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	<title>Etihasik Kahani Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
	<lastBuildDate>Mon, 31 Oct 2022 13:59:52 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Etihasik Kahani Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>Humayun Tomb History in Hindi &#8211; हुमायूँ के मकबरे का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Oct 2022 13:59:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p> हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है और यह मुग़ल शासक हुमायूँ का मकबरा है इस पोस्ट में हम इस मकबरे के इतिहास से सम्बन्धित बात करेंगे और हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया कब बनवाया जैसे प्रश्नों के उत्तर भी जानेंगे &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/humayun-tomb-history-in-hindi/">Humayun Tomb History in Hindi &#8211; हुमायूँ के मकबरे का इतिहास</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Humayun Tomb History </strong>&#8211; हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है और यह मुग़ल शासक<a href="https://whc.unesco.org/en/list/232/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"> हुमायूँ का मकबरा</a> है इस पोस्ट में हम इस मकबरे के इतिहास से सम्बन्धित बात करेंगे और <strong>हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया कब बनवाया</strong> जैसे प्रश्नों के उत्तर भी जानेंगे |</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसे एक बात ज्यादा खास बनाती है वह है यह मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप का पहला उद्यान मकबरा था इसका निर्माण मुग़ल वास्तुकला में हुआ है , इस मकबरे में हुमायूँ की कब्र के अलावा और भी कई राजशी व्यक्तियों की कब्रे है  |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Humayun Tomb History  -हुमायूँ के मकबरे का इतिहास </h2>



<p class="wp-block-paragraph">हुमायूँ का मकबरा दिल्ली के पुराने किले पास है और दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो भी दिल्ली घूमने आता है उसकी लिस्ट में हुमायूँ का मकबरा भी शामिल रहता है  हालाँकि आज के दिन यह मकबरा लाल किला , कुतुबमीनार से काफी कम प्रसिद्ध है | </p>



<p class="wp-block-paragraph">सन 1556 में हुमायूँ की मृत्यु हुई थी और उस समय हुमायूँ दिल्ली के पुराने किले में दफना दिया गया था फिर किन्ही कारणवश तकरीबन 9 साल बाद हुमायूँ के मकबरे का निर्माण का कार्य शुरू हुआ तब हुमायूँ को पुराने किले से लाकर इस मकबरे में दुबारा दफनाया गया था |</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Humayun Tomb History</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi.jpg" alt="Humayun Tomb History in Hindi" class="wp-image-12350" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>Humayun Tomb </figcaption></figure>



<h4 class="wp-block-heading">हुमायूँ का मकबरा कब बनाया गया था </h4>



<p class="wp-block-paragraph">यह मकबरा 1565 से बनना शुरू हो गया था और सन 1572 में यह बनकर तैयार हो गया था इस मकबरे को बनाने में लगभग 8 साल लग गए थे , यह मकबरा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में भी शामिल है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया </h4>



<p class="wp-block-paragraph">यह मकबरा सम्राट अकबर के आदेश पर एक फ़ारसी वास्तुकार ने बनवाया था जिसका नाम मीराक मिर्ज़ा घियाथ था इस कार्य में हुमायूँ की पत्नी ने वास्तुकार की मदद की थी | हुमायूँ की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को सदमा लग गया था वो काफी दुखी हुई थी तभी उन्होंने अपने शौहर की याद में मकबरा &#8211; ए &#8211; हुमायूँ बनवाने का प्रयास किया |</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मकबरे के वास्तुकार मीरक मिर्जा साहब की मृत्यु मकबरे के अधूरे काम के मध्य हो गई थी तो बाकी का काम इन्ही के पुत्र  सैय्यक मुहम्मद इब्र ने किया था |</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-india-gate-in-hindi-india-gate-kisne-banaya-tha/">History of India Gate in Hindi &#8211; इण्डिया गेट का इतिहास </a><br><a href="https://safarjankari.com/information-of-red-fort-in-hindi/">Information of Red Fort in Hindi </a></p>



<h4 class="wp-block-heading">वास्तुकला </h4>



<p class="wp-block-paragraph">आइये अब हुमायूँ के मक्बरे के वास्तुकला को थोडा सा जान लेते है तो यहाँ पर जो सबसे प्रमुख ईमारत बनी है वही हुमायूँ का मकबरा है और यहाँ पर सिर्फ हुमायूँ की ही कब्र ही नहीं अपितु उनकी बेगम सहित बहुत सी कब्रे है , इस मकबरे में कई छोटे छोटे स्मारक भी बने हुये है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मकबरे की दीवारों पर की गई कलाकृतियाँ बहुत ही सुन्दर है इस मकबरे में ज्यादातर चूना और पत्थर का उपयोग किया गया है और इसे लाल बलुआ पत्थरो से बनाया गया है इसकी जो दीवारे है उन पर सफ़ेद रंग का संगमरमर लगा हुआ है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मकबरे की जो सबसे खास बात है वह इसका चार बाग़ गार्डन जो की उस समय का पहला ऐसा मकबरा था जिसमे यह चार बाग़ गार्डन हो लगभग 30 एकड़ में बना यह चारबाग़ शैली का गार्डन बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह उद्यान बहुत ही भव्य है इसमें चार भाग में पैदल पथ है और दो भाग में जल नलिकाए है अरे ऐसे क्या लिखू जब आप जाओगे तब देखोगे इसकी गज़ब की वास्तुकला , इस मकबरे में एक हम्माम भी है जिसका उप्योह पहले स्नान हेतु किया जाता था  |</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है यह मुग़ल वास्तुकला से प्रेरित मकबरा है अगर हम इस मकबरे के खास खास जगहों की बात करे तो हुमायूँ के मकबरे में स्थित ईसा खान का मकबरा , नीला गुम्बद , चारबाग , अरब सराय  , हुमायूँ के नाई का मकबरा आदि खास है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">यदि हम इस मक्ब्रेकी लोकेशन की बात करे तो यह दिल्ली में निजामुदीन रेलवे स्टेशन से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है आप हज़रात निजामुदीन मेट्रो स्टेशन से भी यहाँ आ सकते है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">तो अब यदि आप दिल्ली से है या दिल्ली घूमने आते है तो एक बार हुमायूँ का मकबरा भी देख सकते है |</p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202613478"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पुरानी दिल्ली  में हज़रत निजामुदीन एरिया में | </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202708346"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">अकबर और हुमायूं की बेगम के आदेश अनुसार वास्तुकार मीराक मिर्ज़ा घियाथ ने इसे बनवाया |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202786537"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Humayun Tomb History kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पोस्ट पढ़िए आपको मकबरे से सम्बंधित समस्त इतिहास मिलेगा |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202830569"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा कब बनाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">1565 से बनने का कार्य शुरू हुआ था और 1572 में यह मकबरा बन गया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202965668"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ के मकबरे के वास्तुकार कौन थे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीराक मिर्ज़ा घियाथ |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667203018945"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ की बेगम का क्या नाम था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हमीदा बानो</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667203142881"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ के मकबरे का इतिहास बताइए ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हुमायूँ की मृत्यु सन 1556 में हुई थी उस समय हुमायूँ की दिल्ली के पुराने किले में दफना दिया गया था फिर अकबर और हुमायूँ की बेगम ने 1565 से मकबरा बनवाने का कार्य शुरू किया जो की 1572 में बन गया तब हुमायूँ को इस नए मकबरे में दफनाया गया था |</p> </div> </div>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Humayun Tomb History</strong> की यह सभी जानकारी हमने इतिहास की पुस्तकों और इन्टरनेट की मदद से ली है कोई त्रुटी हो तो माफ़ करियेगा |</p>
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		<title>ओरछा का इतिहास &#124; श्री राम राजा मन्दिर की कहानी &#124; राजा हरदौल की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Mar 2022 10:29:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[ओरछा धाम]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश में घूमने की जगहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ओरछा का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली है पढ़े इस पोस्ट में राजा राम मन्दिर की कहानी , राजा हरदौल की कहानी , ओरछा के किले और महलों का इतिहास  </p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ओरछा का इतिहास | श्री राम राजा मन्दिर की कहानी | राजा हरदौल की कहानी</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph"><strong>ओरछा का इतिहास </strong>बड़ा ही गौरवशाली है पढ़े इस पोस्ट में <strong>राजा राम मन्दिर की कहानी</strong>  <strong>राजा हरदौल की कहानी</strong>  <strong>ओरछा के किले और महलों का इतिहास</strong>  , <a href="https://www.tourism-of-india.com/orchha/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ओरछा </a>भारत के मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित एक ऐसा क़स्बा है जहाँ किले और मंदिरों का अपना एक अलग ही इतिहास है पर्यटन की दृष्टिकोण से यह जगह बहुत बढ़िया है आप हमारी पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/orchha-ghumne-ki-samast-jankari/">ओरछा में घूमने की जगहों की A to Z जानकारी – Orchha Tourist Places (2022)</a> से यहाँ घूमने की जानकारी पढ़ सकते है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">ओरछा का इतिहास</h2>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">बेतवा नदी के किनारे पर बसा ओरछा मध्य काल के समय में परिहार राजाओ की राजधानी हुआ करता था अच्छा परिहार राजाओ के बाद यहाँ पर चंदेल राजाओ ने भी शासन किया है और चन्देल शासको के बाद यहाँ पर बुन्देल राजाओ ने राज किया है  जो आपको वर्तमान में ओरछा दिखाई देता है उसके निर्माण की शुरुआत राजा रूद्र प्रताप सिंह ने सन 1501 से  करवाई था अब हम आपको इस जगह के प्रमुख प्रमुख जगहों के इतिहास से रूबरू कराते है विस्तृत में <em><strong>ओरछा का इतिहास</strong> </em> बताते है  &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री राम राजा मन्दिर की कहानी</h4>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">श्री राम राजा सरकार का महत्त्व आपको अयोध्या के बाद ओरछा में दिखाई देता है यहाँ लोग भगवान राम को अपना राजा मानते है यहाँ पर राम हर धर्म के राजा है दूर-दूर से लोग इस स्थल पर राम राजा के दर्शन करने आते है आइये अब इस मन्दिर के इतिहास पर आते है जो शुरू होता है मधुकर शाह जी के कार्यकाल से जो की यहाँ के महाराजा थे और कृष्ण भक्त थे  और महारानी जो की ग्वालियर जिले से थी वो एक राम भक्त थी महारानी का नाम कुंवर गणेश था |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">एक दिन मधुकर शाह और कुंवर गणेश बाते कर रहे थे और बातो की बातो में दोनों अपने अपने ईष्ट देव को लेकर झगडा करने लगे और महाराजा मधुकर शाह ने महारानी से बोल दिया कि यदि वो एक सच्ची राम भक्त है तो जाए अयोध्या और रामजी को यहाँ ओरछा ले आये अब महारानी जी ने भी यह बात मान ली और बोली की या तो अब मै अपने ईष्ट प्रभु राम को अयोध्या से ओरछा लाऊंगी या फिर अयोध्या में ही अपने प्राण त्याग दूंगी |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब क्या था महारानी कुंवर गणेश आ गई अयोध्या और सरयू नदी के किनारे शुरू कर दो अपने प्रभु राम जी की पूजा 7 दिन हो चुके थे ( कही कही 21 दिन बताया जाता है ) महारानी जी को श्रीराम ने दर्शन नहीं दिए अब महारानी जी हताश होकर अपने प्राण त्यागने का निर्णय लेती है और सरयू में छलांग लगा देती है  तभी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एक बालक के रूप में वहां आ जाते है ( कुछ लोगो का कहना है की सरयू में जब महारानी से छलांग लगाईं थी तो जलधारा में ही भगवान राम महारानी की गोद में बैठ गए थे ) |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब महारानी  बालक रूप में आये श्रीराम से ओरछा चलने का निवेदन करती है श्रीराम मान भी जाते है लेकिन तीन शर्तो के साथ अब महारानी कुंवर गणेश भगवान राम से उनकी शर्ते पूछती है अब आप शर्ते सुनिये &#8211; </p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">पहली शर्त &#8211; जहाँ हम जा रहे है वहां के सिर्फ हम ही राजा होंगे कोई दूसरा नहीं <br>दूसरी शर्त &#8211;  अयोध्या से ओरछा तक आपके साथ हम पैदल जायेंगे वो भी पुण्य नक्षत्र में <br>तीसरी शर्त &#8211;  यदि हम कही पर भी बैठ गए तो वहां से उठेंगे नहीं |<br><br>महारानी कुंवर गणेश ने श्रीराम की तीनो शर्ते मान ली फिर श्रीराम एक मूर्ति के रूप में महारानी की गोद में बैठ गए और महारानी पैदल ही ओरछा की तरफ चल दी और 8 महीने 28 दिन में वो ओरछा आ गई थी अच्छा यह भी कहा जाता है महारनी के ओरछा पहुँचने से पहले महाराजा मधुकर शाह को सपना आया था की महारानी भगवान राम को लेकर आ  रही है तो मधुकर शाह ने भगवान राम के लिये मन्दिर बनवाना शुरू कर दिया जिसे चतुर्भुज मन्दिर कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">लेकिन यह चतुर्भुज मन्दिर पूर्णता बन पाता उससे पहले ही महारानी कुंवर गणेश जी श्रीराम को लेकर ओरछा आ गई और श्रीराम को अपने महल की रसोई घर में थोड़े समय के लिए स्थापित कर दिया फिर जब चतुर्भुज मंदिर बन गया तब उस मूर्ति को रसोई घर से उठाकर इस चतुर्भुज मंदिर में स्थापित किया जाना था लेकिन श्रीराम की वह मूर्ति वहां से उठी ही नहीं इसी को सभी ने भगवान राम का चमत्कार माना और उसी महल को मंदिर बना दिया इसी महल नुमा मंदिर में आज आपको श्री राम राजा दर्शन देते है इस मंदिर को ही श्री राम राजा मन्दिर कहा जाता है |</p>



<p class="wp-block-paragraph">तो इसीलिये महल में बैठे राजा राम ओरछा के राजा है ओरछा में सिर्फ राजा राम की ही सर्कार चलती है यहाँ पर पुलिस द्वारा बन्दूक से राजा राम को सलामी दी जाती है <strong>ओरछा का इतिहास</strong> बगैर <strong>श्री राम राजा सरकार के इतिहास </strong>के अधूरा है  |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="450" height="600" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर.jpg" alt="श्री राम राजा सरकार मन्दिर Orchha Tourist Places" class="wp-image-10983" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर-225x300.jpg 225w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption>श्री राम राजा सरकार मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">राजा हरदौल की कहानी &#8211; ओरछा का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph"><strong>राजा हरदौल की कहानी</strong> बुन्देलखण्ड के लगभग हर घर मे सुनाई जाती है यह कहानी भाई बहन के प्रेम को दिखाती है देखिये हरदौल राजा वीर सिंह देव के पुत्र थे और जुझार सिंह हरदौल के भाई थे राजा वीर सिंह ने जुझार सिंह को ओरछा का राजा बनाया था और हरदौल को दीवान कोई व्यक्ति जो हरदौल से नफरत करता था उसने राजा जुझार सिंह को बहका दिया की हरदौल के अवैध सम्बन्ध जुझार सिंह की पत्नी चम्पावती के साथ है |<br><br>बस अब क्या था राजा जुझार सिंह ने रानी चम्पावती को हरदौल को जहर देने का आदेश दे दिया रानी गई लेकिन वो हरदौल को ज़हर न दे सकी अपनी भाभी की इज्जत की खातिर हरदौल ने स्वयं ही ज़हर पी लिया कहानी अभी समाप्त नहीं होती है हरदौल को बस्ती से दूर दफना दिया जाता है फिर एक दिन जुझार सिंह हरदौल की बहन कुंजावती आती है कुंजावती दतिया के राजा राजा रणजीत सिंह की पत्नी थी |<br><br>कुंजावती अपनी बेटी की शादी में राजा जुझार सिंह से भात मांगने आई थी लेकिन जुझार सिंह ने कुंजावती का यह निवेदन यह बोलकर ठुकरा दिया की कुंजावती तो हरदौल से ज्यादा स्नेह करती थी तो अब जाकर शमशान में हरदौल से ही भात मांगे अब क्या कुंजावती रोने लगी और रोते रोते ही पहुँच गई हरदौल की समाधि पर और भात मांगने लगी तभी एक आवाज आई की हरदौल भात लेकर आएगा |<br><br>लोककथाओ की माने तो सच में हरदौल की आत्मा अपनी भांजी की शादी में भात लेकर गई थी लेकिन यहाँ जो कुंजावती का दामाद था वो नहीं माना फिर हरदौल को अपने शरीर के साथ प्रकट होना पड़ा था तभी से बुन्देलखंड में हरदौल को देवता के रूप में पूजते है |<br><br>बुन्देलखण्ड में आज भी कोई भी शादी या यज्ञ इत्यादि होता है तो सबसे पहला निमन्त्रण हरदौल को ही दिया जाता है तो ऐसे थे हरदौल ओरछा में श्री राम राजा मंदिर के समीप ही हरदौल बैठका बना हुआ है , <strong>  राजा हरदौल की कहानी ओरछा का इतिहास</strong> में सदैव याद की जायेगी |</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी पढ़े &#8211; <a href="https://safarjankari.com/history-of-kumbhalgarh-fort-in-hindi/">History of Kumbhalgarh Fort in Hindi – कुम्भलगढ़ दुर्ग का इतिहास</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">सावन भादो पिलर ओरछा का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">सावन भादो मीनार श्री राम राजा सरकार मन्दिर के समीप ही बने हुये है इस दोनों मीनारों के बारे में किद्वंती है कि सावन महीने के ख़त्म के बाद और भादव का महिना शुरू होने से पहले यह दोनो मीनारे आपस में मिल जाती है और इन मीनारों के नीचे सुरंग बनी है जहाँ से राजपरिवार के लोग आया जाया करते थे फ़िलहाल अब ये सुरंगे बंद कर दी गई है वैसे ये जो दोनों पिलर के आपस में मिलने की बात है इसके कोई भी सबूत नहीं है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">ओरछा के किले का इतिहास </h4>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब बात करते <strong>ओरछा के किले के इतिहास</strong> बारे में राजा रूद्र प्रताप सिंह ने यह किला बनवाया था इसके बाद यही कई राजा हुये और सबने अलग अलग महल बनवाये थे </p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">सबसे पहले बात करते है <strong>जहाँगीर महल के इतिहास</strong> की जिसका निर्माण राजा वीर सिंह देव ने सन 1605 से 1627 के मध्य करवाया था इस महल का निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर के सम्मान में करवाया गया था ये महल बुन्देल और मुग़ल शिल्प कला का मिश्रित उदहारण है इस महल का जो प्रथम तल है उसका निर्माण सन 1606 में जहाँगीर के आने से पहले पूर्ण हो गया था बाकी जो दृतीय ताल पर जो कक्ष , गुम्बद और छत्रियां बनी है उनका निर्माण सन 1618 में हुआ था |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph"><br>राजा वीर सिंह और जहाँगीर की दोस्ती बहुत ही ज्यादा थी क्युंकी जब मुग़ल शासक अकबर ने अबुल गजल को जहाँगीर को काबू में करने के लिये भेजा था इसी बीच जहाँगीर की दोस्ती राजा वीर सिंह से हो गई थी तो फिर राजा वीर सिंह ने अबुल फज़ल को मरवा दिया था फिर जब जहाँगीर मुग़ल बादशाह बना तो उसने ओरछा को राजा वीर सिंह को सौंप दिया था ऐसा कुछ इतिहास है |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब बात करते है <strong>राय प्रवीण महल के इतिहास</strong> की यह महल भी ओरछा के किले के अन्दर बना हुआ है सन 1592 से 1605 के मध्य महाराजा राम शाह के छोटे भाई ओरछा के कार्यवाहक शासक थे जिनका नाम इन्द्रजीत सिंह था राय प्रवीण उनकी प्रेमिका थी राय प्रवीण एक कुशल नर्तकी थी , महाकवि केशवदास ने अपने ग्रन्थ कवी प्रिय में राय प्रवीण की सुन्दरता का खूब बखान किया हुआ है राय प्रवीण महाकवि केशवदास की शिष्या थी तो यह राय प्रवीण महल राजा इन्द्रजीत ने अपनी प्रेमिका राय प्रवीण के लिये ही बनवाया था |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब बात करते है किले के ही अन्दर स्थित <strong>राजा महल के इतिहास</strong> की जिसका निर्माण सन 1501 से 1531 के मध्य राजा रूद्र प्रताप ने शुरू करवाया था इसके बाद राजा रूद्र प्रताप सिंह के बड़े बेटे भारती चंद ने इस महल का कार्य 1531 से 1554 में मध्य में पूर्ण करवाया फिर इस महल में कुछ परिवर्तन भी हुए जो भारती चंद के अनुज मधुकर शाह ने 1554 से 1592 के मध्य करवाए |</p>



<p class="wp-block-paragraph">ओरछा का इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992646222"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओरछा का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह बताने के लिये हमने पोस्ट लिखी है आप  पढ़े और पोर इतिहास समझिये |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992756538"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; रामराजा सरकार की कहानी क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> रामराजा सरकार की कहानी ओरछा की महारानी कुंवर गणेश जी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी हमने लिखी है कृपया पोस्ट पढ़े |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992917963"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या <strong>ओरछा</strong> के इतिहास में राजा हरदौल की कहानी का महत्त्व है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">निसंदेह ओरछा से जुड़ा कोई भी मुद्दा हो तितिहस हो या भूगोल राजा हरदौल जरूर याद किये जायेंगे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993000293"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>ओरछा</strong> का किला किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा रुद्रप्रताप सिंह ने |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993032707"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; राय प्रवीण महल किसने और किसके लिए बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा इन्द्रजीत सिंह जे अपनी प्रेमिका राय प्रवीण के लिये यह किला  बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993129858"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>ओरछा </strong> का राजा महल किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा महल के निर्माण का काम राजा रूद्र प्रताप ने शुरू करवाया था बाद में भारती चंद और मधुकर शाह ने इसे पूरा बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993260827"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211;  जहाँगीर महल का निर्माण किसने करवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जहाँगीर महल का  निर्माण राजा वीर सिंह देव जी ने करवाया था |</p> </div> </div>



<p class="wp-block-paragraph">तो दोस्तों ये था <strong>ओरछा का इतिहास</strong> जिसमे हमने आपको <strong>श्री राम राजा मन्दिर की कहानी</strong> बताई <strong>राजा हरदौल की कहानी</strong> बताई   यह समस्त जानकारी मेरे खुद की नहीं है जो मैंने लोगो से सुना है ओरछा गया था तो वहां लगे पुरातत्व विभाग के बोर्ड में पढ़ा वही से समस्त जानकारी एकत्रतित करके यह पोस्ट लिखी है कही कोई गलत जानकारी हो तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में लिखकर अवश्य बता दे |<br></p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ओरछा का इतिहास | श्री राम राजा मन्दिर की कहानी | राजा हरदौल की कहानी</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास , बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 May 2021 16:27:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[बनारस में घूमने की जगहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास बड़ा ही रोचक है आपको बता दे काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जनपद में है वाराणसी को ही काशी कहा जाता है यह मन्दिर भगवान् शिव की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है और पूर्ण रूप से यह मन्दिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है आज हम आपको इस मन्दिर की समस्त पौराणिक कथाओ और इतिहास  के बारे में बतायेंगे &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/kashi-vishvanath-mandir-ka-itihas-hindi-me/">काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास , बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> बड़ा ही रोचक है आपको बता दे काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश राज्य के <a href="https://www.lonelyplanet.com/india/uttar-pradesh/varanasi">वाराणसी</a> जनपद में है वाराणसी को ही काशी कहा जाता है यह मन्दिर भगवान् शिव की <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/">12 ज्योतिर्लिंग</a> में से एक है और पूर्ण रूप से यह मन्दिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है आज हम आपको इस मन्दिर की समस्त पौराणिक कथाओ और इतिहास  के बारे में बतायेंगे |</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> <strong>और पौराणिक कथाये</strong> &#8211; History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</h2>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">प्रत्येक दिन हजारो श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन हेतु बनारस आते है आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बाबा विश्वनाथ मन्दिर की पौराणिक कथा बताएँगे और हम आपको इतिहास के पन्नो में जो जो जानकारी इस मंदिर के बारे में मिली है वह सब भी बताने का एक प्रयास करेंगे जिससे आपको भी थोडा आईडिया हो कि आखिर जहाँ आप जा रहे हो वहां का क्या इतिहास है क्या कथाये है |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">सबसे पहले तो आप यह जान लो की यह मन्दिर एक ज्योतिर्लिंग है और यह वाराणसी शहर में है जो की माँ गंगा के किनारे पर है तो अब आप समझ ही गये होंगे की यहाँ का धार्मिक महत्त्व अत्यधिक है अब आइये सबसे पहले बाबा विश्वनाथ मन्दिर के बारे में प्रचलित पौराणिक कथा / किद्वंती को जान लेते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>बाबा विश्वनाथ मन्दिर की पौराणिक कथा</strong> </h4>



<p class="wp-block-paragraph">काशी को सबसे पुराना नगर माना गया है और यह भगवान विष्णु भगवान शंकर और माँ पार्वती का प्रिय नगर है अब देखिये यहाँ ज्योतिर्लिंग भी है यह एक सप्तपुरी भी है और यहाँ मणिकर्णिका शक्तिपीठ भी है अगर हम पुराणों की माने तो यह नगरी सबसे पहले एक वैष्णव क्षेत्र थी मतलब भगवान विष्णु की प्रिय नगरी |<br><br> इसी काशी में विष्णु जी के आनंद के अश्रु भी गिरे थे जहाँ पे अश्रु गिरे थे वह स्थान बिन्दुसरोवर बन गया और बिंदुमाधव के नाम से वही पे विष्णु जी स्थापित हो गए |<br><br><a href="https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/">Uttarakhand me Ghumne Ki jagah – उत्तराखण्ड में घूमने वाली जगहे (2021)</a><br><br>उधर भोलेनाथ को काशी इतनी पसंद आई की उन्होंने विष्णु जी से इसे अपने लिये मांग लिया और इसे अपना निवास स्थान बना लिया कहा जाता है की काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी हुई है   |<br><br>एक अन्य कथा के अनुसार भगवान  शंकर और देवी पार्वती के विवाह के बाद शंकर जी तो कैलाश पे रहने लगे लेकिन माँ पार्वती  अपने पिता जी के यहाँ रहती थी तो यहाँ माँ पार्वती को पसंद न था इसलिए उन्होंने भोलेनाथ से अपनी व्यथा बताई और निवेदन किया की भोलेनाथ उन्हें भी अपने साथ रखे भगवान शंकर ने पार्वती जी की इस बात को माना और उन्हें अपने साथ अपनी प्रिय नगरी काशी ले आये और दोनों एक साथ ज्योतिर्लिंग में स्थापित हो गये |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार एक बार विष्णु जी और ब्रम्हा जी का आपस में मतभेद हो गया की दोनों में कौन खास है अब इस विवाद को सुलझाने के लिए शिवजी आये और उन्होंने एक प्रकाश स्तम्भ उत्पन्न किया और दोनों से बोले जाओ इस स्तम्भ का आदि और अंत पता करो जो पता कर लेगा वाही ज्यादा खास होगा अब क्या था विष्णुजी और ब्रम्हाजी निकल लिये उस विशाल प्रकाश स्तम्भ का पता लगाने युगों तक वे दोनों खोजते रहे |<br><br>और अंत में विष्णुजी ने अपनी हार स्वीकार कर ली परन्तु ब्रम्हा जी ने झूठ बोल दिया की उन्होंने प्रकाश स्तम्भ का सिरा देखा है इस बात पे शिवजी अत्यधिक क्रोधित हुए मतलब ब्रम्हा जी इस झूठ पे शिवजी को गुस्सा आ गया और उन्होंने ब्रम्हा जी को श्राप दे दिया की उनकी कभी पूजा नही की जाएगी यह प्रकाश स्तम्भ काशी में भी था |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>जानिये</strong> <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> &#8211; History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">बेशक <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> बहुत ही व्यापक और कष्टदायक है कष्टदायक इसलिए क्यूंकि इस ज्योतिर्लिंग मंदिर को कई बार तोडा गया मुहम्मद गौरी औरंग्जेब जैसे शासको ने काशी विश्वनाथ मन्दिर को तुडवाने में अहम् भूमिका निभाई थी | अब सबसे पहले इस बात की जानकारी कर लेते कि आखिर काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ था |</p>



<h5 class="wp-block-heading">काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ</h5>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">इस बात के कोई भी ठोस प्रमाण नहीं मिले है जिससे हम इस मन्दिर के निर्माण का सही वर्ष जान सके इस मंदिर का जो इतिहास है उसमे यह ११वी शताब्दी से जानकारी में आया है हालाँकि जो जानकारी है उसमे यह है की ११वी शताब्दी में इस पवित्र मंदिर का जीर्णोधार हुआ तो काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ इस बात के कोई पुख्ता तथ्य नहीं है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया </h5>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">यह प्रश्न भी सबके दिमाग में आता है की  बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया तो आपको बता दे की वर्तमान में जो बाबा विश्वनाथ का मंदिर आप देखते है उसका निर्माण सन 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था जो की इन्दोर की महारानी थी इसके अलावा जो ज्ञात इतिहास है उसके हिसाब से कई लोगो ने इस मन्दिर का जीर्णोधार कराया था जिसमे राजा हरिश्चंद्र , सम्राट विक्रमादित्य , राजा टोडरमल , पंडित नारायण भट्ट , महाराजा रणजीत सिंह प्रमुख थे |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">आइये अब शुरू करते है <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> जो हमें ज्ञात है शुरुआत होती है सन 1194 से इस सन में मुहम्मद गौरी ने बाबा विश्वनाथ का मन्दिर तुडवा दिया था और इतिहास की माने तो जो मंदिर मुहम्मद गौरी ने तुडवाया था उसी का जीर्णोद्धार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था मतलब जानकारी के अनुसार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य जिस मंदिर का जीर्णोधार किया उसी को मुहम्मद गौरी ने लूटा फिर तुडवा भी दिया |</p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब फिर से इस मंदिर को बनवाया गया होगा किसके द्वारा यह ज्ञात नहीं है जो जानकारी है वह है सन 1447 की 1447 में महमूद शाह ने इसे तोड़ दिया था फिर सन 1585 राजा टोडरमल ने इसे पुनः बनवाया और इस कार्य में टोडरमल की सहायता की पण्डित नारायण भट्ट ने अब जो जानकारी है उसके हिसाब से सन 1632 में शाहजहाँ ने इस मंदिर को तोड़ने के लिए सेना भेजी परन्तु हिन्दू लोगो ने इसका विरोध किया |</p>



<p class="wp-block-paragraph">सन 1669 में शासक औरंगजेब ने भी इसे तोड़ने के लिए एक आदेश पारित किया था जो की आज भी कोलकत्ता की एशियाटिक लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा हुआ है यही नहीं औरंगजेब ने मंदिर तो तोडा ही साथ ही वही ज्ञानवापी मस्जिद बनवा दी |<br><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a></p>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">अब सन 1780 में इन्दोर की महारानी अहिल्याबाई ने इस मंदिर का जीर्णोधार किया तो ये था <strong><em>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</em></strong>  हम आज बाबा विश्वनाथ का भव्य मन्दिर देखते है उसके लिए कई शासको ने अपना योगदान दिया कई शासको ने इसे लूटने का तोड़ने का प्रयास किया था वे सफल भी हुए थे लेकिन किसी न किसी महापुरुष ने फिर से इस मंदिर को बनवाया |</p>



<p class="wp-block-paragraph">काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662298850413"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मंदिर किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">वर्तमान में जो बाबा विश्वनाथ का मंदिर आप देखते है उसका निर्माण सन 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662298908497"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कब करवाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">११वी शताब्दी में इस पवित्र मंदिर का जीर्णोधार हुआ था , वर्तमान जो मंदिर है उसे 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662299103782"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> जो हमें ज्ञात है शुरुआत होती है सन 1194 से इस सन में मुहम्मद गौरी ने बाबा विश्वनाथ का मन्दिर तुडवा दिया था और इतिहास की माने तो जो मंदिर मुहम्मद गौरी ने तुडवाया था उसी का जीर्णोद्धार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था बाकी आप पोस्ट पढ़े |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662299215857"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> janne ke liye yah post poori padhiye .</p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify wp-block-paragraph">दोस्तों देखा आपने <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> <strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> जिसमे इस मंदिर पर कई आक्रमण हुए फिर भी यह आस्था का प्रतीक ज्योतिर्लिंग हमारे सामने है अद्भुत है हमारा भारत देश और यहाँ की आस्था पोस्ट पसंद आई हो तो कमेन्ट करके अवश्य बताये |<br></p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/kashi-vishvanath-mandir-ka-itihas-hindi-me/">काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास , बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>Meenakshi Temple Madurai History Hindi &#124; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2021 14:53:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Meenakshi Temple Madurai History की पोस्ट में हम जानेंगे तमिलनाडु प्रदेश के एक शहर मदुरई के एक विख्यात मन्दिर के इतिहास के बारे में इस मंदिर का नाम मीनाक्षी मन्दिर है आज हम यह भी जानेंगे कि मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया कब बनवाया और हम इस मन्दिर की सभी पौराणिक ऐतिहासिक कहानियो के बारे में भी जानेंगे &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/meenakshi-temple-madurai-history-in-hindi/">Meenakshi Temple Madurai History Hindi | मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph"><strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> की पोस्ट में हम जानेंगे तमिलनाडु प्रदेश के एक शहर मदुरई के एक विख्यात मन्दिर के इतिहास के बारे में इस मंदिर का नाम <a href="https://knowindia.gov.in/culture-and-heritage/monuments/meenakshi-temple-madurai.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">मीनाक्षी मन्दिर</a> है |</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph"> हम यह भी जानेंगे कि <strong>मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया कब बनवाया</strong> और हम इस मन्दिर की सभी पौराणिक <a href="https://safarjankari.com/tag/historical/">ऐतिहासिक</a> कहानियो के बारे में भी जानेंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इस पवित्र मंदिर में माता पार्वती को श्रद्धालु देवी मीनाक्षी के रूप में पूजते है और वही भगवान शिव को यहाँ सुन्दरेश्वर के रूप में पूजा जाता है तो इस मन्दिर को हम मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर के नाम से भी जानते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">यहाँ की विशेषता यह भी है की यहाँ एक साथ भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा की जाती है तो आइये जानते है <strong><em>Meenakshi Temple History in Hindi</em></strong> को |</p>



<h2 class="wp-block-heading">मीनाक्षी मन्दिर का इतिहास- Meenakshi Temple Madurai History</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">मदुरई के इस प्रसिद्ध मन्दिर के बारे में कई सारी पौराणिक कथाये प्रचलित है हम उन सभी कथाओ को <em>इस</em> पोस्ट में जानेंगे तो आइये शुरू करते है और अपने ज्ञान को बढ़ाते है &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">पाण्ड्य राजा मलयध्वज से सम्बन्धित कहानी &#8211; Meenakshi Temple Madurai History In Hindi About Pandya Raja MalayDhvaj</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">यह पौराणिक कथा अत्यधिक प्रचलित है राजा मलयध्वज जो की पांड्य वंश के राजा थे और इनकी पत्नी कंचनमाला थी इनके कोई भी सन्तान नहीं थी इसलिए ये दोनों राजा रानी परेशान रहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> संतान प्राप्ति हेतु इन दोनों ने अथक तप किया और इस तप के परिणामस्वरुप माँ पार्वती  एक तीन वर्षीय बालिका के रूप में यज्ञ कुंड की अग्नी में प्रकट हुई थी और उसी बालिका का नाम मीनाक्षी रखा गया था मीनाक्षी नाम रखने का कारण यह था की उस बालिका के नेत्र अत्यन्त सुन्दर थे |<br><br>बाद में राजा ने मिनाक्षी को ही अपने राज्य का अगला उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था  कहा जाता है कि देवी मीनाक्षी ने बहुत ही अच्छे तरीके से पांड्य राज्य पर शासन किया राजकुमारी मीनाक्षी ने कई शक्तिशाली राज्यों को अपने राज्य में मिलाया था |<br><br>हमारे इन आर्टिकल को भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-kedarnath-temple-in-hindi/">History of Kedarnath Temple in Hindi – केदारनाथ धाम की पौराणिक कथा</a><br><br>इनकी ख्याति सम्पूर्ण विश्व में हो गई थी फिर कुछ समय बाद भगवान शंकर सुन्दरेश्वर के रूप में प्रथ्वी पर आये और ये शिवजी का सुन्दरेश्वर रूप अति मनमोहक था इन्होने राजकुमारी मिनाक्षी से विवाह किया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> कहा जाता है यह विवाह सम्पूर्ण विश्व में बहुत ही प्रसिद्ध हुआ था इस विवाह में देवी-देवता तक सम्मिलित हुए थे आज भी मदुरई में इस विवाह को चिथिरई तिरुविजा के नाम से मनाते है |<br><br>कहा जाता है की वर्तमान में जहाँ पर मंदिर बना है उसी स्थान से देवी मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश्वर ने स्वर्ग की और प्रस्थान किया था |</p>



<h4 class="wp-block-heading">देवराज इन्द्र से सम्बन्धित पौराणिक कथा &#8211; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">एक अन्य लोक कथा के अनुसार  देवताओ के राजा इंद्र अपने कुछ बुरे कर्मो से निजात पाने के लिए  तीर्थयात्रा पे थे जब इन्द्रदेव मदुरई आये और वहां के शिव लिंग के समीप पहुंचे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">तो उन्हें ऐसा एहसास हुआ की उनका बोझ कोई और उठा रहा है तब इंद्र जी ने उसी स्थान पर शिवलिंग को पुनः प्रतिष्ठापित किया था तो इस हिसाब से हम बोल सकते है कि मीनाक्षी मंदिर का निर्माण इन्द्र देव ने करवाया ,<strong><em> Meenakshi Temple Madurai History</em></strong>  में यह लोक कथा भी कई जगह सुनने में आती है |</p>



<h3 class="wp-block-heading">मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया </h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">देखिये अगर हम बात करे पांडियन वंश की तो जो जानकारी मिलती है उसके हिसाब से राजा सदावर्मन कुलशेखर पांडियन ने भगवान शिव के आदेशानुसार इस मन्दिर का निर्माण करवाया था और शिवजी ने राजा कुलशेखर को मंदिर बनवाने का आदेश स्वप्न में दिया था |<br><br>इसके अलावा एक जानेमाने हिन्दू साधू ने सातवी शताब्दी से पहले ही मिनाक्षी मंदिर का उल्लेख किया था फिर 16वी शताब्दी में एक अन्य नाम आता है विश्वनाथ नायक का जिन्होंने इस मंदिर का दुबारा निर्माण करवाया था और इसका विस्तार भी किया था  |<br><br>इस मंदिर को कई क्रूर शासको ने लूटा भी था तमाम सोना अन्य वस्तुए वे शासक लूटकर ले गए थे , इसके अलावा अगर इन्द्रदेव वाली लोक कथा की माने तो इस पावन मन्दिर का निर्माण इंद्रदेव ने करवाया था जो की देवताओ के राजा है |</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">मिनाक्षी मंदिर के इतिहास सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347867584"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कहा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी मंदिर तमिलनाडु राज्य के मदुरै शहर में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347904722"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर किस भगवान को समर्पित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी मंदिर भगवान् सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी देवी को समप्रित है भगवान् सुन्दरेश्वर भोलेनाथ रोप में पूजे जाते है और मीनाक्षी देवी को माँ पारवती के रूप में पूजा जाता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347997554"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी मंदिर को राजा सदवार्मन कुलशेखरन पांडियन के करवाया था और पौराणिक कथा के अनुसार इन्द्रदेव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था | इस मंदिर का पुनर्निर्माण राजा विश्वनाथ नायक ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661348994307"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कब बनवाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इस मंदिर का निर्माण पांडियन सम्राट सदावर्मन ने सन 1190 &#8211; 1205 इसवी के मध्य हाथ और इसके बाद सोलहवी शताब्दी में इसका दुबारा निर्माण राजा विश्वनाथ नायक ने किया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349405915"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी देवी कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी देवी माँ पार्वती का ही स्वरुप है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349769555"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> Bataiye ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> Janne ke liyeaapko Raja MalayDhvaj Aur Rani Kanchanlata ki katha ko janna Hga Jo aapko isi Post me mil jayegi </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349898435"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मदुरै का प्रमुख मंदिर कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मदुरै का प्रमुख मंदिर मिनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349968948"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी देवी से शादी किसने की थी ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भगवान् शंकर सुन्दरेश्वर के रूप में प्रथ्वी पर आये थे और देवी मिनाक्षी से शादी की थी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350079668"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कौन से राज्य में स्थित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">तमिलनाडु </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350456221"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मदुरै में कौन सा मंदिर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी अम्मान मंदिर |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350766525"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास राजा मलयध्वज और रानी कंचनलता से जुड़ा हुआ है जिसकी समस्त कथा हमने पोस्ट में बताई है |</p> </div> </div>



<p class="wp-block-paragraph">निष्कर्ष </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">देखिये <strong>Meenakshi Temple Madurai History </strong>में हमने आपसे जितनी भी लोक कथाये और इतिहास के बारे में बात की इनसे से ज्यादातर स्थानीय लोककथाये है जिनका प्रमाण नहीं है लेकिन हा ये सभी कथाये हिन्दुओ की आस्था को दिखाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">मैंने यह समस्त जानकारी कुछ किताबो एवं इन्टरनेट के माध्यम से रिसर्च करके लिखी है बाकी इस मंदिर को आप तभी समझ पाओगे जब एक बार इसकी वास्तुकला को अपनी आँखों से देखोगे वाकई में अद्भुत है |</p>
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		<title>History of Kumbhalgarh Fort in Hindi  &#8211; कुम्भलगढ़ के किले का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2020 18:19:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan me Ghumne ki Jagah]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>History of Kumbhalgarh Fort in Hindi की इस पोस्ट में हम राजस्थान के गौरव कुम्भलगढ़ दुर्ग के इतिहास के बारे में जानेंगे इसके अलावा हम यह भी जानेंगे की इस दुर्ग को किसने बनवाया , निसन्देह कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान के शौर्य को अच्छी तरह से परिभाषित करता है , अच्छा हम सबको पता है की विश्व की सबसे ऊँची दीवार चीन में है लेकिन विश्व की दूसरी ऊँची दीवार कुम्भलगढ़ फोर्ट की दीवार है जो की भारतीयों के लिए गौरव की बात है &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"><strong>History of Kumbhalgarh Fort in Hindi</strong> की इस पोस्ट में हम राजस्थान के गौरव कुम्भलगढ़ दुर्ग के <a href="https://safarjankari.com/dharmik-kahani-etihasik-kahani/">इतिहास</a> के बारे में जानेंगे इसके अलावा हम यह भी जानेंगे की इस दुर्ग को किसने बनवाया , निसन्देह कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान के शौर्य को अच्छी तरह से परिभाषित करता है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अच्छा हम सबको पता है की विश्व की सबसे ऊँची दीवार <a href="https://wikitravel.org/en/China" target="_blank" rel="noreferrer noopener">चीन</a> में है लेकिन विश्व की दूसरी ऊँची दीवार कुम्भलगढ़ फोर्ट की दीवार है जो की भारतीयों के लिए गौरव की बात है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">History of Kumbhalgarh Fort in Hindi &#8211; कुम्भलगढ़ के किले का इतिहास </h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">चलिए अब हम लोग इस प्रसिद्ध दुर्ग के इतिहास से रूबरू होते है यह दुर्ग अपने आप में एक महान और पराक्रम से भरे हुये इतिहास को समेटे हुये है चलिए इस दुर्ग के इतिहास को जानने से पहले थोड़ी और बाते इस दुर्ग के बारे में जान लेते है &#8211;</p>



<h4 class="wp-block-heading">कुम्भलगढ़ दुर्ग के बारे में </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">यह दुर्ग भारत के राजस्थान प्रदेश के राजसमन्द जिले में स्थित है जो कि उदयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है और यह दुर्ग अरावली की पहाडियों में है इस दुर्ग को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में भी शामिल किया गया है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> यह दुर्ग राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा किला भी है | महाराणा कुम्भा , महाराणा प्रताप , महाराणा उदय सिंह , महाराणा सांगा , कुंवर प्रथ्वीराज जैसे पराक्रमी राजाओ का सम्बन्ध इसी किले से है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कुम्भलगढ़ किले का निर्माण कब हुआ  और कुम्भलगढ़ किले का निर्माण किसने करवाया </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अब हमारे सामने दो प्रश्न है एक की <strong>कुम्भलगढ़ किले का निर्माण किसने करवाया</strong> और दूसरा कि <strong>कुम्भलगढ़ किले का निर्माण कब हुआ</strong> तो आइये इन दोनों प्रश्नों के उत्तर जान लेते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">देखिये प्राप्त जानकारी के अनुसार कुम्भलगढ़ किले का निर्माण सन 1459 में 13 मई के दिन महाराणा कुम्भा ने करवाया था अच्छा एक अन्य जानकारी के अनुसार कहा जाता है की सम्राट अशोक के पुत्र सम्प्रति ने इस दुर्ग को छठी शताब्दी में बनवाया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">और इसी के अवशेष पर फिर महाराणा कुम्भा ने इस दुर्ग को बनवाया ये राजा सम्प्रति जैन धर्म को मानता था इसलिए कुम्भलगढ़ किले में जैन धर्म के तमाम अवशेष प्राप्त होते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">महाराणा कुम्भा ने जब इस अजेय दुर्ग का निर्माण करवाया था तो उसके साथ साथ सिक्के भी बनवाये थे जिसपे दुर्ग का नाम अंकित था तो अब आपको पता चल गया होगा की कुम्भलगढ़ किले का निर्माण किसने और कब करवाया था |<br><br>यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a><br><a href="https://safarjankari.com/rajasthan-me-ghumne-ki-jagah-ki-jankari/">Rajasthan me Ghumne ki Jagah – राजस्थान में घूमने की जगह</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार वाला कुम्भलगढ़ किला </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">यह बात वाकई में हम भारतीयों के लिए गौरवपूर्ण है कि कुम्भलगढ़ किले की दीवार विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार है आपको बता दे किले की बड़ी दीवारों में पहला नंबर ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना का है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इस कुम्भलगढ़ के विशाल दुर्ग की दीवार लगभग 36 किलोमीटर लम्बी है और इसकी चौड़ाई लगभग 15 फीट है ,  वाह मतलब एक साथ दो कारे इस किले की दीवार पर चल सकती है जो की वाकई में अद्भुत है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कुम्भलगढ़ के किले का इतिहास से जुड़ी अन्य मत  &#8211; <strong>History of Kumbhalgarh Fort in Hindi</strong></h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">कहा जाता है की महाराणा कुम्भा ने मंडौर के राठोर की मंगेतर जो की झालो की राजकुमारी थी को बलपूर्वक शादी करके ले आये थे इसके उपरांत राठौर राजकुमार ने बहुत कोशिश की परन्तु वो झालो की राजकुमारी को वापस पा न सका |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> राणा कुम्भा ने इस राजकुमारी के लिए एक ऐसा महल बनवाया जिससे आकाश साफ़ होने पर मंडौर दुर्ग दीखता था कुम्भलगढ़ दुर्ग में झालीबाव नाम से एक बावड़ी भी मौजूद है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इस अजेय दुर्ग पर ढेर सारे आक्रमण हुए जिसमे पहला आक्रमण महाराणा कुम्भा के समय पे हुआ था लेकिन उस समय राणा कुम्भा किले के अन्दर नहीं था यह आक्रमण मांडू के शासक महमूद खिलजी ने किया था किन्तु खिलजी को सफलता नही मिली थी  फिर गुजरात के सुलतान कुतुबुद्दीन ने इस दुर्ग पर आक्रमण किया परन्तु वह भी असफल रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इस दुर्ग का एक काला इतिहास भी है महाराणा कुम्भा की मृत्यु का , उदय सिंह ऊदा जो की महाराणा कुम्भा के बड़े पुत्र थे इन्होने  छल से अपने पिता की हत्या कर दी थी और स्वयं महाराणा बन गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">परन्तु इसे मेवाड़ के सामंतो से स्वीकार नहीं किया और इसे हटाकर कुम्भा के दूसरे पुत्र रायमल को महाराणा बना दिया था |रायमल के दो पुत्र  प्रथ्वीराज और राणा सांगा थे जिनका जन्म इसी दुर्ग में हुआ था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">प्रथ्वीराज की मृत्यु कुम्भलगढ़ दुर्ग की पहाडियों में हुई थी इन्हें इनके बहनोई जगमाल ने विष देकर मार दिया था इसके बाद इस दुर्ग में एक और अनहोनी हुई थी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">जब एक दासी के पुत्र बनबीर ने महाराणा सांगा के पोते विक्रामादित्य की हत्या कर दी थी और साथ में उदयसिंह को भी बनबीर मारना चाहता था परन्तु पन्ना धाय जी ने अपने पुत्र का बलिदान देकर उदयसिंह को बचाकर बड़ी कोशिश करके कुम्भलगढ़ तक पहुँचाया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">और इसी दुर्ग में राणा उदय सिंह का बचपन बीता और बाद में इसी दुर्ग में इनका राजतिलक कर दिया गया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">महाराणा प्रताप के शासन में शाहबाज खां ने कुम्भलगढ़ किले पर आक्रमण किया और डेरा डाल के दुर्ग के आसपास बैठ गया था पलड़ा महाराणा प्रताप का भारी था लेकिन कुछ समय बाद रसद की कमी होने लगी तो सन 1578 में महाराणा प्रताप दुर्ग से निकल गए और जंगलो में चले गए |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अब कुम्भलगढ़ पर मुगलों का अधिकार था कुछ समय बाद प्रताप जी दुबारा मुगलों से भिड़े और कुम्भलगढ़ दुर्ग को जीत लिया इसके बाद से यह दुर्ग कभी हारा नहीं |</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph"><strong>कुम्भलगढ़ के किले के इतिहास</strong> से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661081674776"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का किला राजस्थान राज्य के राजसमन्द जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661081733737"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला किस पहाड़ी पर है  ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का किला अरावली की पहाड़ी पर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661081821516"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; विश्व की दूसरी ऊँची दीवार कौन सी है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">विश्व की दूसरी ऊँची दीवार कुम्भलगढ़ के किले की दीवार है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661081981889"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला उदयपुर से कितने किलोमीटर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का किला उदयपुर से लगभग 84 किलोमीटर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661082027466"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ किले के इतिहास के बारे में बताइये ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> कुम्भलगढ़ किले के इतिहास के बारे में जानने के लिये हमें महाराणा कुम्भा से जुड़ा इतिहास जानना होगा जो की विस्तार से इस पोस्ट में है आप पढिये |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661082148041"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का किला राणा कुम्भा द्वारा बनवाया गया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661082198989"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला कब बनवाया गयाथा ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का किला 15वी शताब्दी में सन 1459 में बनवाया गया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661082293353"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का किला क्यों प्रसिद्ध है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">क्यूंकि यह किला विश्व की दूसरी ऊँची दीवार है और यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661082468753"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; कुम्भलगढ़ का राजा कौन था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कुम्भलगढ़ का राजा राणा कुम्भा थे |</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">राजस्थान में बहादुरी के किस्सों की कमी नहीं है आज आपने <strong>History of Kumbhalgarh Fort in Hindi</strong> के बारे में विस्तार से जाना यह समस्त जानकारी ऐतिहासिक है जिनके कुछ के तो प्रमाण है परन्तु कुछ के नहीं लेकिन स्थानीय लोगो के अनुसार यह सभी जानकारियां सत्य ही है  |</p>
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		<title>History of Amer Fort in Hindi &#124; आमेर के किले के इतिहास से जुड़ी जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2020 18:59:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>History of Amer Fort in Hindi की इस पोस्ट में हम आपको राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक जाने माने किले आमेर के इतिहास की बात करेंगे और जानेंगे कि आमेर का किला किसने बनवाया , कब बनवाया और इसके पीछे की सारी ऐतिहासिक कहानी जयपुर में घूमने के बहुत से विकल्प है और उनमे से आमेर एक बेहतरीन विकल्प है तो पोस्ट को अंत तक पढ़े और जाने इस किले के बारे में &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"><strong>History of Amer Fort in Hindi</strong> की इस पोस्ट में हम  राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक जाने माने किले आमेर के इतिहास की बात करेंगे और जानेंगे कि आमेर का किला किसने बनवाया , कब बनवाया और इसके पीछे की सारी ऐतिहासिक कहानी <a href="https://safarjankari.com/jaipur-me-ghumne-ki-jagah/">जयपुर में घूमने </a>के बहुत से विकल्प है और उनमे से <a aria-label="undefined (opens in a new tab)" href="https://www.atlasobscura.com/places/amber-fort" target="_blank" rel="noreferrer noopener">आमेर</a> एक बेहतरीन विकल्प है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">History of Amer Fort in Hindi &#8211; आमेर का इतिहास</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">आमेर किले के इतिहास से पहले यह भी जान ले की यह सुप्रसिद्ध किला जयपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर है और अरावली की पहाडियों पर बना हुआ है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> सच मानिए इस किले की बेजोड़ वास्तुकला देखकर आप खुश हो जायेंगे और एक बार वाह जरूर बोलेंगे अच्छा इसे अम्बर का किला भी कहते है इस किले का इतिहास गौरवपूर्ण है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">आमेर के किले का निर्माण किसने करवाया </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अधिकतर लोग जानना चाहते है की आखिर इतने भव्य और अद्भुत किले को बनवाया किसने तो आप को बता दे आप जो आज आमेर  का किला देख रहे है उसको बनवाने का श्रेय राजा मानसिंह प्रथम , राजा सवाई सिंह और मिर्ज़ा जयसिंह को जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इसके अलावा यह भी सुनने में आता है इन सब राजाओ से पहले इस दुर्ग को आमेर के ही स्थानीय मीणाओ ने बनवाया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">तो इस दुर्ग का निर्माण का श्रेय राजा मान सिंह प्रथम को जाता है इसके बाद इस दुर्ग के कई तरह के सुधार हुए जो कि राजा सवाई सिंह और मिर्जा जयसिंह ने करवाए |</p>



<h4 class="wp-block-heading">अम्बर के किले का निर्माण कब हुआ </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph"> मैंने कई जगह देखा तो इस दुर्ग के निर्माण काल के बारे में कई मत है जिनमे सबसे पहले आता है मीणाओ द्वारा बनवाया हुआ आमेर का किला जो कि 967 ईसवी में बना था तो अगर देखा जाय तो मूल रूप से आमेर का किला मीणाओ के चंदा वंश के राजा एलान सिंह ने बनवाया  था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अब 16 वी शताब्दी में राजा मान सिंह प्रथम ने पुराने अवशेषों पर  दुबारा आमेर के किले का निर्माण करवाया इसके बाद वहां के राजा के जो उत्तराधिकारी थे वो इसमें संशोधन करवाते रहे सन 1727 में  सवाई जय सिंह दृतीय ने अपनी राजधानी आमेर से जयपुर बना ली थी |</p>



<h4 class="wp-block-heading">आमेर के इतिहास जे जुडी रोचक जानकारी &#8211; <em><strong>History of Amer Fort in Hindi</strong></em></h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">एक ऐतिहासिक कथा के अनुसार भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज दुलहराय जोकि सोढा सिंह के पुत्र थे ने 11वी सदी में रामगढ़ में मीणाओ और दौसा के बडगुजरो को परास्त किया था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">इन्ही के पुत्र थे कान्किल देव जिन्होंने सन 1207 में आमेर में मीणाओ को परास्त कर  कछवाहा वंश को आमेर में स्थापित किया तबसे आमेर कछवाओ की राजधानी बन गया था जो की बाद में जयपुर में मिल गया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">अब <em><strong>History of Amer Fort in Hindi</strong> </em>की एक अन्य कथा के अनुसार आमेर में पहले मीणाओ का राज था और वहां के राजा एलान सिंह थे , एलान सिघ के दयालु किस्म के राजा था उन्होंने एक असहाय राजपूत माता और उनके पुत्र को अपने राज्य में सहारा दिया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">कुछ समय बाद यही बच्चा ढोलाराय के नाम से जाना जाने लगा और मीणा राज्य का प्रतिनिधि बनकर ये दिल्ली गया अच्छा मीणा वंश की एक खासियत थी की ये लोग हमेशा अस्त्र शस्त्र साथ ही रखते थे तो इनको किसी भी चतुराई से हराना मुश्किल था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">लेकिन साल में दीवाली के दिन मीणा लोग आमेर में बने एक कुंड में बिना अस्त्र शस्त्र के स्नान करते थे और ये बात गुप्त रहती थी लेकिन एक बार इस बात को धोलाराय ने एक ढोल बजाने वाले को बता दी |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">फिर क्या था ये बात राजपूतो में फ़ैल गई अब राजपूतो ने उन निहत्थे मीणाओ पर आक्रमण करके लाशो के ढेर लगा दिए इतिहास में यह कार्य अति निंदनीय था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-india-gate-in-hindi-india-gate-kisne-banaya-tha/">History of India Gate in Hindi – इण्डिया गेट का स्वर्णिम इतिहास</a><br><a href="https://safarjankari.com/daksha-mahadev-mandir-ki-pauranik-katha-hindi-me/">दक्ष महादेव मन्दिर की पौराणिक कथा</a><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-badrinath-temple-in-hindi/">History of Badrinath Temple in Hindi</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">आमेर या अम्बर नाम कैसे पड़ा </h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">एक पौराणिक कथा के अनुसार इस स्थल के पास स्थित एक पहाड़ी पर एक मंदिर है अम्बिकेश्वर जो की भगवान् शिव को समर्पित है इसी मंदिर से इस जगह का नाम अम्बर पड़ा |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">एक अन्य कथा के अनुसार इस किले का नाम माँ अम्बा मतलब दुर्गा जी के नाम पर अम्बर पड़ा था इसके आलावा आमेर में एक मंदिर है संघी जूथारम वहा प्राप्त के शिलालेक्ख के अनुसार इसे पहले अम्बावती नाम से जाना जाता था |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">बहुत से लोग इसे इछ्वाक वंश के राजा अम्बरीश के नाम से जोड़ते है एक बात और सुनने को मिलती है की कछवाहा वंश के राजा कान्किल देव ने इसका नाम आमेर रखा था  |</p>



<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph">आमेर के किले के इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; Questions About <strong>History of Amer Fort in Hindi</strong></p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660908318132"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; आमेर का किला कहाँ पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आमेर का किला राजस्थान में जयपुर जिले में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660908360035"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; आमेर का किला किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आमेर के किले को बनवाने में राजा मानसिंह प्रथम , राजा सवाई सिंह और मिर्ज़ा जयसिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660908438037"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; आमेर का किला कब बना था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">आमेर का किले का निर्माण राजा मान सिंह प्रथम द्वारा सन 1592 में करवाया गया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1660908616574"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; आमेर का पुराना नाम क्या था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">अमरगढ़ , अमरपुरा , अम्बावती</p> </div> </div>



<h6 class="wp-block-heading">निष्कर्ष </h6>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size wp-block-paragraph">आमेर के किले के बारे में हम चाहे जितना जानकारी एकत्र कर  ले कम ही होगी क्यूंकि इसका इतिहास अत्यंत वृहद है देखिये मै कोई इतिहासकार तो नहीं फिर भी पूरा रिसर्च करके आप तक <strong>History of Amer Fort in Hindi </strong>की पोस्ट को पहुँचाया है  यदि कोई त्रुटी हुई तो कृपया माफ़ करे और सुधार अवश्य करवाए |</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br></p>



<p class="wp-block-paragraph"> </p>
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