंदिर है और इस मंदिर तक आने के लिये हमें नाव का सहारा लेना होता है |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">दोस्तों लखनऊ के अन्दर गोमती नदी के मध्य में एक ऐसा मन्दिर जहाँ आप नाव द्वारा जाए यह एक सुखद अनुभव है और सबसे  अच्छी बात की इस क्षेत्र में एक बेहद ही सुन्दर पार्क बना हुआ है तो आप अपने परिवार के साथ यहाँ आकर कुछ अच्छा समय व्यतीत कर सकते है  |</p>



<p class="has-medium-font-size"><strong>गोमेश्वर शिव मन्दिर लखनऊ यूपी</strong> की यह पोस्ट आपको कैसे लगी कमेन्ट करके जरूर बताये |</p>
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		<title>एक कप चाय और घुमक्कड़ी का रिश्ता &#8211;  एक मजेदार चाय का वृतांत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2020 14:16:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Ek Cup Chay]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक कप चाय और घुमक्कड़ी का रिश्ता बहुत ही गहरा है दूसरो का तो पता नहीं लेकिन मेरी कोई भी घुमक्कड़ी बिन चाय के अधूरी है ,  और मेरी मानिये तो आप की घुमक्कड़ी की सारी थकान को चंद मिनटों में उड़न छू करने का दम रखती है सिर्फ एक कप चाय , यह पोस्ट एक वृतान्त की तरह ही है   &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"><strong>एक कप चाय</strong> और घुमक्कड़ी का रिश्ता बहुत ही गहरा है दूसरो का तो पता नहीं लेकिन मेरी कोई भी घुमक्कड़ी बिन<a rel="noreferrer noopener" aria-label=" चाय (opens in a new tab)" href="https://www.britannica.com/topic/tea-beverage" target="_blank"> चाय</a> के अधूरी है ,  और मेरी मानिये तो आप की घुमक्कड़ी की सारी थकान को चंद मिनटों में उड़न छू करने का दम रखती है सिर्फ <strong><em>एक कप चाय</em></strong> , यह पोस्ट एक <a href="https://safarjankari.com/yatra-vritant/">वृतान्त</a> की तरह ही है   |</p>



<h2 class="wp-block-heading">एक कप चाय</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हम भारतीयों के शौख बड़े न्यारे होते है जिसमे से एक शौख है <strong>एक कप चाय </strong>का, हमारे जीवन में चाय का महत्त्व अत्यधिक है हम हिन्दुस्तानी हर छोटी छोटी बात पर चाय को ही याद करते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> ख़ुशी में भी चाय , दुःख में भी चाय , थकान मिटानी हो तो चाय ,  नींद भगानी हो तो चाय ,  सुबह उठके सबसे पहले चाय , कोई मेहमान आये तो उसके स्वागत में चाय ,  मूड फ्रेश करना हो तो चाय , दोस्तों के साथ गप्पे मारनी हो तो साथ हो चाय , बहुत सर्दी है जरा चाय बना लो , गर्मी है चाय पीओ गर्मी को गर्मी ही काटती है |</p>



<h3 class="wp-block-heading">घुमक्कड़ी  और  प्याली भर चाय  का रिश्ता</h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">अब चाय के रिश्तो को हम लोग जोड़ेंगे घुमक्कड़ी से और ये बात हर एक सच्चा घुमक्कड़ी जो चाय का दीवाना है बखूबी समझता है की चाय की चुस्कियो के साथ घूमने का मज़ा ही निराला है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> जाहिर सी बात है घुमक्कड़ी भी आसान नहीं हम कई बार लम्बी लम्बी यात्राये करते है तो स्ट्रेस मतलब तनाव तो आ ही जाता है और इसी तनाव को दो दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका <strong>एक कप चाय </strong>ही है |</p>



<h4 class="wp-block-heading"> घुमक्कड़ी , चाय और मेरे अनुभव </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एक बार मै लखनऊ के एक बहुत ही प्रसिद्ध मन्दिर <a href="https://safarjankari.com/chandrika-devi-mandir-51-shaktipeeth-mandir-lucknow-hindi-me/">माँ चन्द्रिका देवी</a> गया था वहां दर्शन करने के उपरान्त एक चाय की दूकान पर बैठा वहां एक छोटी से लड़की थी उससे पूछा तो बोली रुको मम्मी को बुलाती हूँ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">वो बिटिया पढ़ रही थी फिर उसकी मम्मी आई उन्होंने बड़े ही सेवा भाव से हमारे लिए चाय बनाई और कुल्हड़ में चाय परोसी ठंडी का मौसम था यह चाय पीकर अत्यंत आनन्द आ गया अच्छा कुल्हड़ में चाय पीने का अपना एक अलग ही स्वाद है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="500" height="412" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/03/कुल्हड़_वाली_चाय_लखनऊ.jpg" alt="कुल्हड़ वाली चाय लखनऊ" class="wp-image-2736" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/03/कुल्हड़_वाली_चाय_लखनऊ.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2020/03/कुल्हड़_वाली_चाय_लखनऊ-300x247.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption>कुल्हड़ वाली चाय लखनऊ</figcaption></figure>
</div>


<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">चलिए अब <strong>एक कप चाय</strong> की कीमत को घुमक्कड़ी से जोड़ते हुए मै अपनी एक  छोटी सी घुमक्कड़ी  का किस्सा सुनाता हूँ  , मै नजाकत के शहर लखनऊ में था अपने मित्र वैभव से बात की कि क्या चलोगे त्रिवेणी संगम प्रयागराज तों उधर से जवाब आया चलो चलके इलाहबाद की चाय पी जाएगी तो बस फिर तय हुआ की शाम की 6 बजे वाली ट्रेन गंगा गोमती से चलेंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मै 5 बजे ही लखनऊ के चारबाग पहुँच गया था सितम्बर का महीना था ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पर आ चुकी थी इस ट्रेन में ज्यादातर डिब्बे जनरल वाले ही होते है  अपने मन मुताबिक सीट सर्च करी फिर वैभव भाई को फ़ोन किया बोले 10 मिनट में आ रहा हूँ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">फिर करीब 15 मिनट बाद उनका फ़ोन आया की भैया किस डिब्बे में हो तनिक बाहर निकल के मुंह तो दिखाओ तो मै अपने डिब्बे के गेट पर आया और क्या देखता हूँ  वैभव भाई अपने दोनों हाथो में <strong>एक &#8211; एक कप चाय</strong> लिए तेजी से चले आ रहे थे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हमने कहा ये क्या यार चाय क्यों तो वो बोला अरे साथ बैठकर चुस्की मारेंगे मैंने कहा चलो ठीक , हालाँकि मै भी यही कहता हूँ की रेलवे स्टेशन की चाय अच्छी नहीं होती लेकिन व्यक्तिगत तौर से पीता भी जरूर हूँ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">हम लोग चाय की चुस्कियां ले ही रहे थे तब तक ट्रेन चल दी हम दोनों  आपास में इधर उधर की बाते करते रहे और करीब 8 बजे मै तो नींद के आगोश में आ गया मेरी यही दिक्कत है ट्रेन में जब हवा लगती ठंडी-ठंडी तब सो जरुर जाता हूँ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">करीब 10 बजे नींद खुली तो देखा हम लोग माँ गंगा की पवित्र नगरी <a aria-label="इलाहबाद  (opens in a new tab)" href="https://www.lonelyplanet.com/india/uttar-pradesh/allahabad" target="_blank" rel="noreferrer noopener">इलाहबाद </a>पहुच चुके थे हम दोनों प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर उतर लिए और समय था 11 बजे , अब वैभव को तलाश थी रुकने के जुगाड़ की लेकिन मै ढूंढ रहा था कोई बढ़िया दुकान हो <strong><em>एक कप चाय</em></strong>  पी जाय और लो साहब दिख गई अपनी मंजिल |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एक नौजवान लड़का अपनी भट्ठी को सुलगा रहा था और चाय को शायद बना रहा था , पहुँच गए हम लोग <strong>एक कप चाय</strong> के जुगाड़ में लेकिन ये क्या वो सारी चाय केतली में डालकर किसी होटल में दे आया लेकिन हम लोगो से बोला रुको अभी आते है खैर दो मिनट में ही आ गया फिर बोला बताओ मैंने कहा दोस्त एक कड़क चाय पिला दो |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/meri-pehli-hawai-yatra/">मेरी पहली हवाई यात्रा का मजेदार अनुभव </a><br><a href="https://safarjankari.com/vindhyavasini-mandir-ka-yatra-vratant/">विन्ध्याचल धाम की में यात्रा का वृतान्त</a></p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">वो बोला भैया स्पेशल चाय बनाऊ तो वैभव बोला हा यार आप स्पेशल ही बनाओ लो अब क्या था हमारी चाय बनाने के लिए भगोने में पानी , दूध , चाय पत्ती , इलायची पड़ चुकी थी वो भगोना नीचे से जला हुआ था और भट्ठी की धीमी धीमी आंच के ऊपर रखा हुआ |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> वैभव और हम भगोने में ही झाँक रहे थे हमारी स्पेशल चाय में पड़ा दूध और पानी आपस में ऐसे घुल रहे थे जैसे कभी अलग थे ही नहीं |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">साथ साथ चाय की पत्ती भी अब शरमाकर लाल हो चुकी थी वही शक्कर ने भी अपनी मिठास घोल दी थी अब इलायची क्या चुप रहती उसने अपनी महक को इस चाय में मिला दिया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">जब चाय में उबाल आया तो इसमें अदरक भी डाल दी गई वो सोंधी सोंधी खुशबू चाय की वाकई में नथुनों में घुसकर ललचवा रही थी खैर अदरक पड़ने के बाद एक और उबाल ये क्या अबकी से उबाल आने पर कुछ चाय भगोने से निकलकर भट्ठी पर गिरी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> ऐसा लग रहा हो जैसा भगोना भट्ठी को भी चाय का स्वाद चखा रहा हो अब हमारे सामने कांच के मोटे वाले ग्लास में चाय परोसी गई |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यकीन मानिये वो चाय देखकर एक गहरा सकूं मिल रहा था तब तक चाय बनाने वाले उस नेक लड़के ने बिस्कुट भी दिए जब मैंने उस चाय की पहली चुस्की ली सच में स्पेशल से भी स्पेशल थी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> ये चाय शायद मेरे जीवन की अब तक की सबसे स्वादिष्ट चाय थी ये हम दोनों ने उस नौजवान को धन्यवाद कहा चाय के पैसे दे कर चले गए रूम सर्च करने और अगले दिन इलाहाबाद घुमा और कई जगह चाय पी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">दोस्तों घुमक्कड़ी में अगर आपको मजेदार <strong>एक कप चाय</strong> मिल जाए तो घुमक्कड़ी का मजा दोगुना हो जाता है अच्छा मै तो नया-नया घुमक्कड़ी हूँ अभी ज्यादा घूमा नहीं लेकिन मुझे पहाड़ो पर <strong><em>एक कप चाय</em></strong>  पीने का बड़ा ही मन है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> हालाँकि ऋषिकेश में राम झूला के समीप यह असीम सुख प्राप्त कर चुका हूँ लेकिन सोचता हु जो बर्फ वाले पहाड़ होते है वहां सामने पहाड़ देखते हुए चाय की चुस्की मारना क्या आनंद होगा देखते है कब मौका मिलता है |</p>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">बहुत से लोग चाय की बुराई भी करते है लेकिन मेरा व्यक्तिगत यह मानना है किसी भी चीज की अति नही करनी चाहिए आप चाय पिए इसमें <a aria-label="चीनी (opens in a new tab)" href="https://en.wikipedia.org/wiki/Sugar" target="_blank" rel="noreferrer noopener">चीनी</a> की  मात्रा जरूर कम रखे|</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> मै अपनी <a href="https://safarjankari.com/allahabad-me-ghumne-ki-jagah/">इलाहाबाद यात्रा</a> की यह <strong>एक कप चाय</strong> कभी भूल नहीं पाउँगा आपके पास भी कोई ऐसा किस्सा हो तो कमेन्ट बॉक्स में जरूर लिखे |</p>
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		<title>Meri Pehli Hawai Yatra &#8211; पहली हवाई यात्रा के कुछ मज़ेदार अनुभव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Sep 2019 13:21:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[यात्रा वृतांत]]></category>
		<category><![CDATA[Travel Guide]]></category>
		<category><![CDATA[Yatra Vritant]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पहली हवाई यात्रा के उत्साह, रोमांच, थोड़ा सा डर, जिज्ञासा से मन उथल पुथल हो रहा था जैसे तैसे चारबाग रेलवे स्टेशन पर पहुँचा, लखनऊ चारबाग सुबह 9 बजे ही पहुँच गया था जबकि मेरी गोवा की फ्लाइट शाम 5:30 पर थी खैर अपने एक रिश्तेदार के घर चला गया चाय नाश्ता खाना पीना करके कुछ आराम की और 3 बजे फिर आ गया चारबाग और पहुँच गया मेट्रो स्टेशन वाकई मे लखनऊ की मेट्रो के स्टेशन देखते ही बनते है, टिकट काउंटर पर जाकर लखनऊ एयरपोर्ट की टिकट ली और चल पड़ा जैसे ही प्लेटफॉर्म पर पंहुचा मेट्रो रेल आ चुकी थी मुझे तो जल्दी थी ही फटाफट चढ़ गया वाकई मे साफ़ सफाई नज़र आ रही थी मेट्रो मे, मेरा मेट्रो का सफर भी शानदार रहा &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h2 class="wp-block-heading">Meri Pehli Hawai Yatra</h2>



<p><strong>Meri Pehli Hawai Yatra</strong> के उत्साह, रोमांच, थोड़ा सा डर, जिज्ञासा से मन उथल पुथल हो रहा था जैसे तैसे चारबाग रेलवे स्टेशन पर पहुँचा, लखनऊ चारबाग सुबह 9 बजे ही पहुँच गया था जबकि मेरी <a href="https://safarjankari.com/goa-me-ghumne-ki-jagah/">गोवा</a> की फ्लाइट शाम 5:30 पर थी |</p>



<p>खैर अपने एक रिश्तेदार के घर चला गया चाय नाश्ता खाना पीना करके कुछ आराम की और 3 बजे फिर आ गया चारबाग और पहुँच गया मेट्रो स्टेशन वाकई मे <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Lucknow_Metro" target="_blank" rel="noopener noreferrer">लखनऊ की मेट्रो</a> के स्टेशन देखते ही बनते है |</p>



<p>टिकट काउंटर पर जाकर लखनऊ एयरपोर्ट की टिकट ली और चल पड़ा जैसे ही प्लेटफॉर्म पर पंहुचा मेट्रो रेल आ चुकी थी मुझे तो जल्दी थी ही फटाफट चढ़ गया वाकई मे साफ़ सफाई नज़र आ रही थी मेट्रो मे, मेरा मेट्रो का सफर भी शानदार रहा |</p>



<p>चलो अब पहुँच गए चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट अब वहां आई-डी और टिकट दिखाकर अन्दर प्रवेश लिया फिर सबसे पहले पूरा एयरपोर्ट देखा भैया <strong>Meri Pehli Hawai Yatra</strong> थी तो कौतूहल चरम पर था |</p>



<p>चलिए अब लगेज चेक करवाया मेरे पास तो मात्र एक पिट्ठू बैग था बस सारी औपचारिकताये को पूरा करके मैं एक सीट पर बैठ गया कुछ देर बाद पता चला की हमारी फ्लाइट के लिए लोग जाने लगे है, मैं दौड़ा और लाइन मे लग गया काउंटर पर फिर बोर्डिंग पास दिखाकर आगे बढ़ गया |</p>



<p>इण्डिगो की एक बस आई और अपने गंतव्य&nbsp; मतलब <strong>Meri Pehli Hawai Yatra </strong>के ऐरोप्लेन तक ले गई सबसे पहले तो जी भर के अपने हवाईजहाज ( मतलब जिसपर यात्रा करनी थी ) को निहारा दूर से तो छोटा सा लगता है पास से बहुत ही बड़ा फिर कदम बढ़ा दिए अन्दर की तरफ एयर-होस्टेस ने स्वागत किया और मैंने भी उनको नमस्कार बोलकर उनका अभिवादन स्वीकार किया |</p>



<h4 class="wp-block-heading">अगस्त 2019 &#8211; लखनऊ से गोवा &#8211; Meri Pehli Hawai Yatra</h4>



<p>अब मै हवाई जहाज के अन्दर था मुझे हवाई जहाज एक बड़ी डीलक्स बस की तरह दिखा खैर अपनी सीट ढूंढी और बैठ गया कौतूहलवश सीट बेल्ट को बांधने का प्रयास करने लगा हड़बड़ाहट मे मुझसे बेल्ट बाँधी ही नहीं जा रही थी तो पड़ोस मे बैठे एक सहयात्री ने मेरी मदद की |</p>



<p> मैंने कहा अरे इतना आसान था तब भी मुझसे नहीं हो रहा था वो सज्जन मुस्कुरा दिये अब एयर-होस्टेस ने सारे नियम बताये जिन्हें कोई भी सुन नहीं रहा था लेकिन मैंने बड़े ही ध्यान से सारे नियम सुने , यह <em><strong>Meri Pehli Hawai Yatra </strong></em>थी और <strong>पहली हवाई यात्रा</strong>&nbsp;में नियम सुनने भी चाहिए ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है&nbsp;|</p>



<p>और फिर वो घड़ी आ गई जिसका मुझे कब से इंतजार था हवाईजहाज अपने रनवे पर रेंगने लगा और रेंगते रेंगते इतनी स्पीड तेज हो गई की पूछिए मत और अब मेरे प्लेन ने अवध की ज़मीन को अलविदा बोल दिया था मेरी निगाहेँ खिड़की पर थी |</p>



<p> मेरे ऊपर रोमांच छाया हुआ था ऊपर से नजाकत का शहर लखनऊ बड़ा प्यारा लग रहा था पता नहीं मैं किस सोच मे था तब तक प्लेन मे कुछ हुआ ऐसा प्रतीत हुआ की नीचे गिरे यह बिलकुल वैसा ही अनुभव था जैसे लिफ्ट में होता है लेकिन लिफ्ट से कही ज्यादा तेज और कई बात हुआ था |</p>



<p>अब हमारा हवाईजहाज आसमान को चीरते हुए काफी ऊपर पहुच चूका था , <strong>Meri Pehli Hawai Yatra </strong>असल में अब शुरू हो गई थी&nbsp; खिड़की का नजारा बहुत ही नया था मैंने सोचा पहाड़ दिख रहे है की बादल है |</p>



<p>अब हवाईजहाज में चहलकदमी होने लगी थी एयरहोस्टेस अपनी खाने की ट्राली लेकर जिसको जो चाहिए वो मुहैया करवा रही थी अच्छा एयरहोस्टेस के बोलने का लहजा वाकई में काबिलेतारीफ होता है |</p>



<p>हमने भी सोचा चलो थोडा खड़े होकर पैर सीधे किये जाय और वाशरूम भी देखा जाय कैसा होता है हवाईजहाज का, कौतुहलवश सीट बेल्ट खोलकर खड़े हो गये और पीछे की तरफ चल दिए , उड़ते हुए जहाज में चलना भी एक सुखद अनुभव था खैर अत्यंत साफ़ सुथरा आधुनिक तकनीको से युक्त ये वाशरूम था मै पुनः आकर अपनी सीट पर बैठ गया |</p>



<p>अब जो एयरकंडिशनर की हवा के लिए सीट के ऊपर बटन होता है उसको पहले तो समझा फिर इस्तेमाल किया , अब सामने जो मैगजीन रखी थी उसको पढ़ा मुझे मैगजीन पढने की उत्सुकता नही थी बस जो आगे खान-पीने का सामान रखने के लिए सीट में ही इनबिल्ट छोटी सी मेज होती है उसका उपयोग करना चाह रहा था  |</p>



<p>लखनऊ से जुडी अन्य पोस्ट यहाँ पढ़े &#8211;&nbsp;</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/chandrika-devi-mandir-51-shaktipeeth-mandir-lucknow-hindi-me/">चन्द्रिका देवी मन्दिर लखनऊ की सम्पूर्ण जानकारी&nbsp;</a></p>



<p><a href="https://safarjankari.com/lucknow-me-ghumne-ki-jagah-sirf-ek-din-me/">घूमिये लखनऊ एक दिन में हमारे साथ</a>&nbsp;</p>



<p>अच्छा मोबाइल तो ऐरोप्लेन मोड पर था तो और इतने ऊपर शायद इन्टरनेट चलता भी नहीं , अच्छा एक और समस्या हुई थी मेरे साथ जो बता दू कान दर्द वो भी बड़ा अजीब सा जब आप ऊपर उड़ते हो तो वायु के दबाव के चलते कान में दर्द होता है |</p>



<p> सबको नही होता परन्तु कुछ लोगो को होता है खासकर <strong>पहली हवाई यात्रा </strong>वालो को जिनमे से हम भी एक थे , लोगो की आवाजे बहुत ही धीरे सुनाई दे रही थी हमको लेकिन मेरे पड़ोस में जो सज्जन बैठे थे उनके साथ ये समस्या नहीं थी वो बैठे मुस्कुरा रहे थे फिर मुझसे बोले की |</p>



<p>फिर उन्होंने अपने बैग से कुछ निकाला मैंने देखा वो ऑरेंज वाली चूसने वाली&nbsp; टाफी थी बचपन याद आ गया 1 रुपये की 8 टॉफी मिलती थी खूब चूसते थे उन्हें क्यूंकि इससे सस्ता कुछ मिलता नहीं था और उस समय जेब खर्च भी एक रुपये दो रुपये ही मिलता था |</p>



<p> खैर उन सज्जन ने मुझे मेरे बचपन से बाहर निकाला और बोले ये टॉफी चूसो शायद आराम मिले हमने ले ली परन्तु कोई ख़ास आराम नही मिला फिर वो सज्जन बोले मुह से सांसे लो फिर एक नाक से निकालो वही मतलब अनुलोम विलोम |</p>



<p>खैर मैंने उन भले मानुष की बात मानकर यह भी किया अचानक कान से एक पट्ट की आवाज आई और सच में आराम मिल गया , कान दर्द <strong><em>Meri Pehli Hawai Yatra</em> </strong>का एक दुखद अनुभव रहा |</p>



<p>अब देखा सब लोग नीचे देख रहे थे शायद गोवा आ गया था नीचे की रौशनी देखते ही बन रही थी मैंने टकटकी फिर से खिड़की की तरफ बाँध दी थी, हालाँकि अब फिर से प्लेन ऊपर नीचे हो रहा था जो की एक डर पैदा कर रहा था |</p>



<p>अब हमारा <a href="https://www.merriam-webster.com/dictionary/aeroplane">हवाईजहाज</a> गोवा की जमीन पर दौड़ रहा था, धीरे धीरे सभी यात्रियों ने अपनी सीट बेल्ट खोली मैंने भी खोली और ऊपर से अपना बैग उठाया और समीप बैठे सज्जन का भी बैग उठाकर उनको दिया, सीढियों से निकलकर मै गोवा एअरपोर्ट पर पहुच चुका था गोवा के एअरपोर्ट की भी बनावट शानदार थी और <strong>Meri Pehli Hawai Yatra </strong>भी शानदार रही जिसे मै अपने जीवन में कभी भूल नहीं पाउँगा |</p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659188731774"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हवाई यात्रा के दौरान कितने घंटे पहले एअरपोर्ट आना होता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">लगभग दो घंटे पहले आप एअरपोर्ट आ जाओ |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659188873103"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या हवाई जहाज में वाशरूम की सुविधा होती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जी हां हवाई जहाज में आपको वाशरूम की सुविधा मिल जाती है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659188912263"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या अप कभी हवाई जहाज में बैठे है अपना अनुभव लिखिये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पोस्ट को पढिये यही मेरा अनुभव है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659188962127"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हवाई यात्रा के दौरान कान में होने वाला दर्द या एक अजीब सी आवाज कब सही होती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह तो व्यक्ति व्यक्ति पर निर्भर करता है जब आप हवाई जहाज से उतर जाते हो तो यह आवाज धीरे धीरे कम होने लगती है और शायद अगली सुबह तक बिलकुल आप नार्मल हो जाये |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659189127664"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; बोर्डिंग पास क्या होता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आपने जिब भी एयरलाइन से टिकट बुक किया हुआ है उस एयरलाइन के काउन्टर से आपको एक बोर्डिंग पास लेना होता है यही आपको हवाई जहाज पर दिखाना होता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659189317168"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; फ्लाइट का बोर्डिंग पास कैसे निकाला जाता है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आप अपनी एयरलाइन के काउन्टर पर जायेंगे वहा वो लोग आपको बोर्डिंग पास निकलकर उसका प्रिंट दे देंगे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659189389305"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या हवाई जहाज में खाना ले जा सकते है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जी बिलकुल आप ले जा सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659189524649"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या हवाई जहाज में पानी फी होता है  ?</strong> <p class="schema-faq-answer">निर्भर करता है एयरलाइन कम्पनी पर सबके अपने अपने नियम है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1659189799840"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; फ्लाइट में क्या क्या ले जाना मना है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माचिस , लाईटर , बैटरी , सेल , नुकीला सामान , मेटल वाली कैंची , खेल वाले सामान जैसे हाकी स्टिक क्रिकेट बैट तीर धनुष आदि |</p> </div> </div>
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