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	<title>पौराणिक कथाये Archives - SAFAR JANKARI</title>
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	<description>भारत के पर्यटन स्थलों की जानकारी -Travel Blog in Hindi</description>
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	<title>पौराणिक कथाये Archives - SAFAR JANKARI</title>
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		<title>Sunasir Nath Mandir Mallawan &#124; बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां हरदोई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Dec 2023 08:47:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Historical]]></category>
		<category><![CDATA[Religious]]></category>
		<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[ऐतिहासिक]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश में हरदोई जिले के मल्लावां में स्थित है एक शिव मन्दिर जो की लगभग दो सौ साल पुराना है और दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ पर अपने आराध्य के दर्शन हेतु आते है इस शिव मंदिर का नाम बाबा सुनासीर नाथ है , यहाँ के स्थानीय लोगो की माने तो यह इस मंदिर के शिवलिंग पर औरंगजेब ने आरा चलवाया था &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/sunasir-nath-mandir-mallawan-hardoi-hindi/">Sunasir Nath Mandir Mallawan | बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां हरदोई</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan </strong>: <a href="https://safarjankari.com/tag/uttar-pradesh/">उत्तर प्रदेश</a> में <a href="https://hardoi.nic.in/159-ge-bilgram-mallawan/">हरदोई</a> जिले के मल्लावां में स्थित है एक शिव मन्दिर जो की लगभग दो सौ साल पुराना है और दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ पर अपने आराध्य के दर्शन हेतु आते है इस शिव मंदिर का नाम <strong>बाबा सुनासीर नाथ</strong> है , यहाँ के स्थानीय लोगो की माने तो यह इस मंदिर के शिवलिंग पर औरंगजेब ने आरा चलवाया था और आज भी आरे का निशान आप शिवलिंग पर देख भी सकते है  |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Sunasir Nath Mandir Mallawan Hardoi</h2>



<p><strong>बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर </strong>को छोटा काशी भी कहा जाता है यह एक ऐतिहासिक मंदिर है इस मंदिर को लोग सुनासी नाथ नाम से भी जानते है हालाँकि इस मंदिर का सही नाम <strong>बाबा सुनासीर नाथ मंदिर</strong> है जो की भोलेनाथ का ही एक नाम है , इस मंदिर में सोमवार के दिन अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है |</p>



<p>श्रावण मास में तो श्रद्धालु दूर दूर से यहाँ आते है और शिवलिंग पर गंगा जल अर्पण करते है तो श्रावण मास में यहाँ पर अत्यधिक भीड़ रहती है , <strong>बाबा सुनासीर नाथ मंदिर मल्लावां</strong> एक ऐतिहासिक मंदिर है और मुगलकालीन शासक औरंगजेब की बर्बरता  का प्रतीक है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर कैसे पहुंचे | How to reach Sunasir Nath Mandir Mallawan</h4>



<p>दोस्तों पवित्र <strong>बाबा सुनासीर नाथ मंदिर मल्लावां</strong> में है और यह हरदोई जनपद में है , हरदोई मुख्यालय से इस मंदिर की दूरी लगभग 52 किलोमीटर होगी , इस मंदिर तक आने के लिए सबसे पहले आप कही भी हो आपको मल्लावां आना पड़ेगा |</p>



<p>मल्लावां आप आराम से आ सकते है यहाँ रोड की कनेक्टिविटी बढ़िया है निकटवर्ती शहरों की बात करे तो लखनऊ से मल्लावां की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है और कानपुर से मल्लावां की दूरी लगभग लगभग 85 किलोमीटर है |</p>



<p>अब आप मल्लावां आ गये तो मल्लावां से <strong>सुनासीर नाथ मंदिर</strong> महज ५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है  ऑटो टेम्पो आदि आपको मिल जायेंगे , लोकेशन की बात करे तो यह मंदिर मल्लावां राघवपुर मार्ग फिर तेजीपुर गाँव वाले मार्ग पर स्थित है  |</p>



<p> <strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan</strong> जाने का बेस्ट तरीका वाया रोड ही है और बेहतर होगा कि आप कोई गाडी बुक कर ले लेकिन यदि आप गाडी नहीं बुक कर सकते है मल्लावां से आपको ऑटो टेम्पो मिल जायेंगे  |</p>



<h4 class="wp-block-heading">कहाँ रुके </h4>



<p>यहाँ पर आपको बहुत ज्यादा एक दो घंटे में भोले बाबा के दर्शन हो जायेंगे और सम्पूर्ण मंदिर परिसर भी आप देख लोगे तो यहाँ पर मेरे हिसाब से रुकने की आवश्यकता नहीं है फिर भी श्रद्धालु यदि यहाँ पर रुकने के उत्सुक है तो मन्दिर परिसर में बनी धर्मशाला में आप रूक सकते है और यदि आपको सुविधाये चाहिए तो आप हरदोई शहर में रुक सकते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर परिसर के बारे </h4>



<p>वर्तमान में <strong><em>Sunasir Nath Mandir Mallawan</em></strong> का परिसर बहुत ही सुन्दर बन गया है इस मंदिर का सबसे प्रमुख आकर्षण यहाँ की शिवलिंग है मंदिर तक आने के लिये बाकायदा रास्ता बनाया गया जिससे श्रद्धालु लाइन से मंदिर तक आये मंदिर का मुख्य द्वार बहुत ही सुन्दर और भव्य है इस द्वार में सबसे ऊपर भगवान शिव की एक बहुत ही दिव्य प्रतिमा बनी है  , द्वार पर मंदिर का नाम लिखा हुआ है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="500" height="497" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi-Uttar-Pradesh.jpg" alt="Sunasir Nath Mandir Mallawan Hardoi Uttar Pradesh" class="wp-image-12680" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi-Uttar-Pradesh.jpg 500w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi-Uttar-Pradesh-300x298.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi-Uttar-Pradesh-150x150.jpg 150w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption class="wp-element-caption">Sunasir Nath Mandir Mallawan Hardoi Uttar Pradesh</figcaption></figure>
</div>


<p>इस प्रवेश द्वार से आप मंदिर परिसर में प्रवेश करते है सामने ही मुख्य मंदिर है और आसपास अन्य मन्दिर  बने हुए है अन्य मंदिरों में आप श्री पञ्च मुखेश्वर महादेव मंदिर , संतोषी माता मन्दिर , श्री गुलावेश्वर महादेव मन्दिर , श्री दुर्गा माता मन्दिर , श्री राधा कृष्ण मंदिर , श्री भैरव नाथ मन्दिर के भी दर्शन अवश्य करे हालाँकि परिसर में साफ़ सफाई का अभाव दिखाई देता है  |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="550" height="464" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई.jpg" alt="बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां हरदोई" class="wp-image-12687" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई.jpg 550w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई-300x253.jpg 300w" sizes="(max-width: 550px) 100vw, 550px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां हरदोई</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" width="400" height="744" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां.jpg" alt="बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां" class="wp-image-12688" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-161x300.jpg 161w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां का गुर्गा मंदिर</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="615" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई-की-जानकारी.jpg" alt="बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां हरदोई की जानकारी" class="wp-image-12686" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई-की-जानकारी.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-हरदोई-की-जानकारी-220x300.jpg 220w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption class="wp-element-caption"><br>बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां का भैरवनाथ मंदिर </figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="580" height="593" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-की-जानकारी.jpg" alt="बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां की जानकारी" class="wp-image-12685" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-की-जानकारी.jpg 580w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/बाबा-सुनासीर-नाथ-मन्दिर-मल्लावां-की-जानकारी-293x300.jpg 293w" sizes="auto, (max-width: 580px) 100vw, 580px" /><figcaption class="wp-element-caption">बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर मल्लावां का राधा कृष्ण मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<p>आइये बात करते है <strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan</strong> के मुख्य शिवलिंग की तो जहाँ पर यह शिवलिंग स्थापित है वह भी एक मंदिर नुमा बना है इसके द्वार पर मंदिर का नाम <strong>प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर जय बाबा सुनासीर नाथ</strong> लिखा हुआ है अप इस द्वार से गर्भगृह में प्रवेश करिए और बाबा के शिवलिंग सुन्दर दर्शन करिये बेल पत्र जल आदि अर्पण करिये |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="604" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi.jpg" alt="Sunasir Nath Mandir Mallawan Hardoi" class="wp-image-12681" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi.jpg 400w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-Hardoi-199x300.jpg 199w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption class="wp-element-caption">Sunasir Nath Mandir Mallawan Hardoi</figcaption></figure>
</div>

<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="470" height="412" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan.jpg" alt="Sunasir Nath Mandir Mallawan" class="wp-image-12684" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan.jpg 470w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-300x263.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 470px) 100vw, 470px" /><figcaption class="wp-element-caption">Sunasir Nath Mandir Mallawan</figcaption></figure>
</div>


<p>मंदिर परिसर में ही एक यज्ञ शाला बनी हुई है एक बात और आपको बता दे बाबा सुनासीर नाथ मंदिर में हिन्दुओ के रीति रिवाज वाले कार्यक्रम भी होते है आस पास के लोग ट्राली भर भर कर यहाँ पर आते है , परिसर में ही एक नंदी जी की बेहद भव्य प्रतिमा बनी हुई है जिसकी भी श्रद्धालु पूजा करते है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="520" height="647" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ke-bare-me-jankari.jpg" alt="Sunasir Nath Mandir Mallawan ke bare me jankari" class="wp-image-12682" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ke-bare-me-jankari.jpg 520w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ke-bare-me-jankari-241x300.jpg 241w" sizes="auto, (max-width: 520px) 100vw, 520px" /><figcaption class="wp-element-caption">Sunasir Nath Mandir Mallawan </figcaption></figure>
</div>


<p>यह तो बात हो गई <strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan</strong> परिसर के अन्दर की अब बात करते है परिसर के बाहर की दोस्तों बाहर भगवान शिव और माता सती की एक बहुत ही दिव्य प्रतिमा बनी है इस प्रतिमा में भगवान शिव माता सती को अपने हाथो से उठाये है यह वही द्रश्य है जब माता सती ने खुद को यज्ञ में समर्पित कर दिया था और इस दुःख में शिवजी ने माता सती के शरीर को उठा कर विलाप कर रहे थे |</p>



<p>हरदोई जनपद के <strong>मल्लावां में स्थित बाबा सुनासीर नाथ मन्दिर</strong> की यह सुन्दर प्रतिमा अत्यधिक विशाल और भव्य है और इसी प्रतिमा के नीचे एक बहुत ही छोटी सी गुफा बनी है जिसमे आप जा सकते है खासकर बच्चो को यह सब पसंद आता है |</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="633" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ki-jankari.jpg" alt="Sunasir Nath Mandir Mallawan ki jankari" class="wp-image-12683" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ki-jankari.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2023/12/Sunasir-Nath-Mandir-Mallawan-ki-jankari-213x300.jpg 213w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption class="wp-element-caption">Sunasir Nath Mandir Mallawan</figcaption></figure>
</div>


<p>बाहर ही आपको प्रसाद की तमाम दुकाने दिखाई देंगी जहाँ से आप प्रसाद ले सकते है बाहर ही पीने के पानी की व्यवस्था है यह मन्दिर गाँव की तरफ है यहाँ पर पार्किंग की कोई भी समस्या नहीं है |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b2/">20+ हरदोई में घूमने की जगह – हरदोई के पर्यटन स्थल की समस्त जानकारी</a><br><a href="https://safarjankari.com/maa-purnagiri-tanakpur-ka-yatra-vritant/">माँ पूर्णागिरि टनकपुर ट्रिप का यात्रा वृतान्त</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">बाबा सुनासीर मन्दिर मल्लावां की पौराणिक कहानी और इतिहास </h4>



<p>पोस्ट में अब <strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan</strong> के इतिहास पर नजर डालते है यहाँ के स्थानीय लोगो ने बताया कि इस मंदिर को मुग़ल शासक औरंगजेब ने लूटा था और शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश  की थी , 16वी शताब्दी में मुग़ल शासक औरंगजेब कई मंदिरों को नष्ट करते हुए मल्लावां तक आ गया था इस मंदिर में सोना लगा हुआ था तो मुग़ल शासक इसे तुडवाना चाहता था |</p>



<p>इस बात की जानकारी किसी तरह से गौरखेड़ा के वीरो को हो गई फिर मुगल सेना और गौरखेड़ा के वीरो के बीच जंग हुई जिसमे गौरखेड़ा के वीर पराजित हुए क्यूंकि गौरखेड़ा के वीरो के पास संसाधनो की कमी थी  अब औरग्जेब मंदिर तक आ गया था और अब उसे मढिया के गोस्वामियो ने ललकारा परन्तु फिर से मुग़ल शासक की जीत हुई |</p>



<p>फिर औरंगजेब ने अपने सैनिको को आदेश दिया की मन्दिर को लूट लिया जाय मंदिर में  सोने का कलश था वो निकाल लिया गया फिर सोने की घंटिया निकाल ली कहने का तात्पर्य मंदिर में सोने से निर्मित सारी वस्तुओ को लूटकर औरंगजेब ने मंदिर को नष्ट करने को बोल दिया |</p>



<p> सैनिको ने मंदिर को ध्वस्त किया फिर शिवलिंग को नष्ट करने हेतु पहले तो उसे खोदा जब खोदकर शिवलिंग को निकाल नहीं पाए तब आरा से <strong><em>बाबा सुनासीर नाथ मंदिर</em> </strong>की शिवलिंग को काटने का प्रयास किया |</p>



<p> एक अद्भुत घटना घटित हुई औरंगजेब की सेना पर अनगिनत बर्रैया, मधुमक्खीयो ने आक्रमण किया और इसका कोई जवाब सेना के पास नहीं था विवश होकर औरंगजेब की सेना को वापस आना पड़ा आप जब कभी <strong><em>Sunasir Nath Mandir Mallawan</em> </strong>आये तो आपको यहाँ के शिवलिंग पर आरे के निशान आज भी दिखाई देंगे |</p>



<p>पौराणिक कथा को माने तो कहते है <strong>बाबा सुनासीर नाथ मंदिर</strong> में स्थित शिवलिंग की स्थापना  देवराज इंद्र ने की थी , मन्दिर के पुजारी पण्डित राम गोविन्द शास्त्री ने बताया की यहाँ पर जो भक्त अपार श्रद्धा भाव से भोले बाबा के दर्शन करते है उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है |</p>



<p>कभी भी आपको इधर से निकलना हो या आप नजदीक रहते हो तो एक बार आप <strong>Sunasir Nath Mandir Mallawan</strong> आये और भोले बाबा के दर्शन अवश्य करे |</p>
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		<title>Naimisharanya History in Hindi &#124;नैमिषारण्य का इतिहास पौराणिक कथा</title>
		<link>https://safarjankari.com/naimisharanya-history-in-hindi-neemsar-ki-katha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Apr 2023 13:41:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर जनपद में स्थित है वही हरदोई जनपद से नैमिषारण्य की दूरी लगभग 42 किलोमीटर है यह एक पवित्र स्थल और तपोभूमि है आज हम इस स्थल के इतिहास और पौराणिक कथाओ से आपका परिचय करायेंगे &#124;</p>
<p>नैमिषारण्य  तीर्थ स्थल का जिक्र विष्णु पुराण मारकंडेय पुराण वाराह पुराण में भी मिलता है इससे इत्तर इस स्थल के बारे में कई सारी लोक कथाये भी प्रचलित है , यह क्षेत्र साधुओ की तपोभूमि भी है तो कही सत्यनारायण की कथा में भी इस स्थल का महत्त्व मिलता है &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/naimisharanya-history-in-hindi-neemsar-ki-katha/">Naimisharanya History in Hindi |नैमिषारण्य का इतिहास पौराणिक कथा</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Naimisharanya History in Hindi</strong> &#8211; <a href="https://safarjankari.com/naimisharanya-neemsaar-tirth/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नैमिषारण्य </a>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर जनपद में स्थित है वही हरदोई जनपद से नैमिषारण्य की दूरी लगभग 42 किलोमीटर है यह एक पवित्र स्थल और तपोभूमि है आज हम इस स्थल के इतिहास और पौराणिक कथाओ से आपका परिचय करायेंगे |</p>



<p>नैमिषारण्य  तीर्थ स्थल का जिक्र विष्णु पुराण मारकंडेय पुराण वाराह पुराण में भी मिलता है इससे इत्तर इस स्थल के बारे में कई सारी लोक कथाये भी प्रचलित है , यह क्षेत्र साधुओ की तपोभूमि भी है तो कही सत्यनारायण की कथा में भी इस स्थल का महत्त्व मिलता है |</p>



<p>आदि गुरु शंकराचार्य और महान संत सूरदास जी भी इस पवित्र स्थल पर आये थे | महाभारत में इस स्थल का उल्लेख मिलता है वही ऋग्वेद में भी आप इसका उल्लेख पाएंगे , वाल्मीकि रामायण में भी इस स्थल का जिक्र है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Naimisharanya History in Hindi</h2>



<p>अब हम एक एक करके नैमिषारण्य  तीर्थ स्थल की सभी लोक कथाओ के बारे में जानते है &#8211; </p>



<p>सबसे पहले बात करते है मार्कंडेय पुराण की इस पुराण में कई बार नैमिषारण्य का जिक्र हुआ है इस पुराण के अनुसार नैमिषारण्य में ही 88000 ऋषि मुनियों को सूतजी ने कई पुराण सहित महाभारत की कथा सुनाइ थी सूतजी <a href="https://www.hinduamerican.org/blog/veda-vyasa-the-sage-who-compiled-the-vedas" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ऋषि वेदव्यास</a> के परम शिष्य थे और बात करे तो कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने पृथ्वी पर मानव जीवन की शुरुआत करने का दायित्व  मनु और सतरूपा को सौंपा था और इस जोड़ी मनु और सतरूपा ने नैमिषारण्य  में ही कई वर्षो तक तपस्या की थी |</p>



<p>एक लोककथा के अनुसार देवराज इंद्र को वृत्ता नाम के एक असुर ने उनके देवलोक से  उनको ही निकाल दिया था यह असुर अत्यंत बलशाली था एक वरदान के चलते इस असुर का वध सिर्फ किसी महान ऋषि की अस्थियो से बने शस्त्र से होना था इसीलिए देवराज इंद्र ऋषि दाधीच के पास पहुंचे और ऋषि को इस घटना से अवगत कराया |</p>



<p>ऋषि दधीचि तुरंत ही अपनी अस्थियाँ त्याग करने के लिए तैयार हो गए लेकिन ऋषि ने एक शर्त रखी कि मै अपने प्राण त्याग करने से पहले सभी पवित्र नदियों के जल से स्नान करना चाहता हु अब यदि ऋषि दधीचि जाकर सभी नदियों में स्नान करते तो असुर वृत्ता का वध करने में बहुत देरी हो जाती और देवराज इंद्र को ऋषि की भी बात माननी थी |</p>



<p>तव देवराज ने जल देवता को आदेश दिया की तुरंत ही सभी पवित्र नदिया इस नैमिषारण्य  में आये बस तबसे ही यहाँ स्नान करना अति लाभदायक माना जाता है  यह स्थल दधीचि कुण्ड के नाम से जाना जाता है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">Naimisharanya History</h4>



<p>नैमिषारण्य  में स्थित व्यास गद्दी नाम की जगह पर ऋषि वेदव्यास जी ने पुराणों का निर्माण किया था बताते है यही पर सभी वेद पुराण शास्त्रों को लिखा गया है |</p>



<p>नैमिषारण्य  स्थित माँ ललिता देवी मंदिर 108 शक्तिपीठ में से एक <a href="https://safarjankari.com/list-of-51-shakti-peeth-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">शक्तिपीठ</a> है |</p>



<p>एक लोक कथा के अनुसार इसी स्थल पर हनुमान जी ने अहिरावण का वध करके श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त करवाया था | बताते है कि यही पर श्रीराम ने अपने अश्वमेध यज्ञ को पूरा किया था और लव कुश से श्रीराम का मिलन भी यही पर हुआ था |</p>



<p>एक लोक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद सभी ऋषि मुनि इस बात को लेकर दुविधा में थे कलियुग शुरू होने वाला  है कोई स्थल ऐसा होगा जहाँ कलियुग का प्रभाव न पड़े अपनी इस दुविधा के निराकरण हेतु सभी ऋषि मुनि ब्रह्मा जी के पास गए और ब्रह्माजी ने एक पवित्र चक्र को पृथ्वी की तरफ फेंका और बताया की जहाँ पर यह चक्र गिरेगा वही स्थल कलियुग के प्रभाव से अछूता रहेगा और यह चक्र नैमिषारण्य  में ही गिरा था उस समय यह स्थल नैमिष वन था |</p>



<p>वाराह पुराण के अनुसार यही पर नैमिष वन में असुरो का संघार भगवान विष्णु द्वारा किया गया था यह समस्त असुर ऋषि-मुनियों को सता रहे थे |</p>



<p><strong>Naimisharanya History</strong></p>



<p>सत्यनारायण कथा तो आपने सुनी ही होगी इस कथा में भी नैमिषारण्य का उल्लेख किया गया है बताते है कि सर्वप्रथम सत्यनारायण  कथा को वेदव्यास जी ने ऋषि सूथ को यही पर सुनाया था इसके बाद यही कथा ऋषि सूथ ने ऋषि शौनक सहित अन्य ऋषि मुनियों को सुनाई थी |</p>



<p>एक अन्य कथा के अनुसार श्रीहरि विष्णु जी ने गयासुर का वध किया था और वध करके उस असुर के शरीर के तीन टुकड़े कर दिए थे , इस असुर गयासुर का सर बद्रीनाथ में गिरा था उसके चरण गया में गिरे थे और धड़ नैमिषारण्य में गिरा था |</p>



<p>तो दोस्तों ये सब <strong>Naimisharanya History </strong>से सम्बन्धित कथाये है जो कि आपको कही किसी धार्मिक किताबो में या मंदिरों में लिखी मिल जाती है |</p>
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		<title>मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा और इतिहास के बारे में पढिये</title>
		<link>https://safarjankari.com/mallikarjun-jyotirling-ki-pauranik-katha-itihas/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Apr 2023 11:36:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में भगवान शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंग है जिनमे से एक ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के कुरनूल जनपद में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है स्थित है इस ज्योतिर्लिंग का नाम श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है आज की इस पोस्ट में हम आपको मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा और इतिहास से परिचित करायेंगे &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिन्दू धर्म में भगवान शिवजी के <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">12 ज्योतिर्लिंग</a> है जिनमे से एक ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के <a href="https://www.britannica.com/place/Kurnool" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कुरनूल</a> जनपद में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है स्थित है इस ज्योतिर्लिंग का नाम श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है आज की इस पोस्ट में हम आपको <strong>मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक</strong> कथा और इतिहास से परिचित करायेंगे |</p>



<p>यह तो आप जानते ही है कि हिन्दू धर्म में 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग है जिनका अपना एक विशेष महत्त्व है और इन सभी ज्योतिर्लिंग की अपनी एक पौराणिक कथा भी है , मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को श्रीशैलम मंदिर और श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन मंदिर नाम से भी जाना जाता है |</p>



<p>अच्छा श्रीशैलम पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग दो शब्दों से मिलकर बना है एक मल्लिका जिसका अर्थ माता पार्वती से है और दूसरा अर्जुन जिसका सम्बन्ध भगवान शिव से बताया गया है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा</h2>



<p><strong>मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के पौराणिक कथाओ </strong>में दो कथाये अत्यधिक सुनने में आती है आइये एक एक करके हम दोनों को विस्तार से जान लेते है &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">शिव पुराण के अनुसार मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा </h4>



<p>शिव पुराण जो कि एक हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ है शिव पुराण में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की जो कथा है वह पूर्ण रूप से भगवान शिव के परिवार के इर्द गिर्द ही है आइये अब जानते है इस धार्मिक कथा को &#8211; आप सब जानते है भगवान शिव माता पार्वती के दो पुत्र थे बड़े पुत्र का नाम कार्तिकेय जी और छोटे का नाम गणेश जी था |</p>



<p>पौराणिक कथा के अनुसार श्रीगणेश अपने बड़े पुत्र कार्तिकेय जी से पहले विवाह करने के इच्छुक थे परन्तु कार्तिकेय जी का कहना था कि मै बड़ा हु पहले मेरा विवाह होना चाहिए लेकिन श्रीगणेश ज़िद पकड़ लिए थे और दोनों भाइयो में इस बात को लेकर विवाद हो गया , अब यह विवाद जब गहरा गया तो इसकी भनक माता पार्वती और भगवान शिव को हुई |</p>



<p>अब शिवजी और पार्वती जी ने दोनों पुत्रो के सम्मुख एक शर्त रखी और शर्त के अनुरूप गणेशजी और कार्तिकेयजी में से जो भी पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले वापस लौटेगा उसी का विवाह पहले होगा अब क्या था दोनों पुत्रो ने इस शर्त को स्वीकार किया और कार्तिकेय जी अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा हेतु निकल पड़े |</p>



<p>अब एक तो गणेश जी थोड़े तंदुरुस्त थे ऊपर से उनका वाहन मूसक तो गणेश जी के लिए मूसक पर सवार होकर सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा संभव ही नहीं थी गणेशजी वही खड़े रहे और कुछ सोच रहे थे , गणेश जी सबसे बुद्धिमान देवता है और उन्होंने अपनी बुद्धिमता का प्रयोग किया और एक उपाय निकाल लिया |</p>



<p>अब गणेश जी ने अपने माता पिता को एक साथ एक जगह पर बिठा दिया जब शिवजी और पार्वती जी अपने-अपने आसन पर बैठ गए फिर गणेश जी दोनों की बड़े ही मन से पूजा की इसके बाद गणेशजी ने अपने माता पिता की सात बार परिक्रमा कर डाली सभी देवता यह देख रहे थे कि आखिर गणेशजी कर क्या रहे है |</p>



<p>जो फल हमें सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके मिलता है वही फल अपने माता पिता की परिक्रमा करके भी मिल जाता है इस प्रकार गणेश जी विजयी हो चुके थे अपने पुत्र की यह बुद्धिमता देखकर भगवान शिव और माता पार्वती अत्यधिक प्रसन थे फिर गणेश जी का विवाह रिद्धि-सिद्धि से करवा दिया गया |</p>



<p>अब जब कार्तिकेय जी सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा कर वापस लौटे तब तक गणेश जी का विवाह हो गया था और सिर्फ विवाह ही नही गणेश जी के दो पुत्र भी हो गए थे , कार्तिकेयजी को यह अच्छा न लगा और वह नाराज होकर वहां से चले गए और जाकर क्रौंच नाम के एक पर्वत पर बैठ गए अब शिवजी और माता पार्वती ने कार्तिकेयजी को मनाने हेतु देवऋषि नारद जी को भेजा , नारद जी ने कार्तिकेय जी को बहुत समझाया परन्तु वह नहीं माने |</p>



<p>अब माता पार्वती अत्यधिक दुखी थी फिर भगवान शिव के साथ माता पार्वती कार्तिकेयजी को मनाने हेतु क्रौंच पर्वत की और चल दी यह जानकर कार्तिकेयजी वहां से थोडा और दूर चले गए परन्तु अन्य देवताओ के अनुरोध करने से कार्तिकेय जी रुक गये और अपने माता पिता का आशीर्वाद लिया और शांत हुये , कहा जाता है जिस स्थान पर माता पार्वती और भगवान शिव रुके थे वही पर ही मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थापित है |</p>



<p><a href="https://safarjankari.com/bhimashankar-temple-history-%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">Bhimashankar Temple History – भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का इतिहास</a></p>



<p><a href="https://safarjankari.com/ghat-of-banaras-varanasi-ke-ghat-ki-jankari/">Ghats of Banaras – बनारस के लोकप्रिय घाटों के बारे में समस्त जानकारी</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">राजकुमारी चन्द्रावती से सम्बन्धित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा </h4>



<p>अन्य एक धार्मिक ग्रन्थ में लिखा है की एक राजा चन्द्रगुप्त थे जो कि क्रौंच पर्वत के समीप ही रहते थे इन राजा की एक पुत्री थी जिनका नाम राजकुमारी चन्द्रावती था एक बार राजकुमारी चन्द्रावती किसी भारी मुसीबत में फस गई थी और इसी मुसीबत से बचने के लिये वह पर्वत पर रहने लगी वह यहाँ अपने सेवको के साथ रहने लगी |</p>



<p>राजकुमारी चन्द्रावती की एक गाय भी उनके साथ थी रोजाना गाय का दूध एक चट्टान पर बह जाता था अब यह दूध कौन निकालता था कैसे चट्टान पर आ जाता था यह समझ से परे था एक दिन राजकुमारी चन्द्रावती ने सपने में भगवान शिव को देखा शिवजी ने राजकुमारी को सपने में बताया कि वह चट्टान एक स्वयंभू शिवलिंग है |</p>



<p>अब क्या था अगली सुबह से राजकुमारी रोजाना उस शिवलिंग की पूजा करने लगी और राजकुमारी रोजाना मल्ल्लिका मतलब चमेली के पुष्प शिवलिंग पर अर्पण करती थी राजकुमारी की ऐसी भक्ति देख शिवजी अति प्रसन्न हुये और राजकुमारी चन्द्रावती को मोक्ष प्रदान किया |</p>



<h3 class="wp-block-heading">श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास </h3>



<p>अब बात करते है इस ज्योतिर्लिंग के इतिहास के बारे में  सातवाहन राजवंश के नासिक शिलालेख में इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है जिससे हमें यह ज्ञात होता है दूसरी शताब्दी में यह मंदिर अस्तित्व में था |</p>



<p>मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर के ज्यादातर भाग विजयनगर साम्राज्य के राजा हरिहर प्रथम ने बनवाये थे या उनके काल में बनवाये गए थे | काकतीय , पल्लव , चालुक्य साम्राज्य ने भी मंदिर बनवाने मे अहम भूमिका निभाई थी </p>



<p>विजयनगर राज्य के राजा कृष्णदेवराय ने इस जगह पर एक बेहद ही सुन्दर मंडप बनवाया था , प्रतापी राजा शिवाजी भी यहाँ पर आये थे और शिवाजी ने इस ज्योतिर्लिंग का प्रवेश द्वार और एक धर्मशाला बनवाई थी |</p>



<p>तो दोस्तों हमने आपको श्री शैलम <strong>मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा</strong> और ज्ञात इतिहास से परिचित कराया |</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/mallikarjun-jyotirling-ki-pauranik-katha-itihas/">मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा और इतिहास के बारे में पढिये</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>Bhimashankar Temple History &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 16:55:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हम इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को महारास्ट्र स्थित 12 ज्योतिर्लिंग में से एक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के इतिहास के बारे में बतायेंगे और यह भी जानेंगे की भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर को किसने और कब बनवाया &#124;</p>
<p>भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 125 किलोमीटर की दूरी पर सह्याद्री पर्वत पर  भोरगिरी गाँव में स्थित है इसी स्थल पर भीमा नदी का उद्गम भी हुआ है , इस ज्योतिर्लिंग का शिवलिंग अत्यधिक मोटा है इसी कारण भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव भी जाता है</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/bhimashankar-temple-history-%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">Bhimashankar Temple History &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का इतिहास</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Bhimashankar Temple History</strong> : हम इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को महारास्ट्र स्थित <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/">12 ज्योतिर्लिंग</a> में से एक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के इतिहास के बारे में बतायेंगे और यह भी जानेंगे की <a href="https://en.wikivoyage.org/wiki/Bhimashankar" target="_blank" rel="noreferrer noopener">भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग</a> मंदिर को किसने और कब बनवाया |</p>



<p>भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 125 किलोमीटर की दूरी पर सह्याद्री पर्वत पर  भोरगिरी गाँव में स्थित है इसी स्थल पर भीमा नदी का उद्गम भी हुआ है , इस ज्योतिर्लिंग का शिवलिंग अत्यधिक मोटा है इसी कारण भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव भी जाता है |</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>Bhimashankar Temple History</strong> &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की कथा </h2>



<p>भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में एक कथा प्रचलित है और इस कथा का जिक्र शिव पुराण में है इस पौराणिक कथा की शुरुआत रामायण काल से होती है राक्षस कुलश्रेष्ठ लंका के राजा रावण को तो आप सब जानते ही है और रावण के साथ साथ आप उसके भाई कुम्भकर्ण को भी जानते होंगे |</p>



<p>कुम्भकर्ण अत्यधिक बलवान था कुम्भकर्ण की पत्नी कर्कटी थी ,  कुम्भकर्ण और कर्कटी के एक पुत्र था जिसका नाम भीम था , कर्कटी और उसका पुत्र भीम लंका में नहीं रहते थे वो लंका से दूर एक पर्वत पे रहते थे आपको यह भी जानकारी होगी की भगवान राम के हाथो कुम्भकर्ण का वध हुआ था |</p>



<p>बस इसी क्षण से कर्कटी ने अपने पुत्र को बलवान बनाने का निश्चय किया जिससे भीम बड़ा होकर अपने पिता की मृत्यु का बदला ले सके धीरे धीरे भीम बड़ा हो गया फिर एक दिन  कर्कटी ने अपने पुत्र भीम को उसके पिता कुम्भकर्ण की मृत्यु के बारे में बताया बस उसी दिन से भीम बदले की आग में जलने लगा |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>Bhimashankar Temple History</strong> in Hindi</h4>



<p>भीम अपने पिता की मृत्यु का बदला लेना चाहता था और उसने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या शुरू कर दी और भीम के कठोर तप से भगवान ब्रह्मा प्रसन्न हुये और उसे वरदान दिया वरदान के फलस्वरूप भीम बहुत ही ज्यादा बलशाली हो गया था |</p>



<p>बस यही से भीम पाप करने लगा उसने स्वर्ग लोक पर आक्रमण किया और देवताओ को परास्त किया पृथ्वी पर पाप बढ़ने लगा यज्ञ , पूजा पाठ धार्मिक अनुष्ठान आदि बंद हो गए जहाँ भी किसी प्रकार की भी धार्मिक गतिविधि होती थी भीम उसे बंद करवा देता था |</p>



<p>अच्छा उस समय के राजा थे सुदक्षिण जो की कामरूप प्रांत में रहते थे राजा सुदक्षिण  शिवजी के अनन्य भक्त थे भीम को जब यह बात पता चली तो उसने कामरूप प्रांत पर आक्रमण कर दिया और राजा सुदक्षिण को परास्त कर दिया और राजा सुदक्षिण  को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया |</p>



<p><strong>Bhimashankar Temple History</strong> in hindi</p>



<p>इधर सभी देवता ऋषि मुनि असुर भीम के अत्याचार से परेशान होकर शिवजी के पास गए और उनसे विनती की कि इस असुर भीम के अत्याचार के सभी की रक्षा करे शिवजी ने सभी को आश्वासन दिया की जल्द ही भीम के पापो का घड़ा भरेगा और उसका अंत होगा |</p>



<p>इधर भीम की कैद में राजा सुदक्षिण ने कारागार में ही एक शिवलिंग बनाया और उसकी पूजा करने लगे राजा सुदक्षिण  को देखकर अन्य कैदी भी शिवजी की पूजा करने लगे जब यह बात असुर भीम की जानकारी में आई तो वो आग बबूला हो गया |</p>



<p>भीम राजा सुदक्षिण  का वध करने के लिये कारागार में आया उसने सबसे पहले शिवलिंग पर अपनी तलवार से प्रहार किया लेकिन उसकी तलवार शिवलिंग का स्पर्श तक नहीं कर पाई और तभी उसी शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुये उनके तेज से ही असुर भीम जलकर राख हो गया इस प्रकार भीम के पाप से सम्पूर्ण जगत आज़ाद हुआ |</p>



<p>भीम के वध के बाद सभी देवी देवताओ ने ऋषि मुनियों ने भगवान भोलेनाथ से आग्रह किया कि हे भोलेनाथ आप जग कल्याण हेतु इसी शिवलिंग में वास करे भगवान भोलेनाथ ने सबकी बात का माँन रखा और उसी शिवलिंग में स्थापित हो गए तब से यह शिवलिंग भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कहलाता है  |</p>



<p>आप इन्हें भी पढ़ सकते है &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-omkareshwar-hindi/">History of Omkareshwar – ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास पौराणिक कथा</a><br><a href="https://safarjankari.com/kashi-vishvanath-mandir-ka-itihas-hindi-me/">काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास , बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया</a><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर की किसने बनवाया था </h4>



<p>देखिये इस ज्योतिर्लिंग के सम्बन्ध में जो पौराणिक कथा थी वो हमने आपको बता दी अब बात करते है इतिहास की इतिहास से प्राप्त जानकारी के अनुसार मराठा शिरोमणि छत्रपति शिवाजी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था और इस मंदिर के शिखर का निर्माण दुबारा से मराठा पेशवा नाना फड़नवीस ने करवाया था |</p>



<h4 class="wp-block-heading">भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का निर्माण कब हुआ</h4>



<p>इस बात के कोई पुख्ता सबूत तो नहीं है लेकिन इस मंदिर का निर्माण 13वी सदी में हुआ था  फिर 18वी सदी में इसके शिखर को  पेशवा नाना फड़नवीस  ने बनवाया था |</p>



<p>भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169613816"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; भीमाशंकर क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भीमाशंकर एक ज्योतिर्लिंग है जो की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169664039"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कहा पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 125 किलोमीटर दूर भोरगिरी गाँव में |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169710679"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में कोन सी नदी बहती है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भीमा नदी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169756543"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211;  भीमाशंकर ज्योतिलिंग किस पर्वत पर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">सह्याद्री पर्वत </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169784886"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; Bhimashankar Temple History bataiye ?</strong> <p class="schema-faq-answer">कृपया पोस्ट को पूरा पढ़े |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169822150"><strong class="schema-faq-question">प्र० भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का निर्माण किसने करवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">सबसे पहले मराठा वीर छत्रपति शिवाजी ने फिर इसके शिखर को नाना फड़नवीस ने बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169895293"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का निर्माण कब हुआ ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इतिहास के माने तो 13वी सदी में |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1677169931862"><strong class="schema-faq-question">प्र० &#8211; Bhimashankar Temple History किससे सम्बन्धित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">Bhimashankar Temple History रामनयण काल में कुम्भकर्ण था उसके बेटे भीम से जुड़ी है </p> </div> </div>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/bhimashankar-temple-history-%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf/">Bhimashankar Temple History &#8211; भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का इतिहास</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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		<title>History of Omkareshwar &#8211; ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास पौराणिक कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Dec 2022 11:43:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>- सबसे पहले यह जान लीजिये कि 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के मध्य प्रदेश के खंडवा क्षेत्र में नर्मदा नदी के मन्धाता शिवपुरी द्वीप पर स्थित है , इस पवित्र ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कई पौराणिक कथाये है जिनके बारे में आज की यह पोस्ट है &#124;</p>
<p>शिव भक्त कुबेर से जुड़ी हुई पौराणिक कथा</p>
<p>नारद मुनि और विन्ध्याचल पर्वत से जुड़ी कथा </p>
<p>राजा मान्धाता से जुड़ी हुई पौराणिक कथा </p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/history-of-omkareshwar-hindi/">History of Omkareshwar &#8211; ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास पौराणिक कथा</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>History of Omkareshwar </strong>&#8211; सबसे पहले यह जान लीजिये कि <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">12 ज्योतिर्लिंग</a> में से एक ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के मध्य प्रदेश के <a href="https://khandwa.nic.in/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">खंडवा</a> क्षेत्र में नर्मदा नदी के मन्धाता शिवपुरी द्वीप पर स्थित है , इस पवित्र ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कई पौराणिक कथाये है जिनके बारे में आज की यह पोस्ट है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">History of Omkareshwar in Hindi</h2>



<p>हम आपको इस पोस्ट में ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी हुई सभी पौराणिक कथाओ <strong><em>History of Omkareshwar</em> </strong> को विस्तृत में बताएँगे उससे पहले आप थोडा सा इस ज्योतिर्लिंग के बारे में जान लीजिये देखिये यह ज्योतिर्लिंग खंडवा जिले में है और जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है वही मध्य प्रदेश के इन्दोर से ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग महज 85 किलोमीटर है और खंडवा इन्दोर दोनों ही रेलवे स्टेशन है तो आप आराम से यहाँ आ सकते है |</p>



<p>एक और महतवपूर्ण बात यहाँ पर ओम्कारेश्वर और ममलेश्वर दो शिवलिंग है और इन दोनों को एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है हिन्दू धर्म में ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अत्यधिक महत्त्व है इसके साथ साथ यहाँ बहने वाली नर्मदा नदी का भी विशेष महत्त्व है , माँ नर्मदा में स्नान करना भी पुण्य का कार्य है |</p>



<p>अब बात करते है <strong>History of Omkareshwar</strong> की देखिये यदि हम ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के इतिहास की बात करे तो इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाये हमको सुनने को मिलती है आइये हम एक एक करके इन कथाओ को जान लेते है &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">शिव भक्त कुबेर से जुड़ी हुई पौराणिक कथा &#8211; Omkareshwar History in Hindi</h4>



<p>आप सभी कुबेर देवता को जानते है जो कि हिन्दू धर्म में धन के देवता कहे जाते है कहा जाता है कि इस मंदिर में कुबेर जी ने शिव भगवान की घोर तपस्या की थी इसी तपस्या से शिवजी ने प्रसन्न होकर कुबेर देव को धनपति बनाया था कहते है की कुबेर देव के स्नान हेतु शिवजी ने अपनी जटाओ से कावेरी नदी को उत्पन्न किया था और कावेरी नदी आगे जाकर नर्मदा नदी में मिलती है इस जगह को ही कावेरी- नर्मदा संगम कहते है |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211;  <a href="https://safarjankari.com/somnath-mandir-ka-itihas-aur-kahani/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">सोमनाथ मन्दिर का इतिहास और पौराणिक कथा</a> </p>



<h4 class="wp-block-heading">नारद मुनि और विन्ध्याचल पर्वत से जुड़ी कथा &#8211; Omkareshwar History in Hindi</h4>



<p>आप सब नारद मुनिको तो जान्तेहिहाई वह सम्पूर्ण संसार में भ्रमण किया करते थे एक बार नारद मुनि भ्रमण करते हुये विन्ध्याचल पर्वत पर पहुँचते है , तो विन्ध्याचल पर्वत ने नारद मुनि का स्वागत किया और बोला कि मेरे पास हर एक चीज है समस्त सम्पदा मेरे पास है मै सर्वगुण सम्पन्न हूँ , नारद मुनि विन्ध्याचल पर्वत की घमण्ड से भरी बातो को सुनकर एक लम्बी सांस ली और शान्त भाव से खड़े रहे |</p>



<p>अब विन्ध्याचल पर्वत बोला हे मुनिवर आपको मेरे पास ऐसी कौन सी कमी दिखाई  दी है जो की आपने इतनी लम्बी सांस ली इस पर नारद मुनि बोले मै मानता हु तुम्हारे पास हर एक सम्पदा है लेकिन तुम सुमेरु पर्वत से ज्यादा ऊँचे नहीं हो इतना बोलकर नारद मुनि वहां से चले गये और विन्ध्याचल पर्वत मन ही मन बड़ा दुखी हुआ |</p>



<p>अब क्या था विन्ध्याचल पर्वत ने शिवजी की तपस्या करनी शुरू कर दी और एक शिवलिंग स्थापित किया और लगातार ६ महीने तक घोर ताप किया शिवजी प्रसन्न होकर वहां प्रकट हुये और बोले मै तुमसे प्रसन्न हु तुम जो वरदान चाहो वो मांग लो , विन्ध्याचल पर्वत बोला हे भगवन आप मुझे बुद्धि का वरदान दे जो कि मेरे कार्य सिद्ध करने वाली हो तो भोलेनाथ ने कहा ठीक है मै तुम्हे वरदान देता हु तुम जिस प्रकार का कार्य करना चाहते हो वह सिद्ध हो |</p>



<p>यही पर सभी देवता और ऋषि मुनि भी आ गए और भगवान शिव से निवेदन करने लगे कि आप यही पर सदैव के लिए  विराजमान हो जाये , शिवजी अत्यधिक प्रसन्न हुये और सभी की बात का मान रखा और वाही विराजमान हो गये तभी से यह ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रसिद्ध है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">राजा मान्धाता से जुड़ी हुई पौराणिक कथा &#8211; History of Omkareshwar<strong> </strong>in Hindi</h4>



<p>एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा मान्धाता ने इसी पर्वत पर भगवान शिव की तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान शिव बहुत ही प्रसन्न हुये और उन्होंने अपने दिव्य दर्शन राजा मान्धाता को दिये फिर वरदान में राजा मान्धाता ने शिवजी से वाही पर विराजमान होने का आग्रह किया जिसे शिवजी ने स्वीकार कर लिया तभी से यह ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग है इस जगह को इसीलिए ओंकार- मान्धाता भी कहते है |</p>



<p>इन लोक कथाओ के अलावा भी कई कथाये प्रचलित है जैसे कह्तेही एक बार अक्षसो और देवताओ के मध्य भयंकर युद्ध हुआ था जिसमे देवता पराजित हो गए थे फिर सभी देवता भगवान शिव की शरण में आये उन्होंने इसी पर्वत पर शिवजी की पूजा-अर्चना की जिससे शिवजी काफी प्रभावित और प्रसन्न हुये और ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में यही पर विराजमान हो गये और राक्षसों का विनाश किया |</p>



<p>तो आपने देखा कि इस ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में कई पौराणिक कथाये है ,<strong> History of Omkareshwar</strong> में आपने कई कथाये पढ़ी यह सभी कथाये मैंने इन्टरनेट और हिन्दू धार्मिक ग्रंथो की सहायता से आप तक  पहुंचाई है इनमे कोई त्रुटी हो तो कमेन्ट के माध्यम से अवश्य बताये |</p>



<p><strong>Omkareshwar History in Hindi</strong></p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1670326125088"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग किस राज्य में है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मध्य प्रदेश |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1670326178949"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; History of Omkareshwar bataiye ?</strong> <p class="schema-faq-answer">kai kathaye hai jaise Raja mandhata ki kahani , Kuber Dev ki Kahani , Narad Muni aur Vindhyachal parvat ki Kahani .</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1670326274973"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या ओम्कारेश्वर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जी हाँ |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1670326308027"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में प्रचलित पौराणिक कथाये बताये ?</strong> <p class="schema-faq-answer">१. राजा मान्धाता से जुड़ी कथा <br/>२. कुबेर देवता से जुड़ी कथा<br/>३. नारद मुनि और विन्ध्याचल पर्वत से जुड़ी कथा <br/>विस्तृत में कथा पढने के लिये यह पोस्ट को पूरा पढिये |</p> </div> </div>
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		<title>Humayun Tomb History in Hindi &#8211; हुमायूँ के मकबरे का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Oct 2022 13:59:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p> हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है और यह मुग़ल शासक हुमायूँ का मकबरा है इस पोस्ट में हम इस मकबरे के इतिहास से सम्बन्धित बात करेंगे और हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया कब बनवाया जैसे प्रश्नों के उत्तर भी जानेंगे &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Humayun Tomb History </strong>&#8211; हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है और यह मुग़ल शासक<a href="https://whc.unesco.org/en/list/232/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"> हुमायूँ का मकबरा</a> है इस पोस्ट में हम इस मकबरे के इतिहास से सम्बन्धित बात करेंगे और <strong>हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया कब बनवाया</strong> जैसे प्रश्नों के उत्तर भी जानेंगे |</p>



<p>इसे एक बात ज्यादा खास बनाती है वह है यह मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप का पहला उद्यान मकबरा था इसका निर्माण मुग़ल वास्तुकला में हुआ है , इस मकबरे में हुमायूँ की कब्र के अलावा और भी कई राजशी व्यक्तियों की कब्रे है  |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Humayun Tomb History  -हुमायूँ के मकबरे का इतिहास </h2>



<p>हुमायूँ का मकबरा दिल्ली के पुराने किले पास है और दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो भी दिल्ली घूमने आता है उसकी लिस्ट में हुमायूँ का मकबरा भी शामिल रहता है  हालाँकि आज के दिन यह मकबरा लाल किला , कुतुबमीनार से काफी कम प्रसिद्ध है | </p>



<p>सन 1556 में हुमायूँ की मृत्यु हुई थी और उस समय हुमायूँ दिल्ली के पुराने किले में दफना दिया गया था फिर किन्ही कारणवश तकरीबन 9 साल बाद हुमायूँ के मकबरे का निर्माण का कार्य शुरू हुआ तब हुमायूँ को पुराने किले से लाकर इस मकबरे में दुबारा दफनाया गया था |</p>



<p><strong>Humayun Tomb History</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="445" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi.jpg" alt="Humayun Tomb History in Hindi" class="wp-image-12350" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi.jpg 800w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi-300x167.jpg 300w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/10/Humayun-Tomb-History-in-Hindi-768x427.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption>Humayun Tomb </figcaption></figure>



<h4 class="wp-block-heading">हुमायूँ का मकबरा कब बनाया गया था </h4>



<p>यह मकबरा 1565 से बनना शुरू हो गया था और सन 1572 में यह बनकर तैयार हो गया था इस मकबरे को बनाने में लगभग 8 साल लग गए थे , यह मकबरा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में भी शामिल है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया </h4>



<p>यह मकबरा सम्राट अकबर के आदेश पर एक फ़ारसी वास्तुकार ने बनवाया था जिसका नाम मीराक मिर्ज़ा घियाथ था इस कार्य में हुमायूँ की पत्नी ने वास्तुकार की मदद की थी | हुमायूँ की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को सदमा लग गया था वो काफी दुखी हुई थी तभी उन्होंने अपने शौहर की याद में मकबरा &#8211; ए &#8211; हुमायूँ बनवाने का प्रयास किया |</p>



<p>इस मकबरे के वास्तुकार मीरक मिर्जा साहब की मृत्यु मकबरे के अधूरे काम के मध्य हो गई थी तो बाकी का काम इन्ही के पुत्र  सैय्यक मुहम्मद इब्र ने किया था |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-india-gate-in-hindi-india-gate-kisne-banaya-tha/">History of India Gate in Hindi &#8211; इण्डिया गेट का इतिहास </a><br><a href="https://safarjankari.com/information-of-red-fort-in-hindi/">Information of Red Fort in Hindi </a></p>



<h4 class="wp-block-heading">वास्तुकला </h4>



<p>आइये अब हुमायूँ के मक्बरे के वास्तुकला को थोडा सा जान लेते है तो यहाँ पर जो सबसे प्रमुख ईमारत बनी है वही हुमायूँ का मकबरा है और यहाँ पर सिर्फ हुमायूँ की ही कब्र ही नहीं अपितु उनकी बेगम सहित बहुत सी कब्रे है , इस मकबरे में कई छोटे छोटे स्मारक भी बने हुये है |</p>



<p>इस मकबरे की दीवारों पर की गई कलाकृतियाँ बहुत ही सुन्दर है इस मकबरे में ज्यादातर चूना और पत्थर का उपयोग किया गया है और इसे लाल बलुआ पत्थरो से बनाया गया है इसकी जो दीवारे है उन पर सफ़ेद रंग का संगमरमर लगा हुआ है |</p>



<p>इस मकबरे की जो सबसे खास बात है वह इसका चार बाग़ गार्डन जो की उस समय का पहला ऐसा मकबरा था जिसमे यह चार बाग़ गार्डन हो लगभग 30 एकड़ में बना यह चारबाग़ शैली का गार्डन बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है |</p>



<p>यह उद्यान बहुत ही भव्य है इसमें चार भाग में पैदल पथ है और दो भाग में जल नलिकाए है अरे ऐसे क्या लिखू जब आप जाओगे तब देखोगे इसकी गज़ब की वास्तुकला , इस मकबरे में एक हम्माम भी है जिसका उप्योह पहले स्नान हेतु किया जाता था  |</p>



<p>आज यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है यह मुग़ल वास्तुकला से प्रेरित मकबरा है अगर हम इस मकबरे के खास खास जगहों की बात करे तो हुमायूँ के मकबरे में स्थित ईसा खान का मकबरा , नीला गुम्बद , चारबाग , अरब सराय  , हुमायूँ के नाई का मकबरा आदि खास है |</p>



<p>यदि हम इस मक्ब्रेकी लोकेशन की बात करे तो यह दिल्ली में निजामुदीन रेलवे स्टेशन से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है आप हज़रात निजामुदीन मेट्रो स्टेशन से भी यहाँ आ सकते है |</p>



<p>तो अब यदि आप दिल्ली से है या दिल्ली घूमने आते है तो एक बार हुमायूँ का मकबरा भी देख सकते है |</p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202613478"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पुरानी दिल्ली  में हज़रत निजामुदीन एरिया में | </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202708346"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">अकबर और हुमायूं की बेगम के आदेश अनुसार वास्तुकार मीराक मिर्ज़ा घियाथ ने इसे बनवाया |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202786537"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; Humayun Tomb History kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer">पोस्ट पढ़िए आपको मकबरे से सम्बंधित समस्त इतिहास मिलेगा |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202830569"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ का मकबरा कब बनाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">1565 से बनने का कार्य शुरू हुआ था और 1572 में यह मकबरा बन गया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667202965668"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ के मकबरे के वास्तुकार कौन थे ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीराक मिर्ज़ा घियाथ |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667203018945"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ की बेगम का क्या नाम था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हमीदा बानो</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1667203142881"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; हुमायूँ के मकबरे का इतिहास बताइए ?</strong> <p class="schema-faq-answer">हुमायूँ की मृत्यु सन 1556 में हुई थी उस समय हुमायूँ की दिल्ली के पुराने किले में दफना दिया गया था फिर अकबर और हुमायूँ की बेगम ने 1565 से मकबरा बनवाने का कार्य शुरू किया जो की 1572 में बन गया तब हुमायूँ को इस नए मकबरे में दफनाया गया था |</p> </div> </div>



<p><strong>Humayun Tomb History</strong> की यह सभी जानकारी हमने इतिहास की पुस्तकों और इन्टरनेट की मदद से ली है कोई त्रुटी हो तो माफ़ करियेगा |</p>
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		<title>ओरछा का इतिहास &#124; श्री राम राजा मन्दिर की कहानी &#124; राजा हरदौल की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Mar 2022 10:29:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[ओरछा धाम]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश में घूमने की जगहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ओरछा का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली है पढ़े इस पोस्ट में राजा राम मन्दिर की कहानी , राजा हरदौल की कहानी , ओरछा के किले और महलों का इतिहास  </p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%be/">ओरछा का इतिहास | श्री राम राजा मन्दिर की कहानी | राजा हरदौल की कहानी</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>ओरछा का इतिहास </strong>बड़ा ही गौरवशाली है पढ़े इस पोस्ट में <strong>राजा राम मन्दिर की कहानी</strong>  <strong>राजा हरदौल की कहानी</strong>  <strong>ओरछा के किले और महलों का इतिहास</strong>  , <a href="https://www.tourism-of-india.com/orchha/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ओरछा </a>भारत के मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित एक ऐसा क़स्बा है जहाँ किले और मंदिरों का अपना एक अलग ही इतिहास है पर्यटन की दृष्टिकोण से यह जगह बहुत बढ़िया है आप हमारी पोस्ट <a href="https://safarjankari.com/orchha-ghumne-ki-samast-jankari/">ओरछा में घूमने की जगहों की A to Z जानकारी – Orchha Tourist Places (2022)</a> से यहाँ घूमने की जानकारी पढ़ सकते है |</p>



<h2 class="wp-block-heading">ओरछा का इतिहास</h2>



<p class="has-text-align-justify">बेतवा नदी के किनारे पर बसा ओरछा मध्य काल के समय में परिहार राजाओ की राजधानी हुआ करता था अच्छा परिहार राजाओ के बाद यहाँ पर चंदेल राजाओ ने भी शासन किया है और चन्देल शासको के बाद यहाँ पर बुन्देल राजाओ ने राज किया है  जो आपको वर्तमान में ओरछा दिखाई देता है उसके निर्माण की शुरुआत राजा रूद्र प्रताप सिंह ने सन 1501 से  करवाई था अब हम आपको इस जगह के प्रमुख प्रमुख जगहों के इतिहास से रूबरू कराते है विस्तृत में <em><strong>ओरछा का इतिहास</strong> </em> बताते है  &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">श्री राम राजा मन्दिर की कहानी</h4>



<p class="has-text-align-justify">श्री राम राजा सरकार का महत्त्व आपको अयोध्या के बाद ओरछा में दिखाई देता है यहाँ लोग भगवान राम को अपना राजा मानते है यहाँ पर राम हर धर्म के राजा है दूर-दूर से लोग इस स्थल पर राम राजा के दर्शन करने आते है आइये अब इस मन्दिर के इतिहास पर आते है जो शुरू होता है मधुकर शाह जी के कार्यकाल से जो की यहाँ के महाराजा थे और कृष्ण भक्त थे  और महारानी जो की ग्वालियर जिले से थी वो एक राम भक्त थी महारानी का नाम कुंवर गणेश था |</p>



<p class="has-text-align-justify">एक दिन मधुकर शाह और कुंवर गणेश बाते कर रहे थे और बातो की बातो में दोनों अपने अपने ईष्ट देव को लेकर झगडा करने लगे और महाराजा मधुकर शाह ने महारानी से बोल दिया कि यदि वो एक सच्ची राम भक्त है तो जाए अयोध्या और रामजी को यहाँ ओरछा ले आये अब महारानी जी ने भी यह बात मान ली और बोली की या तो अब मै अपने ईष्ट प्रभु राम को अयोध्या से ओरछा लाऊंगी या फिर अयोध्या में ही अपने प्राण त्याग दूंगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब क्या था महारानी कुंवर गणेश आ गई अयोध्या और सरयू नदी के किनारे शुरू कर दो अपने प्रभु राम जी की पूजा 7 दिन हो चुके थे ( कही कही 21 दिन बताया जाता है ) महारानी जी को श्रीराम ने दर्शन नहीं दिए अब महारानी जी हताश होकर अपने प्राण त्यागने का निर्णय लेती है और सरयू में छलांग लगा देती है  तभी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एक बालक के रूप में वहां आ जाते है ( कुछ लोगो का कहना है की सरयू में जब महारानी से छलांग लगाईं थी तो जलधारा में ही भगवान राम महारानी की गोद में बैठ गए थे ) |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब महारानी  बालक रूप में आये श्रीराम से ओरछा चलने का निवेदन करती है श्रीराम मान भी जाते है लेकिन तीन शर्तो के साथ अब महारानी कुंवर गणेश भगवान राम से उनकी शर्ते पूछती है अब आप शर्ते सुनिये &#8211; </p>



<p class="has-text-align-justify">पहली शर्त &#8211; जहाँ हम जा रहे है वहां के सिर्फ हम ही राजा होंगे कोई दूसरा नहीं <br>दूसरी शर्त &#8211;  अयोध्या से ओरछा तक आपके साथ हम पैदल जायेंगे वो भी पुण्य नक्षत्र में <br>तीसरी शर्त &#8211;  यदि हम कही पर भी बैठ गए तो वहां से उठेंगे नहीं |<br><br>महारानी कुंवर गणेश ने श्रीराम की तीनो शर्ते मान ली फिर श्रीराम एक मूर्ति के रूप में महारानी की गोद में बैठ गए और महारानी पैदल ही ओरछा की तरफ चल दी और 8 महीने 28 दिन में वो ओरछा आ गई थी अच्छा यह भी कहा जाता है महारनी के ओरछा पहुँचने से पहले महाराजा मधुकर शाह को सपना आया था की महारानी भगवान राम को लेकर आ  रही है तो मधुकर शाह ने भगवान राम के लिये मन्दिर बनवाना शुरू कर दिया जिसे चतुर्भुज मन्दिर कहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">लेकिन यह चतुर्भुज मन्दिर पूर्णता बन पाता उससे पहले ही महारानी कुंवर गणेश जी श्रीराम को लेकर ओरछा आ गई और श्रीराम को अपने महल की रसोई घर में थोड़े समय के लिए स्थापित कर दिया फिर जब चतुर्भुज मंदिर बन गया तब उस मूर्ति को रसोई घर से उठाकर इस चतुर्भुज मंदिर में स्थापित किया जाना था लेकिन श्रीराम की वह मूर्ति वहां से उठी ही नहीं इसी को सभी ने भगवान राम का चमत्कार माना और उसी महल को मंदिर बना दिया इसी महल नुमा मंदिर में आज आपको श्री राम राजा दर्शन देते है इस मंदिर को ही श्री राम राजा मन्दिर कहा जाता है |</p>



<p>तो इसीलिये महल में बैठे राजा राम ओरछा के राजा है ओरछा में सिर्फ राजा राम की ही सर्कार चलती है यहाँ पर पुलिस द्वारा बन्दूक से राजा राम को सलामी दी जाती है <strong>ओरछा का इतिहास</strong> बगैर <strong>श्री राम राजा सरकार के इतिहास </strong>के अधूरा है  |</p>


<div class="wp-block-image is-style-default">
<figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="450" height="600" src="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर.jpg" alt="श्री राम राजा सरकार मन्दिर Orchha Tourist Places" class="wp-image-10983" srcset="https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर.jpg 450w, https://safarjankari.com/wp-content/uploads/2022/02/श्री-राम-राजा-सरकार-मन्दिर-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><figcaption>श्री राम राजा सरकार मन्दिर</figcaption></figure>
</div>


<h4 class="wp-block-heading">राजा हरदौल की कहानी &#8211; ओरछा का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify"><strong>राजा हरदौल की कहानी</strong> बुन्देलखण्ड के लगभग हर घर मे सुनाई जाती है यह कहानी भाई बहन के प्रेम को दिखाती है देखिये हरदौल राजा वीर सिंह देव के पुत्र थे और जुझार सिंह हरदौल के भाई थे राजा वीर सिंह ने जुझार सिंह को ओरछा का राजा बनाया था और हरदौल को दीवान कोई व्यक्ति जो हरदौल से नफरत करता था उसने राजा जुझार सिंह को बहका दिया की हरदौल के अवैध सम्बन्ध जुझार सिंह की पत्नी चम्पावती के साथ है |<br><br>बस अब क्या था राजा जुझार सिंह ने रानी चम्पावती को हरदौल को जहर देने का आदेश दे दिया रानी गई लेकिन वो हरदौल को ज़हर न दे सकी अपनी भाभी की इज्जत की खातिर हरदौल ने स्वयं ही ज़हर पी लिया कहानी अभी समाप्त नहीं होती है हरदौल को बस्ती से दूर दफना दिया जाता है फिर एक दिन जुझार सिंह हरदौल की बहन कुंजावती आती है कुंजावती दतिया के राजा राजा रणजीत सिंह की पत्नी थी |<br><br>कुंजावती अपनी बेटी की शादी में राजा जुझार सिंह से भात मांगने आई थी लेकिन जुझार सिंह ने कुंजावती का यह निवेदन यह बोलकर ठुकरा दिया की कुंजावती तो हरदौल से ज्यादा स्नेह करती थी तो अब जाकर शमशान में हरदौल से ही भात मांगे अब क्या कुंजावती रोने लगी और रोते रोते ही पहुँच गई हरदौल की समाधि पर और भात मांगने लगी तभी एक आवाज आई की हरदौल भात लेकर आएगा |<br><br>लोककथाओ की माने तो सच में हरदौल की आत्मा अपनी भांजी की शादी में भात लेकर गई थी लेकिन यहाँ जो कुंजावती का दामाद था वो नहीं माना फिर हरदौल को अपने शरीर के साथ प्रकट होना पड़ा था तभी से बुन्देलखंड में हरदौल को देवता के रूप में पूजते है |<br><br>बुन्देलखण्ड में आज भी कोई भी शादी या यज्ञ इत्यादि होता है तो सबसे पहला निमन्त्रण हरदौल को ही दिया जाता है तो ऐसे थे हरदौल ओरछा में श्री राम राजा मंदिर के समीप ही हरदौल बैठका बना हुआ है , <strong>  राजा हरदौल की कहानी ओरछा का इतिहास</strong> में सदैव याद की जायेगी |</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211; <a href="https://safarjankari.com/history-of-kumbhalgarh-fort-in-hindi/">History of Kumbhalgarh Fort in Hindi – कुम्भलगढ़ दुर्ग का इतिहास</a></p>



<h4 class="wp-block-heading">सावन भादो पिलर ओरछा का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify">सावन भादो मीनार श्री राम राजा सरकार मन्दिर के समीप ही बने हुये है इस दोनों मीनारों के बारे में किद्वंती है कि सावन महीने के ख़त्म के बाद और भादव का महिना शुरू होने से पहले यह दोनो मीनारे आपस में मिल जाती है और इन मीनारों के नीचे सुरंग बनी है जहाँ से राजपरिवार के लोग आया जाया करते थे फ़िलहाल अब ये सुरंगे बंद कर दी गई है वैसे ये जो दोनों पिलर के आपस में मिलने की बात है इसके कोई भी सबूत नहीं है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">ओरछा के किले का इतिहास </h4>



<p class="has-text-align-justify">अब बात करते <strong>ओरछा के किले के इतिहास</strong> बारे में राजा रूद्र प्रताप सिंह ने यह किला बनवाया था इसके बाद यही कई राजा हुये और सबने अलग अलग महल बनवाये थे </p>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले बात करते है <strong>जहाँगीर महल के इतिहास</strong> की जिसका निर्माण राजा वीर सिंह देव ने सन 1605 से 1627 के मध्य करवाया था इस महल का निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर के सम्मान में करवाया गया था ये महल बुन्देल और मुग़ल शिल्प कला का मिश्रित उदहारण है इस महल का जो प्रथम तल है उसका निर्माण सन 1606 में जहाँगीर के आने से पहले पूर्ण हो गया था बाकी जो दृतीय ताल पर जो कक्ष , गुम्बद और छत्रियां बनी है उनका निर्माण सन 1618 में हुआ था |</p>



<p class="has-text-align-justify"><br>राजा वीर सिंह और जहाँगीर की दोस्ती बहुत ही ज्यादा थी क्युंकी जब मुग़ल शासक अकबर ने अबुल गजल को जहाँगीर को काबू में करने के लिये भेजा था इसी बीच जहाँगीर की दोस्ती राजा वीर सिंह से हो गई थी तो फिर राजा वीर सिंह ने अबुल फज़ल को मरवा दिया था फिर जब जहाँगीर मुग़ल बादशाह बना तो उसने ओरछा को राजा वीर सिंह को सौंप दिया था ऐसा कुछ इतिहास है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब बात करते है <strong>राय प्रवीण महल के इतिहास</strong> की यह महल भी ओरछा के किले के अन्दर बना हुआ है सन 1592 से 1605 के मध्य महाराजा राम शाह के छोटे भाई ओरछा के कार्यवाहक शासक थे जिनका नाम इन्द्रजीत सिंह था राय प्रवीण उनकी प्रेमिका थी राय प्रवीण एक कुशल नर्तकी थी , महाकवि केशवदास ने अपने ग्रन्थ कवी प्रिय में राय प्रवीण की सुन्दरता का खूब बखान किया हुआ है राय प्रवीण महाकवि केशवदास की शिष्या थी तो यह राय प्रवीण महल राजा इन्द्रजीत ने अपनी प्रेमिका राय प्रवीण के लिये ही बनवाया था |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब बात करते है किले के ही अन्दर स्थित <strong>राजा महल के इतिहास</strong> की जिसका निर्माण सन 1501 से 1531 के मध्य राजा रूद्र प्रताप ने शुरू करवाया था इसके बाद राजा रूद्र प्रताप सिंह के बड़े बेटे भारती चंद ने इस महल का कार्य 1531 से 1554 में मध्य में पूर्ण करवाया फिर इस महल में कुछ परिवर्तन भी हुए जो भारती चंद के अनुज मधुकर शाह ने 1554 से 1592 के मध्य करवाए |</p>



<p>ओरछा का इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992646222"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; ओरछा का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">यह बताने के लिये हमने पोस्ट लिखी है आप  पढ़े और पोर इतिहास समझिये |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992756538"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; रामराजा सरकार की कहानी क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"> रामराजा सरकार की कहानी ओरछा की महारानी कुंवर गणेश जी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी हमने लिखी है कृपया पोस्ट पढ़े |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662992917963"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; क्या <strong>ओरछा</strong> के इतिहास में राजा हरदौल की कहानी का महत्त्व है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">निसंदेह ओरछा से जुड़ा कोई भी मुद्दा हो तितिहस हो या भूगोल राजा हरदौल जरूर याद किये जायेंगे |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993000293"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>ओरछा</strong> का किला किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा रुद्रप्रताप सिंह ने |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993032707"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; राय प्रवीण महल किसने और किसके लिए बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा इन्द्रजीत सिंह जे अपनी प्रेमिका राय प्रवीण के लिये यह किला  बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993129858"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>ओरछा </strong> का राजा महल किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">राजा महल के निर्माण का काम राजा रूद्र प्रताप ने शुरू करवाया था बाद में भारती चंद और मधुकर शाह ने इसे पूरा बनवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662993260827"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211;  जहाँगीर महल का निर्माण किसने करवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">जहाँगीर महल का  निर्माण राजा वीर सिंह देव जी ने करवाया था |</p> </div> </div>



<p>तो दोस्तों ये था <strong>ओरछा का इतिहास</strong> जिसमे हमने आपको <strong>श्री राम राजा मन्दिर की कहानी</strong> बताई <strong>राजा हरदौल की कहानी</strong> बताई   यह समस्त जानकारी मेरे खुद की नहीं है जो मैंने लोगो से सुना है ओरछा गया था तो वहां लगे पुरातत्व विभाग के बोर्ड में पढ़ा वही से समस्त जानकारी एकत्रतित करके यह पोस्ट लिखी है कही कोई गलत जानकारी हो तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में लिखकर अवश्य बता दे |<br></p>
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		<title>Mata Vaishno Devi Ki Kahani &#124; माता वैष्णो देवी की पौराणिक कथा</title>
		<link>https://safarjankari.com/mata-vaishno-devi-ki-kahani-history-of-vaishno-devi-temple/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Sep 2021 15:48:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Mata Vaishno Devi Ki Kahani की इस  पोस्ट में हम आपको जम्मू के कटरा में स्थित माँ वैष्णो देवी के मन्दिर की पौराणिक कथाओ के बारे में बताएँगे इस मन्दिर में हमेशा श्रधालुओ की एक भारी भीड़ होती है  आज हम आपको माता वैष्णो देवी मन्दिर के इतिहास और पौराणिक कथाओ के बारे में बताने वाले है  जिससे आप सभी इस मन्दिर के महत्त्व को समझे &#124;</p>
<p>The post <a href="https://safarjankari.com/mata-vaishno-devi-ki-kahani-history-of-vaishno-devi-temple/">Mata Vaishno Devi Ki Kahani | माता वैष्णो देवी की पौराणिक कथा</a> appeared first on <a href="https://safarjankari.com">SAFAR JANKARI</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> की इस  पोस्ट में हम आपको जम्मू के <a href="https://wikitravel.org/en/Katra" target="_blank" rel="noreferrer noopener">कटरा</a> में स्थित माँ वैष्णो देवी के मन्दिर की पौराणिक कथाओ के बारे में बताएँगे इस मन्दिर में हमेशा श्रधालुओ की एक भारी भीड़ होती है  आज हम आपको माता वैष्णो देवी मन्दिर के <a href="https://safarjankari.com/dharmik-kahani-etihasik-kahani/">इतिहास और पौराणिक</a> कथाओ के बारे में बताने वाले है  जिससे आप सभी इस मन्दिर के महत्त्व को समझे |</p>



<h2 class="wp-block-heading">Mata Vaishno Devi Ki Kahani &#8211; माता वैष्णो देवी की कथा </h2>



<p class="has-text-align-justify">माँ वैष्णो देवी की कहानी जानने से पहले हम यह जान ले<strong> आखिर है कौन माँ वैष्णो देवी</strong> तो दोस्तों ध्यान दीजियेगा  माँ महाकाली माँ सरस्वती माँ महालक्ष्मी के सम्मिलित रूप को ही माँ वैष्णो देवी कहा जाता है और जो कटरा में मातारानी का भवन है वहा आपको तीन पिंडी दिखाई देती है जिनमे से एक माँ महाकाली एक माँ महासरस्वती और एक माँ महालक्ष्मी की  है और इन तीनो देवियों के सम्मिलित रूप को हम माँ वैष्णो देवी बोलते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">चलिए अब शुरू करते है <strong><em> Mata Vaishno Devi Ki Kahani</em></strong>   के बारे में इस मन्दिर के सन्दर्भ में कई पौराणिक कथाये है जिनमे से पण्डित श्रीधर से सम्बन्धित कथा और भैरवनाथ से सम्बन्धित कथा ज्यादा प्रचलित है जब मैंने इस विषय पे थोडा रिसर्च किया तो यह पाया कुछ लोग इन दोनों कथाओ को अलग अलग बताते है जबकि कुछ लोग इन दोनों ही कथाओ को एक साथ ही जोड़के देखते है खैर जो भी दोनों ही कथाये आपको हम बताते है मैंने भगवान् राम से सम्बंधित भी एक कथा सुनी है जिसका भी जिक्र यहाँ कर दूंगा  |</p>



<h3 class="wp-block-heading">History of Vaishno Devi Temple in Hindi</h3>



<p class="has-text-align-justify">इस मन्दिर के इतिहास की बात करे तो ज्यादातर इस मन्दिर का सम्बन्ध पण्डित श्रीधर से ही बताया जाता है जो की लगभग 700 पूर्व की एक कथा है <strong>History of Vaishno Devi Temple</strong> में ज्यादा कुछ नहीं है बस इस मन्दिर से जुडी पौराणिक कथाये ही इस का इतिहास है |</p>



<h4 class="wp-block-heading">पण्डित श्रीधर से जुडी हुई माँ वैष्णो देवी मन्दिर की पौराणिक कथा </h4>



<p class="has-text-align-justify">अब हम <strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> की शुरुआत करते है पण्डित श्रीधर की कहानी से जम्मू राज्य में कटरा से थोड़ी दूरी पर है हंसाली गाँव यही रहते थे श्रीमान श्रीधर , श्रीधर जी के कोई संतान नहीं थी इसीलिए वो थोडा दुखी रहते थे |</p>



<p class="has-text-align-justify">एक दिन श्रीधर ने सभी गाँव वालो को भंडारे का न्योता दिया और गाँव वालो ने भंडारे के आयोजन के लिए पण्डित श्रीधर की मदद की फिर भी इतनी सामग्री एकत्र नहीं हो पाई जिससे भण्डारा अच्छी तरह हो जाता अब श्रीधर जी को यह चिंता सताने लगी की वो भण्डारा कैसे करेंगे अगले दिन भण्डारा था और श्रीधर पूरी रात सो नहीं पाए |</p>



<p class="has-text-align-justify">जिस दिन भण्डारा होना था श्रीधर जी स्नान करके  अपनी कुटिया में पूजा पाठ किये और दोपहर से गांववासी आने लगे अब भी श्रीधर जी चिन्तित थे ये सब कैसे होगा परन्तु उन्होंने देखा एक अत्यंत सुन्दर कन्या वैष्णवी सभी को भोजन करा रही थी और यह भण्डारा अच्छे तरीके से संपन्न हो गया सभी उस कन्या की तारीफ कर रहे थे परन्तु भण्डारे के बाद वो कन्या किसी को नहीं दिखी  उस कन्या का तेज देखने लायक था |</p>



<p class="has-text-align-justify">एक दिन वही कन्या वैष्णवी पंडित श्रीधर के सपने में आई और गुफा के बारे में बताया और इसके साथ ही  पण्डित जी को बेटे का वरदान भी दिया बस पंडित श्रीधर समझ गये थे के वो कन्या कोई और नहीं साक्षात देवी वैष्णो है और उन्होंने गुफा की खोज की बस तबसे उस गुफा में श्रद्धालु आने लगे  |</p>



<h4 class="wp-block-heading">भैरवनाथ से जुडी हुई माता वैष्णो देवी की पौराणिक कथा  &#8211;  <strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> </h4>



<p class="has-text-align-justify">ऐसा कहा जाता है की पण्डित श्रीधर के भण्डारे में बाबा गोरखनाथ और उनके शिष्य भैरवनाथ भी आये थे जब बालिका वैष्णवी ने भैरवनाथ को खाना परोसा तो वो बोले की मुझे मांसाहारी भोजन करना है तब उस बालिका ने विनम्र भाव से भैरवनाथ से कहा की ये एक पण्डित के घर का भण्डारा है यहाँ आपको शुद्ध शाकाहारी भोजन ही मिलेगा परन्तु भैरवनाथ ज़िद करने लगे और उस बालिका को पकड़ना चाहा तब वो वालिका वायु रूप में परिवर्तित होकर त्रिकुटा पर्वत पे चली गई |</p>



<p class="has-text-align-justify">यहाँ पर भी भैरवनाथ माने नही और माँ के पीछे पीछे वो भी त्रिकुटा पर्वत पर आ गये अब मान्यताओ अनुसार कहा जाता है की माँ वैष्णो की सुरक्षा के लिए वहा पवनपुत्र हनुमान जी आये बजरंगबली हनुमान को प्यास लगी तो माँ वैष्णो ने बाण चलाकर एक जलधारा उत्पन्न की और उसी जलधारा में माँ ने अपने केश भी धुले इसी स्थान को बाणगंगा बोला जाता है और कहा जाता है इस  बाणगंगा  में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते है  |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसके बाद माता वैष्णो ने एक गुफा में तपस्या की और हनुमान जी ने वहां पहरा दिया अब यहाँ भी भैरवनाथ आये हालाँकि यहाँ एक साधूजी ने भैरवनाथ को समझाया की वो बालिका कोई साधारण बालिका नहीं अपितु वह साक्षात् माँ जगदम्बा है परन्तु भैरवनाथ नहीं माना तब माता वैष्णो उस गुफा के दूसरे मार्ग से निकल गई थी शायद इसी स्थल को अर्धकुमारी कहा जाता है |</p>



<p class="has-text-align-justify"><br>आप <strong>माता वैष्णो देवी की कहानी</strong> को पढ़ रहे है इसके अलावा आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके यह पोस्ट भी पढ़ सकते है &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/science-city-lucknow-information-ticket-price-timing-hindi-me/">Science City Lucknow Information Ticket Price Timing in Hindi</a><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-kumbhalgarh-fort-in-hindi/">History of Kumbhalgarh Fort in Hindi – कुम्भलगढ़ दुर्ग का इतिहास</a></p>



<p class="has-text-align-justify">अब इस गुफा से जैसे ही माँ बाहर आई उन्होंने देवी का रूप लिया और भैरवनाथ को वहां से जाने को कहा और दुबारा गुफा के अन्दर चली गई लेकिन भैरवनाथ अब भी वही थे तो हनुमान जी और भैरवनाथ का घमासान युद्ध हुआ इस युद्ध का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा था |</p>



<p class="has-text-align-justify"> फिर माता वैष्णो ने बाहर आकर भैरवनाथ का वध किया यही स्थल भवन कहा जाता है और भैरवनाथ का सर जिस घाटी में गिरा उसे भैरव घाटी कहा जाता है और यही पे बाबा भैरव का मन्दिर भी है जहाँ श्रद्धालु दर्शन हेतु जाते है |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब भैरवनाथ को अपने किये पे पश्चाताप हुआ और उसने माँ से क्षमा मांगी तो माता ने भैरवनाथ को वरदान दिया था कि जो श्रद्धालु मेरे दर्शन करने आएगा उसको तब तक उचित फल नहीं मिलेगा जब तक वो तुम्हारे दर्शन न कर ले तो दोस्तों यह भी एक <strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> थी इसके अनुसार जो भी माँ वैष्णो देवी के दर्शन करने जाए उसे बाबा भैरव क्मंदिर भी जाना चाहिए |</p>



<p>इन कथाओ के अलावा भी एक कथा मेरे सामने आई जिसमे देवी माँ जगदम्बा  असुरो का संघार कर रही थी  एक दिन  माँ  महाकाली माँ महासरस्वती माँ महालक्ष्मी  एक साथ प्रकट हुई और तीनो ने अपने सम्मिलित तेज से एक कन्या को जन्म दिया और उस जन्मी  बालिका से कहा की तुम अब हमारे भक्त रत्नाकर के घर पुत्री रूप में जन्म लेके प्रथ्वी पर धर्म की स्थापना करो और खुद भी तपस्या करो और जब तुम्हारी तपस्या एक अधिकतम स्तर पे पहुँच  जाएगी तब तुम भगवान विष्णु में  लींन होकर  एक हो जाओगी |</p>



<p class="has-text-align-justify">फिर क्या था माता वैष्णो ने कन्या रूप में रत्नाकर के घर जन्म लिया और शुरू से ही यह बालिका अत्यंत तेज बुद्धिमान थी इसमें सारे हुनर थे  अब यह बालिका वैष्णवी जंगल में जाकर तपस्या करने लगी जहाँ वह मर्यादा पुरुशोत्त्तम भगवान राम से मिली और उन्हें वह  पहचान गई और उनसे आग्रह किया वो उसे अपने में मिला ले किन्तु रामजी ने उसे रोका और कहा अभी यह समय इस काम के लिए उचित नही है मै अपने वनवास के बाद तुमसे दुबारा मिलूँगा और यदि तब तुमने मुझे पहचान लिया तो जरूर तुम्हारी इच्छा पूर्ण कर दूंगा |</p>



<p class="has-text-align-justify">फिर रावण से युद्ध समाप्त कर भगवान राम ने एक बुजुर्ग के भेष लेके वैष्णवी से मिले परन्तु अबकी वैष्णवी  भगवान राम को पहचान नहीं पाई तब रामजी ने उस बालिका से कहा अभी भी एक में लीन होने का समय नहीं है और उस बालिका को त्रिकुटा पर्वत पे जाकर तपस्या करने का निर्देश दिया फिर वैष्णवी ने त्रिकुटा पर्वत पर अपना आश्रम बनाया और तपस्या में लींन हो गई उसकी महिमा दूर दूर तक फैलने लगी और दर्शन हेती श्रद्धालु आने लगे  |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब बाबा गोरखनाथ ने यह जानने के लिए कि क्या वैष्णवी अपने अध्यात्मिक स्तर के उच्चतम शिखर पे पहुंची है की नहीं इसलिए गोरखनाथ ने अपने शिष्य भैरवनाथ को भेजा अब वैष्णवी को भैरवनाथ देखने लगे और मतलब निगरानी करने लगा उसने देखा की यह बालिका है तो एक तपस्वी परन्तु हमेशा अपने साथ धनुष बाण रखती है और एक <a href="https://www.britannica.com/animal/lion" target="_blank" rel="noreferrer noopener">शेर</a> उसके साथ ही रहता है बालिका की असीम सुन्दरता को देख भैरवनाथ थोडा भटक गए और उस बालिका से विवाह करने की बेतुकी जिद करने लगे |</p>



<p class="has-text-align-justify">इसी समय पण्डित श्रीधर ने भण्डारा किया जिसमे भैरवनाथ भी गये वैष्णवी भी गई बस भंडारे के उपरान्त ही भैरवनाथ उस बालिका के पीछे पड़ गया आगे की कहानी आप ऊपर पढ़ चुके है तो  <strong> Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> यही थी | यह जितनी भी  माता वैष्णो से जुडी हुई कथाये  हमने आपको बताई है यह सभी मान्यताओ के अनुसार है और पौराणिक कथाओ के अनुसार है हम इनकी सच्चाई का कोई भी दावा नहीं करते है |</p>



<p>माता वैष्णो देवी की कहानी से सम्बन्धित प्रश्न </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662437398103"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माता वैष्णो देवी मंदिर कहाँ है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू के कटरा में स्थित है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662437483730"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ वैष्णो देवी की कहानी क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माँ वैष्णो देवी की दो प्रमुख कहानियां है एक पण्डित श्रीधर से जुड़ी हुई और दूरी भैरवनाथ जी से जुड़ी हुई है दोनों ही कहानी आप यहाँ पढ़ सकते है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662437613503"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; माँ वैष्णो देवी किसका अवतार है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">माँ वैष्णो देवी , देवी माँ का अवतार है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662437781369"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>Mata Vaishno Devi Ki Kahani</strong> Pandir Shredhar aur Bhairavnath se judi hai aap is post me dono hi kahaniya padh sakte hai .</p> </div> </div>



<p><br></p>
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		<title>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास , बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 May 2021 16:27:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[बनारस में घूमने की जगहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास बड़ा ही रोचक है आपको बता दे काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जनपद में है वाराणसी को ही काशी कहा जाता है यह मन्दिर भगवान् शिव की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है और पूर्ण रूप से यह मन्दिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है आज हम आपको इस मन्दिर की समस्त पौराणिक कथाओ और इतिहास  के बारे में बतायेंगे &#124;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-justify"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> बड़ा ही रोचक है आपको बता दे काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश राज्य के <a href="https://www.lonelyplanet.com/india/uttar-pradesh/varanasi">वाराणसी</a> जनपद में है वाराणसी को ही काशी कहा जाता है यह मन्दिर भगवान् शिव की <a href="https://safarjankari.com/12-jyotirling-ke-naam-hindi-me/">12 ज्योतिर्लिंग</a> में से एक है और पूर्ण रूप से यह मन्दिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है आज हम आपको इस मन्दिर की समस्त पौराणिक कथाओ और इतिहास  के बारे में बतायेंगे |</p>



<p><strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> <strong>और पौराणिक कथाये</strong> &#8211; History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</h2>



<p class="has-text-align-justify">प्रत्येक दिन हजारो श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन हेतु बनारस आते है आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बाबा विश्वनाथ मन्दिर की पौराणिक कथा बताएँगे और हम आपको इतिहास के पन्नो में जो जो जानकारी इस मंदिर के बारे में मिली है वह सब भी बताने का एक प्रयास करेंगे जिससे आपको भी थोडा आईडिया हो कि आखिर जहाँ आप जा रहे हो वहां का क्या इतिहास है क्या कथाये है |</p>



<p class="has-text-align-justify">सबसे पहले तो आप यह जान लो की यह मन्दिर एक ज्योतिर्लिंग है और यह वाराणसी शहर में है जो की माँ गंगा के किनारे पर है तो अब आप समझ ही गये होंगे की यहाँ का धार्मिक महत्त्व अत्यधिक है अब आइये सबसे पहले बाबा विश्वनाथ मन्दिर के बारे में प्रचलित पौराणिक कथा / किद्वंती को जान लेते है |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>बाबा विश्वनाथ मन्दिर की पौराणिक कथा</strong> </h4>



<p>काशी को सबसे पुराना नगर माना गया है और यह भगवान विष्णु भगवान शंकर और माँ पार्वती का प्रिय नगर है अब देखिये यहाँ ज्योतिर्लिंग भी है यह एक सप्तपुरी भी है और यहाँ मणिकर्णिका शक्तिपीठ भी है अगर हम पुराणों की माने तो यह नगरी सबसे पहले एक वैष्णव क्षेत्र थी मतलब भगवान विष्णु की प्रिय नगरी |<br><br> इसी काशी में विष्णु जी के आनंद के अश्रु भी गिरे थे जहाँ पे अश्रु गिरे थे वह स्थान बिन्दुसरोवर बन गया और बिंदुमाधव के नाम से वही पे विष्णु जी स्थापित हो गए |<br><br><a href="https://safarjankari.com/uttarakhand-me-ghumne-ki-jagah/">Uttarakhand me Ghumne Ki jagah – उत्तराखण्ड में घूमने वाली जगहे (2021)</a><br><br>उधर भोलेनाथ को काशी इतनी पसंद आई की उन्होंने विष्णु जी से इसे अपने लिये मांग लिया और इसे अपना निवास स्थान बना लिया कहा जाता है की काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी हुई है   |<br><br>एक अन्य कथा के अनुसार भगवान  शंकर और देवी पार्वती के विवाह के बाद शंकर जी तो कैलाश पे रहने लगे लेकिन माँ पार्वती  अपने पिता जी के यहाँ रहती थी तो यहाँ माँ पार्वती को पसंद न था इसलिए उन्होंने भोलेनाथ से अपनी व्यथा बताई और निवेदन किया की भोलेनाथ उन्हें भी अपने साथ रखे भगवान शंकर ने पार्वती जी की इस बात को माना और उन्हें अपने साथ अपनी प्रिय नगरी काशी ले आये और दोनों एक साथ ज्योतिर्लिंग में स्थापित हो गये |</p>



<p class="has-text-align-justify">एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार एक बार विष्णु जी और ब्रम्हा जी का आपस में मतभेद हो गया की दोनों में कौन खास है अब इस विवाद को सुलझाने के लिए शिवजी आये और उन्होंने एक प्रकाश स्तम्भ उत्पन्न किया और दोनों से बोले जाओ इस स्तम्भ का आदि और अंत पता करो जो पता कर लेगा वाही ज्यादा खास होगा अब क्या था विष्णुजी और ब्रम्हाजी निकल लिये उस विशाल प्रकाश स्तम्भ का पता लगाने युगों तक वे दोनों खोजते रहे |<br><br>और अंत में विष्णुजी ने अपनी हार स्वीकार कर ली परन्तु ब्रम्हा जी ने झूठ बोल दिया की उन्होंने प्रकाश स्तम्भ का सिरा देखा है इस बात पे शिवजी अत्यधिक क्रोधित हुए मतलब ब्रम्हा जी इस झूठ पे शिवजी को गुस्सा आ गया और उन्होंने ब्रम्हा जी को श्राप दे दिया की उनकी कभी पूजा नही की जाएगी यह प्रकाश स्तम्भ काशी में भी था |</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>जानिये</strong> <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> &#8211; History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</h4>



<p class="has-text-align-justify">बेशक <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> बहुत ही व्यापक और कष्टदायक है कष्टदायक इसलिए क्यूंकि इस ज्योतिर्लिंग मंदिर को कई बार तोडा गया मुहम्मद गौरी औरंग्जेब जैसे शासको ने काशी विश्वनाथ मन्दिर को तुडवाने में अहम् भूमिका निभाई थी | अब सबसे पहले इस बात की जानकारी कर लेते कि आखिर काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ था |</p>



<h5 class="wp-block-heading">काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ</h5>



<p class="has-text-align-justify">इस बात के कोई भी ठोस प्रमाण नहीं मिले है जिससे हम इस मन्दिर के निर्माण का सही वर्ष जान सके इस मंदिर का जो इतिहास है उसमे यह ११वी शताब्दी से जानकारी में आया है हालाँकि जो जानकारी है उसमे यह है की ११वी शताब्दी में इस पवित्र मंदिर का जीर्णोधार हुआ तो काशी विश्वनाथ मन्दिर का निर्माण कब हुआ इस बात के कोई पुख्ता तथ्य नहीं है  |</p>



<h5 class="wp-block-heading">बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया </h5>



<p class="has-text-align-justify">यह प्रश्न भी सबके दिमाग में आता है की  बाबा विश्वनाथ मन्दिर किसने बनवाया तो आपको बता दे की वर्तमान में जो बाबा विश्वनाथ का मंदिर आप देखते है उसका निर्माण सन 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था जो की इन्दोर की महारानी थी इसके अलावा जो ज्ञात इतिहास है उसके हिसाब से कई लोगो ने इस मन्दिर का जीर्णोधार कराया था जिसमे राजा हरिश्चंद्र , सम्राट विक्रमादित्य , राजा टोडरमल , पंडित नारायण भट्ट , महाराजा रणजीत सिंह प्रमुख थे |</p>



<p class="has-text-align-justify">आइये अब शुरू करते है <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> जो हमें ज्ञात है शुरुआत होती है सन 1194 से इस सन में मुहम्मद गौरी ने बाबा विश्वनाथ का मन्दिर तुडवा दिया था और इतिहास की माने तो जो मंदिर मुहम्मद गौरी ने तुडवाया था उसी का जीर्णोद्धार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था मतलब जानकारी के अनुसार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य जिस मंदिर का जीर्णोधार किया उसी को मुहम्मद गौरी ने लूटा फिर तुडवा भी दिया |</p>



<p class="has-text-align-justify">अब फिर से इस मंदिर को बनवाया गया होगा किसके द्वारा यह ज्ञात नहीं है जो जानकारी है वह है सन 1447 की 1447 में महमूद शाह ने इसे तोड़ दिया था फिर सन 1585 राजा टोडरमल ने इसे पुनः बनवाया और इस कार्य में टोडरमल की सहायता की पण्डित नारायण भट्ट ने अब जो जानकारी है उसके हिसाब से सन 1632 में शाहजहाँ ने इस मंदिर को तोड़ने के लिए सेना भेजी परन्तु हिन्दू लोगो ने इसका विरोध किया |</p>



<p>सन 1669 में शासक औरंगजेब ने भी इसे तोड़ने के लिए एक आदेश पारित किया था जो की आज भी कोलकत्ता की एशियाटिक लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा हुआ है यही नहीं औरंगजेब ने मंदिर तो तोडा ही साथ ही वही ज्ञानवापी मस्जिद बनवा दी |<br><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a></p>



<p class="has-text-align-justify">अब सन 1780 में इन्दोर की महारानी अहिल्याबाई ने इस मंदिर का जीर्णोधार किया तो ये था <strong><em>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</em></strong>  हम आज बाबा विश्वनाथ का भव्य मन्दिर देखते है उसके लिए कई शासको ने अपना योगदान दिया कई शासको ने इसे लूटने का तोड़ने का प्रयास किया था वे सफल भी हुए थे लेकिन किसी न किसी महापुरुष ने फिर से इस मंदिर को बनवाया |</p>



<p>काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास से सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662298850413"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मंदिर किसने बनवाया ?</strong> <p class="schema-faq-answer">वर्तमान में जो बाबा विश्वनाथ का मंदिर आप देखते है उसका निर्माण सन 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662298908497"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कब करवाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">११वी शताब्दी में इस पवित्र मंदिर का जीर्णोधार हुआ था , वर्तमान जो मंदिर है उसे 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662299103782"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> जो हमें ज्ञात है शुरुआत होती है सन 1194 से इस सन में मुहम्मद गौरी ने बाबा विश्वनाथ का मन्दिर तुडवा दिया था और इतिहास की माने तो जो मंदिर मुहम्मद गौरी ने तुडवाया था उसी का जीर्णोद्धार राजा हरिश्चन्द्र और सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था बाकी आप पोस्ट पढ़े |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1662299215857"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> kya hai ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> janne ke liye yah post poori padhiye .</p> </div> </div>



<p class="has-text-align-justify">दोस्तों देखा आपने <strong>काशी विश्वनाथ मन्दिर का इतिहास</strong> <strong>History of Kashi Vishwanath Temple in Hindi</strong> जिसमे इस मंदिर पर कई आक्रमण हुए फिर भी यह आस्था का प्रतीक ज्योतिर्लिंग हमारे सामने है अद्भुत है हमारा भारत देश और यहाँ की आस्था पोस्ट पसंद आई हो तो कमेन्ट करके अवश्य बताये |<br></p>
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		<title>Meenakshi Temple Madurai History Hindi &#124; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anurag Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2021 14:53:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पौराणिक कथाये]]></category>
		<category><![CDATA[Etihasik Kahani]]></category>
		<category><![CDATA[Pauranik Kahani]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Meenakshi Temple Madurai History की पोस्ट में हम जानेंगे तमिलनाडु प्रदेश के एक शहर मदुरई के एक विख्यात मन्दिर के इतिहास के बारे में इस मंदिर का नाम मीनाक्षी मन्दिर है आज हम यह भी जानेंगे कि मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया कब बनवाया और हम इस मन्दिर की सभी पौराणिक ऐतिहासिक कहानियो के बारे में भी जानेंगे &#124;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-medium-font-size"><strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> की पोस्ट में हम जानेंगे तमिलनाडु प्रदेश के एक शहर मदुरई के एक विख्यात मन्दिर के इतिहास के बारे में इस मंदिर का नाम <a href="https://knowindia.gov.in/culture-and-heritage/monuments/meenakshi-temple-madurai.php" target="_blank" rel="noreferrer noopener">मीनाक्षी मन्दिर</a> है |</p>



<p class="has-medium-font-size"> हम यह भी जानेंगे कि <strong>मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया कब बनवाया</strong> और हम इस मन्दिर की सभी पौराणिक <a href="https://safarjankari.com/tag/historical/">ऐतिहासिक</a> कहानियो के बारे में भी जानेंगे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">इस पवित्र मंदिर में माता पार्वती को श्रद्धालु देवी मीनाक्षी के रूप में पूजते है और वही भगवान शिव को यहाँ सुन्दरेश्वर के रूप में पूजा जाता है तो इस मन्दिर को हम मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर के नाम से भी जानते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यहाँ की विशेषता यह भी है की यहाँ एक साथ भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा की जाती है तो आइये जानते है <strong><em>Meenakshi Temple History in Hindi</em></strong> को |</p>



<h2 class="wp-block-heading">मीनाक्षी मन्दिर का इतिहास- Meenakshi Temple Madurai History</h2>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मदुरई के इस प्रसिद्ध मन्दिर के बारे में कई सारी पौराणिक कथाये प्रचलित है हम उन सभी कथाओ को <em>इस</em> पोस्ट में जानेंगे तो आइये शुरू करते है और अपने ज्ञान को बढ़ाते है &#8211; </p>



<h4 class="wp-block-heading">पाण्ड्य राजा मलयध्वज से सम्बन्धित कहानी &#8211; Meenakshi Temple Madurai History In Hindi About Pandya Raja MalayDhvaj</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">यह पौराणिक कथा अत्यधिक प्रचलित है राजा मलयध्वज जो की पांड्य वंश के राजा थे और इनकी पत्नी कंचनमाला थी इनके कोई भी सन्तान नहीं थी इसलिए ये दोनों राजा रानी परेशान रहते है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> संतान प्राप्ति हेतु इन दोनों ने अथक तप किया और इस तप के परिणामस्वरुप माँ पार्वती  एक तीन वर्षीय बालिका के रूप में यज्ञ कुंड की अग्नी में प्रकट हुई थी और उसी बालिका का नाम मीनाक्षी रखा गया था मीनाक्षी नाम रखने का कारण यह था की उस बालिका के नेत्र अत्यन्त सुन्दर थे |<br><br>बाद में राजा ने मिनाक्षी को ही अपने राज्य का अगला उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था  कहा जाता है कि देवी मीनाक्षी ने बहुत ही अच्छे तरीके से पांड्य राज्य पर शासन किया राजकुमारी मीनाक्षी ने कई शक्तिशाली राज्यों को अपने राज्य में मिलाया था |<br><br>हमारे इन आर्टिकल को भी पढ़े &#8211; <br><a href="https://safarjankari.com/history-of-rameshwaram-temple-in-hindi/">History of Rameshwaram Temple in Hindi – रामेश्वरम मन्दिर का इतिहास</a><br><a href="https://safarjankari.com/history-of-kedarnath-temple-in-hindi/">History of Kedarnath Temple in Hindi – केदारनाथ धाम की पौराणिक कथा</a><br><br>इनकी ख्याति सम्पूर्ण विश्व में हो गई थी फिर कुछ समय बाद भगवान शंकर सुन्दरेश्वर के रूप में प्रथ्वी पर आये और ये शिवजी का सुन्दरेश्वर रूप अति मनमोहक था इन्होने राजकुमारी मिनाक्षी से विवाह किया |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size"> कहा जाता है यह विवाह सम्पूर्ण विश्व में बहुत ही प्रसिद्ध हुआ था इस विवाह में देवी-देवता तक सम्मिलित हुए थे आज भी मदुरई में इस विवाह को चिथिरई तिरुविजा के नाम से मनाते है |<br><br>कहा जाता है की वर्तमान में जहाँ पर मंदिर बना है उसी स्थान से देवी मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश्वर ने स्वर्ग की और प्रस्थान किया था |</p>



<h4 class="wp-block-heading">देवराज इन्द्र से सम्बन्धित पौराणिक कथा &#8211; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास</h4>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">एक अन्य लोक कथा के अनुसार  देवताओ के राजा इंद्र अपने कुछ बुरे कर्मो से निजात पाने के लिए  तीर्थयात्रा पे थे जब इन्द्रदेव मदुरई आये और वहां के शिव लिंग के समीप पहुंचे |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">तो उन्हें ऐसा एहसास हुआ की उनका बोझ कोई और उठा रहा है तब इंद्र जी ने उसी स्थान पर शिवलिंग को पुनः प्रतिष्ठापित किया था तो इस हिसाब से हम बोल सकते है कि मीनाक्षी मंदिर का निर्माण इन्द्र देव ने करवाया ,<strong><em> Meenakshi Temple Madurai History</em></strong>  में यह लोक कथा भी कई जगह सुनने में आती है |</p>



<h3 class="wp-block-heading">मीनाक्षी मन्दिर किसने बनवाया </h3>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये अगर हम बात करे पांडियन वंश की तो जो जानकारी मिलती है उसके हिसाब से राजा सदावर्मन कुलशेखर पांडियन ने भगवान शिव के आदेशानुसार इस मन्दिर का निर्माण करवाया था और शिवजी ने राजा कुलशेखर को मंदिर बनवाने का आदेश स्वप्न में दिया था |<br><br>इसके अलावा एक जानेमाने हिन्दू साधू ने सातवी शताब्दी से पहले ही मिनाक्षी मंदिर का उल्लेख किया था फिर 16वी शताब्दी में एक अन्य नाम आता है विश्वनाथ नायक का जिन्होंने इस मंदिर का दुबारा निर्माण करवाया था और इसका विस्तार भी किया था  |<br><br>इस मंदिर को कई क्रूर शासको ने लूटा भी था तमाम सोना अन्य वस्तुए वे शासक लूटकर ले गए थे , इसके अलावा अगर इन्द्रदेव वाली लोक कथा की माने तो इस पावन मन्दिर का निर्माण इंद्रदेव ने करवाया था जो की देवताओ के राजा है |</p>



<p class="has-medium-font-size">मिनाक्षी मंदिर के इतिहास सम्बन्धित प्रश्न &#8211; </p>



<div class="schema-faq wp-block-yoast-faq-block"><div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347867584"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कहा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी मंदिर तमिलनाडु राज्य के मदुरै शहर में है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347904722"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर किस भगवान को समर्पित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी मंदिर भगवान् सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी देवी को समप्रित है भगवान् सुन्दरेश्वर भोलेनाथ रोप में पूजे जाते है और मीनाक्षी देवी को माँ पारवती के रूप में पूजा जाता है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661347997554"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर किसने बनवाया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी मंदिर को राजा सदवार्मन कुलशेखरन पांडियन के करवाया था और पौराणिक कथा के अनुसार इन्द्रदेव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था | इस मंदिर का पुनर्निर्माण राजा विश्वनाथ नायक ने करवाया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661348994307"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कब बनवाया गया था ?</strong> <p class="schema-faq-answer">इस मंदिर का निर्माण पांडियन सम्राट सदावर्मन ने सन 1190 &#8211; 1205 इसवी के मध्य हाथ और इसके बाद सोलहवी शताब्दी में इसका दुबारा निर्माण राजा विश्वनाथ नायक ने किया था |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349405915"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी देवी कौन है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मीनाक्षी देवी माँ पार्वती का ही स्वरुप है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349769555"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; <strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> Bataiye ?</strong> <p class="schema-faq-answer"><strong>Meenakshi Temple Madurai History</strong> Janne ke liyeaapko Raja MalayDhvaj Aur Rani Kanchanlata ki katha ko janna Hga Jo aapko isi Post me mil jayegi </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349898435"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मदुरै का प्रमुख मंदिर कौन सा है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मदुरै का प्रमुख मंदिर मिनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर है |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661349968948"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी देवी से शादी किसने की थी ?</strong> <p class="schema-faq-answer">भगवान् शंकर सुन्दरेश्वर के रूप में प्रथ्वी पर आये थे और देवी मिनाक्षी से शादी की थी |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350079668"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मीनाक्षी मंदिर कौन से राज्य में स्थित है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">तमिलनाडु </p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350456221"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मदुरै में कौन सा मंदिर है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी अम्मान मंदिर |</p> </div> <div class="schema-faq-section" id="faq-question-1661350766525"><strong class="schema-faq-question">प्रश्न &#8211; मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास क्या है ?</strong> <p class="schema-faq-answer">मिनाक्षी मन्दिर का इतिहास राजा मलयध्वज और रानी कंचनलता से जुड़ा हुआ है जिसकी समस्त कथा हमने पोस्ट में बताई है |</p> </div> </div>



<p>निष्कर्ष </p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">देखिये <strong>Meenakshi Temple Madurai History </strong>में हमने आपसे जितनी भी लोक कथाये और इतिहास के बारे में बात की इनसे से ज्यादातर स्थानीय लोककथाये है जिनका प्रमाण नहीं है लेकिन हा ये सभी कथाये हिन्दुओ की आस्था को दिखाती है |</p>



<p class="has-text-align-justify has-medium-font-size">मैंने यह समस्त जानकारी कुछ किताबो एवं इन्टरनेट के माध्यम से रिसर्च करके लिखी है बाकी इस मंदिर को आप तभी समझ पाओगे जब एक बार इसकी वास्तुकला को अपनी आँखों से देखोगे वाकई में अद्भुत है |</p>
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